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वैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों के कुछ-कुछ देर पर झपकियां लेने से सीखने की क्षमता और याददाश्त बढ़ती है.12 महीने तक के 2...
21/01/2015

वैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों के कुछ-कुछ देर पर झपकियां लेने से सीखने की क्षमता और याददाश्त बढ़ती है.

12 महीने तक के 216 बच्चों पर यह शोध किया गया. पता चला कि जब वे लंबी नींद नहीं लेते तो नई चीज़ें सीखने में असमर्थ होते हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ शेफ़ील्ड का शोध दल बिस्तर पर जाने से पहले पढ़ने की अहमियत पर ज़ोर देता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक़ जीवन के शुरुआती दौर में नींद का महत्व अधिक उम्र में नींद लेने की तुलना में ज़्यादा होता है.

यह शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़ में छपा.
संबंध

शोध के दौरान बच्चों को तीन तरह के नए काम सिखाए गए और अगले दिन उन्हें दोबारा वो काम करने को दिया गया.

उन बच्चों ने औसतन एक से ज़्यादा काम दोहराए जिन्होंने काम सीखने के बाद पर्याप्त नींद ली थी.

कम नींद लेने वालों को एक भी काम दोहराने में सफलता नहीं मिली.

पिछले साल वैज्ञानिकों ने पता लगाया था कि रात की अच्छी नींद का याददाश्त तेज़ होने से क्या संबंध है.

उन्होंने नींद में बनने वाली दिमाग की कोशिका के बीच का संबंध देखने में कामयाबी हासिल की थी.

14/12/2014

SEE

14/12/2014

भारतीय मूल के वैज्ञानिकों के एक दल के नेतृत्व में नासा के क्यूरोसिटी रोवर ने मंगल पर पानी की मौजूदगी के नए साक्ष्य खोज निकाले हैं.

इन साक्ष्यों से ये संकेत मिलते हैं कि सौरमंडल में पृथ्वी के साथ सबसे अधिक समानता रखने वाला लाल ग्रह सूक्ष्मीजीवीय जीवन के लिए उपयुक्त था.

नासा की ओर से मंगल पर भेजे गए क्यूरोसिटी नामक रोवर द्वारा ली गई तस्वीरें और जुटाए गए आंकड़े दर्शाते हैं कि गेल क्रेटर के तल में कभी एक झील या कई झीलों के रूप में नदियां बहती थीं.

गेल क्रेटर किसी अंतरिक्षीय चट्टान के कारण मंगल की सतह पर बना एक बड़ा गड्ढा है.

नासा ने कहा कि गेल क्रेटर में क्यूरोसिटी की खोजों की व्याख्या कहती है कि प्राचीन काल के मंगल पर एक ऐसा वातावरण था, जो लाल ग्रह के विभिन्न स्थानों पर पुरानी झीलों का निर्माण कर सकता था.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि मंगल के माउंट शार्प का निर्माण कई लाख वर्षों तक एक बड़ी झील के तल में तलछट जमा होने कारण हुआ था.

नासा की जेट प्रपल्शन लेबोरेटरी में क्यूरोसिटी के डिप्टी प्रोजेक्ट साइंटिस्ट भारतीय मूल के अमेरिकी अश्विन वासावदा ने कहा, ‘‘यदि माउंट शार्प के बारे में हमारी परिकल्पनाएं कायम रहती हैं तो इनसे उन धारणाओं के लिए चुनौती पैदा होगी, जिनके अनुसार, गर्माहट और नमी वाली स्थितियां क्षणिक, स्थानीय थीं या फिर मंगल की जमीन के नीचे ही मौजूद थीं’’.

शोधकर्ताओं ने कहा कि सतह से ऊपर निकले चट्टानी अंशों की मोटाई दर्शाती है कि झील-या झीलें लाखों सालों तक गेल क्रेटर के 154 किलोमीटर गहरे तल में रही होंगी. हालांकि झील संभवत: सूख गई होगी और फिर कई बार पुन: भर गई होगी.

उन्होंने कहा, ‘‘एक परिपूर्ण व्याख्या यह है कि मंगल के प्राचीन और सघन वातावरण के कारण तापमान बढ़कर हिमकारी ताप से ऊपर पहुंच गया लेकिन अब तक हमें यह नहीं पता कि वातावरण ने यह किया कैसे?’’

माउंट शार्प लगभग पांच किलोमीटर ऊंचा है और इसके निचले हिस्से में सैंकड़ों चट्टानी परतें हैं.

एक बयान में नासा ने कहा कि इस परतदार पर्वत का एक क्रेटर में होना शोधकर्ताओं के लिए एक चुनौतीपूर्ण सवाल बना हुआ है.

क्यूरोसिटी के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट और कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर जॉन ग्रोटजिंगर ने कहा, ‘‘हम माउंट शार्प का रहस्य सुलझाने के लिए काम कर रहे हैं’’.

उन्होंने कहा, ‘‘जहां, इस समय एक पर्वत है, हो सकता है एक समय वहां झीलें रही हों’’.

क्यूरोसिटी इस समय माउंट शार्प की निचली तलछट परतों का अध्ययन कर रहा है.

नदियां झील में रेत और मिट्टी को लेकर आईं, जिसके चलते नदी के मुहानों पर जमाव हो गया और डेल्टा बन गए. यह ठीक वैसे ही है, जैसे पृथ्वी पर नदियों के मुहानों पर पाए जाते हैं.

क्यूरोसिटी साइंस के दल के सदस्य और लंदन के इंपीरियल कॉलेज के संजीव गुप्ता ने कहा, ‘‘हमें अवसादी शैल मिली हैं, जो एक के ऊपर एक प्राचीन डेल्टाओं के ढेर का संकेत देती हैं’’.

उन्होंने कहा, ‘‘क्यूरोसिटी नदियों की बहुलता वाले पर्यावरण से निकलकर झीलों की बहुलता वाले पर्यावरण में प्रवेश कर गयां’’.

14/12/2014

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने अपने जियो सिंक्रोनस (भू-समकालिक) उपग्रह प्रक्षेपण यान मार्क-3 (एलवीएम-3 एक्स अभियान) का 18 दिसंबर को प्रक्षेपण करने का निर्णय किया है.

इसरो ने कहा था कि वह 15 से 20 दिसंबर के बीच आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसका एक प्रायोगिक परीक्षण करेगा.

जीएसएलवी मार्क-3 इसरो का अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है.

सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर इसरो ने कहा है ‘‘इसरो का एलवीएम-3 एक्स यान 18 दिसंबर को छोड़ा जायेगा.

यह अपने साथ सक्रिय ठोस बूस्टर, तरल कोर स्टेज और एक क्रायो स्टेज ले जाएगा.’’

इसरो ने बताया कि यह प्रायोगिक उप कक्षा उड़ान में क्रू मॉड्यूल एटमॉस्फेरिक री एंट्री एक्सपेरिमेंट ले जाएगा.

29/10/2014

अक्सर छात्रों से बातचीत के दौरान मुझसे यह सवाल पूछा जाता है कि साइंस की पढ़ाई किस तरह की जानी चाहिए? अपने कई सहकर्मियों, दोस्तों और शिक्षकों के साथ इस विषय पर चर्चा के बाद मैं एक अच्छा साइंस स्टूडेंट बनने के लिए जरूरी बिन्दुओं को खोज पाया हूं।

वैज्ञानिक सोच
वैज्ञानिक सोच का अर्थ है हर घटना से जुड़े सभी पहलुओं को खोजना और उन्हें समझने का प्रयास करना। एक अच्छा वैज्ञानिक बनने के लिए यह जरूरी है कि किसी वस्तु या घटना को देखते ही आपका दिमाग ‘क्या’,‘क्यों’ और ‘कैसे’ की खोज में जुट जाए। हालांकि यह आदत बनाने के लिए लगातार अभ्यास जरूरी है। यदि बचपन से ही दिमाग को इसी तरह सोचने की आदत डाल दी जाए तो धीरे-धीरे वह हर घटना को वैज्ञानिक नजरिए से देखना सीख जाता है ।

गणितीय व्याख्या का महत्व
किसी भी वैज्ञानिक व्याख्या का गणितीय प्रारूप देखने में चाहे उलझन भरा लगे, लेकिन साइंस की दृष्टि से इसके महत्व को नकारा नहीं जा सकता। उदाहरण के तौर पर, यह कहना और समझना ज्यादा आसान है कि कोई चीज़ झूल रही है या ऑसिलेट (दोलन) कर रही है बजाय इसके कि वह विस्थापन के अनुक्रमानुपाती बल के प्रभाव से गति कर रही है। लेकिन हम यह भी देख सकते हैं कि जहां पहला कथन पूरी जानकारी नहीं देता वहीं दूसरे वक्तव्य के जरिए आप दोलन की सम्पूर्ण गणितीय व्याख्या समझ सकते हैं। साइंस को समझने के लिए नॉलेज है जरूरी

विज्ञान आयामों, संबंधों और उनके बीच परस्पर क्रियाओं का अध्ययन है। तथ्यों को याद रखने के बजाय एक दूसरे पर निर्भर विभिन्न पैरामीटर्स के मध्य संबंधों को समझना ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह जानना भी अहम है कि किस तरह कुछ क्वांटिटीज अलग-अलग वस्तुओं से अलग-अलग ढंग से जुड़ती हैं। यह समझने का अर्थ ही विज्ञान को समझना है। हालांकि यह कला किसी भी साइंस सिलेबस में औपचारिक रूप से नहीं सिखाई जाती, क्योंकि इन पारस्परिक क्रियाओं को समझने के लिए आपके पास मूलभूत जानकारी अच्छी मात्रा में होनी चाहिए। साइंस में शिक्षा इन संबंधों को समझने से जुड़ी है।

गुत्थियां सुलझाएं
कोई भी वैज्ञानिक प्रश्न महज किसी गणितीय मान या समीकरण के हल तक सीमित नहीं होता। यह किसी स्थिति विशेष में काम करने वाले विज्ञान के नियम की जड़ तक पहुंचने की समझ से जुड़ा है। साइंस से जुड़ी समस्याओं को सुलझाना भी विज्ञान के नियमों की गहरी समझ देता है। उदाहरण के तौर पर हम जानते हैं कि सबसे छोटी जैविक इकाई वायरस और सबसे छोटी भौतिक इकाई परमाणु है, लेकिन यदि आपके सामने यह प्रश्न रखा जाए कि इन दोनों में से तुलनात्मक रूप से छोटा कौन है तो आप इस तथ्य पर विचार करेंगे कि एक वायरस कई मिलियन परमाणुओं से बना होता है और इस निष्कर्ष तक पहुंचेंगे कि एक वायरस एक परमाणु की तुलना में लाखों गुना बड़ा है। इस तरह सवालों के जवाब तलाशते हुए आप नए तथ्यों की खोज कर अपने ज्ञान का विस्तार कर सकते हैं।

07/10/2014

दुनिया का सबसे बड़ा टेलीस्कोप बनाएंगे भारत समेत 5 देश दुनिया का सबसे बड़ा टेलीस्कोप बनाएंगे भारत समेत 5 देश

भारत, अमेरिका, चीन, जापान और कनाडा हवाई द्वीप पर बनने वाले दुनिया के सबसे बड़े टेलीस्कोप पर काम शुरू करेंगे। इस टेलीस्कोप द्वारा 500 किलोमीटर की दूरी से एक सिक्के जितनी छोटी चीज भी देखी जा सकेगी।

07/10/2014

मानव का आंतरिक GPS खोजने वाले 3 वैज्ञानिकों को नोबेल मानव का आंतरिक GPS खोजने वाले 3 वैज्ञानिकों को नोबेल

मानव मस्तिष्क की एक जटिल गुत्थी सुलझाने वाले तीन वैज्ञानिकों इंग्लैंड के जॉन ओ कीफे और नॉर्वे के वैज्ञानिक दंपति मे-ब्रिट मोजर एवं एडवर्ड मोजर को संयुक्त रूप से इस वर्ष चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

en joy physics
05/07/2014

en joy physics

03/07/2014

खराब मौसम के कारण प्रक्षेपण टालने के बाद नासा ने उड़न-तश्तरी जैसा एक परीक्षण वाहन उस प्रौद्योगिकी का पता लगाने के लिए आकाश में भेज ही दिया.

वाशिंगटन से मिली जानकारी के अनुसार इसकी मदद से एक दिन मंगल पर जाया जा सकता है.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने अपना ‘लो डेन्सिटी सुपरसोनिक डेसिलिरेटर’ वाहन प्रक्षेपित किया है. इसमें परीक्षण के लिए दो नए उपकरण लगाए गए हैं. ये क्र मश: गति को कम करने के लिए एक इन्फ्लेटेबल उपकरण और उतरने के लिए ‘विशाल पैराशूट’ हैं.

हीलियम से भरे विशाल गुब्बारे में छतरीनुमा एलडीएसडी को लगाया गया है और इसे हवाई द्वीप के कौएई से प्रक्षेपित किया गया है.

समझा जाता है कि दो-तीन घटों में यह उस ऊंचाई पर पहुंच जाएगा जहां परीक्षण किया जा सके. मंगल पर उतरने के लिए नासा 1970 के दशक से पैराशूट पण्राली का उपयोग करने के लिए प्रयासरत है लेकिन भारी अंतरिक्षयान और नए उपकरण की जरूरत है.

नई प्रौद्योगिकी का परीक्षण बहुत ही ऊंचाई पर होना है. इतनी ऊंचाई पर वायुमंडल मंगल ग्रह के ऊपरी वायुमंडल के समान ही है.

खराब मौसम के कारण प्रक्षेपण टालने के बाद नासा ने उड़न-तश्तरी जैसा एक परीक्षण वाहन उस प्रौद्योगिकी का पता लगाने के लिए आकाश में भेज ही दिया.

वाशिंगटन से मिली जानकारी के अनुसार इसकी मदद से एक दिन मंगल पर जाया जा सकता है.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने अपना ‘लो डेन्सिटी सुपरसोनिक डेसिलिरेटर’ वाहन प्रक्षेपित किया है. इसमें परीक्षण के लिए दो नए उपकरण लगाए गए हैं. ये क्र मश: गति को कम करने के लिए एक इन्फ्लेटेबल उपकरण और उतरने के लिए ‘विशाल पैराशूट’ हैं.

हीलियम से भरे विशाल गुब्बारे में छतरीनुमा एलडीएसडी को लगाया गया है और इसे हवाई द्वीप के कौएई से प्रक्षेपित किया गया है.

समझा जाता है कि दो-तीन घटों में यह उस ऊंचाई पर पहुंच जाएगा जहां परीक्षण किया जा सके. मंगल पर उतरने के लिए नासा 1970 के दशक से पैराशूट पण्राली का उपयोग करने के लिए प्रयासरत है लेकिन भारी अंतरिक्षयान और नए उपकरण की जरूरत है.

नई प्रौद्योगिकी का परीक्षण बहुत ही ऊंचाई पर होना है. इतनी ऊंचाई पर वायुमंडल मंगल ग्रह के ऊपरी वायुमंडल के समान ही है.

03/07/2014

भौतिक सुख-सुविधाओं के चक्कर में पिछले 100 वर्ष में पृथ्वी को जितना नुकसान पहुंचा है उतना कई हजार वर्ष में नहीं हुआ होगा. प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुध दोहन से ये अब समाप्ति की कगार पर हैं. बीएचयू के पर्यावरणविदों के अनुसार जलवायु पर्वितन से प्राकृतिक आपदाएं बढ़ी हैं. दुनिया को बचाना है तो अर्थ-डे यानी पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) पर धरती को याद करना होगा. भारत ही नहीं पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, गड़बड़ाते पर्यावरण से जूझ रही है. प्रकृति की संरक्षा व सुरक्षा की दिशा में दूरदृष्टि की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति का वरदान मिल सके. भारत के प्राचीन ग्रंथों और वेद-पुराणों में पर्यावरण संरक्षण का उल्लेख है. राष्ट्रगान और गायत्री मंत्र में भी प्रकृति की अराधना की गयी है.
भौतिक सुख-सुविधाओं के चक्कर में पिछले 100 वर्ष में पृथ्वी को जितना नुकसान पहुंचा है उतना कई हजार वर्ष में नहीं हुआ होगा. प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुध दोहन से ये अब समाप्ति की कगार पर हैं. बीएचयू के पर्यावरणविदों के अनुसार जलवायु पर्वितन से प्राकृतिक आपदाएं बढ़ी हैं. दुनिया को बचाना है तो अर्थ-डे यानी पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) पर धरती को याद करना होगा. भारत ही नहीं पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, गड़बड़ाते पर्यावरण से जूझ रही है. प्रकृति की संरक्षा व सुरक्षा की दिशा में दूरदृष्टि की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति का वरदान मिल सके. भारत के प्राचीन ग्रंथों और वेद-पुराणों में पर्यावरण संरक्षण का उल्लेख है. राष्ट्रगान और गायत्री मंत्र में भी प्रकृति की अराधना की गयी है.

03/07/2014

अगर अपने बच्चों से करते हैं प्यार तो उन्हें न डराए
बच्चों को डराना-धमकाना

अगर आप अपने बच्चों को ज्यादा-डराते धमकाते हैं तो इसकी सजा उन्हें प्रौढावस्था में भुगतनी पड़ेगी.

बचपन में जिन बच्चों को अधिक डराया और धमकाया जाता है इससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है और प्रौढावस्था में इन बच्चों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

ब्रिटेन के मनोचिकित्सकों के अनुसार जिन बच्चों को बचपन में अधिक डांट-फटकार का सामना करना पडता है और जिनके सहपाठी उन्हें पीटते हैं. ऐसे बच्चों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य न केवल प्रभावित होता है. बल्कि 50 वर्ष की आयु में इन्हें अनेक दिक्कतों का सामना करना पडता है.

ब्रिटेन के किंग्स कालेज लन्दन के सायकिएट्री संस्थान के मनोचिकित्सक यूताकीजावा की अगुवाई में किए गए इस अध्ययन की रिपोर्ट अमेरिकन जर्नल आफ सायकिएट्री में प्रकाशित हुई.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संबंध में 40 वर्ष पूर्व कराए गए अध्ययन आज भी उतने ही प्रासंगिक है.

अगर अपने बच्चों से करते हैं प्यार तो उन्हें न डराए
बच्चों को डराना-धमकाना

अगर आप अपने बच्चों को ज्यादा-डराते धमकाते हैं तो इसकी सजा उन्हें प्रौढावस्था में भुगतनी पड़ेगी.

बचपन में जिन बच्चों को अधिक डराया और धमकाया जाता है इससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है और प्रौढावस्था में इन बच्चों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

ब्रिटेन के मनोचिकित्सकों के अनुसार जिन बच्चों को बचपन में अधिक डांट-फटकार का सामना करना पडता है और जिनके सहपाठी उन्हें पीटते हैं. ऐसे बच्चों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य न केवल प्रभावित होता है. बल्कि 50 वर्ष की आयु में इन्हें अनेक दिक्कतों का सामना करना पडता है.

ब्रिटेन के किंग्स कालेज लन्दन के सायकिएट्री संस्थान के मनोचिकित्सक यूताकीजावा की अगुवाई में किए गए इस अध्ययन की रिपोर्ट अमेरिकन जर्नल आफ सायकिएट्री में प्रकाशित हुई.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संबंध में 40 वर्ष पूर्व कराए गए अध्ययन आज भी उतने ही प्रासंगिक है.

03/07/2014

भारतीय मूल के भौतिकविज्ञानी प्रोफेसर तेजिंदर विर्डी को विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने ‘नाइटहुड’ सम्मान से सम्मानित किया.

प्रोफेसर तेजिंदर विर्डी को ‘लार्ज हैड्रोन कोलाइडर’ पर किए गए उनके कार्य के लिए जाना जाता है.

शुक्रवार शाम जारी महारानी के जन्मदिन सम्मान सूची के अनुसार विज्ञान के क्षेत्र में सेवा के लिए इंपीरियल कॉलेज, लंदन के विर्डी का नाम ‘नाइट बैचलर’ पुरस्कार के लिए नामित है.

उनके बारे में प्रशस्ति पत्र में लिखा था कि प्रोफेसर विर्डी ब्रिटेन के सबसे प्रतिष्ठित भौतिक विज्ञानियों में से एक हैं. उनका कॉम्पैक्ट म्यूऑन सोलेन्वायड (सीएमएस) प्रयोग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है.

सीएमएस प्रयोग के तहत जेनेवा में हुए लार्ज हैड्रोन कोलाइडर में आण्विक भौतिकी के क्षेत्र में अच्छे परिणाम देखने को मिले थे. इनमें हिग्स बोसोन अथवा गॉड पार्टिकल की अभूतपूर्व खोज शामिल थी. हिग्स बोसॉन या गॉड पार्टिकल किसी भी अणु में भार पैदा करता है.

प्रशस्ति पत्र के मुताबिक कि भौतिकविज्ञान में अपने अभिनव कार्य के अलावा वह विज्ञान के महान प्रचारक और विज्ञान को बढ़ावा देने वाले रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने एशिया और अफ्रीका में शिक्षा को भी बढ़ावा दिया.

प्रोफेसर विर्डी के अलावा हॉलीवुड अभिनेत्री और संयुक्त राष्ट्र में विशेष दूत एंजेलिना जोली का नाम भी ऑनररी डेम (नाइटहुड सम्मान की तरह स्त्रियों को दिया जाने वाला सम्मान) की सूची में शामिल था. युद्ध क्षेत्रों में यौन हिंसा के खिलाफ किए गए उनके कार्य के लिए यह सम्मान उन्हें ब्रिटेन की महारानी द्वितीय द्वारा प्रदान किया गया.


भारतीय मूल के भौतिकविज्ञानी प्रोफेसर तेजिंदर विर्डी को विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने ‘नाइटहुड’ सम्मान से सम्मानित किया.

प्रोफेसर तेजिंदर विर्डी को ‘लार्ज हैड्रोन कोलाइडर’ पर किए गए उनके कार्य के लिए जाना जाता है.

शुक्रवार शाम जारी महारानी के जन्मदिन सम्मान सूची के अनुसार विज्ञान के क्षेत्र में सेवा के लिए इंपीरियल कॉलेज, लंदन के विर्डी का नाम ‘नाइट बैचलर’ पुरस्कार के लिए नामित है.

उनके बारे में प्रशस्ति पत्र में लिखा था कि प्रोफेसर विर्डी ब्रिटेन के सबसे प्रतिष्ठित भौतिक विज्ञानियों में से एक हैं. उनका कॉम्पैक्ट म्यूऑन सोलेन्वायड (सीएमएस) प्रयोग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है.

सीएमएस प्रयोग के तहत जेनेवा में हुए लार्ज हैड्रोन कोलाइडर में आण्विक भौतिकी के क्षेत्र में अच्छे परिणाम देखने को मिले थे. इनमें हिग्स बोसोन अथवा गॉड पार्टिकल की अभूतपूर्व खोज शामिल थी. हिग्स बोसॉन या गॉड पार्टिकल किसी भी अणु में भार पैदा करता है.

प्रशस्ति पत्र के मुताबिक कि भौतिकविज्ञान में अपने अभिनव कार्य के अलावा वह विज्ञान के महान प्रचारक और विज्ञान को बढ़ावा देने वाले रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने एशिया और अफ्रीका में शिक्षा को भी बढ़ावा दिया.

प्रोफेसर विर्डी के अलावा हॉलीवुड अभिनेत्री और संयुक्त राष्ट्र में विशेष दूत एंजेलिना जोली का नाम भी ऑनररी डेम (नाइटहुड सम्मान की तरह स्त्रियों को दिया जाने वाला सम्मान) की सूची में शामिल था. युद्ध क्षेत्रों में यौन हिंसा के खिलाफ किए गए उनके कार्य के लिए यह सम्मान उन्हें ब्रिटेन की महारानी द्वितीय द्वारा प्रदान किया गया.

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