Nirbhay Das Ninama

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12/06/2023
15/05/2023




कबीर, मानुष जन्म पाय कर, नहीं रटैं हरि नाम।
जैसे कुंआ जल बिना, बनवाया क्या काम।।
मानव जीवन में यदि भक्ति नहीं करता तो वह जीवन ऐसा है जैसे सुंदर कुंआ बना रखा है। यदि उसमें जल नहीं है या जल है तो खारा है, उसका भी नाम भले ही कुंआ है, परंतु गुण कुंए वाले नहीं हैं।

05/05/2023


महात्मा बुद्ध एक पुण्य कर्मी आत्मा थे। सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता के विरुद्ध घोर तपस्या की। जिसे गीता में मूर्खों की साधना बताया है।

05/05/2023



महात्मा बुद्ध एक पुण्य कर्मी आत्मा थे। सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता के विरुद्ध घोर तपस्या की। जिसे गीता में मूर्खों की साधना बताया है।

05/05/2023


महात्मा बुद्ध को परमात्मा प्राप्ति की प्रबल कसक थी। तभी वो सब कुछ त्यागकर घर से निकल गए। लेकिन पूर्ण गुरु नहीं मिला जिसके कारण शास्त्र विरुद्ध साधना करके जीवन व्यर्थ कर लिया। आज धरती पर पूर्ण गुरु "सतगुरु रामपाल जी महाराज" हैं। उनसे नाम दान लेकर अपना जीवन सफल बनायें।

26/04/2023


राधास्वामी पंथ की पुस्तक संतमत प्रकाश भाग 4 पृष्ठ 261-262 पर नानक जी की वाणी तथा परमेश्वर कबीर साहेब जी की वाणी का प्रमाण देकर कहा है कि:-
सोई गुरु पूरा कहावे, दोय अख्खर का भेद बतावे।
एक छुड़ावे एक लखावे, तो प्राणी निज घर को जावे।
कबीर जी की वाणी:-
कह कबीर अख्खर दोय भाख, होयेगा खसम तो लेगा राख।।
स्पष्ट है कि इस काल के पंथ के पास दो अख्खर का मंत्र नहीं है, ये अधूरे गुरु हैं।

26/04/2023


राधास्वामी के संस्थापक शिव दयाल जी महाराज का कोई गुरु नहीं था, हुक्का पीते थे, व्यर्थ नाम दीक्षा देना शुरू किया, "राधास्वामी" जैसे मनमाने नाम गढ़े। उनके शिष्य बाबा जयमल सिंह ने शिव दयाल जी से बिना किसी आदेश के ब्यास में एक डेरा शुरू किया और बिना अधिकार के दीक्षा देने लगे। राधास्वामी पंथ दुनिया भर में लाखों लोगों को गुमराह कर रहा है। यह एक तथ्य है।

26/01/2023




पाखण्डी धर्मगुरुओं ने अफवाह फैला रखी थी कि जो काशी में मरेगा वह स्वर्ग जायेगा तथा जो मगहर में मरेगा वह गधा बनेगा।
परमेश्वर कबीर जी कहते थे कि जैसी काशी है वैसा ही मगहर है, केवल हृदय में सच्चा राम होना चाहिए, यदि आप सतभक्ति करते हो तो आप कहीं भी प्राण त्यागो, आप मोक्ष के अधिकारी हो।
माघ महीना, शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी, विक्रम संवत 1575, सन् 1518 को कबीर परमेश्वर मगहर से सशरीर सतलोक गए।

26/01/2023



पाखण्डी धर्मगुरुओं ने अफवाह फैला रखी थी कि जो काशी में मरेगा वह स्वर्ग जायेगा तथा जो मगहर में मरेगा वह गधा बनेगा।
परमेश्वर कबीर जी कहते थे कि जैसी काशी है वैसा ही मगहर है, केवल हृदय में सच्चा राम होना चाहिए, यदि आप सतभक्ति करते हो तो आप कहीं भी प्राण त्यागो, आप मोक्ष के अधिकारी हो।
माघ महीना, शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी, विक्रम संवत 1575, सन् 1518 को कबीर परमेश्वर मगहर से सशरीर सतलोक गए।

28/11/2022




#हिन्दू_धर्म_महान

गीता अध्याय 17 श्लोक 1 में अर्जुन ने पूछा है कि हे कृष्ण! जो मनुष्य शास्त्रविधि को त्यागकर श्रद्धा से युक्त हुए देवादि का पूजन करते हैं। वे स्वभाव से कैसे होते हैं।
अर्जुन ने गीता अध्याय 7 श्लोक 12-15 में पहले सुना था कि तीनों गुणों यानि त्रिगुणमयी माया अर्थात्‌ रजगुण ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु जी तथा तमगुण शिव जी आदि देवताओं को पूजने वाले उन्हीं तक सीमित हैं। उनकी बुद्धि उनसे ऊपर मुझ गीता ज्ञान दाता की भक्ति तक नहीं जाती। जिनका ज्ञान हरा जा चुका है, राक्षस स्वभाव को धारण किए हुए मनुष्यों में नीच दूषित कर्म करने वाले मूर्ख मेरी भक्ति नहीं करते।
- जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी

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