राहगीर

राहगीर राहगीर..~.. mere_zajbat.._..

🚩🚩.... जय राजपूताना....🚩🚩

16/04/2025

पानी की समस्या
संघर्ष.......✨
देश में विकास की लहर किधर दौड़ रही हैं........🤔
थार में आज भी वही समस्याएं हैं.... और हमारे नेता जी बोल रहे हमारा देश आगे बढ़ रहा है, विकास हो रहा हैं।

09/08/2024

म्हाने घणो सुहाणो लागे जी, प्यारो राजस्थान।
रंगीलो राजस्थान, अलबेलो राजस्थान।
म्हाने घणो सुहाणो …………………………।
ऊँचा-ऊँचा टीबा माथे, ऊँटा रो ओषाण।
नागौरी बळद्या दौड़े हे सारा हिन्दुस्थान।
म्हाने घणो सुहाणो ……………………….।
उदयपुर झीलां री नगरी, जैपरियो गणगौर।
भड़कीलो अजमेर अठै है, बांको गढ चित्तौड़।
म्हाने घणो सुहाणो …………………………।
मकराणा को भाटो धोळो, सांभर लूण की खान।
आमेर री शिला देवी, ल्यायो राज मान।
म्हाने घणो सुहाणो …………………………..।
रुणीचा रो वीर रामदेव, जाणे हिन्दुस्थान।

अजमेर के ख्वाजा बाबा, पुष्कर रो स्नान।
म्हाने घणो सुहाणो …………………………।
मीरां रानी महल छोडियो, पन्ना रो बलिदान।
जौहर में ज्वाला बन चमकी, पदमण कर स्नान।
म्हाने घणो सुहाणो …………………………।

जय जय राजस्थान 🚩🚩

07/08/2024

जय महाराणा प्रताप ⚔️🚩
जय मेवाड़ 🚩

#राजपूतानाशौर्यविरासत #जयभवानी

लार्ड डलहौजी की राज्य हड़पने की नीति के चलते, ब्रिटिशों ने निःसंतान लक्ष्मीबाई को उनका उत्तराधिकारी गोद लेने की अनुमति न...
07/07/2024

लार्ड डलहौजी की राज्य हड़पने की नीति के चलते, ब्रिटिशों ने निःसंतान लक्ष्मीबाई को उनका उत्तराधिकारी गोद लेने की अनुमति नहीं दी, क्योंकि वे ऐसा करके राज्य को अपने नियंत्रण में लाना चाहते थे। हालांकि, ब्रिटिश की इस कार्रवाई के विरोध में रानी के सारी सेना, उसके सेनानायक और झांसी के लोग रानी के साथ लामबंद हो गये और उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बजाय ब्रिटिशों के ख़िलाफ़ हथियार उठाने का संकल्प लिया। अप्रैल, 1858 के दौरान, लक्ष्मीबाई ने झांसी के किले के भीतर से, अपनी सेना का नेतृत्व किया और ब्रिटिश और उनके स्थानीय सहयोगियों द्वारा किये कई हमलों को नाकाम कर दिया। रानी के सेनानायकों में से एक दूल्हेराव ने उसे धोखा दिया और किले का एक संरक्षित द्वार ब्रिटिश सेना के लिए खोल दिया। जब किले का पतन निश्चित हो गया तो रानी के सेनापतियों और झलकारी बाई ने उन्हें कुछ सैनिकों के साथ किला छोड़कर भागने की सलाह दी। रानी अपने घोड़े पर बैठ अपने कुछ विश्वस्त सैनिकों के साथ झांसी से दूर निकल गईं। झलकारी बाई का पति पूरन किले की रक्षा करते हुए शहीद हो गया लेकिन झलकारी ने बजाय अपने पति की मृत्यु का शोक मनाने के, ब्रिटिशों को धोखा देने की एक योजना बनाई। झलकारी ने लक्ष्मीबाई की तरह कपड़े पहने और झांसी की सेना की कमान अपने हाथ मे ले ली। जिसके बाद वह किले के बाहर निकल ब्रिटिश जनरल ह्यूग रोज़ के शिविर मे उससे मिलने पहँची। ब्रिटिश शिविर में पहँचने पर उसने चिल्लाकर कहा कि वो जनरल ह्यूग रोज़ से मिलना चाहती है। रोज़ और उसके सैनिक प्रसन्न थे कि न सिर्फ उन्होंने झांसी पर क़ब्ज़ा कर लिया है बल्कि जीवित रानी भी उनके कब्ज़े में है। जनरल ह्यूग रोज़ जो उसे रानी ही समझ रहा था, ने झलकारी बाई से पूछा कि उसके साथ क्या किया जाना चाहिए? तो उसने दृढ़ता के साथ कहा, मुझे फाँसी दो। जनरल ह्यूग रोज़ झलकारी का साहस और उसकी नेतृत्व क्षमता से बहुत प्रभावित हुआ, और झलकारी बाई को रिहा कर दिया गया। इसके विपरीत कुछ इतिहासकार मानते हैं कि झलकारी इस युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुई। एक बुंदेलखंड किंवदंती है कि झलकारी के इस उत्तर से जनरल ह्यूग रोज़ दंग रह गया और उसने कहा कि "यदि भारत की 1% महिलायें भी उसके जैसी हो जायें तो ब्रिटिशों को जल्दी ही भारत छोड़ना होगा"।[2]

सम्मान
भारत सरकार ने 22 जुलाई, 2001 में झलकारी बाई के सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया है। उनकी प्रतिमा और एक स्मारक अजमेर, राजस्थान में निर्माणाधीन है, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उनकी एक प्रतिमा आगरा में स्थापित की गयी है, साथ ही उनके नाम से लखनऊ में एक धर्मार्थ चिकित्सालय भी शुरु किया गया है।

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