Ramayan facts by Ashish Prakash

Ramayan facts by Ashish Prakash रामायण की अनसुनी कथाएं व उनके विश्लेषण

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महाभारत के योद्धा सात्यिकी का अंत: जैसा के हम सब को विदित है कि सात्यिकि ने पांडवों की तरफ से युद्ध किया था और कृतवर्मा ...
08/08/2022

महाभारत के योद्धा सात्यिकी का अंत:

जैसा के हम सब को विदित है कि सात्यिकि ने पांडवों की तरफ से युद्ध किया था और कृतवर्मा ने कौरवों की ओर से, दोनो ही जीवित बचे थे।
पांडवों ने बड़प्पन दिखाते हुए सभी बचे हुए योद्धाओं को सम्मान सहित राज्य दे दिए थे और सभी से मित्रता रखी थी।
36वे वर्ष में पांडवों ने वानप्रस्थ जाने का फैसला किया, और उनके जाने के बाद एक रात सभी राजा एक सभा में मदिरा वी भोज कर रहे थे। उसी वक्त सात्यिकि ने कृतवर्मा का मज़ाक उड़ाना शुरू कर दिया कि उसने कैसे कौरागो का साथ दिया और कैसे देवकी के पिता को मारने के लिए गया था।
कृतवर्मा ने सात्यिकी को उसके कृत्य के बारे में याद दिलाया कि कैसे उसने निहत्थे भूरिश्रवास का वध किया था।
इस बहस के बाद दोनो ही पक्षधर योद्धा एक दूसरे को ताड़ने लग गए और गुस्से में सात्यीकी ने घास अपने हाथों में उठा ली। सात्यिकी को एक ऋषि का श्राप था के क्रोध में वो जो भी उठाएगा वो शस्त्र बन जायेगा। फलस्वरूप उन शस्त्रों से वो कृतवर्मा के सहयोगी को मारने लग गए। कृतवर्मा सात्यिकी को मारने बढ़े। कृष्ण पुत्र प्रद्युम्न ने सात्यिकी को बचाने की कोशिश की पर तब तक उनकी मृत्यु हो गई।
#महाभारत_ज्ञान_आशीष_प्रकाश

महाभारत के अनसुने वीर योद्धासत्यिकि:सत्यिकि यदुवंशी योद्धा था, और जर युद्ध कला में निपुण। यादव सेना का सेनापति भी। और श्...
08/08/2022

महाभारत के अनसुने वीर योद्धा

सत्यिकि:
सत्यिकि यदुवंशी योद्धा था, और जर युद्ध कला में निपुण। यादव सेना का सेनापति भी। और श्री कृष्ण का अनन्य भक्त व अनुयाई।

जब अर्जुन द्वारका में एक वर्ष के लिए रहने गए, उस दौरान सात्यिकी ने अर्जुन को धनुर्विद्या में अपना गुरु बनाया और उनसे धनुर्विद्या का परीक्षण लिया। इसी प्रकार वाह अर्जुन के भी प्रिय बन गए।

यादव सेना अहंकार और अधर्म के रस्ते पर चल चुकी थी, इसीलिए कृष्ण ने उन्हें सबक देने के लिए उन्हें कौरव पक्ष से युद्ध के लिए भेज दिया, सात्यिकी ने कृष्ण से प्रार्थना की के वह धर्म का पक्ष नहीं छोड़ सकते।
कृष्ण ने उन्हें वचन दिया के अगर वह उनके साथ रहे तो वह उन्हें कुछ न होने देंगे। कृष्ण को सात्यिकि इतने प्रिय थे के जब वह हस्तिनापुर संधि संदेश के कर गए तो अपने साथ सिर्फ सात्यीकी को ही लेे गए। और उन्होंने कहा अगर दुर्योधन मुझे बंधी बना ले तो यादव सेना मेरे वचन से मुक्त हो जाएगी और तुम यादव सेना के साथ आक्रमण कर सकते हो।

महाभारत युद्ध में सात्यिकी और कौरव पक्ष के महारथी भुरिशिर्वा का युद्ध होता है। दोनों ही बहुत वीर योद्धा थे।
युद्ध में सात्यकि बुरी तरह से घायल हो जाते हैं, और भुरिशिरवा उनको मारने वाला होता है तभी अर्जुन जो दूर से ये देख रहे थे, वो भूरिशिरवा का हाथ काट देते हैं। भूरीशिरवा को इस अधर्मी कार्य पर बहुत क्रोध आता है और वो वहीं ज़मीन पर इसके विरुद्ध बैठ जाते हैं। इतनी देर में सात्यकि भुरीशिरवा का सर धड़ से अलग कर देते हैं। और इसके तुरंत बाद ही वह ग्लानीबोध में आ गए।
परन्तु अधर्म की परिभाषा तो अभिमन्यु वध से ही लिखी जा चुकी थी।
जो कुछ शेष योद्धा युद्ध के बाद भी जीवित बचे थे उनमें से एक सात्यकि भी थे ।

शायद धर्म अधर्म के इसी युद्ध के बाद यह कहा गया के "युद्ध में सब कुछ उचित होता है"

सात्यिकी का अंत: जैसा के हम सब को विदित है कि सात्यिकि ने पांडवों की तरफ से युद्ध किया था और कृतवर्मा ने कौरवों की ओर से, दोनो ही जीवित बचे थे।
पांडवों ने बड़प्पन दिखाते हुए सभी बचे हुए योद्धाओं को सम्मान सहित राज्य दे दिए थे और सभी से मित्रता रखी थी।
36वे वर्ष में पांडवों ने वानप्रस्थ जाने का फैसला किया, और उनके जाने के बाद एक रात सभी राजा एक सभा में मदिरा वी भोज कर रहे थे। उसी वक्त सात्यिकि ने कृतवर्मा का मज़ाक उड़ाना शुरू कर दिया कि उसने कैसे कौरागो का साथ दिया और कैसे देवकी के पिता को मारने के लिए गया था।
कृतवर्मा ने सात्यिकी को उसके कृत्य के बारे में याद दिलाया कि कैसे उसने निहत्थे भूरिश्रवास का वध किया था।
इस बहस के बाद दोनो ही पक्षधर योद्धा एक दूसरे को ताड़ने लग गए और गुस्से में सात्यीकी ने घास अपने हाथों में उठा ली। सात्यिकी को एक ऋषि का श्राप था के क्रोध में वो जो भी उठाएगा वो शस्त्र बन जायेगा। फलस्वरूप उन शस्त्रों से वो कृतवर्मा के सहयोगी को मारने लग गए। कृतवर्मा सात्यिकी को मारने बढ़े। कृष्ण पुत्र प्रद्युम्न ने सात्यिकी को बचाने की कोशिश की पर तब तक उनकी मृत्यु हो गई।
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Aashish Prakash

01/07/2022

चुन सको तो राम से वनवास चुनना राम का
है कठिन महलों में पुरुषोत्तम सा बनना राम का

जिसने बाली बल के आगे था चुना सुग्रीव को
तुलसी के मानस में ढूंढो ऐसा पन्ना राम का

जिसका मन दुश्मन के भाई कोई भी अपना मान ले
ऐसा आदर खुद में हमको भी है बुनना राम का

जो थे भिलनी बेर खाते, मित्र हैं केवट के जो
जाति से उठकर कभी वो चित्र सुनना राम का

आशीष प्रकाश©

15/03/2022

शास्त्रों की रक्षा के लिए शस्त्रों की पूजा भी आवश्यक है, इसलिए सर्दियों की नवरात्रि के बाद दशहरा मनाया जाता है

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10/10/2021

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