11/08/2018
🍁 जय जय श्री राधे प्रेरणादायक प्रसंग 🍁
☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘
गाँव में पंचायत लगी थी । वहीं थोड़ी दुरी पर एक संत ने अपना बसेरा किया हुआ था । जब पंचायत किसी निर्णय पर नहीं पहुच सकी तो किसी ने कहा कि क्यों न हम महात्मा जी के पास अपनी समस्या को लेकर चलें
अतः सभी संत के पास पहुंचे ।
जब संत ने गांव के लोगों को देखा तो पुछा कि कैसे आना हुआ ? तो लोगों ने कहा 'महात्मा जी गाँव भर में एक ही कुआँ हैं और कुँए का पानी हम नहीं पी सकते, बदबू आ रही है । मन भी नहीं होता पानी पीने को । संत ने पुछा--हुआ क्या? पानी क्यों नहीं पी सक रहे हो ?
लोग बोले--तीन कुत्ते लड़ते लड़ते उसमें गिर गये थे । बाहर नहीं निकले, मर गये उसी में । अब जिसमें कुत्ते
मर गए हों, उसका पानी कौन पिये महात्मा जी?
संत ने कहा -- 'एक काम करो, उसमें गंगाजल डलवाओ, तो कुएं में गंगाजल भी आठ दस बाल्टी छोड़ दिया गया । फिर भी समस्या जस की तस!
लोग फिर से संत के पास पहुंचे, अब संत ने कहा" भगवान की कथा कराओ"। लोगों ने कहा ठीक है । कथा हुई, फिर भी समस्या जस की तस लोग फिर संत के पास पहुंचे! अब संत ने कहा उसमें सुगंधित द्रव्य डलवाओ ।
लोगों ने फिर कहा ••••• हाँ, अवश्य । सुगंधित द्रव्य डाला गया । नतीजा फिर वही...ढाक के तीन पात लोग फिर संत के पास अब संत खुद चलकर आये ।
लोगों ने कहा-- महाराज! वही हालत है, हमने सब करके देख लिया । गंगाजल भी डलवाया, कथा भी करवायी, प्रसाद भी बाँटा और उसमें सुगन्धित पुष्प और बहुत चीजें डालीं; लेकिन महाराज! हालत वहीं की वहीं । अब संत आश्चर्यचकित हुए कि अभी भी इनका मन कैसे नहीं बदला । तो संत ने पुछा-- कि तुमने और सब तो किया, वे तीन कुत्ते मरे पड़े थे, उन्हें निकाला कि नहीं?
लोग बोले --
उनके लिए न आपने कहा था न हमने निकाला, बाकी सब किया । वे तो वहीं के वहीं पड़े हैं । संत बोले -- जब तक उन्हें नहीं निकालोगे, इन उपायों का कोई प्रभाव नहीं होगा । सही बात यह है -----
कि हमारे आपके जीवन की यह कहानी है । इस शरीर नामक गाँव के अंतःकरण के कुएँ में ये काम, क्रोध और लोभ के तीन कुत्ते लड़ते झगड़ते गिर गये हैं ।
सारी बदबू इन्हीं की है । हम उपाय पूछते हैं तो लोग बताते हैं-- तीर्थयात्रा कर लो, थोड़ा यह कर लो, थोड़ा पूजा करो, थोड़ा पाठ। सब करते हैं,
पर बदबू उन्हीं दुर्गुणों की आती रहती है । तो पहले इन्हें निकाल कर बाहर करें तभी होगा जीवन उपयोगी ।------