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नवयुवता में ही मातृभूमि के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर पराधीन भारत के क्षीण होते आत्मगौरव को नवोदय प्रदान करने वाले अव...
24/08/2026

नवयुवता में ही मातृभूमि के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर पराधीन भारत के क्षीण होते आत्मगौरव को नवोदय प्रदान करने वाले अविस्मरणीय रणव्रती, निर्भय राष्ट्रार्चक तथा अमर बलिदानी शिवराम हरि ‘राजगुरु’ को उनकी जयंती पर शत्-शत् प्रणाम। 🇮🇳🙏🏻

राष्ट्रीय अतंरिक्ष दिवस की अनंत शुभकामनायें 🌹🙏🇮🇳स्वर्ग के सम्राट को जाकर खबर कर दो,रोज ही आकाश चढ़ते आ रहे है वो,रोकिये, ...
23/08/2026

राष्ट्रीय अतंरिक्ष दिवस की अनंत शुभकामनायें 🌹🙏🇮🇳

स्वर्ग के सम्राट को जाकर खबर कर दो,
रोज ही आकाश चढ़ते आ रहे है वो,
रोकिये, जैसे बने इन स्वप्न वालों को,
स्वर्ग की ही ओर बढ़ते आ रहे है वो!!

🌹🙏
19/08/2026

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🌹❤️🙏18 अगस्त को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुण्यतिथि के रूप में स्मरण किया जाता है। हालांकि, उनकी मृत्यु की परिस्थितियों ...
18/08/2026

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18 अगस्त को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुण्यतिथि के रूप में स्मरण किया जाता है। हालांकि, उनकी मृत्यु की परिस्थितियों को लेकर आज भी ऐतिहासिक विवाद और जांच का विषय बना हुआ है।

🔹 1. जन्म: सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक, ओडिशा में हुआ था।

🔹 2. ICS परीक्षा में सफलता: उन्होंने भारतीय सिविल सेवा (ICS) की परीक्षा में सफलता हासिल की, लेकिन ब्रिटिश शासन की नौकरी छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन का रास्ता चुना।

🔹 3. कांग्रेस के अध्यक्ष: वे 1938 में हरिपुरा अधिवेशन और 1939 में त्रिपुरी अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए।

🔹 4. फॉरवर्ड ब्लॉक: 1939 में उन्होंने ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की।

🔹 5. आज़ाद हिंद फ़ौज: उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के लिए आज़ाद हिंद फ़ौज (INA) को संगठित और नेतृत्व प्रदान किया।

🔹 6. प्रसिद्ध नारा: उनका आह्वान—“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा”—भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष का अत्यंत प्रसिद्ध संदेश बना।

🔹 7. आज़ाद हिंद सरकार: 21 अक्टूबर 1943 को उन्होंने सिंगापुर में आज़ाद हिंद की अस्थायी सरकार की घोषणा की।

🔹 8. “नेताजी” की उपाधि: सुभाष चंद्र बोस को लोकप्रिय रूप से “नेताजी” कहा जाता है।

🔹 9. असाधारण साहस: ब्रिटिश नजरबंदी से उनका गुप्त रूप से निकलना और विदेश जाकर भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्थन जुटाना उनके साहस और रणनीतिक क्षमता का उदाहरण माना जाता है।

🔹 10. मृत्यु का रहस्य: 18 अगस्त 1945 को ताइहोकू (वर्तमान ताइपेई) में विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु होने की व्यापक रूप से स्वीकृत ऐतिहासिक धारणा है, लेकिन उनकी मृत्यु को लेकर लंबे समय से विभिन्न प्रश्न और विवाद भी रहे हैं।

🇮🇳 नेताजी का जीवन हमें साहस, त्याग, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।

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