28/01/2026
"किसी पेड़ के कटने का किस्सा न होता, यदि कुल्हाड़ी में लकड़ी का हत्था न होता" !
प्रदेश, देश, राष्ट्र , लोकतंत्र, गणतंत्र.. यह कुछ शब्द है जिनमें प्रत्येक नगरिक की भागीदारी है... तो प्रश्न यह है कि जब सबकी भागीदारी है तो समानता का सिद्धांत हो... संविधान ने अनुच्छेद १४ में दो शब्दावलियों का प्रयोग किया है.. पहला "विधि के समक्ष समानता" दूसरा "विधियों के समान संरक्षण" का ... यह दोनों प्रकार की समानता प्रदान करना "राज्य" का कर्तव्य है और ... प्रत्येक नगरिक को यह मौलिक अधिकार... राज्य के द्वारा बनाए गए किसी नियम (रुल), विनियम (रेगुलेशन) , उपनियम (बायलॉज), आदेश (ऑर्डर), अधिसूचना (नोटिफिकेशन), प्रथा (यूसेज) , रूढ़ि (कस्टम) ... जो विधि का बल रखती हो... प्राप्त होगा। ...
उपर्युक्त भारत के संविधान के अनुच्छेद 12, 13 14 के तहत संवैधानिक प्रावधान है ... अब प्रश्न है के जब उपर्युक्त मौलिक अधिकार "राज्य" के विरुद्ध है तो "राज्य" कौन है ? .. तो संविधान अनुच्छेद १२ मे इसका उत्तर देते हुए कहता है की १. केंद्र सरकार और संसद २. राज्य सरकारें और राज्य विधान मंडल, ३ स्थानीय प्राधिकारी ४ . अन्य प्राधिकारी .. यह चारों संस्थाएं "राज्य" की परिभाषा में आती है इन्हीं के विरुद्ध सभी मौलिक अधिकार प्राप्त है... तो अगला प्रश्न है UGC क्या चीज है ? ... तो समझिए यूजीसी चौथी कटेगरी का राज्य ही है और उसके किसी नियम/ विनियम से यदि किसी के मौलिक अधिकारों का हनन होता है तो .. संविधान उसे न्यायालय के कटघरे में खींचने की अनुच्छेद ३२ मे और अनुच्छेद २२६ में इजाजत देता है ।.. अभी तक जो लिखा वो तो निष्कर्ष है.. अकसर लोग समस्याओं का जिक्र करते है निष्कर्षों की नहीं... अब मेरे कुछ प्रश्न है आप सभी जिनको भी संविधान या कानून की समझ हो वो उत्तर दे सकते है ...
१. देश की आबादी के १४ प्रतिशत से ८६ % प्रतिशत को कौन कौन से संवैधानिक खतरे है ?
२. देश की आजादी के बाद जमींदारी उन्मूलन कर के भूमि-हीन सवर्णों के लिए कितनी योजनाएं बनी जिसमें उनकी शिक्षा, रोजगार, राजनैतिक भागीदारी, प्राप्त हो सके ?
३. देश के विभाजन पर ५६५ रियासतों का एकीकरण कर के उन रियासतों के भागीदारों को क्या दिया गया?
४.अनु. जाति/अनु. जनजाति के कानून के तहत फर्जी मुकदमों में फंसा कर बर्बाद की गई जिंदगियों का मुआवजा क्या तय हो ?
५. कोई गलत करे उसे बिल्कुल सजा हो लेकिन गलत शिकायत पर भी कोई कार्यवाही न किया जाय यह कहां का कानून है साब.. वो भी उन मासूम बच्चों का जो अपने करियर के पहली पायदान पर कदम रखने जा रहे उनके ख़िलाफ़ साजिशन मुकदमा करा कर उनका करियर खराब कर दिया जाय ये कहां का कानून है.. वो तब जब सब कुछ राजनीति प्रेरित हो... अब समय आ चुका है कि गलत नीतियों और नीति निर्माताओं को जड़ों से उखाड़ फेंका जाय.. नहीं तो आने वाली पीढ़ियां हमे माफ नहीं करेगी।