29/05/2026
Note on Implementation of 3-Language Policy, as per NEP 2020 from Class 6 to 9 in CBSE-affiliated Schools in 2026-27
Unique Features of Three Language Policy in the CBSE Scheme of Studies
1. The three-language policy of CBSE is completely aligned with NEP 2020 and NCF 2023.
2. It is a flexible, inclusive, non-imposing, futuristic, transformational, and unifying language policy meant to fulfil the needs of Viksit Bharat 2047.
3. No single language is compulsory under this policy.
4. The policy states that two out of the three languages should be native to India. There are several reasons for this condition. In different parts of the country, students may speak one language at home, another in their surroundings, another in school, and yet another in the marketplace. They may also need different languages in the workplace in the future. Keeping this in mind, students should be equipped with communicative abilities in several languages. Therefore, they should be encouraged to learn at least two Indian languages.
5. People freely move from one linguistic region to another within India for jobs, higher studies, and other opportunities. This makes the learning of more Indian languages important and useful.
6. For a person who already knows one Indian language, learning another Indian language is not like learning a foreign language or a language not native to India. Indian languages share several common features, such as phonology, syntax, vocabulary patterns, and cultural contexts. Therefore, learning more Indian languages should not be viewed as an additional burden on students.
7. School-going children have a natural ability to acquire or learn new languages simultaneously and with ease. Therefore, learning more languages, especially Indian languages, should not be considered a burden.
8. The difficulty involved in learning another Indian language is much less compared to learning a foreign language or a language not native to India.
9. In any city or village of India, people generally live in a multilingual environment. This creates a favourable atmosphere for learning more Indian languages.
10. Students in CBSE schools are already learning three languages in Classes VI, VII, and
VIII. The present policy of CBSE aims to continue this practice up to Class X.
11. Only a small percentage of students, mostly in some elite schools in metropolitan cities, opt for foreign languages. They may continue to study those languages under this policy as an additional language.
12. The basket of optional languages offered by CBSE is one of the largest in of the school education board in the world. It provides them with a valuable opportunity to learn different languages during their school years.
13. Most State Secondary Education Boards offer three languages from Class VI to Class X, where students study two Indian languages along with English. CBSE is following a similar pattern.
14. CBSE has addressed the challenges that schools may face in implementing the policy and has suggested practical solutions in its circular dated 15.05.2026, taking into account different types of school-level constraints.
15. No single language is imposed or given greater prominence than any other Indian language.
16. Detailed information is available on the CBSE website, www.cbseacademic.nic.in, and the circular can be obtained from this link :
https://cbseacademic.nic.in/web_material/Circulars/2026/33_Circular_2026.pdf
17. The policy supports multilingual learning and helps students become more confident in more than one language.
18. Schools may adjust smoothly because many students already study English, Odia, and another Indian language such as Hindi or Sanskrit.
19. The policy strengthens Indian languages by ensuring that students learn at least two native Indian languages.
20. Students are likely to face less disruption because foreign-language enrolment is very limited in the state.
21. Schools with a strong regional-language base can continue their existing language structure with only minor changes.
22. The policy helps students stay connected with their local language, culture, and identity.
23. CBSE has made the transition easier by allowing beginners in the third language to start with Class VI-level textbooks.
24. The new R3 language will be assessed internally for the current Class IX batch, reducing board-examination pressure.
25. Students’ performance in the third language will still be reflected in the CBSE certificate, giving recognition to their language learning.
26. The policy encourages balanced learning by giving importance to language skills along with other academic subjects.
27. This policy caters to the needs of the students from all the states, all linguistic background and from all sections of the society.
28. This policy promotes and strengthens the linguistic diversity and national unity of India.
29. This policy enables students to access diverse knowledge systems preserved in Indian languages. Knowledge of more languages gives students wider access to these knowledge repositories and helps a larger number of learners benefit from them.
30. Every student has to master his/her mother tongue, state language, official language, and any language needed for any specific purpose. This policy accommodates all these aspirations of the students.
29/05/2026
2026-27 में CBSE से जुड़े स्कूलों में कक्षा 6 से 9 तक NEP 2020 के अनुसार 3-भाषा नीति के लागू होने पर एक नोट
CBSE की अध्ययन योजना में तीन-भाषा नीति की खास बातें
1. CBSE की तीन-भाषा नीति पूरी तरह से NEP 2020 और NCF 2023 के अनुरूप है।
2. यह एक लचीली, समावेशी, गैर-थोपने वाली, भविष्योन्मुखी, परिवर्तनकारी और एकता लाने वाली भाषा नीति है, जिसका मकसद 'विकसित भारत 2047' की ज़रूरतों को पूरा करना है।
3. इस नीति के तहत कोई भी एक भाषा अनिवार्य नहीं है।
4. नीति में कहा गया है कि तीन भाषाओं में से दो भाषाएँ भारत की मूल भाषाएँ होनी चाहिए। इस शर्त के कई कारण हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में, छात्र घर पर एक भाषा, अपने आस-पास दूसरी, स्कूल में तीसरी और बाज़ार में कोई और भाषा बोल सकते हैं। भविष्य में उन्हें काम की जगह पर भी अलग-अलग भाषाओं की ज़रूरत पड़ सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए, छात्रों को कई भाषाओं में बातचीत करने की काबिलियत से लैस किया जाना चाहिए। इसलिए, उन्हें कम से कम दो भारतीय भाषाएँ सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
5. लोग नौकरी, उच्च शिक्षा और दूसरे मौकों के लिए भारत के भीतर ही एक भाषाई क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आज़ादी से आते-जाते रहते हैं। इससे ज़्यादा भारतीय भाषाएँ सीखना ज़रूरी और फायदेमंद हो जाता है।
6. जिस व्यक्ति को पहले से ही एक भारतीय भाषा आती है, उसके लिए दूसरी भारतीय भाषा सीखना किसी विदेशी भाषा या भारत की मूल भाषा न होने वाली भाषा को सीखने जैसा नहीं होता। भारतीय भाषाओं में कई बातें एक जैसी होती हैं, जैसे कि ध्वनि-व्यवस्था, वाक्य-रचना, शब्द-भंडार के तरीके और सांस्कृतिक संदर्भ। इसलिए, ज़्यादा भारतीय भाषाएँ सीखने को छात्रों पर एक अतिरिक्त बोझ के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
7. स्कूल जाने वाले बच्चों में नई भाषाएँ एक साथ और आसानी से सीखने या समझने की स्वाभाविक काबिलियत होती है। इसलिए, ज़्यादा भाषाएँ सीखना—खास तौर पर भारतीय भाषाएँ—एक बोझ नहीं माना जाना चाहिए।
8. दूसरी भारतीय भाषा सीखने में जो मुश्किल आती है, वह किसी विदेशी भाषा या भारत की मूल भाषा न होने वाली भाषा को सीखने की तुलना में बहुत कम होती है।
9. भारत के किसी भी शहर या गाँव में, लोग आम तौर पर एक बहुभाषी माहौल में रहते हैं। इससे ज़्यादा भारतीय भाषाएँ सीखने के लिए एक अच्छा माहौल बनता है।
10. CBSE स्कूलों के छात्र पहले से ही कक्षा VI, VII और VIII में तीन भाषाएँ सीख रहे हैं। CBSE की मौजूदा नीति का मकसद इस चलन को क्लास X तक जारी रखना है।
11. बहुत कम संख्या में छात्र—ज़्यादातर बड़े शहरों के कुछ जाने-माने स्कूलों में—विदेशी भाषाएँ चुनते हैं। इस नीति के तहत वे उन भाषाओं को एक अतिरिक्त भाषा के तौर पर पढ़ना जारी रख सकते हैं।
12. CBSE द्वारा दी जाने वाली वैकल्पिक भाषाओं की सूची दुनिया के किसी भी स्कूल शिक्षा बोर्ड की सबसे बड़ी सूचियों में से एक है। यह छात्रों को अपने स्कूली दिनों में अलग-अलग भाषाएँ सीखने का एक कीमती मौका देती है।
13. ज़्यादातर राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड क्लास VI से क्लास X तक तीन भाषाएँ पढ़ाते हैं, जिनमें छात्र अंग्रेज़ी के साथ-साथ दो भारतीय भाषाएँ पढ़ते हैं। CBSE भी इसी पैटर्न को अपना रहा है।
14. CBSE ने उन चुनौतियों पर ध्यान दिया है जिनका सामना स्कूलों को इस नीति को लागू करते समय करना पड़ सकता है, और 15.05.2026 को जारी अपने सर्कुलर में, स्कूल-स्तर की अलग-अलग तरह की मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए, व्यावहारिक समाधान सुझाए हैं।
15. किसी भी एक भाषा को किसी दूसरी भारतीय भाषा से ज़्यादा अहमियत नहीं दी गई है और न ही किसी पर कोई भाषा थोपी गई है।
16. पूरी जानकारी CBSE की वेबसाइट www.cbseacademic.nic.in पर उपलब्ध है, और सर्कुलर इस लिंक से देखा जा सकता है:
https://cbseacademic.nic.in/web_material/Circulars/2026/33_Circular_2026.pdf
17. यह नीति कई भाषाओं में सीखने को बढ़ावा देती है और छात्रों को एक से ज़्यादा भाषाओं में ज़्यादा आत्मविश्वास महसूस करने में मदद करती है।
18. स्कूल आसानी से बदलाव कर सकते हैं, क्योंकि कई छात्र पहले से ही अंग्रेज़ी, ओडिया और कोई दूसरी भारतीय भाषा—जैसे हिंदी या संस्कृत—पढ़ते हैं।
19. यह नीति भारतीय भाषाओं को मज़बूत बनाती है, क्योंकि यह पक्का करती है कि छात्र कम से कम दो भारतीय भाषाएँ ज़रूर सीखें।
20. छात्रों को शायद ही किसी रुकावट का सामना करना पड़े, क्योंकि राज्य में विदेशी भाषाएँ चुनने वाले छात्रों की संख्या बहुत कम है।
21. जिन स्कूलों की क्षेत्रीय भाषाओं पर अच्छी पकड़ है, वे अपने मौजूदा भाषा-ढाँचे को बिना किसी बड़े बदलाव के जारी रख सकते हैं।
22. यह नीति छात्रों को अपनी स्थानीय भाषा, संस्कृति और पहचान से जुड़े रहने में मदद करती है।
23. CBSE ने तीसरी भाषा सीखने की शुरुआत करने वाले छात्रों को क्लास VI के स्तर की किताबों से पढ़ाई शुरू करने की छूट देकर इस बदलाव को और भी आसान बना दिया है।
24. अभी क्लास IX में पढ़ रहे छात्रों के लिए नई R3 भाषा का मूल्यांकन स्कूल के अंदर ही किया जाएगा, जिससे बोर्ड परीक्षा का दबाव कम होगा। 25. तीसरी भाषा में छात्रों का प्रदर्शन CBSE प्रमाणपत्र में भी दर्शाया जाएगा, जिससे उनके भाषा सीखने के प्रयास को मान्यता मिलेगी।
26. यह नीति अन्य शैक्षणिक विषयों के साथ-साथ भाषाई कौशल को भी महत्व देकर संतुलित शिक्षा को बढ़ावा देती है।
27. यह नीति सभी राज्यों, सभी भाषाई पृष्ठभूमि और समाज के सभी वर्गों के छात्रों की आवश्यकताओं को पूरा करती है।
28. यह नीति भारत की भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देती है और उसे सुदृढ़ बनाती है।
29. यह नीति छात्रों को भारतीय भाषाओं में संरक्षित विविध ज्ञान प्रणालियों तक पहुँचने में सक्षम बनाती है।
28/05/2026
त्रिभाषा सूत्र और हमारी शिक्षा व्यवस्था
भारत अपनी बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहाँ प्रत्येक राज्य की अपनी भाषा, बोली और संस्कृति है। हमारा संविधान सभी भाषाओं को समान सम्मान देता है और इस भाषाई विविधता को देश की एकता और शक्ति का आधार मानता है।
इसी विविधता को संरक्षित रखने तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शिक्षा व्यवस्था में त्रिभाषा सूत्र (Three Language Formula) को अपनाया गया। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने भी इस नीति को अपनी पाठ्यचर्या में सम्मिलित किया है।
त्रिभाषा सूत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को तीन भाषाओं का ज्ञान देना है — मातृभाषा, हिंदी (संपर्क भाषा) और अंग्रेजी (अंतर्राष्ट्रीय भाषा)। इससे विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं, देश के अन्य भागों से संवाद स्थापित कर पाते हैं और वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना पाते हैं।
19/05/2026
सरस्वती शिशु मंदिर पक्कीबाग में विद्या भारती गोरक्ष प्रांत की क्रिया शोध वार्षिक कार्य योजना बैठक संपन्न।
गोरखपुर; विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा संचालित, विद्या भारती गोरक्ष प्रांत की क्रिया शोध वार्षिक कार्य योजना बैठक सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) पक्कीबाग, गोरखपुर के लज्जाराम तोमर सभागार में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने और शिक्षण के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक के मुख्य अतिथि, शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत के प्रदेश निरीक्षक श्री राम सिंह ने अपने संबोधन में क्रिया शोध के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि क्रिया शोध के अंतर्गत समस्या का चयन, उसके कारण, उपाय और निवारण सही प्रकार से होना चाहिए। क्रिया शोध शिक्षा जगत का वह वैज्ञानिक उपकरण है जिसके द्वारा एक शिक्षक शिक्षा में आने वाली चुनौतियों और समस्याओं का सटीक समाधान करता है। उन्होंने आत्म-चिंतन पर विशेष बल देते हुए कहा कि हमें सकारात्मक सोचना, सुनना, बोलना और करना चाहिए। उन्होंने एक मूल सूत्र देते हुए कहा कि हम बच्चों को पढ़ाने से पहले खुद पढ़ें, और उससे भी पहले स्वयं को पढ़ें। यही किसी संस्थान, परिवार, समाज और राष्ट्र को आगे बढ़ाने का एकमात्र सही रास्ता है।
कार्यक्रम की शुरुआत में विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं क्रिया शोध के संयोजक डॉ. राजेश सिंह द्वारा अतिथियों का परिचय कराया गया और उनका ससम्मान स्वागत किया गया।
इस अवसर पर क्रिया शोध के सह-संयोजक डॉ. राजेश श्रीवास्तव, ग्रामीण शिक्षा के संयोजक व प्रधानाचार्य श्री चंद्रभूषण पाण्डेय, और शिशु मंदिर पक्कीबाग संकुल के संयोजक श्री अभिषेक जायसवाल उपस्थित रहे। इनके साथ ही गोरक्ष प्रांत में संचालित विभिन्न विद्यालयों के आचार्य और आचार्याओं ने भी अपने विचार साझा किए।
19/05/2026
सरस्वती शिशु मंदिर पक्कीबाग में शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम का आयोजन: प्रो. ऊषा सिंह के सितार वादन से मंत्रमुग्ध हुआ विद्यालय परिवार
विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के विद्यालयों में संगीत को केवल एक मनोरंजन या अतिरिक्त गतिविधि (Co-curricular activity) नहीं माना जाता, बल्कि इसे शिक्षा के मूल आधार के रूप में स्वीकार किया गया है। इसी क्रम में सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) पक्कीबाग, गोरखपुर में ग्रीष्मावकाश से पूर्व भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक बेहद मधुर एवं सुरमई प्रस्तुति का आयोजन किया गया। "हमारी संस्कृति, हमारी पहचान स्वरों की साधना, संस्कृति की आराधना" विषय पर आधारित इस शास्त्रीय संगीतमय कार्यक्रम में मुख्य कलाकार के रूप में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उषा सिंह उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने उत्कृष्ट सितार वादन से समूचे वातावरण को संगीतमय और जीवंत बना दिया।
इस संगीत कार्यक्रम में प्रोफेसर उषा सिंह का साथ जुगलबंदी के रूप में अन्य गुणी कलाकारों ने दिया। तबले पर निखिल रंजन, हारमोनियम पर राजन भारती और सितार पर अभिषेक श्रीवास्तव ने अपनी सधी हुई संगत से प्रस्तुति में चार चांद लगा दिए। कलाकारों की इस जुगलबंदी ने उपस्थित श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा से सराबोर कर दिया।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। अतिथियों का परिचय विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने भारतीय संस्कृति और संगीत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी कलाकारों का स्वागत किया।
कार्यक्रम के समापन पर शिशु शिक्षा समिति विद्या भारती गोरक्ष प्रांत के मंत्री डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन श्री शिवम दुबे द्वारा किया गया। अंत में उप प्रधानाचार्य श्री राम केवल शर्मा के नेतृत्व में सामूहिक शांति मंत्र के पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर डॉ. गौरी शंकर (ललित कला एवं संगीत विभाग गोरखपुर विश्वविद्यालय) सहित विद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और समस्त विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।
#शास्त्रीसंगीत
डॉ. शैलेश सिंह Sourabh Malviya
Vidya Bharati Akhil Bhartiya Shiksha Sansthan Vidya Bharti Purvi Uttar Pradesh शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत गोरखपुर Saraswati Shishu Mandir Pakkibag Gorakhpur
18/05/2026
✨ गोरखपुर - प्रांतीय बालिका शिक्षा कार्यशाला का समापन सत्र ✨
“भारतीय बालिका शिक्षा ज्ञान परंपरा, संबंध मूल्य एवं जीवन मूल्यों पर आधारित है।”— डॉ. सौरभ मालवीय 🌸
सरस्वती बालिका विद्यालय, सूर्यकुंड (गोरखपुर) में आयोजित चार दिवसीय प्रांतीय बालिका शिक्षा कार्यशाला का समापन माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पार्चन एवं सरस्वती वंदना के साथ अत्यंत गरिमामयी वातावरण में सम्पन्न हुआ। 🙏🪔🌺
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के मंत्री एवं अखिल भारतीय सह-प्रभारी (प्रचार विभाग) प्रो. सौरभ मालवीय जी तथा क्षेत्रीय बालिका शिक्षा प्रभारी श्री उमाशंकर जी की प्रेरणादायी उपस्थिति रही। 🌟
अपने उद्बोधन में डॉ. मालवीय जी ने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य नारी को पूज्य भाव प्रदान करते हुए संबंध एवं जीवन मूल्यों की स्थापना करना है। संस्कारयुक्त शिक्षा के माध्यम से ही बालिकाओं में आत्मविश्वास, संस्कार और राष्ट्रभाव का विकास संभव है, जिससे एक सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण होगा। 💫
🌸 *संस्कारयुक्त बालिका शिक्षा ही सशक्त राष्ट्र निर्माण का आधार है।* 🌸
18/05/2026
सरस्वती शिशु मन्दिर पक्कीबाग में विज्ञान एवं शारीरिक विषय का संकुल स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग सम्पन्न
साइलेंट क्लास से वाइब्रेंट क्लास की ओर बढ़ना आज की आवश्यकता: प्रभात त्रिपाठी
बिना अनुशासन के व्यक्तित्व विकास संभव नहीं: राजीव श्रीवास्तव
6 विद्यालयों के 49 आचार्यों ने लिया प्रशिक्षण
गोरखपुर, 18 मई: सरस्वती शिशु मन्दिर (10+2) पक्कीबाग, गोरखपुर के प्रांगण में विज्ञान एवं शारीरिक विषय का संकुल स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का सफल आयोजन किया गया। प्रांतीय विज्ञान प्रशिक्षण प्रमुख श्री रवि तिवारी जी के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग में पक्कीबाग संकुल के 6 विभिन्न विद्यालयों से कुल 49 आचार्य एवं आचार्याओं ने सहभागिता की। यह महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कुल चार वैचारिक एवं व्यावहारिक सत्रों में सम्पादित हुआ:
प्रथम सत्र: विद्यालय के प्रथम सहायक श्री रामकेवल शर्मा जी द्वारा सत्र की शुरुआत की गई, जिसमें उन्होंने पंचपदी शिक्षण पद्धति के मूलभूत सिद्धांतों पर प्रकाश डाला।
द्वितीय सत्र: इस सत्र में सहभागी आचार्यों द्वारा व्यावहारिक रूप से लेशन प्लान (पाठ योजना) निर्माण का कार्य किया गया।
तृतीय व चतुर्थ सत्र: तृतीय सत्र में लेसन प्लान निर्माण व चतुर्थ सत्र में मॉडल शिक्षण (आदर्श शिक्षण) का प्रदर्शन किया गया, जिसमें आचार्य सुरेश चन्द्र पाण्डेय जी ने रसायन विज्ञान, श्री जगमोहन आचार्य जी ने भौतिक विज्ञान तथा श्रीमती अल्का सिन्हा जी ने जीव विज्ञान विषय पर प्रभावी मॉडल शिक्षण प्रस्तुत किया।
कौशल विकास और एक्टिविटी बेस्ड टीचिंग पर जोर
समापन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए प्रख्यात ज्योतिर्विद एवं बेसिक शिक्षा के प्रधान अध्यापक श्री प्रभात त्रिपाठी ने कहा:
"शिक्षक को सदैव छात्र की रुचि, योग्यता और उसकी व्यक्तिगत क्षमता को ध्यान में रखकर ही शिक्षण कार्य करना चाहिए। प्रत्येक छात्र की क्षमता अद्वितीय है। वर्तमान समय की मांग है कि हम छात्रों को भारत की मूल संस्कृति और सिद्धांतों से जोड़ते हुए उनके भीतर कौशल विकास (Skill Development) पर ध्यान केंद्रित करें। हमें 'साइलेंट क्लास' के पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलकर 'वाइब्रेंट क्लास' (जीवंत कक्षा) की ओर बढ़ना होगा, जिसके लिए एक्टिविटी बेस्ड टीचिंग सबसे सशक्त माध्यम है। एक सफल शिक्षक का दृष्टिकोण सदैव दूरदर्शी होना चाहिए।"
अनुशासन और पूर्व तैयारी ही व्यक्तित्व की कुंजी
विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित सुभाष चंद्र बोस नगर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री राजीव श्रीवास्तव ने व्यक्तित्व विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि बिना अनुशासन के किसी भी व्यक्तित्व का विकास संभव नहीं है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा:
"विज्ञान और शारीरिक शिक्षक किसी भी विद्यालय के मजबूत स्तंभ होते हैं। छात्रों का विकास करने से पहले हमें स्वयं के व्यक्तित्व को परिष्कृत करना होगा। कक्षा चाहे प्राथमिक स्तर की हो या इंटरमीडिएट की, बिना पूर्व तैयारी के कक्षा में जाना उचित नहीं है। कक्षाओं को एक्टिविटी बेस्ड बनाकर ही हम छात्रों में विषय के प्रति निरंतर रुचि जगाए रख सकते हैं।"
प्रशिक्षण वर्ग के अंत में प्रधानाचार्य डॉ राजेश सिंह जी के द्वारा सभी आगंतुकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। संपूर्ण कार्यक्रम को गति प्रदान करने में श्री संतोष मल्ल जी, श्री नवनीत सिंह जी एवं श्री निखिल जी का विशेष सहयोग रहा।
यह एक दिवसीय वर्ग शिक्षकों के संवर्धन और आगामी सत्र की प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने में अत्यंत लाभप्रद सिद्ध हुआ।
Vidya Bharati Akhil Bhartiya Shiksha Sansthan Vidya Bharti Purvi Uttar Pradesh शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत गोरखपुर Saraswati Shishu Mandir Pakkibag Gorakhpur डॉ. शैलेश सिंह Sourabh Malviya
12/05/2026
विद्या मंदिर रामबाग में इंटरलॉकिंग कबड्डी मैट का उद्घाटन
बस्ती। सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रामबाग-बस्ती में खेल गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से विद्यालय परिसर में इंटरलॉकिंग कबड्डी मैट का उद्घाटन किया गया। उद्घाटन विद्या भारती गोरक्ष प्रान्त के शिशु शिक्षा समिति के प्रदेश निरीक्षक श्री राम सिंह जी के कर-कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री गोपाल गाडिया जी, प्रबंधक डॉ. सुरेन्द्र प्रताप सिंह जी, कोषाध्यक्ष श्री प्रहलाद मोदी जी, प्रबंध समिति की सदस्य श्रीमती लता सिंह, श्रीमती पद्मजा उपाध्याय, श्री अश्विनी अग्रवाल, श्री दिनेश पाल, श्री ओम प्रकाश गुप्त, विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री गोविन्द सिंह जी, उप प्रधानाचार्य श्री विजय नारायण उपाध्याय जी, बालिका विद्या मंदिर की प्रधानाचार्या श्रीमती प्रियंका सिंह जी आदि उपस्थित रहे।
ज्ञात हो कि मुख्य रूप से इसे इंटरलॉकिंग कबड्डी मैट या EVA फोम कबड्डी मैट कहा जाता है। ये रबर-EVA कंपाउंड से बने होते हैं, जो झटके सोखने और खिलाड़ियों को चोट से बचाने के लिए एकदम सही हैं।
उद्घाटन के अवसर पर प्रदेश निरीक्षक श्री राम सिंह जी ने कहा कि खेल केवल शारीरिक विकास का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास, साहस, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सशक्त साधन है। कबड्डी जैसे खेल से विद्यार्थियों में ऊर्जा, त्वरित निर्णय क्षमता और संघर्षशीलता का विकास होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित खेल अभ्यास करने और विद्यालय का नाम जनपद व प्रान्त स्तर पर रोशन करने की प्रेरणा दी।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री गोविन्द सिंह जी ने कहा कि विद्यालय में खेल सुविधाओं का विस्तार विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कबड्डी मैट उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं व्यवस्थित वातावरण में अभ्यास करने का अवसर मिलेगा तथा वे प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर तैयारी कर सकेंगे।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रबंध समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने विद्यालय में खेल संसाधनों के विकास को विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य हेतु आवश्यक बताते हुए इस पहल की सराहना की।
उद्घाटन के पश्चात विद्यार्थियों द्वारा कबड्डी का प्रदर्शन भी किया गया, जिसे उपस्थित अतिथियों ने उत्साहवर्धन करते हुए सराहा।
इस अवसर पर विद्यालय के आचार्य अम्बिकेश्वर दत्त ओझा जी, आशुतोष मिश्र, श्रीमती नेहा पाण्डेय सहित बंधु-भगिनी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।