Ashraf Qadeer 7

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》اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعٰلَمِيْنَ
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07/02/2024

यह तस्वीर किसी पहाड़, सुरंग या गुफा की नहीं है,बल्कि यह इन्सानी शरीर में सूई के जख्म (Needle puncture) की है,सूई के चुभने से पैदा होने वाले सुराख को इलेक्ट्रॉनिक दूरबीन की मदद से सैंकड़ों गुना बड़ा(Highly magnified) कर के दिखाया गया है, टेक्नोलॉजी की मदद से ली गई इस तस्वीर में इन्सानी चमड़ी मिट्टी के गारे जैसी नजर आती है।
﴿٪۲۵﴾ وَ لَقَدۡ خَلَقۡنَا الۡاِنۡسَانَ مِنۡ صَلۡصَالٍ مِّنۡ حَمَاٍ مَّسۡنُوۡنٍ ﴿ۚ۲۶﴾
(और हमने इंसान को सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से पैदा किया है)
{अल कुरान,सूरह हिज्र:26}

30/05/2023

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13/05/2023

हम दुनिया से शिकायत करते हैं पर ख़ुद तमाशा देखते हैं.. अगर आपके क़ौम के भाई पर 15 बजरंग दल के आतंकवादी घेर कर मोबलिंचिग करते हैं उस समय आप विडियो बनाते है, अगर विडियो बनाने की जगह 15 के मुकाबले 5 भी खङे हो जाइएगा तो वो भाग खङे होंगे।
ये जो खङे खङे अपने ही क़ौम के भाई को मरते देख रहे हैं यदि ये चाहते तो एक साथ मिलकर शेर की धज्जियाँ उङा सकते हैं
लेकिन इनको पता ही नहीं नम्बर तो इनका भी आएगा, यही हाल आज हमारे मुस्लिम समाज का है
नम्बर सबका आएगा, इसलिए एक जुट होकर एक दूसरे का साथ दें
सबका साथ रहे सबका विश्वास रहे.. जनहित में जारी।

13/05/2023

📄 *सवाल (Suwal)*
बेहयाई और बदनज़री के अज़ाब बताएं,

Be'hayai aur bad'nazari ke azaab batayen,

📄 *जवाब (Jawab)*
देखें, जिस तरह से हर मज़हब का एक बुनियादी अख़लाक़ होता है ठीक उसी तरह मज़हबे इस्लाम का बुनियादी अख़लाक़ हया है,
यानी शर्म व हया और ग़ैरत दीने इस्लाम का बुनियादी अख़लाक़ है, तो जो भी नेक मुसलमान होगा उसके बुनियादी अख़लाक़ में हया व ग़ैरत होगी, वो मुसलमान अपनी नज़रों की हिफाज़त करता है, उसके अख़लाक़ में हया होती है, उसके अंदर ग़ैरत ज़िंदा होती है,

लेकिन अफ़सोस की आज जिस तरह से लोग इस्लाम की तालीम से दूर होते जा रहे हैं उनके अंदर से शर्म व हया और ग़ैरत खत्म होते जा रही है,
हमारे मुआशरे में बेपर्दगी, बदनज़री, बेहयाई, उरयानियत फैलते जा रही है, ना जाने ये बेपर्दगी की रस्में हमने किस मुआशरे से ली है,

हमारा रब ﷻ तो ये भी पसंद नही करता कि कोई रस्म जो दूसरे मज़हबों की है मुसलमान उसकी मुशाबिहत करे अगर्चे वो रस्में दीने इस्लाम के उसूलों से टकराती ना हों, लेकिन हमने उन मुशाबिहत को अपने अंदर जज़्ब कर लिया जो हमारे दीन में नस्से क़तई से नाजाएज़ व हराम हैं,

आज के वक़्त में औरतें बेपर्दा खड़ी हैं साथ ही बाप भाई और बेटा व शौहर भी मौजूद है लेकिन ना बाप व बेटे के अंदर हया है और ना ही भाई और शौहर के अंदर ग़ैरत बची हुई है,
और अफ़सोस ये बाप भाई और बेटा व शौहर भी कैसे पर्दे के लिए कह सकते हैं क्यूंकि ये खुद वो हैं जो गलियों और बाजारों में दूसरों की बहन बेटियों पर नज़रें टिका कर रखते हैं,

हदीसे पाक है कि प्यारे आक़ा ﷺ इरशाद फ़रमाते हैं_
"शिर्क के बाद जो सबसे बड़ा गुनाह है वो बदकारी और बेहयाई है,
और फ़रमाया कुछ औरतें ऐसी हैं जो लिबास पहन कर भी नंगी हैं, फ़रमाया ये वो औरतें हैं जिनको अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ﷻ जन्नत की हवा भी अता नही करेगा, जन्नत की खुश्बू तक नही दी जाएगी,

आज मुसलमान परेशान हाल है, वो बेरोज़गारी, बेसुकूनी, नाकामयाबी और बेबरकती के शिकार हैं, किसी का रिज़्क़ साथ नही दे रहा है तो किसी की शादी नहीं हो पा रही है, लेकिन अगर देखा जाए तो जिनमें से उमूमन वो लोग हैं जो इसी बेहयाई के शिकार हैं,
फिर लोग कहते हैं कि परेशानियां बड़ी हैं, हमारी शादी नहीं हो रही है, भाइयों और बहनों की शादी नही हो रही है, बच्चों का निकाह नही लग रहा है, बेबरकती बहुत है, रिज़्क़ में कुशादगी नही है, घरों में बेसुकूनी बहुत है, बड़ी आज़माइश है,
कोई अमलियात मांग रहा है तो कोई तावीज़ मांग रहा है, कि मुश्किलें खत्म हो, तो अगर परेशानियों में हो तो रब ﷻ की नाफरमानी वाले काम ना करो, अगर तकलीफ में हो तो रहमत वाले काम करो ना, तब तो रब ﷻ की रहमत नाज़िल होगी, बन्दा दुख में हो और काम अज़ाब वाले करे तो उसे आसानी कैसे हासिल होगी,

लेकिन रिवायतों के मुताबिक बताया जाए तो मुसलमान शुक्र मनाएं की उनपर आग नही बरस रही है, अज़ाबे इलाही ﷻ नाज़िल नही हो रहा है,

दूसरी क़ौमों में एक एक गलती के बदले आसमानों से अज़ाबे इलाही नाज़िल हो जाता था, किसी कौम पर आग की बारिश हुई तो किसी पर तूफान क़ाएम कर दी गयी, किसी क़ौम पर पत्थर बरसाए गये तो किसी पर खून की बारिश हुई, किसी क़ौम को उनके सहित ज़मीन पलट दी गयी तो किसी क़ौम को पत्थर का बना दिया गया,
लेकिन इस उम्मत पर सिर्फ और सिर्फ सरकारे मदीना ﷺ के सदके से अज़ाब नाज़िल नही हो रहा है,
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ﷻ फरमाता है अये महबूब ﷺ सिर्फ आपकी वजह से अज़ाब नही भेजा जा रहा है,

शायर कहता है_
अगर उनकी रहमत ना हो दरमियाँ में,
आग लग जायेगी दोनों जहाँ में,

और आज मुसलमान अपना अख़लाकी बुनियाद को छोड़ कर बेपर्दगी, उरयानियत, बेहयाई जैसे बुरे अफ़आल में मुब्तिला हो कर अपनी नज़रों को नापाक करके कहता है कि हम पर अल्लाह ﷻ की रहमत नाज़िल नही हो रही, हम परेशान हाल हैं, लेकिन मुसलमान शुक्र मनाएं की उनपर आग नही बरसाई जा रही है, उनपर पत्थर नही बरसाए जा रहे हैं, शुक्र करो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का कि ये सरकारे दो आलम ﷺ के क़दमों का सदक़ा है,
लेकिन ये भी याद रखा जाए कि रिवायतों में मौजूद है कि जब मुसलमान बदकारियों में मुब्तिला हो जाता है, अल्लाह ﷻ का खौफ़ करना छोड़ देता है, तो उनपर ज़ालिम बादशाह को मुसल्लत कर दिया जाता है,
अब गौर करें कि क्या आज ऐसा नही है, आज के हुक्मरान मुसलमानों पर जुल्म व तशद्दुद कर रहे हैं, तो कब हम इस बात को समझेंगे, कब अपने वक़ार को वापस हासिल करेंगे,

▪️याद रखें जिन लोगों की नजरें नापाक रहती हैं उनका हाफ़िज़ा कमज़ोर हो जाता है, उनकी इबादत में लज़्ज़त नही रह जाती, यानी इनको इबादत में वो सुकून और फ़वाएद हासिल नहीं होते, इबादत में मन नहीं लगता,
ऐसे लोग ज़हनी और कलबी तौर पर परेशान रहते हैं, इनके पास सबकुछ होते हुए भी इनका दिल उचाट रहता है, क्यूंकि इन्होंने वो नशा पाला है जिससे कभी पेट और ज़हन भरता ही नही, बन्दा जब संजीदा उम्र को पहुंच जाता है तब भी ये बन्दे का पीछा नहीं छोड़ती,

मुसनद इमाम अहमद बिन हम्बल में नज़र की हिफाज़त के हवाले से एक हदीस शरीफ़ मौजूद है कि नबी करीम ﷺ इरशाद फ़रमाते हैं_
"तेरी नज़र अगर किसी जगह पड गयी तो वापस कर ले और अल्लाह ﷻ से डर जा, अगर तूने अल्लाह ﷻ के डर से नज़र को वापस फेर लिए तो तेरा वो फेरना अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ﷻ इबादत में बदल देगा, और इबादत भी ऐसी जिसमे लज़्ज़त हासिल होगी,

बेहयाई वाले का निकाह जल्दी नहीं होता, बहुत मुश्किलें आती हैं, रिज़्क़ से बरकत खत्म हो जाती है, उम्र से बरकत खत्म हो जाती है, वक़्त में बरकत नही रहती, क़ल्ब और ज़हन में सुकून नही रहता,

बेहयाई और बेपर्दगी पर ये जो कुछ भी बताया गया ये समन्दर के एक क़तरे का हजारवां हिस्सा है, न जाने कितनी तफसील और अज़ाब हैं इस नापाक काम के,
इस लिए मुसलमानों अपने वक़ार पर जियो, अपनी आंखों में शर्म व हया पैदा करो, निगाहों की हिफाज़त करो ताकि इस्लामी और खुशहाल ज़िन्दगी हासिल हो,

13/05/2023

एक बार जरूर पढ़े

लड़कियों के पास सबसे कीमती चीज़ उनकी इज़्ज़त होती है,लड़कियां खुली तिजोरी की तरह होती हैं।।। कुछ लड़के ऐसे होते हैं जो पहले उनसे इज़्ज़त और प्यार से बात करते हैं,उनके साथ प्यार का झूठा नाटक करते हैं,और बाद में उनके साथ वो करना चाहते है जो एक लड़की शादी के पहले ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहती। मगर लड़के उनको अपनी आदत बनाकर मजबूर करते है, प्यार की कसमें देते है, रिश्ता तोड़ने की बात करते हैं, तो कुछ लड़कियां अपना रिश्ता बचाने के लिए वो सब करती है जो लड़का उनसे कहता है,जो कि अनावश्यक प्यार के नाम पर धोखा है। जिसको लड़कियां सच्ची वाला प्यार समझ लेती है। और अपनी इज़्ज़त उनके हाथों में सौप देती हैं।।मेरी सभी लड़कियों से एक ही गुजारिश है कि "सबकी बहन बनों, बीवी बनो, मगर किसी की जरूरत मत बनों। आपके घर में माँ बाप भाई बहन हैं जो आपसे बहुत प्यार करते हैं, कभी भी उनका सिर झुकने मत देना ,जिससे वो समाज मे सिर उठा कर चल भी ना पाएं।
दूसरी_बात
जो आपसे सच्ची मोहब्बत करता है वो पहले आपसे शादी करेगा,न कि हराम का रिश्ता बनाएगा....एक बात और.............जिस्म से की गयी मोहब्बत अक्सर बिस्तर पर आकर खत्म हो जाती है। सच्ची मोहब्बत में दो आत्माओ का मिलन होता है ना कि दो जिस्मो का।।।।
अगर किसी को मेरी बात बुरी लगी हो तो माफ कर देना दोस्तो....लेकिन यही आज की सच्चाई है।।

13/05/2023

शादी का असली रंग...😊
कर्ज़ करके महंगी शादी और चमकदार प्रोग्राम करने से आपको कोई सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा. तुम मिडल क्लास हो और ये समझ लो एक दिन के लिए 20 गाड़ी किराये कर लेने से कोई तुमको अम्बानी नहीं समझने वाला. हकीकत का भूत दूसरे दिन ही पकड़ लेगा जब चार थाली और 6 जग कम मिलेंगे. और उस दूल्हे को कई सालों तक खच्चर बनना पड़ेगा जो कल शेरवानी पहन के एक दिन का नकली शहंशाह बना हुआ था, निकाह को आसान बनाओ दिखावे से दूर रहो शादी सुन्नत तरीके से करो दहेज लेने और देने से परहेज करो...💯

05/05/2023

क़यामत के दिन अल्लाह के अर्श के अलावा कोई साया ना होगा,
3 लोग ऐसे है जो महरूम रहेंगे जिन्हे पाक भी नहीं किया जाएगा, और अल्लाह ना रहमत से देखेगा, और जहन्नम में फेक दिए जायेंगे (1) एहसान जताने वाला,(2) सलवार टकनो से नीची रखने वाला,
(3) क़सम उठा कर माल बेकने वाला
हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फरमाया क़यामत के दिन सबसे पहले अर्श का साया उसको नसीब होगा, जिसने किसी कर्जदार को मोहलत दी या उसको उसी पर सदका कर दिया,

09/04/2023

अकसर लोग हराम रिलेशनशीप में है, वो उसको छोड़ना भी चाहते है,
लेकिन सबसे बड़ी जो आजकल एक झिझक है, एक बात है जो आजकल आम है,
वो ये है= क्या अल्लाह यही सिखाता है किसी का दिल तोड़ो, यही सिखाता है इस्लाम, मेरा दिल तोड़ोगे तो तुम भी कभी खुश नहीं रहोगे देख लेना, यहां आपको दोनो बातो को ज़हन में रखना है और खुद से सवाल करना है ,
अल्लाह का हुकुम ज्यादा है या उस इंसान की बाते जिससे आप हराम रिलेशन में है,
जब अल्लाह ने बोल दिया हराम छोड़ना है ,
तो बस फिर आपकी सबसे पहली बात यही है मेरे अल्लाह का हुकुम पहले है बाकी सब बाद में ,
तो मेरे भाईयो अल्लाह के लिए इस रमज़ान में बक्शीश करा लो क्या पता अगले रमज़ान मिले या नही, जबकि अल्लाह के नबी का फरमान है जो सख्श रमज़ान का महीना पाकर भी बक्शीश ना करा सके हालाक हो जाए वो सख्श ।।
✍🏿 अशरफ कदीर

04/04/2023

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