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07/11/2025
Photos from The SSC's post 21/12/2024
Photos from The SSC's post 27/07/2024

आज की सबसे अच्छी फोटो 😍 😍







21/07/2024

बधाई नहीं दोगे इस वीर लड़की को 👏👏🎉🎉
धनुर्धर शीतल देवी पांव से रोजाना चलाती हैं 300 तीर। उनकी इस मेहनत का फल पैरा एशियाड में दो स्वर्ण पदक जीतकर मिला है। शीतल का अगला लक्ष्य पेरिस पैरालम्पिक में देश के लिए शीर्ष स्थान हासिल करना है। पैर से तीर चलाकर पदक जीतने वाली विश्व की पहली महिला बनने के बाद, शीतल अब पैरा विश्व तीरंदाजी रैंकिंग के महिला कंपाउंड ओपन वर्ग में शीर्ष तीरंदाज बन गई हैं।

नई दिल्ली में ‘बीइंग यू’ किताब के कवर लॉन्च के मौके पर, शीतल ने बताया कि वह पैरालम्पिक में पदक जीतने के लिए पुरजोर अभ्यास कर रही हैं। उनकी यह सफलता उन्हें और भी ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित कर रही है। शीतल का यह सफर संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल है, जो हर किसी के लिए प्रेरणा है।

20/07/2024

उन्होंने भूत का किरदार निभाया, जिन्न बने, बच्चा बने, गॉड बने... खास बात ये है कि 65 वर्ष की उम्र की दहलीज पार करने के बाद उन्होंने इस तरह के चुनौतीपूर्ण किरदार निभाए। सब कुछ हटा कर अगर सिर्फ अभिनय की बात करें अमिताभ बच्चन ने 20वीं सदी में बॉक्स ऑफिस पर जितने चमत्कार किए थे, उसका कई गुना करामात उन्होंने 21वीं सदी में कर दिखाया है।
अमिताभ बच्चन ने अपनी उम्र के बावजूद फिल्म इंडस्ट्री में एक अमिट छाप छोड़ी है। 'Kalki 2898 AD' में भी, अमिताभ ने अपनी दमदार आवाज़ और कद-काठी से अश्वत्थामा के किरदार में जान डाल दी। 65 साल की उम्र पार करने के बाद भी वे चुनौतीपूर्ण किरदार निभा रहे हैं और 20वीं सदी में बॉक्स ऑफिस पर जितने चमत्कार किए थे, उससे कहीं ज्यादा 21वीं सदी में कर दिखाया है।

'मोहब्बतें' में जबरदस्त कमबैक के बाद, उन्होंने 'सरकार' और 'पीकू' जैसी फिल्मों में अपनी बेहतरीन अभिनय क्षमता दिखाई है। शाहरुख-सलमान की फिल्मों में पिता के किरदार से लेकर, 'ऊँचाई' जैसी फिल्मों में बुजुर्गों के साथ काम करने तक, अमिताभ ने हमेशा अपनी अभिनय कला का लोहा मनवाया है।

असल में अमिताभ बच्चन ने छा जाने की ये विधा अपनी कमबैक फिल्म 'मोहब्बतें' से ही सीख ली थीं, जब उन्होंने 10 अभिनेता-अभिनेत्रियों के बीच अपने किरदार में ऐसी जान डाली कि इस फिल्म को उनके 'परंपरा, प्रतिष्ठा, अनुशासन' के लिए याद किया जाने लगा। शाहरुख़-सलमान की फिल्मों में एक ज़िंदादिल पिता का किरदार अदा करना हो या फिर 'सरकार' सीरीज में 'गॉडफादर' सदृश किरदार हो, अमिताभ बच्चन ने कभी इसकी परवाह नहीं की कि फिल्म में उनका कितनी देर का किरदार हैं या फिर कौन से और अभिनेता-अभिनेत्री हैं।

आप 'पीकू' को भी इसी श्रेणी में देख सकते हैं, जितने बंगाली अमिताभ बच्चन इस फिल्म में लगे हैं उतने बंगाली शायद बंगाल का कोई अभिनेता भी नहीं लगता। आप उन्हें 15-16 साल के बच्चों के साथ फिल्म में डाल दीजिए या फिर 'ऊँचाइयाँ' में बुजुर्गों के साथ, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। 'कल्कि' को और अच्छा बनाया जा सकता था, जिसमें कोई शक नहीं है, लेकिन, इस फिल्म में अगर बिग बी की जगह कोई और अभिनेता होता तो शायद आज प्रभाष गालियाँ सुन रहे होते। अमिताभ बच्चन ने इस फिल्म को ढोया है, उन्हें अधिक स्क्रीन स्पेस देकर निर्देशक ने भी चतुराई बरती है।

भारत के निर्माता-निर्देशकों को मैं यही कहूँगा कि अगर आपके पास कोई ऐसा किरदार है जो आपको अत्यधिक चुनौतीपूर्ण लग रहा हो या फिर आप संशय में हों कि किस अभिनेता को इसे दिया जाए, बेधड़क Amitabh Bachchan को एप्रोच कीजिए। इस व्यक्ति के पास जो भी समय बचा है, उसमें ही ये भारतीय सिनेमा को अपना सर्वश्रेष्ठ देने वाला है। मुझे अभी भी लगता है कि 81 वर्ष की उम्र के बाद अब भी उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बचा हुआ है। अगर Kalki के दूसरे भाग में भी वो होते हैं और उम्र व स्वास्थ्य उनका साथ देता है तो वो भारत की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म होगी।

इस उम्र तक भला कौन ही अभिनय करता है, आप ही सोचिए न। 75 तक आते-आते धर्मेंद्र भी ठंडे पड़ गए थे, मिथुन चक्रवर्ती ने 74 की उम्र में बिस्तर पकड़ लिया है, विनोद खन्ना 70 की आयु में कैंसर से चल बसे, गोविंदा का तो 45 साल के होते-होते करियर ही खत्म हो गया, राजेश खन्ना ने 60 पार होते ही बी-ग्रेड फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था, शशि कपूर के बुढ़ापे का कोई रोल ही किसी को याद नहीं। हाँ, शम्मी कपूर ने ज़रूर बुजुर्ग होने के बाद कुछ अच्छे किरदार निभाए लेकिन सब में उन्हें गुस्सैल पिता ही बनाया गया। मुन्नाभाई सीरीज छोड़ दें तो सुनील दत्त भी बुढ़ापे के दिनों में सक्रिय नहीं रहे। जितेंद्र जैसे अभिनेता अंत में बड़े भाई का किरदार निभाते-निभाते थक कर निकल लिए। कुल मिला कर देखें तो अपने समय के अभिनेताओं में सबसे अधिक Versatile अमिताभ बच्चन ही निकले। उनकी यात्रा अनवरत जारी है

20/07/2024

ऐसा करने वाले यशस्वी जायसवाल दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए फिर भी कोई तारिफ नही करेगा।

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