Acharya ChandraKant

Acharya ChandraKant

Share

arya samaj prachar Prasar
9212441177

29/06/2025
28/06/2025

इन्द्रं॑ वो वि॒श्वत॒स्परि॒ हवा॑महे॒ जने॑भ्यः। अ॒स्माक॑मस्तु॒ केव॑लः॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ
इन्द्र॑म्। वः॒। वि॒श्वतः॑। परि॑। हवा॑महे। जने॑भ्यः। अ॒स्माक॑म्। अ॒स्तु॒। केव॑लः॥

ऋग्वेद » मण्डल:1» सूक्त:7» मन्त्र:10 | अष्टक:1» अध्याय:1» वर्ग:14» मन्त्र:5 | मण्डल:1» अनुवाक:2» मन्त्र:10
उपलब्ध भाष्य

स्वामी दयानन्द सरस्वती

पदार्थान्वयभाषाः -हम लोग जिस (विश्वतः) सब पदार्थों वा (जनेभ्यः) सब प्राणियों से (परि) उत्तम-उत्तम गुणों करके श्रेष्ठतर (इन्द्रम्) पृथिवी में राज्य देनेवाले परमेश्वर का (हवामहे) वार-वार अपने हृदय में स्मरण करते हैं, वही परमेश्वर (वः) हे मित्र लोगो ! तुम्हारे और हमारे पूजा करने योग्य इष्टदेव (केवलः) चेतनमात्र स्वरूप एक ही है॥१०॥
भावार्थभाषाः -ईश्वर इस मन्त्र में सब मनुष्यों के हित के लिये उपदेश करता है-हे मनुष्यो ! तुमको अत्यन्त उचित है कि मुझे छोड़कर उपासना करने योग्य किसी दूसरे देव को कभी मत मानो, क्योंकि एक मुझ को छोड़कर कोई दूसरा ईश्वर नहीं है। जब वेद में ऐसा उपदेश है तो जो मनुष्य अनेक ईश्वर वा उसके अवतार मानता है, वह सब से बड़ा मूढ़ है॥१०

Want your school to be the top-listed School/college in Gurugram?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Category

Website

Address

Gurugram