Aarti jha sanskrit एक प्रयास

Aarti jha sanskrit एक प्रयास Sanskrit is the life line of the spiritual consciousness of India. It is not merely a language. It i

22/09/2022

🔸1. रामायण को महर्षि वाल्मीकि जी ने लिखा था तथा इस महाग्रंथ में 24,000 श्लोक, 500 उपखंड तथा उत्तर सहित सात कांड है।

🔸2. जिस समय दशरथ जी ने पुत्रेष्ठी यज्ञ किया था उस समय दशरथ जी की आयु 60 वर्ष थी।

🔸3. तुलसीरामायण में लिखा है की सीता जी के स्वयंवर में श्री राम ने भगवान शिव का धनुष बाण उठाया व इन्हें तोड़ दिया परंतु इस घटना का वाल्मीकि रामायण में कोई उल्लेख नहीं है।

🔸4. रामचरितमानस के अनुसार परशुरामजी सीता स्वयंवर के मध्य में आए थे परंतु बाल्मीकि रामायण के अनुसार जब प्रभु श्री राम, माता सीता के साथ अयोध्या जा रहे थे उस समय बीच रास्ते में परशुराम जी इन्हें मिले थे।

🔸5. जब भगवान श्री राम वनवास के लिए जा रहे थे तब उनकी आयु 27 वर्ष थी।

🔸6. जब लक्ष्मण जी आए और उन्हें पता चला कि श्री राम को वनवास का आदेश मिला है तब वह बहुत क्रोधित हुए तथा श्री राम के पास जाकर उनसे अपने ही पिता के विरुद्ध युद्ध के लिए बोला परंतु बाद में श्री रामजी के समझाने पर वह शांत हो गए।

🔸7. जब दशरथ जी ने श्री राम को वनवास के लिए कहा, तब वह चाहते थे कि श्री राम जी बहुत सा धन एवं दैनिक उपयोग की चीजें अपने साथ ले जाए परंतु कैकई ने इन सब चीजों के लिए भी मना कर दिया।

🔸8. भरत जी को सपने में ही इनके पिता दशरथ की मृत्यु का अनुमान हो गया था क्योंकि उन्होंने अपने सपने में दशरथ जी को काले कपड़े पहने एवं उदास देखा था।

🔸9. हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस ब्रह्माण्ड में 33 करोड़ देवी-देवता है लेकिन बाल्मीकि रामायण के के अनुसार 33 करोड़ नहीं अपितू 33 कोटि अर्थात 33 प्रकार के देवी देवता है।

🔸10. प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि जब माता सीता का अपहरण रावण के द्वारा हुआ तब जटायु ने उन्हें बचाने का प्रयास किया और अपना बलिदान दिया परंतु राम वाल्मीकि रामायण के अनुसार यह जटायु नहीं थे अपितु उनके पिता अरुण थे।

🔸11. जिस दिन रावण ने माता सीता का हरण किया तथा उन्हें अशोक वाटिका लेकर आया, उसी रात भगवान ब्रह्मदेव ने इंद्रदेव को एक विशेष प्रकार की खीर सीता जी को देने के लिए कहा, तब इंद्रदेव ने पहले अपनी अलौकिक शक्तियों के द्वारा अशोक वाटिका में उपस्थित सारे राक्षसों को सुला दिया, उसके बाद वह खीर माता सीता को दी।

🔸12. जब भगवान श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता की खोज में जंगल में गए तब वहां उनकी राह में कंबंध नाम का एक राक्षस आया जो श्री राम व लक्ष्मण के हाथ मारा गया परंतु वास्तव में कंबंध एक श्रापित देवता था और एक श्राप के कारण राक्षस योनी में जन्मा और जब प्रभु श्रीराम ने उसकी उसका मृत शरीर जलाया तब उसकी आत्मा मुक्त हो गई एवं उसने ही उसने ही श्रीराम व लक्ष्मण को सुग्रीव से मित्रता करने का मार्ग सुझाया।

🔸13. एक बार रावण कैलाश पर्वत पर भगवान शिव से मिलने गया और उसने वहां उपस्थित नंदी का मजाक उड़ाया इससे क्रोधित नंदी ने रावण को श्राप दिया कि एक वानर तेरी मृत्यु एवं पतन करण बनेगा।

🔸14. वाल्मीकि रामायण के अनुसार जब रावण ने कैलाश पर्वत उठाया था तब माता पार्वती ने क्रोधित होकर श्राप दिया था की तेरी मृत्यु का कारण एक स्त्री बनेगी।

🔸15. विद्युतजिन, रावण की बहन शुर्पणखां का पति था तथा यह कालकेय नामक राजा का सेनापति भी था। जब रावण पूरी दुनियाँ को जीतने निकला तब उसने कालकेय से भी युद्ध किया तथा इस युद्ध में विद्युतजिन मारा गया तब क्रोधित शुर्पणखां ने रावण को श्राप दिया की वही एक दिन अपने भाई रावण की मृत्यु का कारण बनेगी।

🔸16. जब राम और रावण के मध्य अंतिम युद्ध लड़ा जा रहा था तब इंद्रदेव ने अपना चमत्कारिक रथ श्रीराम के लिए भेजा था और इस रथ पर बैठ कर ही श्री राम ने रावण का वध किया।

🔸17. एक बार रावण अपने पुष्पक विमान पर कही जा रहा था तब उसने एक सुंदर स्त्री को भगवान विष्णु की तपस्या करते हुए देखा जो श्री हरि विष्णु को पति रूप में पाना चाहती थी। रावण ने उसके बाल पकड़ कर उसे घसीटते हुए अपने साथ चलने को कहा परंतु उस स्त्री ने उसी क्षण अपने प्राण त्याग दिए और रावण को अपने कुल सहित नष्ट हो जाने का श्राप दिया।

🔸18. रावण को अपनी सोने की लंका पर बहुत अहंकार था, परंतु इस लंका पर रावण से पहले उसके भाई कुबेर का राज था। रावण ने लंका को अपने भाई कुबेर से युद्ध करके जीता था।

🔸19. रावण राक्षसों का राजा था तथा उस समय लगभग सभी बालक इससे बहुत ज्यादा डरते थे क्योंकि इसके दस सिर थे परन्तु रावण, शिव का बहुत बड़ा भक्त था तथा बहुत ही बुद्धिमान विद्यार्थी भी था, जिसने सारे वेद का अध्ययन किया।

🔸20. रावण के रथ की ध्वजा पर अंकित वीणा के चिन्ह से यह पता लगता है कि रावण को संगीत थी प्रिय था तथा कई जगह इस बात का उल्लेख है कि रावण वीणा बजाने में भी निपुण था।

🔸21. राजधर्म का निर्वाह करते हुए एक धोबी के कारण श्री राम ने माता सीता की अग्नि परीक्षा ली तथा इसके पश्चात माता सीता को वाल्मीकि आश्रम में छोड़ दिया, बाद में जब पुनः श्री राम ने माता सीता को परीक्षा के लिए कहा तो माता सीता धरती में समा गयी, तब श्री राम व इनके पुत्र कुश, माता सीता को पकड़ने के लिए दौड़े परन्तु तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस घटना के पश्चात श्री राम को अत्यंत ही ग्लानी हुई की उन्होंने राजधर्म का निर्वाह तो किया लेकिन अपनी प्राणों से भी प्रिय पत्नी को उनके कारण कितने ही दुःख झेलने पडे, इसके कुछ समय पश्चात ही भगवान श्री राम ने सरयू नदी में जल समाधि ले ली एवं बैकुंठ धाम प्रस्थान कर गये।

🔸22. जब सीता हरण के पश्चात रावण को पता चला की श्री राम, लंका की ओर युद्ध के लिए आ रहे है तब इनके भाई विभीषण ने माता सीताजी को लौटाकर राम से संधि करने को कहाँ लेकिन तब रावण बोला की अगर वह साधारण मानव है तब वह मुझे नहीं हरा सकते लेकिन अगर वह वास्तव में ईश्वर है तब उनके हाथो मेरी मृत्यु नहीं अपितु मोक्ष प्राप्ति होगी, अतः में युद्ध अवश्य करूँगा।

🔸23. लक्ष्मण जी 14 सालो तक नहीं सोयें थे तथा इसी कारण इन्हें गुडाकेश भी कहा जाता है। रावण पुत्र मेघनाद को वरदान था की उसकी मृत्यु वही करेगा जो 14 वर्षो तक न सोया हो और इसी कारण मेघनाद, लक्ष्मण के द्वारा मारा गया।

💥 24
👇👇
🔹1:~मानस में राम शब्द=1443 बार आया है।

🔸2:~मानस में सीता शब्द=147 बार आया है।

🔹3:~मानस में जानकी शब्द= 69 बार आया है।

🔸4:~मानस में बड़भागी शब्द=58 बार आया है।

🔹5:~मानस में कोटि शब्द=125 बार आया है।

🔸6:~मानस में एक बार शब्द= 18 बार आया है।

🔹7:~मानस में मन्दिर शब्द= 35 बार आया है।

🔸8:~मानस में मरम शब्द =40 आर आया है।

🔹9:~मानस में श्लोक संख्या=27 है।

🔸10:~लंका में राम जी =111 दिन रहे।

🔹11:~लंका में सीताजी =435 दिन रही।

🔸12:~मानस में चोपाई संख्या=4608 है।

🔹13:~मानस में दोहा संख्या=1074 है।

🔸14:~मानस में सोरठा=207 है।

🔹15:~मानस में छन्द=86 है।

🔸16:~सुग्रीव में बल था=10000 हाथियों का!

🔹17:~सीता रानी बनी=33वर्ष की उम्र में।

🔸18:~मानस रचना के समय तुलसीदास की उम्र=77 वर्ष

🔹19:~पुष्पक विमान की चाल=400 मील/घण्टा

🔸20:~रामादल व् रावण दल का युद्ध=87 दिन चला

🔹21:~राम रावण युद्ध=32 दिन चला।

🔸22:~सेतु निर्माण=5 दिन में हुआ।

🔹23:~नलनील के पिता=विश्वकर्मा

🔸24:~त्रिजटा के पिता=विभीषण

🔹25:~दशरथ की उम्र थी=60000 वर्ष।

🔸26:~सुमन्त की उम्र=9999 वर्ष।

🔹27:~विश्वामित्र राम को ले गए=10 दिन के लिए।

🔸28:~मानस में बैदेही शब्द=51 बार आया है।

🔹29:~राम ने रावण को सबसे पहले मारा था=6 वर्ष की उम्र में।

🔸30:~रावण को जिन्दा किया=सुखेन बेद ने नाभि में अमृत रखकर।

24/08/2022

अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्चैव सप्तैते चिरंजीविनः॥
सप्तैतान् स्मरेन्नित्यम् मार्कंडेयम् तथाष्टमम्।
जीवेद्‌वर्षशतं सोऽपि सर्वव्याधिविवर्जितः॥

24/08/2022

प्रकाण्ड विद्वान #अष्टावक्र

#अष्टावक्र इतने प्रकाण्ड विद्वान थे कि माँ के गर्भ से ही अपने पिताजी "कहोड़" को अशुद्ध वेद पाठ करने के लिये टोंक दिए जिससे क्रुद्ध होकर पिताजी ने आठ जगह से टेड़ें हो जाने का श्राप दे दिया था।

पौराणिक_कथा

अष्टावक्र अद्वैत वेदान्त के महत्वपूर्ण ग्रन्थ अष्टावक्र गीता के ऋषि हैं। अष्टावक्र गीता अद्वैत वेदान्त का महत्वपूर्ण ग्रन्थ है।

'अष्टावक्र' का अर्थ 'आठ जगह से टेढा' होता है।
कहते हैं कि अष्टावक्र का शरीर आठ स्थानों से टेढ़ा था।

उद्दालक ऋषि के पुत्र का नाम श्‍वेतकेतु था। उद्दालक ऋषि के एक शिष्य का नाम कहोड़ था। कहोड़ को सम्पूर्ण वेदों का ज्ञान देने के पश्‍चात् उद्दालक ऋषि ने उसके साथ अपनी रूपवती एवं गुणवती कन्या सुजाता का विवाह कर दिया। कुछ दिनों के बाद सुजाता गर्भवती हो गई। एक दिन कहोड़ वेदपाठ कर रहे थे तो गर्भ के भीतर से बालक ने कहा कि पिताजी! आप वेद का गलत पाठ कर रहे हैं। यह सुनते ही कहोड़ क्रोधित होकर बोले कि तू गर्भ से ही मेरा अपमान कर रहा है इसलिये तू आठ स्थानों से वक्र (टेढ़ा) हो जायेगा।

हठात् एक दिन कहोड़ राजा जनक के दरबार में जा पहुँचे। वहाँ बंदी से शास्त्रार्थ में उनकी हार हो गई। हार हो जाने के फलस्वरूप उन्हें जल में डुबा दिया गया। इस घटना के बाद अष्टावक्र का जन्म हुआ। पिता के न होने के कारण वह अपने नाना उद्दालक को अपना पिता और अपने मामा श्‍वेतकेतु को अपना भाई समझता था। एक दिन जब वह उद्दालक की गोद में बैठा था तो श्‍वेतकेतु ने उसे अपने पिता की गोद से खींचते हुये कहा कि हट जा तू यहाँ से, यह तेरे पिता का गोद नहीं है। अष्टावक्र को यह बात अच्छी नहीं लगी और उन्होंने तत्काल अपनी माता के पास आकर अपने पिता के विषय में पूछताछ की। माता ने अष्टावक्र को सारी बातें सच-सच बता दीं।

अपनी माता की बातें सुनने के पश्‍चात् अष्टावक्र अपने मामा श्‍वेतकेतु के साथ बंदी से शास्त्रार्थ करने के लिये राजा जनक के यज्ञशाला में पहुँचे। वहाँ द्वारपालों ने उन्हें रोकते हुये कहा कि यज्ञशाला में बच्चों को जाने की आज्ञा नहीं है। इस पर अष्टावक्र बोले कि अरे द्वारपाल! केवल बाल श्वेत हो जाने या अवस्था अधिक हो जाने से कोई बड़ा व्यक्ति नहीं बन जाता। जिसे वेदों का ज्ञान हो और जो बुद्धि में तेज हो वही वास्तव में बड़ा होता है। इतना कहकर वे राजा जनक की सभा में जा पहुँचे और बंदी को शास्त्रार्थ के लिये ललकारा।

राजा जनक ने अष्टावक्र की परीक्षा लेने के लिये पूछा कि वह पुरुष कौन है जो तीस अवयव, बारह अंश, चौबीस पर्व और तीन सौ साठ अक्षरों वाली वस्तु का ज्ञानी है? राजा जनक के प्रश्‍न को सुनते ही अष्टावक्र बोले कि राजन्! चौबीस पक्षों वाला, छः ऋतुओं वाला, बारह महीनों वाला तथा तीन सौ साठ दिनों वाला संवत्सर आपकी रक्षा करे। अष्टावक्र का सही उत्तर सुनकर राजा जनक ने फिर प्रश्‍न किया कि वह कौन है जो सुप्तावस्था में भी अपनी आँख बन्द नहीं रखता? जन्म लेने के उपरान्त भी चलने में कौन असमर्थ रहता है? कौन हृदय विहीन है? और शीघ्रता से बढ़ने वाला कौन है? अष्टावक्र ने उत्तर दिया कि हे जनक! सुप्तावस्था में मछली अपनी आँखें बन्द नहीं रखती। जन्म लेने के उपरान्त भी अंडा चल नहीं सकता। पत्थर हृदयहीन होता है और वेग से बढ़ने वाली नदी होती है।

अष्टावक्र के उत्तरों को सुकर राजा जनक प्रसन्न हो गये और उन्हें बंदी के साथ शास्त्रार्थ की अनुमति प्रदान कर दी। बंदी ने अष्टावक्र से कहा कि एक सूर्य सारे संसार को प्रकाशित करता है, देवराज इन्द्र एक ही वीर हैं तथा यमराज भी एक है। अष्टावक्र बोले कि इन्द्र और अग्निदेव दो देवता हैं। नारद तथा पर्वत दो देवर्षि हैं, अश्‍वनीकुमार भी दो ही हैं। रथ के दो पहिये होते हैं और पति-पत्नी दो सहचर होते हैं। बंदी ने कहा कि संसार तीन प्रकार से जन्म धारण करता है। कर्मों का प्रतिपादन तीन वेद करते हैं। तीनों काल में यज्ञ होता है तथा तीन लोक और तीन ज्योतियाँ हैं। अष्टावक्र बोले कि आश्रम चार हैं, वर्ण चार हैं, दिशायें चार हैं और ओंकार, आकार, उकार तथा मकार ये वाणी के प्रकार भी चार हैं। बंदी ने कहा कि यज्ञ पाँच प्रकार के होते हैं, यज्ञ की अग्नि पाँच हैं, ज्ञानेन्द्रियाँ पाँच हैं, पंच दिशाओं की अप्सरायें पाँच हैं, पवित्र नदियाँ पाँच हैं तथा पंक्‍ति छंद में पाँच पद होते हैं। अष्टावक्र बोले कि दक्षिणा में छः गौएँ देना उत्तम है, ऋतुएँ छः होती हैं, मन सहित इन्द्रयाँ छः हैं, कृतिकाएँ छः होती हैं और साधस्क भी छः ही होते हैं। बंदी ने कहा कि पालतू पशु सात उत्तम होते हैं और वन्य पशु भी सात ही, सात उत्तम छंद हैं, सप्तर्षि सात हैं और वीणा में तार भी सात ही होते हैं। अष्टावक्र बोले कि आठ वसु हैं तथा यज्ञ के स्तम्भक कोण भी आठ होते हैं। बंदी ने कहा कि पितृ यज्ञ में समिधा नौ छोड़ी जाती है, प्रकृति नौ प्रकार की होती है तथा वृहती छंद में अक्षर भी नौ ही होते हैं। अष्टावक्र बोले कि दिशाएँ दस हैं, तत्वज्ञ दस होते हैं, बच्चा दस माह में होता है और दहाई में भी दस ही होता है। बंदी ने कहा कि ग्यारह रुद्र हैं, यज्ञ में ग्यारह स्तम्भ होते हैं और पशुओं की ग्यारह इन्द्रियाँ होती हैं। अष्टावक्र बोले कि बारह आदित्य होते हैं बारह दिन का प्रकृति यज्ञ होता है, जगती छंद में बारह अक्षर होते हैं और वर्ष भी बारह मास का ही होता है। बंदी ने कहा कि त्रयोदशी उत्तम होती है, पृथ्वी पर तेरह द्वीप हैं।...... इतना कहते कहते बंदी श्‍लोक की अगली पंक्ति भूल गये और चुप हो गये। इस पर अष्टावक्र ने श्‍लोक को पूरा करते हुये कहा कि वेदों में तेरह अक्षर वाले छंद अति छंद कहलाते हैं और अग्नि, वायु तथा सूर्य तीनों तेरह दिन वाले यज्ञ में व्याप्त होते हैं।

इस प्रकार शास्त्रार्थ में बंदी की हार हो जाने पर अष्टावक्र ने कहा कि राजन्! यह हार गया है, अतएव इसे भी जल में डुबो दिया जाये। तब बंदी बोला कि हे महाराज! मैं वरुण का पुत्र हूँ और मैंने सारे हारे हुये ब्राह्मणों को अपने पिता के पास भेज दिया है। मैं अभी उन सबको आपके समक्ष उपस्थित करता हूँ। बंदी के इतना कहते ही बंदी से शास्त्रार्थ में हार जाने के पश्चात जल में डुबोये गये सार ब्राह्मण जनक की सभा में आ गये जिनमें अष्टावक्र के पिता कहोड़ भी थे।

अष्टावक्र ने अपने पिता के चरणस्पर्श किये। तब कहोड़ ने प्रसन्न होकर कहा कि पुत्र! तुम जाकर समंगा नदी में स्नान करो, उसके प्रभाव से तुम मेरे शाप से मुक्त हो जाओगे। तब अष्टावक्र ने इस स्थान में आकर समंगा नदी में स्नान किया और उसके सारे वक्र अंग सीधे हो गये।।

*धन्य है हमारी सनातन संस्कृति*

https://youtu.be/BsXhy-3OBWI
20/08/2022

https://youtu.be/BsXhy-3OBWI

केंद्रीय विद्यालय ख़ानापारा की छात्रा कृतिका भट्टाचार्य द्वारा संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत भारतीय संस्कृति और संस...

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