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15/12/2025

आप चाहते हैं की आपके प्रतिष्ठान में बिक्री ज्यादा हो तो यह करें
आप अपने व्यापार में अधिक पैसा प्राप्त करना चाहते हैं और चाहते हैं की आपके व्यापार की बिक्री बढ़ जाए तो आप वट वृक्ष की लता को शनिवार के दिन जाकर निमंत्रण दे आएं। (वृक्ष की जड़ के पास एक पान, सुपारी और एक पैसा रख आएं) रविवार के दिन प्रातः काल जाकर उसकी एक जटा तोड़ लाएं, पीछे मुड़कर न देखें। उस जटा को घर लाकर गुग्गल की धूनी दें तथा 101 बार इस मंत्र का जप करें-

*ॐ नमो चण्ड अलसुर स्वाहा:*

27/09/2025

🙏 *शनि देव की महादशा, अंतरदशा, साढ़ेसाती या ढैय्या से पीड़ित लोगों के लिए विशेष उपाय* 🙏

1️⃣ *तैलाभिषेक (सरसों के तेल का अभिषेक)*

हर शनिवार सुबह एक लोटे पानी में थोड़ा काला तिल और सरसों का तेल मिलाकर शनि देव, पीपल के पेड़ या शिवलिंग पर चढ़ाएँ। इससे शनि दोष शांति पाता है और स्वास्थ्य व करियर में राहत मिलती है।

2️⃣ *शनि दीपक (दीप दान)*

लोहे के दीपक में सरसों का तेल डालकर शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे जलाएँ। दीपक को ऐसे रखें कि ज्योति पेड़ की जड़ को स्पर्श करे। यह साढ़ेसाती और ढैय्या में सबसे शक्तिशाली उपाय है।

3️⃣ *छाया दान (दुर्लभ उपाय)*

एक स्टील के बर्तन में सरसों का तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें और बिना पीछे देखे उस तेल को मंदिर में या किसी गरीब को दान कर दें। इससे शनि की दृष्टि दोष शांति पाती है और दुर्घटना, कोर्ट केस व नौकरी में रुकावट से बचाव होता है।

4️⃣ *सेवा और निष्काम कर्म*

शनि देव कर्मफलदाता हैं, इसलिए उनके कष्ट से छुटकारा पाने का सबसे बड़ा उपाय है — सेवा। किसी अंधे, गरीब, मज़दूर या बुज़ुर्ग की सप्ताह में कम से कम एक बार निस्वार्थ सेवा करें। यह शनि की कृपा पाने का श्रेष्ठ मार्ग है।

🌹 *मेरी शुभकामनाएँ हैं कि शनि देव की कृपा आप सभी पर बनी रहे*

08/09/2025
22/08/2025

Enhance your personal growth by emulating the planets: 1) Sun - establish boundaries and prioritize self-time 2) Moon - maintain emotional detachment 3) Mars - focus on physical fitness 4) Mercury - practice discretion in public discourse 5) Jupiter - value your knowledge and expertise 6) Saturn - cultivate self-discipline 7) Rahu - avoid addictive behaviors Ketu - learn to say no when necessary
If you don’t know your planet then msg me😊👏

Photos from Numeroheal's post 03/08/2025

Amazonite soothes the spirit and calms the soul. Named for the river and the mythical female warriors, it radiates power and energy. Amazonite is a stone of hope and courage. It soothes while also fortifying you spiritually and emotionally. Amazonite is a powerful Throat Chakra healer, and it also stimulates the Heart Chakra. It is associated with the Element of Water. Since it is a support stone, it can be especially soothing and supportive in times of stress or anxiety. Amazonite helps balance emotions and provides harmony and balance
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10/07/2025

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07/07/2025

*सर्जरी के प्रमुख ग्रह*

1. *मंगल (Mars)* – प्रमुख कारक है। यह चाकू, रक्त, चोट, ऑपरेशन, और शल्यक्रिया का ग्रह है।

2. *केतु (Ketu* ) – तेज कटौती, अचानक दर्द, और गुप्त रूप से होने वाली बीमारियों का सूचक है।

3. *शनि (Saturn)* – दीर्घकालिक रोग, कठोरता, और ऑपरेशन के बाद रिकवरी में देरी का कारण हो सकता है।

4. *राहु (Rahu)* – असामान्य या अचानक सर्जरी, विशेषकर जब कोई बीमारी लंबे समय तक नहीं समझ में आती।

5. *चंद्रमा (Moon* ) – यदि पीड़ित हो तो रक्त, शरीर के तरल तत्व या मानसिक तनाव के कारण सर्जरी हो सकती है।

*(Houses indicating Surgery):*

*6वां भाव* : रोग, ऑपरेशन, और दुश्मन (बीमारी) से लड़ाई।

*8वां भाव* : अचानक घटनाएं, मृत्यु तुल्य अनुभव, गुप्त रोग, और ऑपरेशन।

*12वां भाव* : अस्पताल, बिस्तर पर रहना, खर्च, और शरीर से कुछ अलग होना (जैसे ऑपरेशन के दौरान कुछ अंग हटाना)।

07/07/2025

जन्म कुण्डली में कैसे जानें पितृ दोष किन कारणों से पितृ दोष होता है
पितृ दोष: दार्शनिक, आध्यात्मिक, और ज्योतिषीय विश्लेषण
1. पितृ दोष क्या है?
पितृ दोष एक ज्योतिषीय और आध्यात्मिक अवधारणा है, जो जन्म कुंडली में विशिष्ट ग्रह योगों के कारण उत्पन्न होती है और यह माना जाता है कि यह पितरों (पूर्वजों) के असंतुष्ट या अतृप्त आत्माओं के कारण जीवन में बाधाएँ, दुख, और कष्ट लाती है। दार्शनिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, यह पूर्वजों के प्रति कर्तव्यों की उपेक्षा, उनके श्राद्ध-तर्पण में कमी, या उनके जीवनकाल में किए गए कर्मों के प्रभाव से संबंधित है।

दार्शनिक आधार
भारतीय दर्शन में, विशेष रूप से वेदांत और कर्म सिद्धांत के अनुसार, आत्मा अमर है और मृत्यु के बाद भी पितरों की ऊर्जा सूक्ष्म रूप में परिवार पर प्रभाव डालती है। गरुड़ पुराण (प्रेत खंड, अध्याय 10) में कहा गया है कि पितरों का तर्पण न करने से उनकी आत्माएँ भटकती हैं और यह वंशजों के लिए कष्टकारी हो सकता है। यह दर्शन आत्मा और कर्म के चक्रीय संबंध पर आधारित है, जहाँ पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कर्तव्य पालन जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।

आध्यात्मिक आधार
आध्यात्मिक दृष्टि से, पितृ दोष पितरों की आत्माओं का असंतोष है, जो उनके अधूरे कर्मों, अपूर्ण इच्छाओं, या वंशजों द्वारा श्राद्ध-तर्पण जैसे अनुष्ठानों की उपेक्षा से उत्पन्न होता है। भागवत पुराण (11.5.41) में उल्लेख है कि पितरों की सेवा और सम्मान से उनकी आत्माएँ शांति प्राप्त करती हैं, जिससे वंशजों को आशीर्वाद मिलता है। पितृ दोष तब उत्पन्न होता है जब यह आध्यात्मिक संतुलन भंग होता है।

ज्योतिषीय आधार
ज्योतिष में, पितृ दोष का संबंध कुंडली में सूर्य, चंद्र, राहु, केतु, और नवम भाव (पिता और पूर्वजों का भाव) से होता है। पितृ दोष के प्रमुख योग निम्नलिखित हैं:

नवम भाव में राहु या केतु की स्थिति: यह पितरों के असंतोष को दर्शाता है।
सूर्य का नीच राशि (तुला) में होना या शनि, राहु, केतु से युति/दृष्टि: यह पिता या पितृ पक्ष से संबंधित समस्याएँ दर्शाता है।
नवम भाव का स्वामी कमजोर या पाप ग्रहों से पीड़ित होना: यह पितृ तृप्ति की कमी को इंगित करता है।
लग्न, पंचम, या नवम भाव में राहु-केतु की युति: यह वंशजों में बाधाएँ उत्पन्न करता है।
उदाहरण श्लोक (विष्णु पुराण, 3.14.22):

यदा पितृणां तृप्तिः स्यात् तदा सौख्यं प्रजायते।

अतृप्ताः पितरः कष्टं ददति च कुलाय च॥

(अर्थ: जब पितर तृप्त होते हैं, तब सुख प्राप्त होता है। असंतुष्ट पितर कुल को कष्ट देते हैं।)

2. जन्म कुंडली में पितृ दोष की पहचान
पितृ दोष की पहचान के लिए कुंडली का गहन विश्लेषण आवश्यक है। निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए:

नवम भाव का विश्लेषण:
नवम भाव पूर्वजों, धर्म, और भाग्य का प्रतिनिधित्व करता है। यदि इस भाव में राहु, केतु, या शनि जैसे पाप ग्रह हों, या यह भाव पीड़ित हो, तो पितृ दोष की संभावना बनती है।
उदाहरण: यदि नवम भाव में राहु हो और सूर्य नीच राशि में हो, तो यह पितृ दोष का संकेत है।
सूर्य और चंद्र की स्थिति:
सूर्य पिता और पितृ पक्ष का कारक है। यदि सूर्य छठे, आठवें, या बारहवें भाव में हो, या राहु-केतु से युति करे, तो पितृ दोष संभव है।
चंद्रमा मन और माता का कारक है। यदि चंद्रमा भी पीड़ित हो, तो यह पितृ दोष के प्रभाव को बढ़ाता है।
राहु-केतु का प्रभाव:
राहु और केतु कर्म और पूर्वजन्म के संचित प्रभावों के कारक हैं। इनका नवम, पंचम, या लग्न में होना पितृ दोष को दर्शाता है।
उदाहरण: यदि राहु नवम भाव में हो और सूर्य पर दृष्टि डाल रहा हो, तो यह पितरों के असंतोष को इंगित करता है।
दशम भाव और पितृ दोष:
दशम भाव कर्म और सामाजिक स्थिति से संबंधित है। यदि यह भाव भी पीड़ित हो, तो पितृ दोष के कारण करियर और सामाजिक जीवन में बाधाएँ आ सकती हैं।
प्रमाणित श्लोक (बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 16):

सूर्ये राहुयुते नवमे पितृदोषः स्याद् वै कष्टप्रदः।

तर्पणं श्राद्धं च कुर्यात् तदा शान्तिः प्रजायते॥

(अर्थ: नवम भाव में सूर्य और राहु की युति से पितृ दोष होता है, जो कष्ट देता है। श्राद्ध और तर्पण से शांति प्राप्त होती है।)

3. पितृ दोष के कारण
पितृ दोष के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

ज्योतिषीय कारण:
कुंडली में सूर्य, राहु, केतु, या शनि का पाप प्रभाव।
नवम भाव या इसके स्वामी का कमजोर होना।
राहु-केतु की युति या दृष्टि पितृ कारक ग्रहों पर।
आध्यात्मिक और कर्मगत कारण:
पितरों के श्राद्ध-तर्पण में लापरवाही।
पूर्वजों के प्रति अनादर या उनके अधूरे कार्यों को पूरा न करना।
पितरों के जीवनकाल में किए गए पाप कर्म, जैसे दूसरों को कष्ट देना, धन का दुरुपयोग, या अनैतिक कार्य।
सामाजिक और पारिवारिक कारण:
परिवार में पितरों की स्मृति में कोई अनुष्ठान न करना।
पितृ पक्ष में तर्पण या दान-पुण्य की उपेक्षा।
कुल परंपराओं का पालन न करना।
पुराण आधार (गरुड़ पुराण, प्रेत खंड, 10.15):

पितृणां तृप्तये यस्तु श्राद्धं न कुरुते नरः।

तस्य कुलं संनाशति दोषः पितृगणात् भवेत्॥

(अर्थ: जो व्यक्ति पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध नहीं करता, उसका कुल नष्ट होता है और पितृ दोष उत्पन्न होता है।)

4. पितृ दोष के प्रभाव
पितृ दोष के प्रभाव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई दे सकते हैं:

वैवाहिक जीवन: विवाह में देरी, वैवाहिक कलह, या संतान सुख में कमी।
आर्थिक क्षेत्र: धन हानि, व्यापार में असफलता, या अचानक आर्थिक संकट।
स्वास्थ्य: पुरानी बीमारियाँ, मानसिक तनाव, या अस्पष्ट रोग।
सामाजिक जीवन: परिवार में कलह, सामाजिक मान-सम्मान में कमी।
आध्यात्मिक बाधाएँ: पूजा-पाठ में रुचि कम होना, अनुष्ठानों में विघ्न।
5. पितृ दोष से मुक्ति के शास्त्रीय और तांत्रिक उपाय
पितृ दोष से मुक्ति के लिए शास्त्रों और तंत्र में कई उपाय दिए गए हैं, जो निम्नलिखित हैं:

शास्त्रीय उपाय
पितृ तर्पण और श्राद्ध:
पितृ पक्ष (आश्विन मास की अमावस्या) में श्राद्ध और तर्पण करना। यह गरुड़ पुराण में अनिवार्य माना गया है।
मंत्र:
ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।

ॐ पितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।

ॐ प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।

(यह मंत्र तर्पण के समय जल अर्पित करते हुए पढ़ें।)

विधि: तिल, जल, और कुशा के साथ पितरों का तर्पण करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पिंडदान करें।
नारायण बली पूजा:
यह तांत्रिक और शास्त्रीय दोनों तरह का उपाय है, जो गया (बिहार) में किया जाता है। यह पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करता है।
शास्त्र आधार: गरुड़ पुराण (10.20) में नारायण बली का उल्लेख है, जो पितृ दोष निवारण के लिए प्रभावी है।
विधि: पंडित के मार्गदर्शन में गया में विष्णु मंदिर में यह पूजा करें।
महामृत्युंजय जाप:
पितृ दोष के कारण स्वास्थ्य और जीवन पर संकट होने पर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

विधि: 1,25,000 जाप पंडित के माध्यम से करवाएँ या स्वयं 108 बार रोज करें।
गंगा स्नान और दान:
गंगा नदी में स्नान कर पितरों के नाम से दान करना। यह पितृ दोष को कम करता है।
शास्त्र आधार: स्कंद पुराण में गंगा स्नान को पितृ तृप्ति का साधन बताया गया है।
तांत्रिक उपाय
पितृ गायत्री मंत्र जाप:
मंत्र:
ॐ देवता भ्यः पितृभ्यो नमो नमः।

सर्वं पितृभ्यो स्वधा नमो नमः॥

विधि: रोज सुबह 108 बार इस मंत्र का जाप करें और पितरों को जल अर्पित करें।
तिलक तंत्र:
तिल के तेल का दीपक जलाकर पितरों को समर्पित करें। यह तांत्रिक उपाय पितृ दोष को शांत करता है।
विधि: शनिवार या अमावस्या को दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक जलाएँ और पितरों से क्षमा माँगें।
पितृ यंत्र पूजा:
पितृ यंत्र को स्थापित कर उसकी पूजा करें। यह तांत्रिक उपाय पितरों की आत्मा को शांति देता है।
विधि: यंत्र को शुद्ध कर, पितृ गायत्री मंत्र से 108 बार अभिमंत्रित करें।
अन्य उपाय
गौ दान: गाय को भोजन या दान देना पितृ दोष निवारण में सहायक है।
शास्त्र आधार: विष्णु पुराण में गौ दान को पितृ तृप्ति का साधन बताया गया है।
वृक्षारोपण: पितरों के नाम से पीपल या बरगद का पेड़ लगाएँ और उसकी सेवा करें।
पितृ पक्ष में भोजन दान: गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराएँ।
6. चरणबद्ध उपाय योजना
कुंडली विश्लेषण: किसी विद्वान ज्योतिषी से कुंडली दिखाएँ और पितृ दोष की पुष्टि करें।
पितृ पक्ष में श्राद्ध: पितृ पक्ष में तर्पण और पिंडदान करें।
नारायण बली पूजा: यदि दोष गंभीर हो, तो गया में नारायण बली पूजा करवाएँ।
नित्य जाप: पितृ गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
दान-पुण्य: गंगा स्नान, गौ दान, और गरीबों को भोजन दान करें।
तांत्रिक उपाय: तिलक तंत्र और पितृ यंत्र पूजा करें।
7. शास्त्रीय और पुराण आधारित साक्ष्य
गरुड़ पुराण: पितृ दोष और श्राद्ध की महत्ता को विस्तार से बताया गया है।
उदाहरण: “श्राद्धेन तृप्यन्ति पितरः सर्वं सौख्यं च जायते।” (श्राद्ध से पितर तृप्त होते हैं और सुख प्राप्त होता है।)
विष्णु पुराण: पितरों की सेवा और तर्पण को वंश की समृद्धि का आधार माना गया है।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र: पितृ दोष के ज्योतिषीय योग और उनके निवारण के उपायों का वर्णन है।
स्कंद पुराण: गंगा स्नान और दान के महत्व को बताया गया है।
8. सावधानियाँ
पितृ दोष के उपाय हमेशा विद्वान पंडित या ज्योतिषी के मार्गदर्शन में करें।
तांत्रिक उपायों में शुद्धता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें।
श्राद्ध और तर्पण दक्षिण दिशा की ओर मुख करके ही करें।

पितृ दोष एक जटिल ज्योतिषीय और आध्यात्मिक स्थिति है, जो पितरों के असंतोष और ग्रहों के पाप प्रभाव से उत्पन्न होती है। इसके दार्शनिक आधार कर्म सिद्धांत और आत्मा की अमरता पर टिके हैं, जबकि आध्यात्मिक आधार पितरों की शांति और तृप्ति पर। ज्योतिषीय दृष्टि से, सूर्य, राहु, और नवम भाव का विश्लेषण महत्वपूर्ण है। शास्त्रीय और तांत्रिक उपाय, जैसे श्राद्ध, तर्पण, नारायण बली, और मंत्र जाप, इस दोष को शांत करने में प्रभावी हैं। इन उपायों को श्रद्धा और नियमितता से करने पर पितृ दोष के प्रभाव कम हो सकते हैं और जीवन में सुख-शांति प्राप्त कर सकते हैं

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