30/12/2021
इसमें कोई शक नहीं कि खेती-बाड़ी मेहनत के साथ किस्मत का खेल है| परिश्रम, वो भी जरूरत और परिस्थिति अनुसार दिन रात की परवाह किऐ बगैर|
पर बिचौलिए और सरकारी महकमे के मिलेजुले भष्टाचार की बदौलत 80 फीसदी किसानों को हर साल अपनी उपज तय एमएसपी से 25 से 40 फिसदी कम कीमत पर बेचने को मजबूर होना पड़ता है| ये खेल सबकी नजरों के सामने खुलेआम चलता हैं, जिसें तंत्र ने किसानों की "सहूलियत" का नाम दिया है और ताज्जुब कि किसानों ने भी इस सहूलियत को अपना नसीब मान लिया है|🤐
"सहूलियत" मतलब अपनी उपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हुऐ भुगतान मे से 25 से 40℅ रकम बिचौलियों को दे देना|
अब आप कहेंगे, इसमें सहूलियत कैसी,?🤔
है भाई, क्यूंकि धान तैयार होने के बाद किसान जब क्रय केंद्र पहुंचता है तो उसे 15 से 20 दिन बाद का समय दे दिया जाता है, यानि क्वालिटी बरकरार रखते हुए उपज सुरक्षित रखने की चुनौती| जैसे तैसें निबह गए तो फिर पहुंचे केंद्र| अब यहां से शुरू होगा चोर सिपाही का खेल, कभी साहब नहीं, कभी बोरा नहीं तो कभी धान गिराने की जगह नहीं, मारते रहिए सुबह शाम चक्कर| कम से कम हफ्ता दस दिन इसी मे बीत जाता हैं, साथ ही क्वालिटी के साथ उपज सुरक्षित रहें इसका ख्याल दिमाग से उतरने नहीं देना है| अब इतना होने के बाद अगर आप ढीट की तरह केंद्र प्रभारी के सामने दांत चीयारते हुऐ नजर आ जाऐ तो वो आपको क्वालिटी का पहाड़ा पढाते हुऐ नमी और गंदगी के नाम पर चार छ: किलों कटौती के साथ उपज खरीद का उपकार आप पर कर ही देगा|🤑
गर इतना झेलना बस की बात नहीं है तो स्वागत है आपका सहूलियत क्लास में| बिचौलिया घर खलिहान आऐगा, न्यूनतम समर्थन मूल्य से चार पांच रूपये की कम कीमत पर दाम तय करेगा और अगले ही दिन अनाज उठा ले जाऐंगा| दो चार दिन में पैसा भी आप ही के खाते में| तय हुऐ मूल्य मुताबिक पैसा रख कर बाकी उस बिचौलिए को दे दिजिये और अपने उस सहूलियत के चुल्लू भर पानी में नाक डूबा कर मरते रहिये|
असल मे खरीद दोनों ही तरीकों से होती सरकारी ही है| बिचौलिया भी आपका अगूंठा लगवाने के लिए आपको केंद्र पर ही बुलाऐंगा| केंद्र प्रभारी पहलें के विपरीत हल्की मुस्कुराहट केे साथ आपको सहुलियत के ऐहसान के बोझ तलें दबाते हुऐ, वहां मौजूद नाक रगड़ने वाले ढीट किसानो के नजरों से बचते बचाते आपसे अगूंठा लगवा लेगा| जाईये गंगा नहा लिजिए|
इस बार तो और गजब हुआ, बीच खरीद ही आनलाइन टोकन कटने लगा|😇
मतलब कुदाल से शुरू हो ये सफर कम्प्यूटर तक आ गया| रात बारह बजे ही तत्काल टिकट की तरह दो मिनट मे टोकन विंडो फुल हो जाता है| किस्मत साथ दे तो आपके क्रय केंद्र का विंडो फुल करने वाले चार पांच लोगों में शामिल होकर आप खुद को कुछ समय के लिए खुशनसीब मान सकतें है, क्योंकि जब आनाज खलिहान में पड़ा हो तो बारिश के साथ अगर विभाग का ये मैसेज आ जाऐ तो खुशनसीबी का नशा दो मिनट मे काफूर होना तय है| 😓
खैर हमनें आधा बेच लिया बगैर सहूलियत क्लास के बाकी भी ठिकाने लगा ही दूगां|
क्यूंकि ढीट हम पैदाईशी है, बाकी एक बात तय है कि अबकी किसान आंदोलन हुआ तो झोले मे दो जोड़ी कपड़ा और चार पारले-जी का बड़ा पैकेट डाल जाऊंगा जरूर|
जय किसान|🙏
30/08/2021
19/09/2020
03/08/2020
28/06/2020