01/09/2025
* #अल्लाह_ने_हमें_बिना_मक़सद_पैदा_नहीं_किया_होगा।*
गैंगस्टर और नाइट क्लबों की ज़िंदगी जीने वाला *"सोना आरडी"* इस्लाम क़बूल करता है और कहता है, अगर मैंने इस्लाम क़बूल नहीं किया होता, *तो आज मैं पागलों के अस्पताल में होता।*
कैसे सोना आरडी एक गैंगस्टर से बदलकर *ब्रिटेन में अंग्रेज़ी भाषा में इस्लाम के सबसे अहम और बेहतरीन दाइयों (दावत देने वालों) में से एक बन गया।*
उसने साफ़ कहा, मैं लंदन में गैंग्स और लड़ाई-झगड़ों में पड़ा हुआ था। फिर जब लंदन से बाहर गया तो गैंगस्टर ज़िंदगी से नाइट क्लब की ज़िंदगी में चला गया। मेरी पूरी ज़िंदगी सिर्फ़ *भौतिकता और ऐशो-आराम* के पीछे भागने में गुज़र रही थी।
लेकिन मैं सोचता था जरूर कोई असली धर्म होना चाहिए। *अल्लाह ने हमें बिना मक़सद पैदा नहीं किया होगा।*
मैंने बाइबिल पढ़ना शुरू किया और उसमें खोज की।
क़ुरआन पढ़ा और दूसरे मज़हबी ग्रंथ भी पढ़े।
ईसाइयों, मुसलमानों और हिंदुओं की बहुत-सी बहसें देखीं।
करीब 2-3 साल तक मैं इसी तलाश में रहा। और मेरे पास बस एक शर्त थी, *अगर कोई किताब दावा करती है कि यह अल्लाह की तरफ़ से है तो उसमें कोई विरोधाभास (contradiction) नहीं होना चाहिए।*
उसमें कोई गलती न हो, उसे खुद अपने आप को साबित करना होगा कि वह सच है।
मैंने यही कसौटी बाइबिल, तौरात, क़ुरआन, वेद और बाक़ी किताबों पर लगाई।
मेरे लिए एक ही नियम था, अगर कोई किताब दावा करती है कि *वह अल्लाह की तरफ़ से है, तो उसे खुद को साबित करना होगा।*
*क़ुरआन की एक आयत ने मुझे बहुत प्रभावित किया, क्या वे क़ुरआन पर ग़ौर नहीं करते? अगर यह अल्लाह के अलावा किसी और की तरफ़ से होता तो इनमें ज़रूर बहुत विरोधाभास मिलते।*
और एक दूसरी आयत ने दिल को छू लिया, *अगर तुम सच्चे हो तो इसकी जैसी एक सूरह ले आओ* और अपने गवाहों को भी बुला लो अल्लाह के सिवा।
यह बहुत बड़ा चैलेंज है, जैसे कोई कहे कि मैं हर उस शख़्स को हरा दूँगा जो मुझे चुनौती देगा।
लेकिन यहाँ फर्क यह था कि *क़ुरआन ने सचमुच अपने आप को साबित किया।*
मैंने सोचा ठीक है, मैं क़ुरआन को टेस्ट करता हूँ।
जब मैंने खोज की, *तो देखा कि यह चुनौती अरब के उन मशहूर शायरों को दी गई थी जो भाषा में माहिर थे। लेकिन वे भी ऐसी कोई चीज़ न ला सके और दंग रह गए, यह मेरे लिए हैरान कर देने वाला था।*
फिर मैंने इसमें विरोधाभास ढूँढने की कोशिश की।
कुछ भी नहीं मिला, बल्कि मुझे इसमें *चमत्कार और भविष्यवाणियाँ मिलीं।*
तब मैंने कहा, अगर तुम कहते हो कि यह अल्लाह की तरफ़ से नहीं है तो तुम खुद से झूठ बोल रहे हो।
फिर मैंने पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की ज़िंदगी पर रिसर्च की। और यह सब तस्वीर को पूरा कर गया।
इस्लाम अपनाने के बाद सोना आरडी ने अपना नाम रखा "अली दावाह"
वह पिछले कई सालों से स्पीकर कॉर्नर (लंदन) में लोगों से इस्लाम पर बात करते हैं, उन्हें इस्लाम की तरफ़ बुलाते हैं, नास्तिकों से बहस करते हैं, शंकाओं का जवाब देते हैं और ग़लतफहमियाँ दूर करते हैं।
10 साल की लगातार दावत में "अली दावाह" की वजह से बहुत-से *यूरोपियनों और अमेरिकियों ने इस्लाम क़बूल किया।*
हम दुआ करते हैं कि अल्लाह उन्हें इस्तिक़ामत और इल्म-ए-नाफ़े अता करे।
आमीन