04/06/2026
धुआं था। आग थी। और एक मां थी
जो तीसरी मंजिल से कूद गई।
अपने बच्चे को सीने से लगाकर।
नीचे गद्दे थे।
एक गद्दे वाले ने बिछाए थे।
बिना सोचे। बिना रुके। बिना किसी से पूछे।
बुधवार की सुबह।
दिल्ली के मालवीय नगर में।
Flourish Stay B&B होटल में आग लगी।
इक्कीस लोग नहीं बचे।
अट्ठावन बचे, क्योंकि कुछ लोग दौड़े।
बिना हेलमेट के।
बिना यूनीफॉर्म के।
बिना किसी ऑर्डर के।
मोहम्मद अफजल और उसके दस भाई-भतीजे।
पिता का फोन आया 'वहां आग लगी है।'
बस इतना काफी था।
वो पहुंचे। गेट तोड़ा। अंदर घुसे।
धुएं में। अंधेरे में।
एक बच्चे को उन्होंने ऊपरी मंजिल से कूदते हुए थाम लिया।
अफजल के कपड़े काले हो गए थे।
उसने कहा-
'हम बस जानें बचाना चाहते थे।
एक पल भी नहीं रुके।'
रियाज़ुद्दीन मंसूरी और उनका बेटा अरमान।
पास में गद्दे की दुकान है उनकी।
उन्होंने खिड़कियों से लोगों को कूदते देखा।
सोचा नहीं।
हिसाब नहीं लगाया।
दुकान खाली कर दी।
सड़क पर गद्दे बिछा दिए।
एक औरत थी-बच्चा गोद में था।
तीसरी मंजिल से कूदी।
गद्दे पर गिरी।
बच गई।
बच्चा बच गया।
रियाजुद्दीन ने बाद में कहा-
'नुकसान का खयाल ही नहीं आया।
बस यही दिखा कि लोगों को नीचे आना है।'
दस पुलिसवाले भी थे।
करतार, हरग्यान, प्रेमचंद, जितेंद्र, दिनेश।
रविरंजन, संदीप, विक्रम, दीपक, रामपाल।
धुएं में घुसे।
एम्स में भर्ती हुए।
लेकिन जब तक ऑपरेशन पूरा नहीं हुआ
वहां से नहीं हटे।
हमारे न्यूजरूम में एक कहावत है —
'खबर में हीरो ढूंढो तो मिलता है।
भीड़ में नहीं-उस एक चेहरे में
जो सबसे आगे था।'
मनोविज्ञान कहता है -
खतरे में इंसान के दो रास्ते होते हैं।
फाइट या फ्लाइट।
लड़ो या भागो
लेकिन कुछ लोग होते हैं
जिनमें एक तीसरा रास्ता होता है
केयर।
वो रुकते नहीं।
वो भागते नहीं।
वो दौड़ते हैं-उस तरफ
जहां से बाकी सब भाग रहे हैं।
वे गद्दे बिछाते हैं
अपनी दुकान से उठाकर
बिना कुछ सोचे
इस दुनिया में तकलीफ बहुत है।
नफरतें बहुते है। सियासत है।
यह सच है।
लेकिन यह भी सच है
कि जब एक मां तीसरी मंजिल से कूदती है
तो नीचे कोई न कोई गद्दा बिछाने वाला नेक इंसान होता है।
हमेशा।
यही इंसानियत है।
यही बचाती है हमें।
हर बार।
🙏
#इंसानियत_ज़िंदा_है #साहस #धैर्य
26/05/2026
इस चेयर की कीमत कोई बता सकता है क्या....???
20/03/2026
बैंगलोर में आर्ट ऑफ़ लिविंग आश्रम में श्री श्री रविशंकर के सामने एक मशीन का डेमो दिखाया गया। श्री महेश द्वारा विकसित यह आविष्कार पानी (H₂O) से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन अलग करता है और प्रदूषण-मुक्त नीली ज्वाला पैदा करता है, जिसे चूल्हे पर खाना पकाने में इस्तेमाल किया जाता है। दावा है कि आधा लीटर पानी से लगातार 6 महीने तक खाना बनाया जा सकता है, बिना किसी कार्बन उत्सर्जन या LPG सिलेंडर की जरूरत के। इससे पर्यावरण सुरक्षित, सस्ता और सेहतमंद खाना मिलता है।.........
31/01/2026
गुजरात के छोटे से गाँव गोरखी में, जहाँ खेतों की मिट्टी अभी भी किसानों के पसीने से तर होती है, वहाँ एक अनपढ़ किसान विट्ठल भाई के घर एक बच्चा पैदा हुआ। नाम रखा गया **गणेश** लेकिन जैसे ही वह बड़ा हुआ, सबने देखा कि उसका कद रुक गया है। महज **3 फीट**। वजन 18-20 किलो। डॉक्टरों ने कहा ये **ड्वार्फिज्म** है, लाइलाज। शरीर का 72% हिस्सा लोकोमोटर डिसएबिलिटी से ग्रस्त।
बचपन कठिन था। गाँव के बच्चे हँसते, ताने मारते। 10 साल की उम्र में एक सर्कस वाली मंडली आई। उन्होंने माँ-बाप से कहा, "इस बच्चे को हमें दे दो, हम 5 लाख रुपये देंगे।" माँ देवुबेन की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने गणेश को सीने से लगाया और कहा, "मेरा बेटा कोई तमाशा नहीं, वो इंसान है... और बड़ा आदमी बनेगा।"
गणेश ने स्कूल में किताबें गले लगाईं। छोटे कद के कारण बेंच पर पैर नहीं पहुँचते थे, फिर भी आगे बैठता, हाथ उठाता, सवाल पूछता। दोस्त मदद करते, शिक्षक प्रोत्साहित करते। स्कूल के प्रिंसिपल ने एक दिन मजाक में कहा, "गणेश, इतने छोटे कद से डॉक्टर बन गए तो वर्ल्ड रिकॉर्ड बन जाएगा!" गणेश ने मुस्कुराकर कहा, "तो फिर रिकॉर्ड बनाकर दिखाता हूँ।"
12वीं साइंस में अच्छे नंबर आए। **NEET** दिया, पास हुआ। सपना सच होने वाला था डॉक्टर बनकर गाँव के गरीबों का इलाज करना। लेकिन...
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने फाइल देखी और कहा, "नहीं। इतने छोटे कद और डिसएबिलिटी के साथ मेडिकल प्रैक्टिस नहीं कर सकते।" एडमिशन रिजेक्ट।
दुनिया टूट गई। लेकिन गणेश ने हार नहीं मानी। परिवार ने हिम्मत बाँधी। स्कूल प्रिंसिपल, जिला कलेक्टर, शिक्षा मंत्री सबके पास गए। मदद मिली, लेकिन काफी नहीं। फिर गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने भी मना कर दिया।
अब रास्ता सिर्फ एक बचा था **सुप्रीम कोर्ट**।
लंबी कानूनी लड़ाई। वकील, कागज, सुनवाई, इंतजार। गणेश रोज़ सोचता, "अगर मैं हार गया तो मेरा सपना ही नहीं, उन हजारों बच्चों का हौसला भी टूट जाएगा जो मेरे जैसे हैं।" आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया "योग्यता कद से नहीं, मेहनत और ज्ञान से मापी जाती है। एडमिशन दो।"
उस दिन गणेश की आँखों में आँसू थे, लेकिन मुस्कान भी। **गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, भावनगर** में MBBS शुरू हुआ। पढ़ाई कठिन थी। ऑपरेशन थिएटर में स्टूल पर खड़े होकर काम करना पड़ता। प्रोफेसर मदद करते, दोस्त कंधा देते। लेकिन गणेश कभी शिकायत नहीं करता।
2024 में MBBS पूरा। इंटर्नशिप। और फिर... 26 नवंबर 2025 को सरकारी आदेश आया **डॉ. गणेश बरैया** को **सर तख्तासिंह जी जनरल हॉस्पिटल, भावनगर** में **मेडिकल ऑफिसर** के पद पर नियुक्ति।
आज 25 साल का डॉ. गणेश व्हाइट कोट पहने, स्टेथोस्कोप गले में टाँगे, छोटे-छोटे कदमों से वार्ड में घूमता है। मरीज उसे देखकर पहले हैरान होते हैं, फिर मुस्कुराते हैं। वह कहता है, "भगवान ने मुझसे कद लिया, लेकिन हौसला और दिमाग दिया। मैं उसी से गरीबों का इलाज करूँगा। जहाँ सबसे ज्यादा जरूरत है, वहीं जाऊँगा।"
जब वह हॉस्पिटल के गलियारे में चलता है, तो लोग सिर्फ एक छोटे कद के डॉक्टर को नहीं देखते... वे एक **बड़े इरादे** को देखते हैं।
क्योंकि सच में **कद छोटा हो सकता है, लेकिन सपने और हिम्मत बहुत बड़ी होती है।**
डॉ. गणेश बरैया एक जीती-जागती मिसाल। 🇮🇳
30/01/2026
सवर्ण समाज कों धन्यवाद
आप लोगों ने UGC का विरोध करके
SC, ST, OBC
वर्ग के करोड़ो लोगों का हिंदू होने का भूत उतार दिया !
30/01/2026
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों (UGC Equity Regulations 2026) पर रोक लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच का नेतृत्व भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत (Justice Surya Kant) ने किया।
इस मामले की सुनवाई कर रही दो जजों की बेंच में निम्नलिखित न्यायाधीश शामिल थे:
जस्टिस सूर्यकांत (CJI)
जस्टिस जॉयमाल्या बागची (Justice Joymalya Bagchi)
जस्टिस सूर्यकांत सामान्य वर्ग (General Category) से आते हैं। उनका जन्म हरियाणा के हिसार जिले में हुआ था।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची सामान्य वर्ग (General Category) से आते हैं। उनका जन्म 3 अक्टूबर 1966 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में एक बंगाली परिवार में हुआ था। उनके पिता भी पेशे से वकील थे।
क्रोनोलॉजी समझिए दोनों जज जनरल केटेगरी से आते हैं इसलिए इनको UGC से समस्या हुई.
देश में बहुत सारे कानूनी कैसे अदालत में पेंडिंग पड़े हुए हैं और जिसमें से लगभग 80% से 85% कैसे पिछड़े और ओबीसी वर्ग का है, अब पता चला केस पेंडिंग में क्यों रहता है क्योंकि यह जनरल वाले ओबीसी और पिछड़े और दलित को मरने कटने के लिए छोड़ देता है।
इन दोनों जज को भी पता है कि दलितों के साथ हमेशा से शोषण होता हुआ आया है और आज भी शोषण हो रहा है दोनों जज जनरल केटेगरी से होते हुए साबित कर दिया, कॉलेजियम सिस्टम और नेपोटिज्म सिस्टम जारी रहेगा।
इन दोनों जगह को मोदी और अमित शाह की जाति से नफरत है।
बल्कि पूरा ओबीसी समाज से उनको नफरत है।
27/01/2026
अंबानी और मस्क की 'सीक्रेट डील' लीक? टेलीकॉम मार्केट में हड़कंप!
क्या आपकी जेब में रखा सिम कार्ड बहुत जल्द एक मामूली 'प्लास्टिक का टुकड़ा' बन जाएगा? 😱
कल रात मुंबई के एक अनजान लोकेशन से कुछ ऐसी जानकारी लीक हुई है, जिसने दुनिया के सबसे बड़े इनवेस्टर्स की रातों की नींद उड़ा दी है।
अंदरूनी सूत्रों की मानें तो मुकेश अंबानी और एलन मस्क के बीच एक ऐसी अति-गोपनीय डील फाइनल हुई है, जिसे अब तक सरकारी फाइलों से भी दूर रखा गया था।
चर्चा है कि यह सिर्फ इंटरनेट नहीं है... बल्कि एक ऐसा 'अनलिमिटेड फ्री एक्सेस' प्लान है जो भारत के हर उस कोने तक पहुँचेगा जहाँ आज तक बिजली भी नहीं पहुँची।
कहा जा रहा है कि Jio और Starlink का यह 'हाइब्रिड नेटवर्क' सीधे अंतरिक्ष से आपके फोन को एक ऐसे 'सुपर-सिग्नल' से जोड़ देगा, जिसमें न तो रिचार्ज खत्म होने का डर होगा और न ही टावर की ज़रूरत।
अगर ऐसा हो जाये तो।
ิดค่าการมองเห็น
27/01/2026
…..ये हैं यूरोपीय यूनियन की राष्ट्रपति उर्सुला वॉन डेर लेयेन…..
अमेरिका चाहता था कि
👉 रूस से तेल खरीदने को लेकर
👉 EU, भारत पर प्रतिबंध लगाए
लेकिन सामने थे मोदी जी…
और फिर जो हुआ, वो कूटनीति की मास्टरक्लास बन गया 👇
यूरोपीय यूनियन की राष्ट्रपति को
🇮🇳 भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनाकर बुला लिया।
कर्तव्य पथ पर
👉 करीब दो घंटे तक भारत की शान, अनुशासन और शक्ति के बीच उन्हें खड़ा रखकर
👉 दिखा दिया कि नया भारत क्या होता है।
उन्हें दिखाई गई
🇮🇳 ऑपरेशन सिंदूर की झांकी —
साफ संदेश था: भारत शांति चाहता है,
लेकिन ज़रूरत पड़ी तो जवाब भी जानता है।
कर्तव्य पथ पर ही
👉 रूसी S-400 डिफेंस सिस्टम
👉 और रूसी लड़ाकू विमानों के करतब
पूरी दुनिया ने लाइव देखे।
यूरोपीय यूनियन की राष्ट्रपति ने खुद कहा —
“This is the Honor of a Lifetime”
…..और अब वही यूरोप 👇
👉 भारत के साथ
👉 इतिहास के सबसे बड़े कहे जा रहे
👉 “Mother of All Trade Deals” – Free Trade Agreement
पर हस्ताक्षर करने जा रहा है।
दुनिया समझ चुकी है —
भारत अब दबाव में नहीं,
बराबरी और शर्तों पर दोस्ती करता है।
मोदी हैं…
तो मुमकिन ही नहीं,
पक्का है। 🇮🇳
जय हिंद 🇮🇳