Mohd Riyaj Khan

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28/10/2023

🎉 Facebook recognized me as a top rising creator this week!

09/10/2023

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07/02/2023

17/01/2023

ReZzu 🥰🥰

11/01/2023

Mohd Riyaj ❤️🥀

13/12/2022

🥀❤️हाजी फजरुद्दीन सरपंच ❤️🥀 दोहा

रंगीन पगड़ी, फैन की धोती, कुर्ता और राजदूत मोटर साइकिल, मोटे तौर पर यही पहचान थी, मेवात के ऐतिहासिक गाँव दोहा के सरपंच जनाब फजरुद्दीन दुलौत की. दुलौत पाल के 360 गाँवों के चौधरी चौधरी सरदार खाँ उर्फ चौ० सरदारा के घर जन्में इकलौते पुत्र फजरुद्दीन की शख़्सियत अपने आप में अलग मुकाम रखती थी. फजरूद्दीन की याददाश्त बहुत तेज थी, कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद, उर्दू एवं फारसी के अनेक शेर उनको याद थे. मेवाती दोहों के तो वो भण्डार थे, सैकडों मेवाती दोहे उन्हें याद थे, पाल के चौधरी और गाँव के सरपंच तो वो थे ही, समाज व बिरादरी में भी उनकी अलग ही पहचान थी. 1992 में जब मेवात साक्षरता समिति के बैनर से मेवात में साक्षरता अभियान चला तो वे पूरे जोश के साथ आगे आए. एक सामाजिक

नेता का आगे आने से साक्षरता अभियान को नई उर्जा मिली और साथियों का उत्साह दोगुना बढ़ गया. यह वो समय था जब मेवात में लड़कियों को पढ़ाना अच्छा नहीं समझा जाता था. साक्षरता अभियान का नेतृत्व कर रहे श्री राजकुमार कादियान ने गाँव के एक पंच श्री उसमान के सुझाव पर, लड़कियों का एक अनौपचारिक स्कूल खोलने का प्लान सामने रखा. फजरुद्दीन तुरन्त आगे आए और 10 अप्रैल, 1992 को मेवात में पहले अनौपचारिक कन्या स्कूल की नींव दोहा गाँव में रखी गई, जिसमें पहले ही दिन 135 लड़कियों ने दाखिला लिया. इस स्कूल की सफलता के बाद चन्देनी और टाई में लड़कियों के अनौपचारिक स्कूल खोले गए. इसके बाद तो मेवात में सारे विरोधाभास के बावजूद कन्या शिक्षा का रास्ता हमवार होता चला गया. 1996 में औपचारिक रूप से मेवात में साक्षरता अभियान शुरू हुआ, फजरुद्दीन दूलौत को फिरोजपुर झिरका खण्ड का नेतृत्व सौंपा गया, जिसका उन्होंने सफलतापूर्वक संचालन किया. इसके बाद जब 24 दिसम्बर, 1996 को मेवात एजुकेशनल एण्ड सोशल संगठन का गठन हुआ तो फजरुद्दीन दूलौत को इसका सर्वसम्मति से अध्यक्ष बनाया गया. उन्होंने अश्लील कैसेटों के खिलाफ चलाये गये अभियान का सफल नेतृत्व किया और हजारों अश्लील कैसेटों की होली जलाई गई. अपने जीवन के अंतिम वर्षों में वे तब्लीग आन्दोलन के साथ जुड़ गये और गाँव-गाँव जाकर सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जोरदार अभियान शुरू कर दिया. 2011 में वे हज करके आए तो आते ही बीमार हो गये. इसी दौरान उनके ऊपर लकवे का जबरदस्त अटैक हुआ, मगर दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण उन्होंने लकवा जैसी बीमारी से भी संघर्ष जारी रखा, अभी वे लकवा से उबर ही रहे थे कि अचानक 13 दिसम्बर, 2011 को दिल का दौरा पड़ने से दुनिया से पर्दा कर गये. Mohd Riyaj
Today my father died 11 years.

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