12/09/2025
शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर 2025 को शुरू होंगे और 2 अक्टूबर विजयादशमी के दिन पारण किया जाएगा.
शारदीय नवरात्रि में तृतीया तिथि दो दिन तक विद्यमान होगी, 24 और 25 सितंबर को तृतीया तिथि होने से इसमें वृद्धि हुई है.
ऐसे में 1 अक्टूबर को महानवमी रहेगी, इस दिन माता के आखिरी स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा, कन्या पूजन और हवन होगा.
शारदीय नवरात्रि 2025 कलश स्थापना चौघड़िया मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि कलश स्थापना चौघड़िया मुहूर्त के अनुसार-
सुबह 06:15 से सुबह 07:46 बजे तक (अमृत चौघड़िया में)
सुबह 09:17 से सुबह 10:48 बजे तक (शुभ चौघड़िया में)
सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:43 बजे तक (अभिजीत चौघड़िया में)
नवरात्रि में तिथि का बढ़ना क्या संकेत देता है ?
ज्योतिषियों और शास्त्रों के अनुसार शारदीय नवरात्रि में तिथि का घटना अशुभ होता है लेकिन अगर तिथि में वृद्धि हुई है यानी 9 की बजाय 10 दिन के नवरात्र हैं तो इसे शुभ फलदायी बताया गया है. ये संकेत है कि आने वाला समय सुख, समृद्धि से परिपूर्ण होगा.
इस साल नवरात्रि में माता हाथी पर सवार होकर भी आ रही हैं, ये भी शुभ संकेत देता है. ऐसे में तिथि का बढ़ना और माता की सवारी दोनों के शुभ होने पर इस बार का शारदीय नवरात्रि भक्तों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा.
शारदीय नवरात्रि 2025 तिथियां
22 सितम्बर, 2025 सोमवार प्रतिपदा तिथि शैलपुत्री रूप का पूजन.
23 सितम्बर, 2025 मंगलवार द्वितीया तिथि देवी ब्रह्मचारिणी रूप की पूजा.
24 सितम्बर, 2025 बुधवार तृतीया तिथि देवी चन्द्रघंटा रूप की आराधना
25 सितम्बर, 2025 गुरुवार तृतीया तिथि
26 सितम्बर, 2025 शुक्रवार चतुर्थी तिथि देवी कूष्मांडा रूप की उपासना
27 सितम्बर, 2025 शनिवार पंचमी तिथि माता स्कंदमाता रूप की पूजा
28 सितम्बर, 2025 रविवार षष्ठी मां कात्यायनी की पूजा
29 सितम्बर, 2025 सोमवार सप्तमी तिथि मां कालरात्रि रूप की पूजा
30 सितम्बर, 2025 मंगलवार अष्टमी तिथि को मां महागौरी रूप की पूजा
01 अक्टूबर, 2025 बुधवार नवमी तिथि देवी सिद्धदात्री रूप की पूजा की जाती है इस दिन नवदुर्गा पूजा का अनुष्ठान और पूजा पूर्ण हो जाती है। इस दिन अधिकांश लोग कन्या पूजन करते है।
02 अक्टूबर, 2025 गुरुवार दशमी तिथि को नवरात्रि दुर्गा विसर्जन का कार्यक्रम किया जाता हैं साथ में दशमी तिथि दशहरा यानी विजयादशमी का कार्यक्रम किया जाता हैं।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे
पंडित कौशल पाण्डेय
राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं महंत
श्री शिव शक्ति मंदिर
ब्लाक सी-8 यमुना विहार,दिल्ली
#शारदीय_नवरात्रि_2025
09/08/2025
श्री राधे
#रक्षाबंधन 9 अगस्त 2025
रक्षा बंधन का पर्व प्रत्येक वर्ष श्रावण शुक्ल पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार पुरे विश्वभर में मनाया जाने वाला एक ऐसा पर्व है जो अपने साथ भाई बहनों के प्यार को स्नेहरुपी धागों में जन्मजन्मांतर तक बांध के रखता है,भाई -बहन के रिश्तों की अटूट डोर का प्रतीक है यह पर्व।
रक्षाबंधन का शुभमुहूर्त
राखी आज पुरे दिन बांध सकते है भद्रा पुरे दिन नहीं है पूरा दिन शुभ है
रक्षाबन्धन पर्व श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को भद्रा रहित तीन मुहूर्त या उससे अधिक व्यापिनी पूर्णिमा को अपराह्न काल व प्रदोष काल में मनाया जाता है.
यथा पूर्णिमायां भद्रारहितायां त्रिमुहूत्र्ताधिकोदय व्यापिन्यामपराले प्रदोषे वा कार्यम्
रक्षाबंधन का महत्व
हिंदू पंचांग के मुताबिक रक्षाबंधन सावन महीने की पूर्णिमा का हर साल मनाया जाता है.भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का यह त्योहार पूरे भारत वर्ष में उत्साह के साथ मनाया जाता है और बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर भाई की लंबी उम्र की कामना करती है, वहीं भाई भी बहन की रक्षा करने का संकल्प लेता है.
पूजा विधि
रक्षाबंधन पर सबसे पहले राखी की थाली सजाएं.
इस थाली में रोली कुमकुम अक्षत पीली सरसों के बीज दीपक और राखी रखें.
भाई को तिलक लगाकर उसके दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र यानी कि राखी बांधें.
राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें, फिर भाई को मिठाई खिलाएं.
अगर भाई आपसे बड़ा है तो चरण स्पर्श कर उसका आशीर्वाद लें.
अगर बहन बड़ी हो तो भाई को चरण स्पर्श करना चाहिए.
राखी बांधने के बाद भाइयों को इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार बहनों को भेंट देनी चाहिए.
ब्राह्मण या पंडित जी भी अपने यजमान की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हैं.
ऐसा करते वक्त इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए
ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
आज के दिन बहनें अपने भाई के दाहिने हाथ पर राखी बांधकर उसके माथे पर तिलक करती हैं और दीर्घ आयु की कामना करती हैं। बदले में भाई बहन की रक्षा का वचन देता है।
ऐसा माना जाता है कि राखी के रंगबिरंगे धागे भाई-बहन के प्यार के बंधन को मज़बूत करते है। भाई बहन एक दूसरे को मिठाई खिलाते है। और सुख दुख में साथ रहने का यकीन दिलाते हैं।दोस्तों इस संसार का कोई भी प्राणी किसी प्रकार का भी बंधन स्वीकार नहीं करता है। आज केवल प्रेम ही एकमात्र ऐसा बंधन है जिसमें बँधने की इच्छा हर किसी की होती है। राखी भी प्यारा का बंधन है। जो केवल भाई बहन के प्रेम को बांध कर रखता है।
इसीलिए रक्षा बंधन की सर्वव्यापकता को भाई बहन के परस्पर स्नेह के माध्यम से व्यक्त किया गया है। भाई बहन के प्रेम का ऐसा अनूठा उदाहरण विश्व में कहीं अन्यत्र उपलब्ध नहीं है।
यह एक ऐसा पावन पर्व है जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को पूरा आदर और सम्मान देता है। रक्षाबंधन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चांदी जैसी मंहगी वस्तु तक की हो सकती है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को बांधती हैं परंतु ब्राहमणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित संबंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बांधी जाती है। कभी कभी सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठत व्यक्ति को भी राखी बांधी जाती है।
रक्षाबंधन के त्योहार को प्रभावशाली बनाने के लिए वेद मन्त्र का उच्चारणः करते हुए राखी बांधे , जिससे भाई बहन का पवित्र रिस्ता कायम रहे ,
आज के दिन सभी भाइयों को अपनी बहन के साथ सभी बहनो की रक्षा करने का संकल्प लेना चाहिए , जिससे समाज में माताए बहने आजादी से अपना कार्य कर सके।
राखी बांधते समय करें इस मंत्र का उच्चारण :-
भविष्यपुराण के अनुसार इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र को देवगुरु बृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते हुए निम्नलिखित मंत्र के द्वारा रक्षाबन्धन बाँधा था।
येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥
इस श्लोक का हिन्दी भावार्थ है- "जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधता हूँ। हे रक्षे (राखी)! तुम अडिग रहना (तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।)"
मृदुल स्नेह, अटूट विश्वास और समर्पण से परिपूर्ण भाई-बहन के पावन पर्व रक्षाबंधन की आप सभी को हार्दिक बधाई।
रक्षाबंधन का त्योहार आप सभी के जीवन में अपार खुशियां और नई उमंग लाए, यही कामना है सभी को इस स्नेह पर्व की अनंत शुभकामनाएं।
पंडित कौशल पाण्डेय (ज्योतिष विशेषज्ञ)
राष्ट्रीय अध्यक्ष :-श्री राम हर्षण शांति कुञ्ज,भारत
#रक्षाबंधन
21/06/2025
विश्व योग दिवस 21 जून
यह सनातन धर्म का ही प्रभाव है की आज सारा संसांर विश्व योग दिवस 21 जून के दिन मना रहा है, इस दिन विश्व के 177 देश एकसाथ मिलकर अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनायेंगे.
योग किसी एक धर्म या समुदाय का नहीं है यह सभी मानव समाज का है अब जो मानव होंगे वह योग करेंगे और जो शैतान होंगे वह घर में बैठे इसका विरोध करेंगे और इससे ज्यादा उनके बस की कुछ नहीं , यह दिन सभी मानव समाज के लिए बहुत जरुरी है आज योग को सभी लोग अपनी दिनचर्या में शामिल करे और स्वस्थ जीवन की सुरुवात करे आज के दिन अधिक से अधिक संख्या में सभी घरों से बाहर निकले और विश्व योग दिवस को सफल बनाये।
कौशल पाण्डेय (राष्ट्रीय अध्यक्ष )
श्री राम हर्षण शांति कुञ्ज ,दिल्ली
#विश्वयोगदिवस
12/06/2025
अहमदाबाद में हुए विमान हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी जी तथा हादसे के शिकार अन्य यात्रियों एवं चालक दल के सदस्यों का निधन अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है।
उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!
प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्माओं को सद्गति एवं उनके शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति।
11/04/2025
जय श्री राम
सप्रेम निमंत्रण
श्री हनुमान जन्मोत्सव के पावन पर्व पर भव्य शोभा यात्रा में आप सभी भक्तों का सादर अभिनन्दन है ।
आप को जानकर हर्ष होगा की प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी शनिवार 12 अप्रैल 2025 को श्री हनुमान जन्मोत्सव के पावन पर्व पर भव्य शोभा यात्रा एवं विशाल भंडारे का आयोजन श्री शिव शक्ति मंदिर सी-8 यमुना विहार में दोपहर 3 बजे से किया जा रहा है ,
आप इस शोभा यात्रा में सम्मिलित होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाये खुद भी आये और पड़ोसियों को भी लाये ,
इस शोभा यात्रा के माध्यम से समस्त हिन्दू समुदाय को एक साथ आकर हिन्दू एकता का परिचय देना है।
अतः तन मन धन से अपना सहयोग प्रदान कर के इस कार्यक्रम को सफल बनाये।
कार्यकर्म
शनिवार 12 अप्रैल 2025
शोभा यात्रा दोपहर 03:00 से प्रारम्भ
सुन्दरकाण्ड पाठ सायं 7 बजे से प्रारम्भ
कार्यक्रम स्थल :- श्री शिव शक्ति मंदिर, सी 8 यमुना विहार,दिल्ली
आयोजक :- आप और हम समस्त हिन्दू परिवार
अधिक जानकारी के लिए मिले अथवा संपर्क करे पंडित कौशल पाण्डेय 9968550003
03/11/2024
यम और यमुना जैसे भाईबहन के प्रेम और विश्वास का बंधन #भाई_दूज की हार्दिक बधाई मंगलमय शुभकामनायें।
कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाता है. इस सम्बन्ध में एक कथा के अनुसार पूर्व काल में यमुना जी ने यमराज जी को अपने घर पर सत्कारपूर्वक भोजन कराया था। उस दिन नारकी जीवों को यातना से छुटकारा मिला और उन्हें तृप्त किया गया। वे पाप-मुक्त होकर सब बंधनों से छुटकारा पा गये और सब के सब यहां अपनी इच्छा के अनुसार सन्तोषपूर्वक रहे। उन सब ने मिलकर एक महान् उत्सव मनाया जो यमलोक के राज्य को सुख पहुँचाने वाला था। इसीलिए यह तिथि तीनों लोकों में यम द्वितीया के नाम से विख्यात हुई।
जिस तिथि को यमुना ने यम को अपने घर भोजन कराया था, उस तिथि के दिन जो भाई अपनी बहन के हाथ का उत्तम भोजन करता है उसे उत्तम भोजन समेत धन की प्राप्ति भी होती रहती है।
यह पर्व भाई-बहन के स्नेह का द्योतक है। कोई बहन नहीं चाहती कि उसका भाई दीन-हीन, तुच्छ हो, सामान्य जीवन जीने वाला हो, ज्ञानरहित, प्रभावरहित हो। इस दिन भाई को अपने घर पाकर बहन अत्यन्त प्रसन्न होती है अथवा किसी कारण से भाई नहीं आ पाता तो स्वयं उसके घर चली जाती है।
आज का पर्व से हमें भाई बहन के प्रति प्रेम विश्वास और समर्पण की भावना को दर्शाता है।
आप को #भाई_दूज की हार्दिक बधाई मंगलमय शुभकामनायें
पंडित कौशल पाण्डेय
30/10/2024
आप सभी को पाँच दिवसीय दीपोत्सव (धनतेरस, रूपचतुर्दशी, दीपावली,गोवर्धन पूजा और भाई-दूज ) की हार्दिक शुभकामना
🙏😊🙏
हर्ष, उल्लास व प्रसन्नता के पर्व
दीपावली पर बहुत बहुत मंगलकामनाएं।
🌹🌹🌹
प्रभु श्री की कृपा से इस प्रकाश पर्व पर आप को आठों सिद्धियां,नव-निधियां और चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति हो । साथ ही सुख , समृद्धि , आरोग्य , यश , कीर्ति और खुशी की भी अनवरत प्राप्ति हो । धन, वैभव, यश, ऐश्वर्य के साथ दीपावली पर माँ महालक्ष्मी आपकी सुख सम्पन्नता स्वास्थ्य व हर्षोल्लास में वृद्धि करें,
👩❤️👨🎈🌹
*इन्हीं शुभेच्छाओं के साथ,*
*जय श्री राम*
30/10/2024
आप को दीपोत्सव के पावन पर्व की बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ। यह त्योंहार आपके जीवन में आपार खुशियां एवं समृद्धि लेकर आए।
पंडित कौशल पाण्डेय
www.astrokaushal.com
https://forms.gle/XZigPCDfb3jesctR6
Pandit Kaushal Pandey (Astrologer)
https://www.astrokaushal.com
22/10/2024
कब है अहोई अष्टमी? जानिये तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि :--पंडित कौशल पाण्डेय
#अहोईअष्टमी व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन किया जाता है। दीपावली पूजन के ठीक आठ दिन पहले उसी वार को भी करने का उल्लेख प्राप्त होता है।
अहोई अस्टमी
अहोई अष्टमी का व्रत बृहस्पतिवार, अक्टूबर 24, 2024 को रखा जाएग
ऐसी मान्यता है की इस व्रत को करने से पुत्रों को दीर्घायु की प्राप्ति होती हैं। इस व्रत के प्रभाव से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
इस व्रत को करने के लिए प्रातःकाल स्नानादि क्रियाओं से निवृत होकर यह संकल्प करें कि आज मैं संपूर्ण दिन निराहार रहते हुए सायंकाल को अहोई माता का विधि-विधान से पूजन करुंगी, मातेश्वरी इस व्रत की सफलता का मुझे मंगलमय आशीर्वाद प्रदान करें, जिससे कि व्रत को सहजता से पूर्ण किया जा सके। सायंकाल को तारे निकलने के बाद दीवाल को चूना आदि से पोतकर सुंदर तरीके से चित्र नवचित्र रंगों, गेरु व हल्दी आदि से अहोई माता का चित्र बनाकर पूजन की संपूर्ण सामग्रियां तैयार कर लें, स्वर्णकार से एक चांदी की अहोई माता की मूर्ति बनवाएं और जिस प्रकार हार में पेन्डेन्ट लगा होता है उसकी जगह अहोई को स्थान दें तथा उसी डोरे में चांदी के दाने डलवा दें, फिर दीवाल पर व डोरे में स्थित अहोई की विभिन्न सामग्रियों पकवान व दूध, भात-सीरा आदि से गणेशादि देवताओं के साथ षोडशोपचार पूजन करें। जल के लोटा पर स्वास्तिक बनाकर एक पात्र में सीरा (हलवा) या वायना तथा रुपया निकालकर तथा हाथ में सात दाने गेहूं के लेकर कहानी सुनें, फिर अहोई को गले में धारण कर लें। जो वायना निकाला था उसे सासू मां के पैर लगकर सासू मां को अर्पण कर दें, इस दिन राधा-कुंड स्नान भी करें।
दीपावली के बाद किसी अच्छे (शुभ) दिन में अहोई गले में से उतारकर जितने बेटे हों उतनी बार और जितने बेटों का विवाह संस्कार हुआ हो उतनी बार दो चांदी के दाने उस अहोई की माला में पिरोती जायें। जब अहोई उतारें तो जल से छींटे देकर गुड़ का भोग अवश्य लगाये
इस दिन भगवान् चंद्र देव को अघ्र्य देने के साथ ब्राह्मणों को पेठा दान करना चाहिए और श्रद्धानुसार जो भी बन पडे़ दक्षिणा सहित देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। इतना करने के बाद पारिवारिक सदस्यों के साथ स्वयं भी अहोई मां का प्रसाद ग्रहण करें। यह व्रत छोटे-छोटे बच्चों के कल्याण के लिए किया जाता है अतः अहोई माता की प्रतिमा के साथ ही बच्चों का चित्र बनाकर उनकी भी विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन अवश्य करें।
व्रत के नियम –
कोई भी व्रत-उपवास यदि बताएं गए नियमों के अनुसार पूर्ण किया जाए तो वह व्रत अपना सम्पूर्ण फल देता है इसी प्रकार प्रत्येक व्रत की तरह अहोई अष्टमी (जिसे हम सामान्य बोल चाल में होई का व्रत भी कहते है ।)
व्रत के भी अपने कुछ नियम है जैसे कि सब्जी, कपड़ा आदि इस दिन नहीं काटना चाहिए, सिलाई कढ़ाई भी नहीं करनी चाहिए आदि।
अहोई व्रत के नियमानुसार निर्जल उपवास करें। लेकिन यदि आप गर्भवती है तो निर्जल उपवास न करें।
गर्भवती महिलाएँ उपवास के दौरान कुछ फलहार जरूर लें।आपका लम्बे समय तक भूखा रहना बच्चें की सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। जो महिलाएँ मासिक धर्म से हैं वह व्रत रखें लेकिन पूजन न करें।
आज के दिन किसी भी बुजुर्ग का अपमान न करें। व्रत संतान के लिए रखा है इसलिए भूलवश भी आज अपने या किसी दुसरे के बच्चों को बिलकुल भी न मारे। यदि आप ऐसा करती है तो अहोई माता नाराज हो सकती है।
जीव हत्या न करें और न ही किसी जानवर को मारें-पिटे।
इस दिन नहाने के बाद अशुद्ध कार्य जैसे कि झाड़ू लगाना, पोछा लगाना, कबाड़ घर से बाहर निकालना आदि कोई काम न करें।
यदि आप व्रत है तो भूलकर भी इस दिन फल व सब्जी से लेकर अख़बार, कागज़, कपड़ा आदि भी नहीं काटना चाहिए। कामकाजी महिलाएँ उपवास के दिन सिलाई, कढ़ाई या जिसमे कुछ भी काटने अथवा सिलने का कार्य होता हो वह न करें।
व्रत के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। तारों को अर्घ्य देने के बाद ऐसा भोजन न करें जो तामसिक हो। दिन में नहीं सोना चाहिए
इस व्रत में दिन में सोकर समय व्यतीत नहीं करना चाहिए।
अहोई अस्टमी की कथा-
एक नगर में एक साहूकार रहा करता था। उसके सात लड़के थे। एक दिन उसकी स्त्री ख्दान में मिट्टी खोदने के लिए गई और ज्यों ही उसने मिट्टी में कुदाल मारी त्यों ही सेही के बच्चे कुदाल की चोट से सदा के लिए सो गए। इसके बाद उसने कुदाल को स्याहूं के खून से सना देखा, तो उसे सेही के बच्चों के मर जाने का बड़ा दुःख हुआ परन्तु वह विवश थी और यह काम उससे अनजाने में हो गया था। इसके बाद वह बिना मिट्टी लिए ही खेद करती हुई अपने घर आ गई। उधर जब सेही अपने घर में आई, तो अपने बच्चों को मरा देखकर नाना प्रकार से विलाप करने लगी और ईश्वर से प्रार्थना की कि जिसने मेरे बच्चों को मारा है, उसे भी इसी प्रकार का कष्ट होना चाहिए। तत्पश्चात् सेही के श्राप से से. ठानी के सातों लड़के एक साल के अन्दर ही मर गए। इस प्रकार अपने बच्चों को असमय में काल के मुंह में चले जाने पर सेठ-सेठानी इतने दुखी हुए कि उन्होंने किसी तीर्थ पर जाकर अपने प्राणों को तज देना उचित समझा। इसके बाद वे घर बार छोड़ कर पैदल ही किसी तीर्थ की ओर चल दिये और खाने पीने की ओर कोई ध्यान न देकर जब तक उनमें कुछ भी शक्ति और साहस रहा तब तक चलते ही रहे और जब वे पूर्णतया अशान्त हो गए तो अन्त में मूच्र्छित होकर गिर पड़े। उनकी यह दशा देखकर भगवान् करुणा सागर ने उनको भी मृत्यु से बचाने के लिए उनके पापों का अन्त चाहा और इसी अवसर पर आकाशवाणी हुई कि - हे सेठ! तुम्हारी सेठानी ने मिट्टी खोदते समय ध्यान न देकर सेही के बच्चों को मार दिया था, इसी कारण तुम्हें अपने बच्चों का दुःख देखना पड़ा। यदि अब पुनः घर जाकर तुम मन लगाकर गऊ की सेवा करोगे और अहोई माता देवी का विधि-विधान से व्रत आरम्भ कर प्राणियों पर दया रखते हुए स्वप्न में भी किसी को कष्ट नहीं दोगे, तो तुम्हें भगवान् की कृपा से पुनः सन्तान का सुख प्राप्त होगा। इस प्रकार की आकाशवाणी सुनकर सेठ सेठानी कुछ आशावान् हो गए और भगवती देवी का स्मरण करते हुए अपने घर को चले आए। इसके बाद श्रद्धा शक्ति से न केवल अहोई माता के व्रत के साथ गऊ माता की सेवा करना आरम्भ कर दिया अपितु सब जीवों पर दया भाव रखते हुए क्रोध और द्वेष का परित्याग कर दिया। ऐसा करने के पश्चात् भगवान् की कृपा से सेठ और सेठानी पुनः सातों पुत्र वाले होकर और अगणित पौत्रों के सहित संसार में नाना प्रकार के सुखों को भोगने के पश्चात् स्वर्ग को चले गए। शिक्षा - बहुत सोच विचार के बाद भली प्रकार निरीक्षण करने पर ही कार्य आरम्भ करें और अनजाने में भी किसी प्राणी की हिंसा न करें।
18/08/2024
जय श्री राम
#रक्षाबंधन 19 अगस्त 2024 का शुभ समय :-पंडित कौशल पाण्डेय
रक्षा बंधन का पर्व प्रत्येक वर्ष श्रावण शुक्ल पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार पुरे विश्वभर में मनाया जाने वाला एक ऐसा पर्व है जो अपने साथ भाई बहनों के प्यार को स्नेहरुपी धागों में जन्मजन्मांतर तक बांध के रखता है,भाई -बहन के रिश्तों की अटूट डोर का प्रतीक है यह पर्व।
श्रावणी पूर्णिमा 19 अगस्त सोमवार के दिन श्रवण उपरांत धनिष्ठा नक्षत्र तथा शोभन योग की साक्षी में आ रहा है. सोमवार के दिन श्रवण नक्षत्र के होने से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है. इस साल भी रक्षाबंधन पर भद्रा का साया रहेगा।
रक्षाबन्धन पर्व श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को भद्रा रहित तीन मुहूर्त या उससे अधिक व्यापिनी पूर्णिमा को अपराह्न काल व प्रदोष काल में मनाया जाता है.
यथा पूर्णिमायां भद्रारहितायां त्रिमुहूत्र्ताधिकोदय व्यापिन्यामपराले प्रदोषे वा कार्यम्
शुभ मुहूर्त
राहु काल - आज के दिन प्रातः 7:30 से सुबह 9 बजे तक राहुकाल समय होने से रक्षासूत्र न बांधे
रक्षा बंधन धागा समारोह समय – दोपहर 01:30 बजे से रात्रि 09:08 बजे तक
अपराह्न समय रक्षाबंधन मुहूर्त – दोपहर 01:43 बजे से शाम 04:20 बजे तक
प्रदोष समय रक्षा बंधन मुहूर्त – शाम 06:56 बजे से रात 09:08 बजे तक
रक्षाबंधन भद्र समाप्ति समय – दोपहर 01:30 बजे
रक्षाबंधन भद्रा पुंछा – प्रातः 09:51 बजे से प्रातः 10:53 बजे तक
रक्षाबंधन भद्रा मुख – सुबह 10:53 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक
नोट :- भद्रा का वास पाताल में होने से भद्रा का प्रभाव नहीं है फिर भी भद्रा का त्याग कर के रक्षाबंधन का पर्व मनाये।
राखी बांधते समय करें इस मंत्र का उच्चारण :-
भविष्यपुराण के अनुसार इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र को देवगुरु बृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते हुए निम्नलिखित मंत्र के द्वारा रक्षाबन्धन बाँधा था।
येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥
इस श्लोक का हिन्दी भावार्थ है- "जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधता हूँ। हे रक्षे (राखी)! तुम अडिग रहना (तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।)"
अधिक जानकारी के लिए निचे दिए गए वेबसाइट पर देखे।
https://www.astrokaushal.com/2023/07/2023_20.html
पंडित कौशल पाण्डेय
रक्षाबंधन 2024 :-पंडित कौशल पाण्डेय
#रक्षाबंधन 19 अगस्त 2024