हे भारत की देवियों! इतिहास गवाह है कि भूतकाल में तुम्हारे साथ अमानवीय अत्याचार हुए, तुम्हें कदम-कदम पर सताया गया। लेकिन क्या आज उस दर्द की आड़ में तुम मर्यादा भूल जाओगी? क्या किसी पुरुष को इस तरह तिल-तिल कर मिटा दोगी कि उसका सांस लेना भी गुनाह हो जाए?"
OSHO KATHA SAGAR
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ओशो (चंद्र मोहन जैन) बीसवीं सदी के एक अत्यंत प्रभावशाली, विवादास्पद और रहस्यमयी आध्यात्मिक गुरु थे। वे अपनी प्रखर बुद्धिमत्ता, लीक से हटकर सोचने की क्षमता और बेबाक विचारों के लिए जाने जाते हैं।
ओशो ने किसी भी रूढ़िवादी परंपरा या अंधविश्वास का खुलकर विरोध किया। उन्होंने ध्यान, प्रेम, स्वतंत्रता और उत्सव को जीवन का मूल आधार माना। उनकी 'डायनेमिक मेडिटेशन' (सक्रिय ध्यान) पद्धति आज भी दुनिया भर में लोकप्रिय है। जहाँ एक ओर उन्होंने समाज के पाखंड पर कड़ा प्रहार किया, वहीं दूसरी ओर पूँजीवाद और भौतिक सुखों का समर्थन भी किया, जिसके कारण उन्हें 'सेक्स गुरु' और 'अमीरों का गुरु' जैसी रूढ़ियों में भी बांधा गया। संक्षेप में, वे एक ऐसे विचारक थे जिन्होंने मनुष्यों को बिना किसी डर के, पूरी जागरूकता के साथ जीने के लिए प्रेरित किया।
said
said....
ओशो के दर्शन में 'बुरा व्यक्ति' जैसी कोई स्वतंत्र सत्ता नहीं है। ओशो का मानना है कि जो व्यक्ति हमें 'बुरा' दिखाई देता है, वह वास्तव में किसी न किसी गहरे दुख, भय, दमित इच्छाओं या गलत शिक्षाओं का परिणाम होता है।
ओशो के अनुसार, 'बुरा व्यक्ति' के संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण बातें इस प्रकार हैं:
चेतना का अभाव: ओशो कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर बुरा नहीं होता। बुराई केवल अचेतनता (Unconsciousness) का लक्षण है। जब कोई व्यक्ति अपनी बुद्धिमत्ता और जागरूकता का उपयोग नहीं कर पाता, तब वह अज्ञानतावश ऐसे कृत्य करता है जिन्हें समाज 'बुरा' कहता है।
दमन और बुराई: ओशो के अनुसार, जिस समाज ने सहज मानवीय इच्छाओं को दबाया है, वहीं से बुराई पैदा होती है। जो चीजें भीतर दबी रह जाती हैं, वे बाद में विकृत होकर बाहर निकलती हैं। इसलिए, जिसे हम 'बुरा' कहते हैं, वह अक्सर समाज द्वारा थोपे गए दमन का ही एक हिंसक रूप होता है।
निंदा के बजाय करुणा: ओशो का दृष्टिकोण है कि बुराई की निंदा करने से कुछ नहीं बदलता। उनके अनुसार, हमें ऐसे व्यक्तियों के प्रति करुणा रखनी चाहिए क्योंकि वे स्वयं अपने भीतर के अंधकार से पीड़ित हैं। जैसे एक बीमार व्यक्ति को दवा की जरूरत होती है, वैसे ही एक 'बुरे' व्यक्ति को जागरूकता की जरूरत है।
Osho said...
Osho said..
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