13/02/2023
देना नईं अब उनको बोसा माथे पर,
जब से देखा गैर का टीका माथे पर!
जब भी याद करूं तो रोना आता है,
कैसे उसने होंठ रखा था माथे पर!
संतोष 'साग़र'
रांची के नज़दीक वाले दोस्तों का स्वागत है 💐
स्वागत है आप सब का हमारे विशेष कार्यक्रम 'काव्य के रंग गज़लों के संग' में जहाँ आप काव्य सम्मेलन और मुशायरे का एक अलग स्वाद महसूस करेंगे। कार्यक्रम का अंदाज परम्परागत काव्य सम्मेलनों की निश्चित परिपाठी से थोड़ा अलग होगा।
कार्यक्रम की विशेष शोभा बढ़ाएंगे आरा (बिहार) से काव्य Pedia के संस्थापक 'अंकित मौर्या ' ( )। मंच पर अंकित मौर्या के साथ होंगे झारखंड हज़ारीबाग से छंद विशेषज्ञ और ओज रस के युवा कवि 'पुष्कर कुमार पुष्प' ( )। आध्यात्मिक नगरी वाराणसी BHU से आएंगे 'शिवांशु सिंह'( ) और
'आयुष कश्यप ' ( )। झारखंड साहित्य अकादमी के संस्थापकर 'राधेश्याम तिवारी' (.in )राँची से। लोहरदगा से 'आकाश गिरि' (._.gar ), रामगढ़ से 'संतोष सागर' ( ), रांची से होंगे 'आक़िब खान' ( ), 'रंजन कुमार बरनवाल' ( )गिरिडीह से , दुमका से होंगे 'अक्षय आदित्य' ( )और आपके सामने राँची से अपनी मखमली गज़ल परोसेंगी 'नसरीन क़मर' ( )।
मंच संचालक के रूप में कार्यक्रम में आपकों बांधने की जिम्मेदारी होगी हज़ारीबाग के 'आतिश आलोक' () की।
झारखंड साहित्य अकादमी और काव्य pedia के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस कार्यक्रम में आप सब सादर आमंत्रित हैं।