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02/06/2025

जितना दिया सरकार ने मुझ को, उतनी मेरी औक़ात नहीं ये तो करम है उन का वर्ना मुझ में तो ऐसी बात नहीं….

13/03/2023

*बेरोजगारी की समस्या को कैसे हल किया जा सकता है?*

*How can the problem of unemployment be solved?*

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```I will share my opinion later if you can put your views you can do.```

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26/01/2023

_देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेणसंस्थिता।_
_नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।_
*बसंत पंचमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।*

29/09/2022

*क्या कारण था कि तुलनात्मक रूप से एक बहुत नई भाषा होने के बाद भी हिन्दी बहुत ही कम समय में भारत की एक बड़ी जनसंख्या की प्रथम भाषा बन गई?*

```ये प्रश्न उतना ही गलत है जितनी कि यह बात कि अंग्रेजो से पहले मुगलों का राज था या मुगलों के ताजमहल से बढ़कर भारत में निर्माण कला के नमूने नहीं हैं। इस प्रकार के प्रश्न या तो गुलामी कि सोच से आते हैं या एजेण्डा के कारण , दोनो से ही हमें लडना है।
समय आ गया है कि हिंदी भाषा का इतिहास भी गुलामी की सोच से आजाद हो।
मैं पहले उन कुतर्कों की चर्चा कर रहा हूँ जिनके कारण हिन्दी को नया कहा जाता है।
जब हिन्दी भाषा के इतिहास पर चर्चा होती है तो अक्सर ये तार्किक त्रुटियाँ होती हैं।
१. हिन्दी साहित्य के इतिहास और हिन्दी भाषा के इतिहास को एक ही मान लिया जाता है।
२. बहुदा ये मान लिए जाता है हिन्दी शब्द की उत्पत्ति का कालखण्ड हिन्दी भाषा की उत्पत्ति का ही कालखण्ड होगा।
लेख के इस भाग में मैं इस विषय पर चर्चा नहीं कर रहा कि हिंदी भाषा कितनी प्राचीन है। लेकिन केवल इतना ध्यान दिलाना चाहता हूँ , भिन्न भिन्न विषयों को एक दूसरे से जोड़कर गड्डमड्ड नहीं करना चाहिए।
भाषाएँ साहित्य से बहुत पुरानी होती है। दूसरे भारत में बहुत समय तक साहित्य , विज्ञान सभी ज्ञान के विषयों की भाषा संस्कृत होती थी। जो अलग अलग भाषाओँ के लोगों को जोड़ती थी। ज्ञान सभी लोगों तक पहुँचें इसलिए क्षेत्रीय भाषा के स्थान पर संस्कृत में साहित्य लिखा जाता था। जैसा आजकल अंग्रेजी में होता है। आज भी अनेक भारतीय भाषाएँ हैं जो हजारों वर्ष पुरानी है लेकिन उनमें आज तक साहित्य नहीं लिखा गया है।
संभव है कि हिन्दी भाषा केवल हिन्दी साहित्य जितनी ही पुरानी हो लेकिन फिर भी सही तर्क के लिए ये समझना आवयश्यक है कि हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य दो भिन्न भिन्न चीजें हैं।
भाषा के नाम की उत्पत्ति के समय और स्थान को भी भाषा की उत्पत्ति के समय और स्थान से जोड़ना सही नहीं है। हिन्दी शब्द विदेशी है और पिछले कुछ हजार वर्षों में उत्पन्न हुआ , इसलिए हिन्दी भाषा की उत्पत्ति भी विदेशी होगी या इसी कालखण्ड की होगी। ये तर्क उथला है। हिंदुस्तान शब्द भी विदेशी है और पिछले कुछ हजार वर्षों में ही उत्पन्न हुआ है तो क्या हिंदुस्तान देश भी विदेशी और केवल कुछ हजार वर्ष पुराना हो गया ? क्या India नाम के देश की उत्पत्ति को इस शब्द की उत्पत्ति से जोड़ा जा सकता है? जिस तरह भारत की सभ्यता भारत शब्द से कहीं अधिक पुरानी इसी प्रकार हिंदी भाषा हिंदी शब्द से पुरानी होगी ये तो माना जा सकता है।
हिंदी भाषा कितनी प्राचीन है , ये चर्चा का विषय हो सकता है पर उस चर्चा में उपरोक्त दोनों तर्कों को शामिल नहीं किया जा सकता। हिंदी भाषा की प्राचीनता के विषय पर मेरा मत बहुत से विद्वानों से भिन्न है। जिस पर भविष्य में पूरे शोध के साथ लिखूँगा लेकिन कुछ सरल से बाते यहाँ भी।
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अब हिन्दी प्राचीनता के विषय में कुछ तर्क।
दो सौ वर्षों से अंग्रेजी का खूब प्रचार हो रहा है। इस दौर में भी उससे पहले भी फ़ारसी का खूब प्रचार हुआ था फिर भी ये दोनों जनमानस की भाषा नहीं बन पाई। किसी भाषा को इतने बड़े क्षेत्र की भाषा बनने कितना समय और प्रयास लग सकता है ये सोचने का विषय है। विश्व में ऐसा कोई उदाहरण है ही नहीं कि बड़े किसी समाज ने बिलकुल नई भाषा अपनाई हो।
यदि अब से डेढ़ सौ वर्ष पूर्व की हिन्दी भाषा देखें तो बिलकुल वही व्याकरण है जो आज है। डेढ़ सौ वर्ष इसलिए कि उस समय का गद्य लेखन खूब उपलब्ध है। उस समय से अब तक लेशमात्र भी बदलाव नहीं हैं। बदलाव है तो बस इतना कि अंग्रेजी शब्द अधिक प्रयोग में आने लगें हैं और फ़ारसी शब्दों का प्रयोग घट गया है। लेकिन व्याकरण (व्यवहार में प्रयोग हो रही भाषा की लय) वही है। यदि डेढ़ सौ वर्षों में इतना बदलाव आता है तो पूरी भाषा विकसित होने में कितना समय लगता है ये देखने का विषय है।
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हिन्दी के अपभ्रंश हिंदी के इतिहास की धरोहर हैं।
हिंदी के इतिहास के विषय में इस तर्क का प्रयोग मुझसे पहले किसी ने नहीं किया है या किया हो तो मुझे ज्ञात नहीं । लेकिन ये बहुत ध्यान देने योग्य बात है।
मैंने कुछ समय पूर्व बनजारा शब्द के अर्थ की चर्चा की थी। बनजारा वो होता है जो बनज करता है। बनज क्या होता है ? बनज होता है व्यापार। बनज शब्द संस्कृत वाणिज्य का देशज रूप है। अब वाणिज्य से बनज बन जाना और फिर बनज का इतना व्यवहार में आ जाना कि उससे भी दूसरे शब्द निकलने लगें। और वे शब्द भी बहुत प्राचीन हों चुकें । यदि अब से हजार वर्ष पूर्व का काव्य देखते हैं तो अपभ्रंशों से भरा हुआ है। अर्थात तब तक अपभ्रंश खूब विकसित हो चुके थे।
आजादी के बाद हिंदी भाषा इतनी नहीं बढ़ी कि इस पर व्यापक शोध हो पाए। लेकिन अपभ्रंशों पर शोध होगा तो प्रचीनता प्रमाणित हो जाएगी।
तो शब्दोंं के हेरफेर या भाषा के नाम बदलकर हिंदी को नया बताने का प्रयास किया जाता है . जैसे संलग्न चित्र में दिखाया गया हिंदी का इतिहास है

इसमेंं कमाल की बात यह है कि हिंदी शब्द तीन स्थानों पर आया है. एक तो सबसे नीचे जिसके कारण हिंदी को नई भाषा बनाकर दिखाया गया है। हिंदी की माँ है हिंदुस्तानी और उसकी माँ है पश्चिमी हिंदी , अरे? ये तो यहाँ भी हिंदी आ गई । यानि हिंदी से दादी भी हिंदी थी? क्या घपला है भाई ।
आज का हिंदी भाषी पश्विमी हिन्दी को बडी सरलता से समझ सकता है बल्कि पश्विमी हिन्दी लगभग आज की हिंदी ही है । जब विश्व में अन्य भाषाओँ के इतिहास के चार्ट बनते हैं तो क्या इतने अंतर पर नए नए नाम दिए जाते हैं ? एक हजार वर्ष पहले की अंग्रेजी बिलकुल अलग भाषा है लेकिन उसका नाम अंग्रेजी ही है। ये तब जबकि उसका प्राचीन नाम अलग था।विश्व में किसी अन्य भाषा का उदाहरण तो बताइए जिसके इतिहास में हिन्दुस्तानी , उर्दू, हिंदी जितनी समानता वाले रूपों को अलग अलग नाम दिए गए हो। यहाँ साफ़ साफ़ गुमराह करने का प्रयास है. हिंदी से जुड़े "घोषित विद्वान" किसी भी अंग्रेज द्वारा लिखित पुस्तक को स्वयं सिद्ध प्रमाण मान लेते हैं और स्वयं का कोई शोध विश्लेषण नहीं करते। जिनमें किसी स्थापित सिद्धान्त के पुनर्निरीक्षण करने का भी आत्मबल ना हो क्या वे लोग घोषित या अघोषित विद्वान हो सकते हैं ?
पश्विमी हिन्दी से हिंदुस्तानी का जन्म दिखाने का कारण है उर्दू को हिंदी के समतुल्य रखने का प्रयास । जबकि यदि आज की हिंदी से संस्कृत और फारसी शब्द निकाल दो तो पश्विमी हिन्दी बन गई। तो आपको बीच में हिन्दुस्तानी घुसेड़ने की आवश्यकता कहाँ से आ गई। जो भाषा अब है वही पश्चिमी हिंदी है। जैसा मैंने कहा कुछ सौ शब्द तो भाषा में आते जाते रहते हैं नए नए चलन के कारण , जैसे अब अंग्रेजी के आ गए हैं। लेकिन उन्होंने भाषा की व्याकरण नहीं बदली।
वैसे तो अब ऐसे चार्ट पर नहीं उनके स्रोत पर चर्चा करने का समय है। आज का भारतीय सभी प्राथमिक तथ्यों का पुनर्निरीक्षण करने लायक है किसी अंग्रेज का निष्कर्ष मानने की उसे आवश्यकता नहीं हैं ।

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05/02/2022

🌼 वसंत पंचमी 🌼

विद्या की देवी मां सरस्वती से लीजिए शांत और पवित्र मन की प्रेरणा।

वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। देवी सरस्वती का प्राकट्य दिवस होने से इस दिन सरस्वती जयंती, श्रीपंचमी आदि पर्व भी होते हैं। वैसे सायन कुंभ में सूर्य आने पर वसंत शुरू होता है। इस दिन से वसंत राग, वसंत के प्यार भरे गीत, राग-रागिनियां गाने की शुरुआत होती है। इस दिन सात रागों में से पंचम स्वर (वसंत राग) में गायन, कामदेव, उनकी पत्नी रति और वसंत की पूजा की जाती है। देवी भागवत में उल्लेख है कि माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही संगीत, काव्य, कला, शिल्प, रस, छंद, शब्द व शक्ति की प्राप्ति जीव को हुई थी। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी।

सरस्वती को बागीश्वरी भगवती, शारदा, वीणावादनी और वारदेवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण वह संगीत की देवी भी है। वसंत पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। पद्मपुराण में मां सरस्वती का रूप प्रेरणादायी है। शुभवस्त्र धारण किए हैं और उनके चार हाथ हैं जिनमें वीणा, पुस्तकमाला और अक्षरमाला है। धर्मशास्त्रों के अनुसार मां सरस्वती का वाहन सफेद हंस है। सरस्वती का वाहन हंस विवेक का परिचायक है।

एक हाथ में पुस्तक, संदेश देती है कि हमारा लगाव पुस्तकों के प्रति, साहित्य के प्रति हो । विद्यार्थी कभी पुस्तकों से अलग न हों, भौतिक रूप से भले ही कभी किताबों से दूर रहे, लेकिन हमेशा मानसिक रूप से किताबों के साथ रहें। दो हाथों से वीणा का वादन, यह संकेत करता है कि विद्यार्थी जीवन में ही संगीत जैसी ललित कलाओं प्रति भी हमारी रुचि होनी चाहिए। संगीत हमारी याददाश्त बढ़ाने में भी सहायक होता है। दो हाथों में वीणा ललित कला में प्रवीण होने की प्रेरणा देती हैं। जिस प्रकार वीणा के सभी तारों में सामंजस्य होने से मधुर संगीत निकलता है वैसे ही मनुष्य अपने जीवन में मन व बुद्धि का सही तालमेल रखे।


चित्र में देवी सरस्वती नदी किनारे एकांत में बैठी है, यह संकेत है कि विद्यार्जन के लिए एकांत भी आवश्यक है। विद्यार्थी को थोड़ा समय एकांत में भी बिताना चाहिए। एक हाथ में माला है, यह बताती है कि हमें हमेशा चिंतन में रहना चाहिए, जो ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। उसका लगातार मनन करते रहें. इससे आपकी मेधा बढ़ेगी। शुभवस्त्र मानव को प्रेरणा देते हैं कि अपने भीतर सत्य, अहिंसा, क्षमा, सहनशीलता, करुणा, प्रेम व परोपकार आदि सद्गुणों को बढ़ाएं और क्रोध, मोह, लोभ, मद, अहंकार आदि का परित्याग करें। सरस्वती के पीछे सूरज भी उगता दिखाई देता है, यह बताता है कि पढ़ाई के लिए सुबह का समय ही श्रेष्ठ है।

सरस्वती के सामने दो हंस है, बुद्धि के प्रतीक हैं, हमारी बुद्धि रचनात्मक और विश्लेषणात्मक दोनों होनी चाहिए। क्योंकि हंस दूध ग्रहण कर पानी छोड़ देने का अद्भुत गुण होता है।


श्वेत रंग पसंद मां सरस्वती प्रेरणा देतीं हैं कि मन शांत और पवित्र हो। हमारा ज्ञान निर्मल हो श्वेत रंग की तरह, विकृत न हो. जो भी ज्ञान प्राप्त करें वो सकारात्मक हो. यही बात हमारे चरित्र को लेकर भी है। कोई भी दुर्गुण हमारे चरित्र में न हो, एकदम शुभ्र दमक के साथ हो। मां सरस्वती सभी पर कृपालु हों।
🪔🙏☘😊🐚💗🌼

01/10/2021

मजाक की भी हद होती है आज किसी ने मैसेज भेजा
"हैप्पी श्राध"
🙊🙊🙊😝😝😝

e-P@thshala 10/06/2021

*रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने अपने करोड़ों कस्टमर्स के लिए WhatsApp Bot सर्विस की शुरुआत की है. कंपनी ने एक नंबर भी जारी किया है, जिस पर Hi लिखकर भेजने से आप रिजार्च समेत कई जरूरी काम घर बैठे ही बड़ी आसानी से कर पाएंगे.*
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```
ई दिल्ली: भारत की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने अपने करोड़ों यूजर्स की सहुलियत के लिए शानदार सर्विस की शुरुआत की है. इस सर्विस के जरिए अब जियो कस्टमर्स वॉट्सऐप मैसेज से ही अपने नंबर को रिचार्ज (Recharge via WhatsApp Message) करा पाएंगे. कंपनी ने इसके लिए एक वॉट्सऐप नंबर- 7000770007 जारी किया है, जिसे आपको अपने फोन में सेव करना होगा, और रिचार्ज करते वक्त वॉट्सऐप पर 'Hi' टाइप करके सेंड करना होगा.

रिप्लाई में मिलेंगे कई ऑप्शन

ध्यान रहे कि, रिचार्ज के अलावा कंपनी इसी नंबर के जरिए कई अन्य सर्विस भी ऑफर कर रही है. जैसे- नए ब्रॉडबैंड कनेक्शन (New Broadband Connection) लेना, जियो फाइबर (Jio Fibre) से जुड़ी पूछताछ करना और नजदीकी वैक्‍सीनेशन सेंटर पर कोविड वैक्सीन की उपलब्धता की जानकारी देना. ऐसे में जब आप बताए गए वॉट्सऐप नंबर पर Hi मैसेज सेंड करेंगे तो रिप्लाई में कई ऑप्शन खुलकर आएंगे. इसके बाद आपको अपनी जरूरत के हिसाब से रिप्लाई करना होगा.

```

*कृपया लड़की और लड़कों में भेदभाव करना बंद करो*

*"लड़कियां है तो कल है"*

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27/05/2021

वजाईनल स्वैब टेस्ट क्या होता है और यह क्यों किया जाता है?*
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*चेतावनी: यह उत्तर स्त्रियों के स्वास्थ्य के हिसाब से लिख रहे हैं और थोड़ा संवेनदशील हो सकता है। आप उसी हिसाब से इसको पढ़ें।*

```इस टेस्ट के बारे में बताने के साथ साथ कुछ बैक्टीरिया सम्बंधित जानकारी देते हैं। लगभग हर महिला को जीवन में एक या दो बार कोई न कोई वैजिनल इन्फेक्शन जरूर होता है और इसकी जानकारी स्वास्थ्य के हिसाब से बहुत ही जरूरी है।
बैक्टीरिया: हर महिला के वजाइना के अंदर बैक्टीरिया होते है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है लेकिन कभी कभी जब किसी बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है तो उनका प्राकृतिक संतुलन खराब हो जाता है और तब कुछ गंध वाला डिस्चार्ज होने लगता है।
वैजिनल स्वाब टेस्ट क्या होता है : जब अधिक गंध वाला डिस्चार्ज हो या डॉक्टर चेकअप के बाद अगर उनको शक हो कि कोई इन्फेक्शन है तो उसके लिए एक टेस्ट करवाते हैं। इसके लिए एक किट आती है जिसमे वैजिनल सैंपल कलेक्ट करना पड़ता है। [1]
वैजिनल टेस्ट किट: वैजिनल स्वाब टेस्ट के लिए आपको एक टेस्ट किट मिलेगी। वो इस तरह की दिखती है। इससे आपको सैंपल इकठ्ठा करके लैब को भेजना होगा।

[2]
सैंपल कैसे कलेक्ट करें:
सैंपल कलेक्ट करने के लिए निम्नलिखित तरीके हैं:

किट के अंदर सैंपल कलेक्ट करने के लिए एक बोतल होती है उसके अंदर का द्रव्य मत निकालें।

या तो आप टॉयलेट सीट पर बैठ जाएँ या खड़े होकर एक पैर को मोड़ लें जैसा कि नीचे के चित्र में बाएं वाले में दिखाया गया है।

[3]

टेस्ट किट में जो रुई के मुंह वाला स्वाब है उसको लगभग एक इंच वजाइना के अंदर तक ले जाएँ।

उसको कम से कम पांच सेकंड तक घुमाये और निश्चित कर लें कि रुई वजाइना की सतह के संपर्क में आये ताकि सैंपल इकठ्ठा कर सकें।

इसके बात स्वाब को निकाल कर बोतल के अंदर रख दें और बोतल की ढक्कन को ठीक से बंद कर दें।

इस किट के साथ एक फॉर्म आता है उसको भर लें।

अब इसको आप लैब भेज सकते हैं।

वैजिनल स्वाब टेस्ट कब करवाते हैं : वैसे तो जब भी वजाइना में अधिक डिस्चार्ज हो और जब इन्फेक्शन की शंका हो तब इसको करवा सकते हैं लेकिन डॉक्टर इस टेस्ट को और भी बीमारियों की जानकारी के लिए करवाते हैं। [4]

कैंडिडिआसिस: जब भी वजाइना में सूजन हो, खुजली हो और गंध वाला सफ़ेद रंग का डिस्चार्ज निकले तो इसकी संभावना हो सकती है। इन हालातों में अक्सर वैजिनल स्वाब टेस्ट करने के बाद मालुम कर सकते है कि क्या कैंडिडिआसिस ही है। मुलायम कपडे पहनने और दही खाने से इसमें सुधार होता है लेकिन ये घरेलु इलाज़ है और इसका कोई क्लीनिकल प्रूफ नहीं है।

बैक्टीरियल वेजिनोसिस: वजाइना में बहुत तरह के बैक्टीरिया होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी हैं लेकिन जब कभी किसी विशेष बैक्टीरिया की संख्या में बढ़ोत्तरी होती है तो भूरे और हलके हरे रंग का डिस्चार्ज होता है और उसकी महक मछली जैसी होती है। वैजिनल स्वाब से इस बैक्टीरिया के कल्चर से पता कर सकते हैं कि कौन सी बैक्टीरिया की संख्या में बढ़ोत्तरी आयी है। इसका इलाज़ करने के लिए एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ सकती है।

क्लामेडिआ: यह एक तरह की सेक्सुअली ट्रांसमिटेड बीमारी है जो मर्दों और औरतों दोनों को होती है।[5] इसकी वजह एक बैक्टीरिया है जिसका नाम है क्लामेडिआ ट्रंकोमाटिस। यह बैक्टीरिया पुरुषों के उरेथ्रा में और औरतों के सर्विक्स में इन्फेक्शन लाती है। इसके अलावा गले में और रेक्टम में भी इन्फेक्शन हो सकता है। इसके लिए वैजिनल स्वाब टेस्ट करवाना होगा।

गोनोरिआ: यह भी सेक्स से संबंधित बीमारी है जिसके बारे में हर लड़के और लड़की को सावधान रहना चाहिए। अनप्रोटेक्टेड सेक्स की वजह से हो सकता है। अगर इसका टेस्ट करके पता नहीं लगा पाए और जल्दी इलाज़ नहीं किया गया तो बाद में बहुत से कम्प्लीकेशन आ सकते हैं। इसमें भी ग्रीन डिस्चार्ज होता है और थोड़ा खून भी हो सकता है। बहुत ही अधिक दर्द हो सकता है। अगर कभी भी अनप्रोटेक्टेड सेक्स के बाद ऐसा हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। [6] समय पर इसका इलाज़ बेहद जरूरी है।

जेनिटल हर्पीज़: यह भी सेक्स से सम्बंधित बीमारी है और वैजिनल स्वाब टेस्ट के बाद इसका पता लगा सकते हैं।[7] यह हर्पीज़ सिम्पलेक्स वायरस (HSV) की वजह से होती है। इसका इलाज एंटी वाइरल दवाएं हैं। इसका इलाज़ तुरंत करवाना चाहिए। अगर सेक्स के बाद हो तो तुरंत इसका टेस्ट करवाएं।

जेनिटल वार्ट: यह ह्यूमन पप्पीलोना वायरस के एक स्ट्रेन की वजह से होता है। सबको HPV का टीका लगवा लेना चाहिए। इसके अलावा किसी अजनबी के साथ सेक्स के समय कंडोम का प्रयोग जरूरी है। [8] इसको भी वैजिनल स्वाब से पता कर सकते हैं। इसका इलाज़ करने में कई महीने लग सकते हैं। कभी कभी तो इसका पता भी नहीं चलता है।

सिफलिश : यह सेक्स से सम्बंधित एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है।[9] यह बीमारी किसी के सिफ्लिश के जगह के संपर्क में आने से फैलती है जो अक्सर सेक्स के दौरान होता है। ध्यान रहे कि यह बीमारी किश करने से भी हो सकती है अगर किसी को पहले से सिफलिश हो तो इसको भी वैजिनल स्वाब टेस्ट से मालुम कर सकते हैं।

हम सब बीमारी के बारे में नहीं लिख पाए लेकिन मुख्य बीमारियों के बारे में लिखे जिसको हम वैजिनल स्वाब टेस्ट से पता कर सकते हैं। सबसे मुख्य बात है कि बिना प्रोटेक्शन के किसी अजनबी से सेक्स बहुत ही खतरनाक हो सकता है। अगर कोई भी डिस्चार्ज हो या खुजली या सूजन हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें और डॉक्टर को सब बात साफ़ साफ़ बताएं। समय पर इलाज़ बहुत ही जरूरी है।
```
*नोट : हम डॉक्टर नहीं हैं और जो भी लिखे है सिर्फ अपनी जानकारी से लिखे हैं। अगर आपको कोई सिम्प्टम हैं तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।*

*Disclaimer*

```The main motive of sending this post to spread knowledge to all of you our intention is clear to help every one who wants to learn more
If any one who don't like this post kindly skip this post

Note :- we respect all woman & girls we know that our existence is depends on her

कृप्या ध्यान दे!!
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आप सभी तक ज्ञान का प्रसार करने के लिए इस पोस्ट को भेजने का मुख्य उद्देश्य है हम हर उस व्यक्ति की मदद करना चाहते है जो अधिक सीखना चाहता है
अगर कोई इस पोस्ट को पसंद नहीं करता है तो कृपया इस पोस्ट को छोड़ सकता है```

नोट :- हम सभी महिलाओं और लड़कियों का सम्मान करते हैं हम जानते हैं कि हमारा अस्तित्व इन पर ही निर्भर करता है

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e-P@thshala 26/05/2021

*क्‍या भारत में सचमुच प्रतिबंधित हो जाएंगे... Facebook, WhatsApp, Twitter और Instagram, पूछ रहे यहां के लोग*.
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```इंटरनेट मीडिया के महत्‍वपूर्ण प्लेटफॉर्म फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम (Facebook, Twitter, WhatsApp और Instagram) 26 मई 2021 से बैन हो सकते हैं। इसे भारत में बैन किया जा सकता है। ऐसे इंटरनेट मीडिया प्‍लेटफार्म पर यह कार्रवाई केंद्र की नई इंटरमीडियरी गाइडलाइन को लागू नहीं करने के कारण हो सकती है। Facebook, WhatsApp, Twitter और Instagram प्रतिबंध लागू होने की सूचना मात्र से ही यहां के लोगों ने दुखी है।

https://chat.whatsapp.com/EAxM7zFyjGvB4PaRp23CcP

इस बीच Facebook की तरफ से एक बयान आया है कि वो सरकार की नई गाइडलाइन का पूरी तरह पालन करेंगे। नई गाइडलाइन पर उसकी सरकार के साथ बातचीत चल रही है। जबकि Twitter ने नई गाइडलाइन को लागू करने के लिए छह माह का समय मांगा है।
तीन माह पहले जारी हुई थी नई गाइडलाइन
केंद्र सरकार ने फरवरी में नई गाइडलाइन को जारी की थी। इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए यह जरुरी था। इंडियन वर्जन Koo एक मात्र इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म है, जिसने नई गाइडलाइन पालन किया है।

भारत में किसके कितने यूजर्स हैं
भारत में Youtube के 44.8 करोड़, WhatsApp के 53 करोड़, और Facebook के 41 करोड़ यूजर हैं। इंस्टाग्राम के 21 करोड़ क्लाइंट है। वहीं, 1.75 करोड़ Twitter एकाउंट होल्डर हैं। वहीं Koo ऐप के 65 लाख से यूजर्स हैं।
इंटरनेट मीडिया को लेकर नई गाइडलाइन
इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म को यहां नोडल ऑफिसर, रेसिडेंट ग्रीवांस ऑफिसर (इंडिया में बेस्ड) तैनात करना होगा। 15 दिनों के अंदर ओटीटी कंटेंट के बारे में शिकायतों का निवारण करना होगा। एक मंथली रिपोर्ट जारी करनी होगी। शिकायतों और उनके निवारण की जानकारी, कौन सी पोस्ट और कंटेंट को हटाया गया और इसकी वजह। सभी प्लेटफॉर्म के पास इंडिया का फिजिकल पता हो, जो कंपनी के ऐप और वेबसाइट पर दर्ज रहे। शिकायत के 24 घंटे के अंदर आपत्तिजनक कंटेंट को हटाना होगा। कंपनियों को शिकायत निवारण तंत्र रखना होगा। 24 घंटे में शिकायत का पंजीकरण हो साथ ही 15 दिनों में इसका निपटरा करे।

टीचर्स ऑफ बिहार (Teachers of Bihar- The change makers) की भागलपुर District Mentor इशाकचक, भागलपुर निवासी खुशबू कुमारी (शिक्षिका, मध्‍य विद्यालय बलुआचक, जगदीशपुर, भागलपुर) ने कहा कि टीचर्स ऑफ बिहार एक ऐसा प्लेटफार्म है, जिससे लाखों शिक्षक, अभिभावक, बच्चे प्रतिदिन लाभान्वित होते हैं। टीचर्स ऑफ बिहार के सभी कार्यक्रम इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के माध्‍यम से ही प्रसारित की जाती है। बच्चों के शिक्षा का भी ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन ऑनलाइन क्लास Facebook, WhatsApp, Twitter और Instagram के माध्‍यम से लेते हैं। बिहार और देश की उप‍लब्धियों की चर्चा होती है। गौरवशाली अतीत की बातें होती है। आदर्श व्‍यक्तित्‍व को याद किया जाता है। प्रतिदिन कई विषयों पर नई जानकारी दी जाती है। इसलिए इस इंटरनेट मीडिया के प्लेटफार्म पर बैन लगाना उचित नहीं होगा। इस प्‍लेटफार्म पर जो भी कमियां है, उसे दूर कराने के लिए‍ प्रयास किया जाए। सुरक्षा पर पूरा ध्‍यान रखें। गलत और अफवाह फैलाने वाले पोस्‍ट के यूजर पर कार्रवाई हो। Facebook, WhatsApp, Twitter और Instagram भी पूर्वाग्रह से कार्य ना करें। उन्‍होंने कहा कि सरकार इन मुद्दों पर कंपनियों से बात करें। बीच का रास्‍ता निकाले, ना कि प्रतिबंध लगाएं।
मुकुल निशांत (संस्थापक इंडियाबीटस) ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1) में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार बनाया गया, जिसमें हर व्यक्ति को अपनी बात बोलने या रखने का अधिकार दिया जाता है, जिसमें इंटरनेट मीडिया की आज अहम भूमिका है। लेकिन 19(2) में इसे सीमित करने के आधार भी बताए गए हैं। इसलिए दोनों पक्ष हमारे संविधान में है। इसलिए सरकार को चाहिए कि बातचीत कर इसका हल करे, ना कि पूरी तरह से प्रतिबंध लगाए। गलत जानकारी देना, अफवाह फैलाना, मान‍हानि, अदालत की अवमानना आदि करने वालों पर कार्रवाई की जाए। संबंधित इंटरनेट मीडिया प्‍लेटफार्म को भी अपनी पार‍दर्शिता बनाए रखनी चाहिए। Facebook, WhatsApp, Twitter और Instagram भी नियमों का पालन करे। उन्‍होंने उम्‍मीद जताया कि सरकार और संबंधित कंपनी बीच का रास्‍ता निकाल लेगी।
रविश कुमार (संस्थापक एक बिहारी सब पर भारी) ने कहा कि मेरा पेज है इंटरनेट मीडिया पर एक बिहारी सब पे भारी है। जिसे मैं 2009 से चलाता हूं। इसके माध्‍यम से बिहार से जुड़ी हर एक जानकारी लोगों को दी जाती है। साथ साथ यहां की संस्कृति और यहां के त्योहारों को लोगों तक पहुंचाया जाता है। इसलिए यह महत्‍वपूर्ण प्‍लेटफार्म है। इसलिए सरकार इसपर बैन ना लगाकर बातचीत का रास्‍ता निकले।
अररिया के सत्यनारायण साह ने कहा कि फेसबुक और ट्विटर जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म का बंद होना बिल्कुल भी सही नहीं होगा। यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। टीचर्स ऑफ बिहार अपील करता है कि सार्वजनिक हित में फेसबुक, ट्विटर इत्यादि प्लेटफार्म बंद नहीं करें।
बांका के उमाकांत कुमार (टीम लीडर, स्कूल ऑन मोबाइल, टीचर्स ऑफ़ बिहार : द चेंज मेकर्स) ने कहा कि टीचर्स ऑफ बिहार का स्‍कूल ऑन मोबाइल फेसबुक ग्रुप के माध्यम से ही 23 अप्रैल 2021 से वर्ग 5वीं से 10वीं कक्षाओं के बच्चों के लिए फेसबुक लाइव के माध्यम से 50 सरकारी शिक्षक निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है। सरकार को सबसे पहले फेसबुक जैसे प्लेटफार्म वाली व्यवस्था देनी चाहिए, जिसके माध्यम से हजारों बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं हो। बिहार के सरकारी विद्यालयों के बच्चों के हित को ध्यान में रखते हुए फेसबुक जैसे प्लेटफार्म जैसा वैकल्पिक इंतजाम होने तक इसे बंद नहीं किया जाय।
शिक्षक अंजील कुमार ने कहा कि सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्, न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम्। प्रियं च नानृतम् ब्रूयात्, एष धर्मः सनातन:॥ सत्य बोलना चाहिये, प्रिय बोलना चाहिये, सत्य किन्तु अप्रिय नहीं बोलना चाहिये। प्रिय किन्तु असत्य नहीं बोलना चाहिये; यही सनातन धर्म है॥ जो व्यक्ति इसका पालन करते हुए इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। उनके लिए इसका बंद होना दुखदाई है। लेकिन जो व्‍यक्ति इसका प्रयोग दूसरों का मज़ाक उड़ाने के लिए या निचा दिखाने के लिए करते है, वैसे व्यक्ति के लिए इसका बंद किया जाना सामाजिक हित में साबित होगा।
रंजेश सिंह (टीओबी प्रवक्ता, बिहार) ने कहा कि इंटरनेट मीडिया शिक्षा के लिए एक अच्छा उपकरण है। यह कई सामाजिक मुद्दों के लिए जागरूकता पैदा कर सकता है। ऑनलाइन जानकारी तेज़ी से हस्तांतरित होती है, जिसकी मदद से उपयोगकर्ताओं को सूचना तत्काल ही प्राप्त हो जाती हैं। इस कोरोनाकाल मे भी टीओबी ने ऑनलाईन लर्निंग के कई कार्यक्रम चलाये जा रहे है। सरकार इसको बैन ना करे।
तिलकामांझी भागलपुर निवासी मध्य विद्यालय मदरौनी, रंगरा चौक, भागलपुर की शिक्षिका नम्रता मिश्रा ने कहा कि आज फेसबुक और ट्वीटर न केवल एक मनोरंजन या व्यवसाय के केंद्र के रूप में रह गया है। बल्कि मौजूदा हालात को देखते हुए बिहार के साथ पूरे देश में शिक्षा के प्रचार प्रसार का एक अहम ज़रिया बन चुका है। फेसबुक और ट्वीटर का बंद होना बच्चों के साथ शिक्षक और शिक्षा जगत के लिए एक तरह से श्‍वांस का रुक जाना होगा।
कन्या मध्य विद्यालय कुटुंबा औरंगाबाद के प्रधानाध्यापक चन्द्रशेखर प्रसाद साहू ने कहा कि ऐसी खबरें आ रही हैं कि फेसबुक और व्हाट्सएप कुछ अन्‍य इंटरनेट मीडिया के प्‍लेटफार्म भारत में बैन किए जा सकते हैं। अगर, ऐसा होता है तो यह लोगों की अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित होने के समान होगा। यह सूचना संचारण हो या शिक्षण गतिविधि का प्रसारण हर दृष्टि से यह उपयोगी है। फेसबुक, व्हाट्सएप आदि पर बैन नहीं लगाया जाए।

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टीचर्स ऑफ बिहार के इंस्टाग्राम मॉडरेटर मुदित कुमार ने कहा कि महान व्यक्तित्व को इंस्टाग्राम पर सैकड़ों हजारों नहीं, लाखों फॉलोअर्स फॉलो करते हैं और इंस्टाग्राम से लोग बहुत तेजी से पूरी दुनिया में अपनी तस्वीरों के माध्यम से पहुंच सकते हैं। शिक्षा से संबंधित कई उद्देश्यों को हम तेजी से लोगों तक पहुंचाते हैं। अतः सरकार इस पर प्रतिबंध नहीं लगाए।
बौंसी, बांका की शिक्षिका रूबी कुमारी ने कहा कि मैं प्रतिदिन बच्चों को ऑनलाइन तरीकों से विज्ञान पढ़ाती हूं। टीचर्स ऑफ बिहार के फेसबुक ग्रुप स्कूल ऑन मोबाइल के माध्यम से इसका लाइव प्रसारण किया जाता है। बच्चे भी काफी मन लगा कर पढ़ रहे हैं। यदि फेसबुक बंद हो गया तो लॉकडाउन को पढ़ाना बड़ी चुनौती हो जाएगी।
शिवेंद्र प्रकाश सुमन ने कहा कि लाखों शिक्षक अपने नवाचारों को फेसबुक के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। इससे बच्चे और शिक्षक दोनें लाभान्वित होते हैं। ट्वीटर के माध्यम से हमें ncert, scert व अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के गतिविधियों के बारे में पता चलता है। यदि फेसबुक और ट्विटर बंद हो गए तो यह सारी सुविधाएं भी बंद हो जाएंगी। सरकार इस निर्णय पर पर पुन: विचार करे। बातचीत कर बीच का रास्‍ता निकाले।
कोरोना काल में लॉकडाउन लगा हुआ है। सभी सरकारी एवं निजी विद्यालय बंद हैं। बच्चों का शिक्षण कार्य बाधित है। इस विषम परिस्थिति में बिहार के सरकारी विद्यालयों पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक मात्र सहारा लर्निंग कम्युनिटी टीचर्स ऑफ बिहार है। स्कूल ऑन मोबाइल कार्यक्रम फेसबुक के माध्यम से ही संचालित किया जा रहा है। जिससे बच्चे ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यदि फेसबुक बंद हुआ तो ऑनलाइन पढ़ाई बाधित होगी। इतना ही नहीं ट्विटर के माध्यम से भी बिहार के शिक्षक अपनी बातों को सभी विभागों तक संप्रेषित करते थे। इसलिए सरकार को इंटरनेट मीडिया संचालकों से बात करनी चाहिए। और इसका कोई हल निकाला जाए। बैन लगाना उचित नहीं है। - केशव कुमार, प्राथमिक शिक्षक, राजकीय बुनियादी विद्यालय बखरी, प्रखण्ड- मुरौल, जिला- मुजफ्फरपुर।
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24/05/2021

Phd Full Form ! पीएचडी की सम्पूर्ण जानकारी
Phd Full Form : नमस्कार दोस्तों अगर आप इस संकल्प ले लिया है कि आप को शिक्षा के शीर्ष पर पहुंचना है तो आज मैं आपको आपके इस संकल्प में मदद करने जा रहा हूं क्योंकि आज मैं आपको इस लेख में Phd के बारे में जानकारी देने बाला हु। आपको आपके इस संकल्प को पूरा करने में पूरी मदद करेगा इसमें हम पीएचडी से रिलेटेड सारी सारी संभावनाओं पर बात करेंगे जैसे कि पीएचडी क्या है, एडमिशन कैसे हो सकती है , Phd Full Form , Phd ka Full Form ,Phd ka Full Form in English ,Phd ka Full Form in Hindi , Full Form of Phd Degree ,Phd करने के लिए कितनी फ़ीस लगती है। Phd करने के लिए Best Colleges आदि।

Contents of Table
1 Full Form of Phd –
1.1 पीएचडी करने के लिए योग्यता क्या क्या होनी चाहिए।
1.1.1 Phd करने में कितना समय लगता है।
1.1.2 Phd कोर्स करने की फीस क्या है ?
1.1.3 Phd करने के लिए जरूरी बातें।
1.1.4 Best University for Phd in india
1.1.5 पीएचडी Phd की तैयारी कैसे करे।
1.1.6 पीएचडी करने के बाद आप क्या कर सकते है।
Full Form of Phd –
Phd Full Form – Full Form of Phd in English Doctor of Philosophy और Phd Full Form of Phd in Hindi में डॉक्टरेट डिग्री होता है। Phd Degree को शिक्षा के क्षेत्र में एक सम्मानजनक डिग्री होती है। यदि आप कॉलेज टीचर बनने की शौक रखते है तो आपके पास Phd की डिग्री होना जरुरी है। पीएचडी डिग्री होल्डर को रोजगार के बहुत से अबसर होते है।


पीएचडी करने के लिए योग्यता क्या क्या होनी चाहिए।
Phd Full Form – अगर आप Phd करना चाहते हैं इस प्रोग्राम में एडमिशन लेना चाहते हैं तो आपके पास इस Post Graduation की Degree होनी चाहिए है। पीजी में यहां पर आपका एमएससी एमकॉम एमबीए एमसीए डिग्री आती हैं और कुछ अलग भी मास्टर डिग्री है वह भी इसमें आ जाएंगे लेकिन आपको देख लेना है। Post Graduation में 55% अंक होने चाहिए है। कुछ विश्वबिद्यालय में योगयता अलग अलग भी हो सकती है।

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Delhi university से Phd करने के लिए आपके पास M.phil डिग्री होना जरुरी है और आपके पास 2 साल का Research Experice भी होना चाहिए है। तभी आपको Delhi university में Phd के लिए प्रबेश मिल सकता है।

Phd करने में कितना समय लगता है।
Phd Full Form – Course को करने में 2 – 5 बर्ष का समय लगता है। जो लोग अपने पैसे से Phd Course करते है। बह कोशिश करते है। उनका Phd Course 2 साल में पूरा हो जाये। लेकिन जो लोग JRF के थ्रू करते हैं वह प्रयास करते हैं इस कोर्स को उन्हें 5 साल में इसका सर्टिफिकेट मिले। JRF से Phd करने बाले को विश्वबिद्यालय को कम फ़ीस देते है। इसलिए बह कोशिश करते है की समय अधिक ले के अच्छे से शिक्षा को हासिल करे।


Phd कोर्स करने की फीस क्या है ?
Phd Full Form – कोर्स करने की फीस क्या है ? अगर आप JRF के माध्यम से एडमिशन लेते हैं तो आपको एक रुपए भी अपनी पॉकेट से नहीं लगाना पड़ेगा क्योंकि आपको UGC आपको ₹35000 देती है। यदि आप Phd को Net के माध्यम से फिर अन्य माध्यम से Phd कोर्स करते है तो आपको 2 से 3 लाख का खर्चा आ सकता है। Phd कोर्स को करने की सभी university की अलग अलग फ़ीस होती है। इसलिए हम इस लेख में आपको सटीक फ़ीस के बारे में नहीं बता सकते है।

Phd करने के लिए जरूरी बातें।
Phd Full Form – आपने सोच लिया है कि आपने पीएचडी करनी है। उसके लिए आपको दसवीं कक्षा से तैयारी को करना पड़ेगा। आपने जिस भी विषय में Phd करनी है। यह फिर जिस विषय में आपकी रूचि अधिक है। आपको बही विषय +1 में चुनना होगा। उसके बाद को आपको 11बी 12बी और स्नातक सन्नतकोत्तर की शिक्षा उसी विषय में लेनी है। जिस विषय में अपने Phd करनी है। Phd करने से पहले आपको उस विषय में अपनी अच्छी पकड़ बना लेनी है।

परीक्षा की तैयारी के लिए आपको इंटरनेट पर बहुत सामग्री मिल जाएगी। यह फिर आप Books को ले के भी आप परीक्षा की तैयारी कर सकते है। पुराने Question Paper की मदद भी आप ले सकते है।

Best University for Phd in india
Phd Full Form – भारत में पीएचडी करने के लिए बहुत सी university है। पर लेख में आपको सिर्फ उन के बारे में बताउगा जो टॉप है। जहा पर हाई लेवल की शिक्षा दी जाती है।


IIT Delhi – Indian Institute of Technology.
IIT Ahmedabad – Indian Institute of Technology.
JNU Delhi – Jawahar Lal Nehru University.
IIT Mumbai – Indian Institute of Technology.
LPU Jalandhar – Lovely Professional University.
IIT Patna– Indian Institute of Technology.
JMI Delhi – Jamia Millia Islamia.
AMU Alligarh- Aligarh Muslim University.
TISS Mumbai – Tata Institute of Social Sciences.
TIU Kolkata – Techno India University.
IIT Chennai – Indian Institute of Technology.
BU Bangalore – Bangalore University.
SGGST Gurgaon – Shree Guru Govind Singh Tricentenary.
FALU Kurukshetra – Faculty of Art and Languages.
CUSAT Cochin – Cochin University of Science and Technology.
CU Chandigarh – Chandigarh University.
IIT Hyderabad – Indian Institute of Technology.
UCLOU Hyderabad – University College of Law, Osmania.
ASLAU Banglore – Alliance school of Law alliance University.
BITS Pilani – Birla Intitute of Technology and Science.
पीएचडी Phd की तैयारी कैसे करे।
Phd Full Form – शिक्षा के फिल्ड में उच्त्तम डिग्री होती है। उच्त्तम डिग्री को हासिल करने के लिए मेहनत भी आपको उसी लेवल की करनी होगी। इस लेख में आपके साथ कुछ tips शेयर कर रहा हु ,जिन्हे फॉलो करके आप Phd की डिग्री को हासिल कर सकते है।

जिस विषय में Phd करनी है उस विषय को +1 में ही चुन ले।
जिस विषय में Phd करनी है उस विषय को +1 में ही चुन ले।
आपने टीचर माता पिता की सलाह ले।
जिसने पहले ही पीएचडी की है उसकी सलाह ले और उनके सम्पर्क में रहे।
जिस विषय में पीएचडी करनी है उस विषय के हर पहलु का अच्छे से समझने की कोशिश करे।
पीएचडी करने के लिए यूनिवर्सिटी को चुनने से पहले उसके बारे में अच्छे से जांच पड़ताल करे।
पुराने प्रशन पत्रों को मदद ले।
पीएचडी करने के बाद आप क्या कर सकते है।
PHD जानकारी है की आप पीएचडी के बाद किस किस फिल्ड में जॉब कर सकते है।

आप एक प्रोफसर के रूप में कार्य कर सकते है।hd Full Form – ज़ाहिर सी बात है जब आपके पास शिक्षा की उच्तम डिग्री होगी तो आपके पास रोजगार के अबसर भी उतने ही अधिक होंगे। इस लेख में
आप as a Researcher भी जॉब कर सकते है।
इंडस्ट्रियल आर एंड डी लैब प्रोफेशनल्स में जॉब कर सकते है।
बहुत सी कंपनी पीएचडी डिग्री होल्डर को डेवलपमेंट सेंटर्स के लिए हायर करते है।

आज हमने सीखा : पीएचडी की क्या है।Phd Full Form पीएचडी के लिए बेस्ट यूनिवर्सिटी कौन कौन सी है। पीएचडी करने के क्या फयदे है। आपको पीएचडी क्यों करनी चाहिए है आदि।

उम्मीद है की आपको जानकारी पसन्द आई होगी। और जानकारी आपके लिए हेल्पफुल होगी। लेख को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे ताकि जानकारी उन लोगो को मिल सके।

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