26/05/2026
Sahjanand College
Swami Sahjanand PG College, Ghazipur was established in July,1972 in the memory of the great farmer-leader and social reformer SWAMI SAHJANAND SARASWATI
26/05/2026
25/05/2026
A post by Dr Saumya Verma, HoD, Defence Studies, Swami Sahjanand PG College, Ghazipur.
25/05/2026
A poster by Dr Saumya Verma, HoD, Defence Studies, Swami Sahjanand PG College, Ghazipur.
18/05/2026
शोक संवाद-
स्वामी सहजानन्द पीजी कालेज, गाजीपुर के पूर्व सचिव श्री रामजी राय का गत शनिवार, 16 मई- 2026 को पूर्वाह्न निधन हो गया. अस्सी वर्षीय स्व. राय पिछले कुछ सालों से अस्वस्थ चल रहे थे तथा नगर के प्रकाश नगर शिवपूजन कालोनी स्थित अपने आवास पर चिकित्सकीय देखरेख में थे.
स्वामी सहजानन्द पीजी कालेज, गाजीपुर में आज सोमवार, दिनांक- 18 मई को महाविद्यालय के पूर्व सचिव स्व. राय के निधन स्वरुप एक शोक सभा हुई जिसमें सभी शिक्षक-कर्मचारियों ने शोक व्यक्त करते हुए गतात्मा की शांति हेतु प्रार्थना की.
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. वी के राय ने अपने शोक वक्तव्य में कहा कि स्व. रामजी राय खरडीहा महाविद्यालय व सहजानन्द कालेज सहित जनपद के अनेक संस्थाओं में प्रबंधन का हिस्सा थे. उनकी कार्य क्षमता से इन संस्थाओं ने आशातीत सफलता प्राप्त की.
स्व. राय के निधन पर शोक सभा में संवेदना व्यक्त करने वालों में डॉ. रामधारी राम, डॉ. विलोक सिंह, डॉ. कृष्णा नंद चतुर्वेदी, डॉ. सौम्या वर्मा, डॉ. निवेदिता सिंह, डॉ. कृष्ण कांत दुबे, शशांक राय, प्रवीण राय, सत्तेन्द्र राय, नर नारायण राय, सतीश राय, समीर राय, डॉ. सतीश राय, अरविंद शर्मा, अमित राय, प्रो. अजय राय, अभय यादव, वी के ओझा, पंकज राय, अरविंद राय, आदि थे.
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26/03/2026
स्वामी सहजानन्द स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर एवं उ० प्र० राजकीय अभिलेखागार, संस्कृति विभाग, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान मे दिनांक 25 मार्च, 2026 को “राष्ट्रीय आंदोलन में गाजीपुर के सबाल्टर्न वर्गों की भूमिका” विषय पर एक भव्य अभिलेख प्रदर्शनी एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय के कुबेर नाथ सभागार में प्रातः 10:30 बजे किया गया। कार्यक्रम में इतिहास के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं विद्वानों की उल्लेखनीय सहभागिता रही, जिससे यह आयोजन अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुआ.
इस अवसर पर आयोजित अभिलेख प्रदर्शनी कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही, जिसमें 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न चरणों से जुड़े दुर्लभ, प्रामाणिक एवं ऐतिहासिक दस्तावेजों का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु से संबंधित टेलिग्राम (18 जून 1858), ताई बाई की गिरफ्तारी एवं कानपुर प्रेषण से जुड़े अभिलेख, नाना साहब की गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये के इनाम का इश्तेहार, बेगम हजरत महल की संपत्ति जब्ती के दस्तावेज, 1857 के विद्रोहियों की सूची, मातादीन को फांसी देने का वारंट, शेख चाँद को कारावास संबंधी आदेश तथा खान बहादुर खान का मृत्यु प्रमाण-पत्र जैसे महत्वपूर्ण अभिलेख शामिल रहे।इसके अतिरिक्त चौरी-चौरा कांड (1922) से संबंधित रिपोर्ट एवं न्यायिक निर्णय, महात्मा गांधी के गोरखपुर एवं काशी विद्यापीठ में दिए गए ऐतिहासिक भाषण, काकोरी कांड (1925) के दस्तावेज, भगत सिंह को फांसी (1931) से संबंधित आदेश, चन्द्रशेखर आजाद एवं रामप्रसाद बिस्मिल के पत्र, तथा सुभाष चन्द्र बोस के पत्र एवं ‘चलो दिल्ली’ से संबंधित सामग्री ने प्रदर्शनी को अत्यंत समृद्ध बनाया। इन अभिलेखों ने स्वतंत्रता संग्राम के उन पहलुओं को उजागर किया, जो सामान्यतः इतिहास की मुख्यधारा में कम चर्चा में आते हैं।संगोष्ठी में विभिन्न वक्ताओं ने “सबलटर्न” इतिहास की अवधारणा पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। स्वागत वक्तव्य में प्रो० डॉ० वी० के० राय ने कहा कि इतिहास केवल घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि समाज के विकास और परिवर्तन का सजीव दस्तावेज है, और अभिलेख इसके सबसे प्रामाणिक साक्ष्य हैं।
विशिष्ट वक्ता प्रो० डॉ० केशव मिश्रा ने अपने उद्बोधन में कहा कि “इतिहास, इतिहास नहीं बल्कि इतिहास-लेखन है”, अर्थात् इसे लिखने वाले की दृष्टि से उसका स्वरूप निर्धारित होता है। उन्होंने सबलटर्न इतिहास को समाज के वंचित एवं उपेक्षित वर्गों की आवाज बताते हुए बिरसा मुंडा जैसे नायकों का उदाहरण प्रस्तुत किया।डॉ० शशीकेश गौतम ने कहा कि सबलटर्न लेखन उन लोगों के इतिहास को सामने लाता है जो अब तक “इतिहास-विहीन” माने जाते रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से गाजीपुर के स्थानीय इतिहास की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि यह अभी भी अभिलेखागारों में अध्ययन की प्रतीक्षा कर रहा है।
श्री उबैदुर्रहमान ने अपने वक्तव्य में 1857 के आसपास गाजीपुर की परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उस समय यहां फांसी की घटनाएं सीमित थीं, किन्तु चेरू जनजाति एवं अहीर समुदाय जैसे उपेक्षित वर्गों के लोगों को अंग्रेजों द्वारा कठोर दंड दिया गया, जिनका उल्लेख इतिहास में अपेक्षाकृत कम मिलता है।डॉ० अजीत राय ने गाजीपुर के युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी निभाई और स्थानीय स्तर पर संघर्ष की चेतना को जीवित रखा.
कार्यक्रम की संयोजिका डॉ० निवेदिता सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि सबलटर्न इतिहास उन वर्गों की आवाज है जो मुख्यधारा के इतिहास लेखन में उपेक्षित रहे हैं, और ऐसे आयोजनों के माध्यम से उन्हें उचित पहचान मिलती है.
25/03/2026
https://theghazipurkhabar.com/बिरसा-मुंडा-पहले-सब-आल्टर/
बिरसा मुंडा पहले सब आल्टर्न थे: प्रो. केशव मिश्रा - The Ghazipur Khabar राष्ट्रीय आंदोलन में जनपद के सब आल्टर्न वर्ग की योगदान उल्लेखनीय है- प्रो. वी के राय, प्राचार्य गाजीपुर। उ. प्र. रा.....
*Congratulations, 77thR-Day*
The 77th Republic Day Celebration being held in Swami Sahjanand PG College, Ghazipur today morning.
19/12/2025
# खेलकूद शैक्षिक पाठ्यक्रमों के अनिवार्य अंग हैं- प्रो. वी के राय, प्राचार्य
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वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर की अंतर महाविद्यालयीय महिला क्रिकेट (महिला) प्रतियोगिता सत्र 2025-26 के द्वि- दिवसीय आयोजन का समापन आज शुक्रवार, दिनांक- 19 दिसम्बर 2025 को संपन्न हुआ. प्रतियोगिता में सूर्यबली महाविद्यालय, जौनपुर की टीम प्रथम स्थान पर रही जबकि पांचू राम महाविद्यालय की टीम उपजेता रही. मेजबान स्वामी सहजानन्द पीजी कालेज, गाजीपुर की टीम को प्रतियोगिता में तीसरा स्थान मिला. प्रतियोगिता में कुल पांच टीमों ने प्रतिभाग किया.
प्रतियोगिता का पहला सेमी फाइनल मैच स्वामी सहजानन्द पीजी कालेज, गाजीपुर तथा सूर्यबली महाविद्यालय, जौनपुर के बीच हुआ. सूर्यबली महाविद्यालय की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 125 रन का स्कोर बनाया जिसके जवाब में सहजानन्द की टीम 118 रन बना कर आल-आउट हो गई.
दूसरा सेमी फाइनल मैच मडियाहूं पीजी कॉलेज, जौनपुर तथा पांचू राम महाविद्यालय, जौनपुर के बीच खेला गया जिसमें मडियाहूं पी जी कालेज की टीम मात्र 73 रन बना कर आल-आउट हो गई. जवाब में पांचू राम महाविद्यालय, जौनपुर ने 2 विकेट खो कर लक्ष्य की पूर्ति कर 8 विकेट से मैच जीत लिया.
ज्ञातव्य है कि इस प्रतियोगित के माध्यम से ही वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की 14 सदस्यीय महिला क्रिकेट टीम का चयन होना है. मुख्य चयनकर्ता और पर्यवेक्षक के रूप में सुश्री अलका सिंह पूरे प्रतियोगिता के दौरान मौजूद रहीं.
प्रतियोगिता के समापन समारोह में प्रतिभागी टीमों की खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डा.) वी के राय ने कहा कि खेलकूद शैक्षिक पाठयक्रमों के अनिवार्य अंग के रूप मे लिए जाने चाहिए. खेल प्रतियोगिताओं से दर असल जीवन को सकारत्मक रूप से समग्रता में जीने की प्रेरणा मिलती है. प्रो. राय ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए खेल-कूद विभाग के अध्यक्ष डॉ. रामधारी राम तथा खेल प्रशिक्षक श्री संजय राय सहित पूरे आयोजन समिति को धन्यवाद दिया.
इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक कर्मचारी डा. विलोक सिंह , डॉ रामधारी राम, डॉ. कृष्णानन्द चतुर्वेदी, डॉ. राकेश पाण्डेय, डॉ. अवधेश पाण्डेय, डॉ. सतीश राय, डॉ. देव प्रकाश राय, डॉ. नित्यानंद राय, शशांक राय, प्रवीण राय, समीर राय, सत्येंद्र राय, डॉ. कंचन सिंह, डॉ. विभा राय, शरद राय, आदि के साथ सैकड़ों की संख्या मे छात्र- छात्राएं उपस्थित थे.
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15/11/2025
https://theghazipurkhabar.com/खेलकूद-युवा-वर्ग-के-मन-मष्/
खेलकूद युवा वर्ग के मन मष्तिष्क में परिष्कार लाता है - प्रो. वी के राय, प्राचार्य - The Ghazipur Khabar गाजीपुर। शुक्रवार को पूर्वांचल विश्वविद्यालय की अंतर–महाविद्यालयीय वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता सत्र 2025–26 का आयोजन...
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