23/03/2025
रट्टा मारने के नुकसान:
1. समझने की क्षमता कम हो जाती है – रट्टा मारने से छात्र विषय की गहराई को नहीं समझ पाते और केवल शब्दों को याद रखते हैं।
2. याद किया हुआ जल्दी भूल सकते हैं – बिना समझे याद की गई चीजें जल्दी दिमाग से निकल जाती हैं और लंबे समय तक नहीं टिकतीं।
3. नवाचार (Innovation) और रचनात्मकता (Creativity) घट जाती है – अगर छात्र सिर्फ याद करने पर ध्यान देंगे, तो वे नए विचार और समाधान निकालने में कमजोर हो जाएंगे।
4. प्रयोगात्मक (Practical) विषयों में दिक्कत होती है – गणित, विज्ञान, और तकनीकी विषयों में सिर्फ रट्टा लगाने से सफलता नहीं मिलती, बल्कि उनका सही प्रयोग भी आना चाहिए।
5. तनाव और डर बढ़ सकता है – जब छात्र बिना समझे चीजें याद करने की कोशिश करते हैं, तो वे जल्दी भूलने लगते हैं, जिससे परीक्षा के समय तनाव और घबराहट बढ़ जाती है।
6. लंबे समय तक ज्ञान नहीं रहता – रट्टा मारकर पढ़ी गई चीजें आमतौर पर परीक्षा के बाद भूल जाती हैं, इसलिए यह स्थायी ज्ञान देने में विफल रहता है।
रट्टा मारना कुछ स्थितियों में मददगार हो सकता है,(जैसे:परीक्षा में अच्छे नंबर लाने में मदद करता है)
लेकिन यह दीर्घकालिक ज्ञान और समझ के लिए अच्छा तरीका नहीं है। बेहतर होगा कि हम समझने और व्यावहारिक रूप से सीखने की आदत डालें, जिससे हम किसी भी विषय में गहराई तक जा सकें और उसे अच्छे से याद रख सके ।
दोस्तो आज हमारे गांव में एक प्रचलन काफी तेजी के साथ बढ़ रही है , विद्यार्थियों से रट्टा मरवाने की ताकि उस कोचिंग संस्थान का नाम हो
उसमें विद्यार्थियों के मानसिक विकास, स्वास्थ्य और तनाव काफी बढ़ जाती है , और तो और उस तनाव के कारण अपना बचपना भूल कर वो 8 - 10 घंटों तक रट्टा मरता है,
रट्टा न मारने पर मास्टर साहब डंडा और प्रेशर देकर रटवाएगा इसलिए बेचारे करे तो करे क्या मजबूरी है 😐
इसमें हमारे कुछ अभिभावक का भी अहम योगदान है ,उनको सीखने से मतलब नहीं रहता है बस 5 से 6 घंटा कोचिंग क्लासेज में बच्चो को देखना चाहते है।
तो हमारा ये प्रयास होना चाहिए कि इसको रोके और बच्चो के concept based learning, visualisation techniques, practicing और application ,से सीखने की आदत डालें, ताकि विषय को गहराई से समझ सकें।
आप अगर चाहते है कि हमारे बच्चे कम से कम, साइंस और मैथ्स जैसे विषयों में रट्टा न मारे तो #शिक्षणम् कोचिंग क्लासेज में आज ही नामांकन करवाए
धन्यवाद् 🙏🙏