आर्य प्रतिभा प्रतिष्ठान

आर्य प्रतिभा प्रतिष्ठान

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A Charitable Institute for Civil Services Exam. preparation. A Charitable Organization for Civil Services Examination Preparation.

Vision and Mission for this organization is to identify and guide students who can contribute towards nation building through civil services and help them inculcate Nationalistic values and ethos.
• To imbibe in them the values of honesty, integrity, compassion, social, commitment, excellence, foresightedness, determination, devotion to duty, loyalty and dedication to the national welfare.
• To h

12/05/2026

आर्य प्रगति छात्रवृत्ति आर्थिक रूप से कमजोर एवं मेधावी विद्यार्थियों को शैक्षिक सहयोग प्रदान करने हेतु आरंभ की गई है। इसका उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना है जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण शिक्षा जारी रखने में बाधाओं का सामना कर रहे हैं।
इस वर्ष आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। अतः आपसे अनुरोध है कि अपने आस पास के पात्र विद्यार्थियों को आवेदन हेतु प्रेरित करें तथा यह सूचना अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचाएँ।
कृपया इसे अन्य माध्यमों से प्रसारित करने की कृपा करें, ताकि जरूरतमंद विद्यार्थी लाभ उठा सकें।

छात्रवृत्ति का लाभ उठाने के लिए अभियार्थी को द्विस्तरीय परीक्षा से गुजरना होता है, जिसकी जानकारी निम्नवत है :

प्रथम सोपान : बहुविकल्पीय ऑनलाइन परीक्षा: इसमें कुल 100 प्रश्न ( भौतिकी , रसायन, गणित, जीव विज्ञान, सामान्य ज्ञान, समसामयिकी एवं रीजनिंग से सम्बंधित ) होते हैं, जिनके अधिकतम अंक 200 हैं । यह परीक्षा ऑनलाइन होगी, जिसको अभियार्थी घर बैठ के कंप्यूटर-लैपटॉप आदि के माध्यम से दे सकता है ।

द्वितीय सोपान : साक्षात्कार :ऑनलाइन परीक्षा में चयनित अभियार्थी का ऑनलाइन साक्षात्कार होता है, जो वह अपने निज स्थान से ज़ूम मीटिंग के द्वारा दे सकता है।

आवेदन करने तथा अधिक जानकारी हेतु वेबसाइट पर जा सकते है : https://www.aryapragati.com
आपके सहयोग से अनेक विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा जारी रखने में सहायता मिलेगी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान संभव होगा।

संपर्क: 9311721172
ई-मेल: [email protected]
पता: आर्य समाज, आनंद विहार , एल ब्लॉक, हरी नगर, दिल्ली।

Photos from आर्य प्रतिभा प्रतिष्ठान's post 28/05/2025

For UPSC Civil Services Exam

10/08/2023

आवदेन की अंतिम तिथि बढ़ाई गई है।

An Initiative of Arya Samaj for UPSC Civil Services Examination #UPSC #bpsc #uppsc #hpsc #ips #ias 22/07/2023

सिविल सेवा परीक्षा की निःशुल्क तैयारी कर सकते हैं।

An Initiative of Arya Samaj for UPSC Civil Services Examination #UPSC #bpsc #uppsc #hpsc #ips #ias आर्य समाज की एक पहल उन छात्रों की पहचान करने और उनका मार्गदर्शन करने के लिए है जो सिविल सेवाओं के माध्यम से राष्ट्र ...

11/07/2023

Register Free Today

20/06/2023

Register Today

09/04/2023
15/01/2023

राष्ट्रभाषा हिन्दी का समर्थन
भारत के राष्ट्रीय जागरण में उनका एक योगदान देश की एक सम्पर्क भाषा के रूप में अर्थात् राष्ट्रभाषा के लिए हिन्दी का समर्थन किया। उन्होंने गाँधी जी से बहुत पहले ही यह समझ लिया था कि हिन्दी ही राष्ट्रीय एकता की स्थापना करने वाली सक्षम भाषा है। यद्यपि दयानन्द जी की मातृभाषा गुजरती थी, उनका अध्ययन और शिक्षण संस्कृत भाषा के माध्यम से हुआ था, फिर भी उन्होंने अपनी कृतियों, लेखों एवं व्याख्यानों में हिन्दी भाषा का ही प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि, जिस देश में एक भाषा एक धर्म तथा एक वेशभूषा को महत्व नहीं दिया जाएगा, उसकी एकता निरन्तर डॉवाडोल रहेगी। इसीलिए उन्होंने देश के एक छोर से लेकर दूसरे छोर तक हिन्दी भाषा के माध्यम से राष्ट्रीय एकता एवं नव जागरण का महान् आन्दोलन चलाया तथा भारतीयों की तन्ना भंग की।

दयानन्द सरस्वती के उपरोक्त वर्णित विचारों एवं कार्यों से स्पष्ट होता है कि वह राष्ट्र, राष्ट्रीयता एवं राष्ट्रवाद की परम्परा को पुनर्जीवित करने वाले ऐसे पुरोधा थे, जिनका चरम उत्कर्ष कालान्तर में तिलक, लाल, बाल एवं पाल में हुआ। वेलेन्टाइन शिलेल के अनुसार, “दयानन्द ने जो आन्दोलन आरम्भ किया, उससे आत्म-निर्भरता की भावना पैदा हुई तथा भारतीयों में आत्म-सम्मान की भावना प्रबल हुई।” दयानन्द की शिक्षाओं तथा उपदेशों की समग्र प्रवृत्ति भारतीय जनमास को विदेशी प्रभावों के विरुद्ध खड़ा करने की थी। दयानन्द सरस्वती द्वारा स्थापित ‘आर्य समाज’ ने थोड़े ही समय में राष्ट्रीय चेतना को जाग्रत कर पूरे देश में उसका प्रसार कर दिया। स्वामी दयानन्द का आन्दोलन केवल धर्म, समाज और राजनीति तक ही सम्बन्धित न था, अपितु सबसे बढ़कर यह महान् राष्ट्रीय एवं नैतिकतापूर्ण आन्दोलन था।

15/01/2023

देशी शासकों का सुधार
दयानन्द जी ने भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, 1857 देखा था। वह यह भी जानते थे कि यह संग्राम इस कारण भी विफल रहा कि देशी रियासतों ने इसमें कोई योगदान नहीं दिया। अतः उन्होंने देशी रियासतों/रजवाड़ों में राष्ट्रीयता जाग्रत करने का कार्यक्रम किया। उनके इस कार्य से ब्रिटिश सरकार परेशान हुई। राष्ट्रवाद को के शक्तिशाली बनाने के लिए दयानन्द जी ने राजा-रजवाड़ों के व्यक्तिगत और सार्वजनिक दोनों जीवन को सुधारने की कोशिश की। उनके प्रयास रंग लाए और थोड़े ही समय में उदयपुर, जोधपुर, बड़ौदा, कोल्हापुर, इन्दौर, आदि राज्यों ने उनके विचारों को स्वीकार कर लिया।

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