29/01/2023
*चिराग योजना V/S सरकारी स्कूल*
अभिभावक - नमस्ते मास्टर जी। मेरे बच्चों की SLC दे दो।
अध्यापक - नमस्ते भाई। क्या हुआ भाई। यहां पर कोई परेशानी है।
अभिभावक - नहीं मास्टर जी। सरकार की चिराग योजना
के तहत बच्चे का दाखिला प्राइवेट स्कूल में करवा रहा हूँ। प्राइवेट स्कूल वाले घर आये थे कह रहे थे कि आपके बच्चों को हम पढ़ाएंगे। इसके लिए आपको कोई फीस नहीं देनी। सरकार देगी 1730 रुपये पहली से पाँचवी तक के बच्चों के लिए।
अध्यापक - यहाँ भी तो आपको कोई फीस नहीं देनी होती है भाई। इसके अलावा किताबें, वर्दी, कॉपी, वजीफा और दोपहर का भोजन भी मुफ्त मिलता है भाई।
अभिभावक - हाँ जी ये तो है पर दाखिला तो अबकी बार प्राइवेट में ही करवाना है। बच्चों की मां भी नहीं मान रही, कह रही है कि अबकी बार हमारे बच्चें भी प्राइवेट स्कूल में पढ़ेंगे।
अध्यापक - देख लो भाई,मान लिया फीस तो सरकार देगी प्राइवेट स्कूलों को पर उसके अलावा भी बहुत खर्च हो जाता है कॉपी, किताबें, वर्दी, वैन का खर्च आदि।
अभिभावक - हाँ जी, वो हम देख लेंगे। आप मेरे तीनों बच्चों की SLC दे दो।
अध्यापक - एक बार बच्चों से पूछ लो भाई उन्हें कहा पढ़ना है।
अभिभावक - उनसे क्या पूछना है। आप एसएलसी दे दो बस।
अध्यापक - उदास मन से तीनों बच्चों की SLC बनाकर देता है।
अभिभावक - SLC पाकर खुशी से घर जाता है।
अगले दिन प्राइवेट स्कूल में दाखिला करवाने के लिए जाता है।
अभिभावक - स्कूल के बड़े से गेट में से प्रवेश करते हुए तीनों बच्चों को साथ लेकर प्रिंसिपल के ऑफिस के पास पहुंचता है।
चपरासी - हाँ, क्या काम है।
अभिभावक - बच्चों का दाखिला करवाना है।
चपरासी - यहां बैठ जाओ, अभी अंदर कोई आया हुआ
है।
अभिभावक - ऑफिस के बाहर बैठ जाता है।
30 मिनट बाद......
अभिभावक - भाई क्या अब अंदर जाए।
चपरासी - रुको। मैं पूछ कर आता हूं।
10 मिनट बाद चपरासी बाहर आकर कहता है - आप अंदर जाओ।
अभिभावक - नमस्ते मास्टर जी।
प्रिंसिपल - नमस्ते। हाँ बताओ जी।
अभिभावक - ये तीनों मेरे बच्चे है इनका दाखिला आपके स्कूल में करवाना है।
प्रिंसिपल - पहले कहाँ पढ़ते थे।
अभिभावक - जी गांव के सरकारी स्कूल में।
प्रिंसिपल - अच्छा चिराग योजना के तहत दाखिला करवाना है।
अभिभावक - हाँ जी, आपके स्कूल से मैडम आई थी हमारे घर पर दाखिले के लिए।
प्रिंसिपल - अच्छा जी, कौन सी कक्षा में पढ़ते थे ये वहां पर।
अभिभावक - जी ये इनकी SLC है।
प्रिंसिपल - SLC देखते हुए, विजय पाँचवी में, मनीषा तीसरी में और आरव दूसरी में। इनको कुछ आता भी है।
अभिभावक - हाँ जी, मेरे तीनों बच्चें पढ़ाई में बहुत होशियार है। तीनों अपनी कक्षा में फर्स्ट आये है। विजय ने तो गिनती-पहाड़े प्रतियोगिता में जिले में पहला साथ प्राप्त किया था। राज्य प्रतियोगिता के लिए इनके मास्टर जी इनको पंचकूला लेकर गए थे। उसका परिणाम अभी आया नहीं है।
प्रिंसिपल - ठीक है। फ़ीस तो सरकार दे देगी पर हमारे स्कूल में सभी बच्चे वर्दी में आते है टाई- बेल्ट, कोट आदि पहनकर।
अभिभावक - जी ठीक है मैं वर्दी दिलवा दूंगा।
प्रिंसिपल - ठीक है आपको अभी इनकी दाखिला फीस देनी होगी बाकी ट्यूशन फीस सरकार दे देगी।
प्रिंसिपल क्लर्क को कहते है इनको दाखिला फीस की रसीद बनाकर दे दो।
क्लर्क - यहां आ जाओ जी, क्लर्क रसीद बनता है-
दूसरी की दाखिला फीस - 9000/-
तीसरी की दाखिल फीस - 10000/-
पाँचवीं की दाखिला फीस - 12000/-
आपके दाखिले के कुल रुपये हो गए - 31000/-
वर्दी बाजार में पूजा क्लॉथ हाउस से मिल जाएगी हर बच्चे की 2 जोड़ी ड्रेस खरीदना जी।
एक जोड़ी ड्रेस लगभग 600 रुपये में आ जायेगी।
3 बच्चों की 6 ड्रेस हो गई - 6X600 = 3600 रुपये
हमारी बुक्स अनिल बुक डिपो पर मिलेंगी।
ये पर्ची दिखा देना आपको 10% डिस्काउंट मिल जाएगा।
दूसरी की किताबें - 1800 रुपये की
तीसरी की किताबें - 2100 रुपये की
पांचवीं की किताबें - 2400 रुपये की
कुल रुपये - 6300 रुपये
टाई-बेल्ट के 400 रुपये हमारे पास जमा करवा दो। कल हम बच्चों को दे देंगे।
अभिभावक - जी चिराग योजना ????
क्लर्क - आपको दाखिले के पैसे तो देने ही होंगे, वर्दी और किताबे कल खरीद लेना।
अभिभावक एक बार अपने बच्चों की तरफ देख रहा है, एक बार 31000 रुपये की रसीद की ओर और एक बार हरियाणा की चिराग योजना की तरफ.....
चिराग योजना आई है
बच्चों की सरकारी स्कूल से हुई विदाई है
प्राइवेट स्कूलों को खिलानी मलाई है
सरकारी स्कूलों को बंद करने की साजिश रचाई है...
शिष्य बचाओ, शिक्षा बचाओ, शिक्षक बचाओ.....