28/09/2026
"दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फत, मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आएगी..."
आज़ादी के दीवाने, महान क्रांतिकारी और देश के युवाओं की धड़कन—शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन! 🇮🇳✨
भगत सिंह केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का वह ज्वलंत अध्याय हैं, जिसने अपनी कम उम्र में ही देश की आज़ादी के लिए जो अलख जगाई, वह इतिहास के पन्नों पर अमर हो गई। हँसते-हँसते फाँसी के फंदे को चूम लेना किसी आम इंसान के बस की बात नहीं थी, यह सिर्फ उस शख्स का जिगर था जो अपनी मातृभूमि को सर्वस्व मानता था।
उनकी क़ुर्बानी ने सुस्त पड़े स्वतंत्रता संग्राम को एक नया और आक्रामक मोड़ दिया। उनके विचार, उनकी दूरदर्शिता और उनका क्रांतिकारी नज़रिया आज भी देश के युवाओं के दिलों में नया जोश और देशभक्ति की प्रेरणा भरता है। उनका यह नारा "इंकलाब ज़िंदाबाद!" आज भी अन्याय के खिलाफ लड़ने की सबसे बड़ी ऊर्जा है।
माँ भारती के इस वीर सपूत का बलिदान हमें हमेशा याद दिलाता है कि आज हम जिस आज़ादी की हवा में साँस ले रहे हैं, उसके पीछे कितने महान बलिदान छिपे हैं।
उनकी लाठी और फाँसी का फंदा चूमने की वह मुस्कान आज भी भारत के हर युवा के दिल में देशभक्ति की आग जला देती है। उनका यह अमर नारा—"इंकलाब ज़िंदाबाद!"—सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि अन्याय के ख़िलाफ़ उठने वाली हर आवाज़ की ताक़त है।
🌹 अमर शहीद भगत सिंह को शत-शत नमन! 🌹