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30/09/2025

ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः || 🙏🙏🏵️🏵️☘️☘️
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30/09/2025

ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः || 🙏🙏🏵️🏵️☘️☘️
नवरात्रि के आठवें दिन (अष्टमी) मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व है। नीचे मां सिद्धिदात्री की कथा, उनका स्वरूप, संपूर्ण भजन/मंत्र सहित दिया गया है।

मां सिद्धिदात्री के स्वरूप का वर्णन ||
मां सिद्धिदात्री को चार भुजाओं वाली, कमल के आसन पर विराजमान, एक हाथ में चक्र, दूसरे में गदा, तीसरे में शंख और चौथे हाथ में कमल लिए हुए चित्रित किया जाता है। वे लाल या गुलाबी साड़ी में, सिर पर मुकुट और चेहरे पर दिव्य मुस्कान लिए होती हैं। उनके वाहन सिंह या कमल पुष्प दोनों माने जाते हैं।

कथा ||
मां सिद्धिदात्री को सभी सिद्धियों की दात्री कहा गया है। यह मां दुर्गा का नवां स्वरूप है, जो भक्तों को आठों प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं। देवी पुराण के अनुसार, सृष्टि के प्रारंभ में जब कुछ भी नहीं था, तब मां ने स्वयं को सिद्धिदात्री रूप में प्रकट किया। भगवान शिव ने भी इन्हीं से सिद्धियां प्राप्त कीं, जिससे उनका अर्धनारीश्वर स्वरूप बना।मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। वे कमल के आसन पर विराजती हैं। उनके हाथों में चक्र, गदा, शंख और कमल होता है। भक्तों का विश्वास है कि मां की पूजा से साधक को अष्ट सिद्धियां (अनिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व) प्राप्त होती हैं।

भजन:||

जय सिद्धिदात्री माँ, जय सिद्धिदात्री।
सर्व सिद्धि दो हमें, माँ, जय सिद्धिदात्री॥

कमलासन पर विराजे, चार भुजाओं वाली।
चक्र, गदा, शंख, कमल, रूप है मतवाली॥
देव, ऋषि, मुनि, गंधर्व, करते सदा सेवा।
भक्ति भाव से जो कोई, माँ को करे मेवा॥

जय सिद्धिदात्री माँ, जय सिद्धिदात्री।
सर्व सिद्धि दो हमें, माँ, जय सिद्धिदात्री॥

सिद्धि दो, बुद्धि दो, शक्ति दो हम सबको।
माँ की भक्ति में लग जाए, यह मन हमारा॥
संसार दुखों से भागे, संकट सब मिट जाए।
माँ की कृपा से जीवन, सुख से भर जाए॥

जय सिद्धिदात्री माँ, जय सिद्धिदात्री।
सर्व सिद्धि दो हमें, माँ, जय सिद्धिदात्री॥


Devgram

#दिल्ली

28/09/2025

ॐ कालरात्र्यै नमः॥
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माँ कालरात्रि के कई मंत्र हैं, जिनका प्रयोग उनकी पूजा के दौरान किया जाता है। यहाँ कुछ प्रमुख मंत्र दिए गए हैं:

पूजा का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
बीज मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्यै नमः॥
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
ध्यान मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥
जप के लिए सरल मंत्र
ॐ कालरात्र्यै नमः॥
इन मंत्रों का जाप नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा के दौरान किया जाता है। माना जाता है कि इन मंत्रों के जाप से भय, नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं का नाश होता है।

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Anil Dhruv
Anil Yadav नीरज प्रसाद राय
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Vipin Jha

24/09/2025

जय हो माँ चंद्रघंटा || 🙏🙏🙏🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🌿🌿❄️❄️

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ चंद्रघंटा के दो मुख्य प्रसंग हैं, जिनमें से एक महिषासुर वध से और दूसरा भगवान शिव से उनके विवाह से संबंधित है।
महिषासुर वध की कथा
जब महिषासुर नामक राक्षस का अत्याचार बहुत बढ़ गया, तो उसने देवताओं के राजा इंद्र का सिंहासन छीन लिया और स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। उसके आतंक से परेशान होकर सभी देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास सहायता के लिए पहुँचे। देवताओं की व्यथा सुनकर त्रिदेवों को बहुत क्रोध आया, और उनके मुख से एक तेज ऊर्जा प्रकट हुई। यह ऊर्जा एक देवी के रूप में परिवर्तित हो गई, जिनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित था। इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा गया।
सभी देवताओं ने अपनी-अपनी शक्तियों और अस्त्र-शस्त्रों से माता को सुसज्जित किया:
भगवान शिव ने त्रिशूल दिया।
भगवान विष्णु ने चक्र प्रदान किया।
देवराज इंद्र ने अपना घंटा भेंट किया।
सूर्य देव ने तेज और तलवार दी।
अन्य देवताओं ने भी अपने अस्त्र-शस्त्र दिए।
दिव्य अस्त्रों से सुसज्जित होकर, माँ चंद्रघंटा महिषासुर से युद्ध करने गईं। उनकी घंटे की भयंकर ध्वनि ने राक्षसों को भयभीत कर दिया। माँ और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध हुआ, और अंत में माँ चंद्रघंटा ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई।

शिव विवाह की कथा
एक अन्य कथा के अनुसार, जब देवी पार्वती भगवान शिव से विवाह करने के लिए प्रकट हुईं, तो शिव अपने भयानक रूप (भूत-प्रेत और राक्षसों के साथ) में उनकी बारात लेकर आए। शिव के इस रूप को देखकर पार्वती की माता मैना देवी सहित सभी लोग भयभीत हो गए।
इस स्थिति को देखकर, पार्वती ने स्वयं को माँ चंद्रघंटा के रूप में प्रकट किया, जिनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र था। उन्होंने शिव से अनुरोध किया कि वे एक दूल्हे की तरह मनमोहक रूप धारण करें। पार्वती के कहने पर शिव ने अपना रूप बदला, और तब विवाह संपन्न हुआ।
माँ चंद्रघंटा का यह रूप दर्शाता है कि वह दुष्टों का नाश करने के लिए अत्यंत भयानक हो सकती हैं, लेकिन अपने भक्तों के लिए वह हमेशा शांत और कल्याणकारी हैं।

जय माता।।




#दिल्ली

नीरज प्रसाद राय
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Devgram

23/09/2025

जय माँ शैलपुत्री।
🙏🙏🙏
Day 1 की कथा, कहानी, छवि विवरण और भजन का संपूर्ण हिंदी रूपांतरण नीचे प्रस्तुत है:

माँ शैलपुत्री की कथा

माँ शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री थीं। उनका वाहन वृषभ (बैल) है और वे अपने दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल पुष्प धारण करती हैं। पौराणिक कथा अनुसार, माँ शैलपुत्री का पूर्व जन्म सती के रूप में हुआ था। सती ने भगवान शिव से विवाह किया, लेकिन उनके पिता दक्ष ने शिवजी का अपमान करते हुए यज्ञ में उन्हें आमंत्रित नहीं किया। सती इस अपमान को सहन नहीं कर सकीं और यज्ञ की अग्नि में अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद माँ ने पर्वतराज हिमालय के यहां पुनर्जन्म लिया और वे शैलपुत्री कहलाईं। वे नवरात्रि के प्रथम दिन पूजी जाती हैं|

** छवि का उल्लेख **

माँ शैलपुत्री सफेद वस्त्रों में, वृषभ पर सवार, एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल लिए हुए दर्शाई जाती हैं। उनके माथे पर चंद्रमा सुशोभित रहता है। यह स्वरूप शक्ति, पवित्रता और नए आरंभ का प्रतीक हैं|




#दिल्ली

23/09/2025

माँ ब्रह्मचारिणी की कथा (नवरात्रि का दूसरा दिन) ||

नवरात्रि के दूसरे दिन हम माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं, जो तप, संयम और भक्ति की प्रतीक हैं। ये माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं, जिनका जीवन हमें धैर्य और आत्मसंयम की प्रेरणा देता है।
माँ ब्रह्मचारिणी ने राजा हिमवान की पुत्री सती के रूप में जन्म लिया। उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। वर्षों तक जंगलों में रहकर उन्होंने फल-फूल खाकर और फिर निर्जल रहकर तप किया। उनके हाथों में जपमाला और कमंडलु होता है, और वे सफेद वस्त्रों में शांत मुद्रा में विराजमान रहती हैं।
उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी स्वीकार किया। माँ ब्रह्मचारिणी हमें सिखाती हैं कि सच्ची शक्ति धैर्य, संयम और भक्ति में होती है।

🖼️ चित्र संदर्भ
माँ ब्रह्मचारिणी की एक सुंदर छवि देखने के लिए आप Rasoi Shop के ब्लॉग पर जा सकते हैं। इस चित्र में माँ का शांत स्वरूप, सफेद वस्त्र और दिव्य आभा दर्शाई गई है।

🎶 भजन संदर्भ
माँ ब्रह्मचारिणी की भक्ति में डूबने के लिए यह भजन सुनें, जिसे चेतना शुक्ला ने गाया है और संगीत महेश प्रभाकर द्वारा दिया गया है। यह भजन माँ की कथा को भावपूर्ण स्वर में प्रस्तुत करता है।
भजन की एक पंक्ति:
“जय माँ ब्रह्मचारिणी, ब्रह्मा को दिया ग्यान।
नवरात्रे के दुसरे दिन सारे करते ध्यान॥”

यह पंक्तियाँ माँ की ज्ञान और ध्यान की शक्ति को दर्शाती हैं।

🙏 पूजा विधि
- आज का रंग: सफेद – शांति और पवित्रता का प्रतीक।
- प्रसाद: मिश्री और फल अर्पित करें।
- मंत्र: “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः”

माँ ब्रह्मचारिणी आपको धैर्य, स्पष्टता और अटूट भक्ति का आशीर्वाद दें। उनकी कथा हमें याद दिलाती है कि कठिन रास्ते भी ईश्वर की कृपा तक पहुँचते हैं, यदि हम श्रद्धा और तप से उन्हें अपनाएं।
अगर आप चाहें तो मैं माँ ब्रह्मचारिणी पर आधारित एक छोटा सा ध्यान या प्रार्थना भी रच सकता हूँ। बताइए, आपकी रुचि किसमें है?


#दिल्ली



नीरज प्रसाद राय
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22/09/2025

जय अम्बे मैया ||
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Date Day Goddess Color Significance
22-Sep-25 Day 1 Maa Shailputri White Purity, peace, and new beginnings
23-Sep-25 Day 2 Maa Brahmacharini Red Love, passion, and strength
24-Sep-25 Day 3 Maa Chandraghanta Royal Blue Divine energy and stability
25-Sep-25 Day 4 Maa Kushmanda Yellow Cheer and joy
26-Sep-25 Day 5 Maa Skandamata Green Harmony, fertility, and growth
27-Sep-25 Day 6 Maa Katyayani Grey Strength and balance
28-Sep-25 Day 7 Maa Kaalratri Orange Energy, enthusiasm, and warmth
29-Sep-25 Day 8 Maa Maha Gauri Peacock Green Beauty, grace, and positivity
30-Sep-25 Day 9 Maa Siddhidatri Pink Love and kindness




#दिल्ली

15/09/2025

Sad but it's the real truth of life.

11/09/2025

बारिश के मौसम में गालियों का क्या हुआ बुरा हाल।

05/09/2025

बाद 🌊🌊🌊 का पानी बुराड़ी पुस्ते के किनारे तक आगया है।
सभी लोगों की खेती जलमग्न हो गई है।😞

29/07/2025

Har Har Mhadev

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