JRD State University

JRD State University Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from JRD State University, College & University, Chitrakoot, Chitrakoot.

25/08/2026

आज दिनांक 25/08/2026 को बारिश जैसे चुनौतिपूर्ण मौसम के बावजूद BCA प्रथम वर्ष कि कक्षा मे विद्यार्थियों की उत्साह पूर्ण उपस्थिति उनकी पढ़ाईं के प्रति लगन, अनुशासन और जिम्मेदारी को दर्शाता है

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम एवं जगद गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय ,चित्रकूट के संस्कृत एवं हिंदी विभ...
21/08/2026

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम एवं जगद गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय ,चित्रकूट के संस्कृत एवं हिंदी विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के चतुर्थ दिवस पर प्रथम सत्र में विभिन्न विद्वानों ने अपने शोध परक आलेख प्रस्तुत किए। इस अवसर पर कार्यशाला के चल रहे सफलतापूर्वक सत्रों की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शिशिर कुमार पांडेय ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा के नए सोपानों का उदय होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुल सचिव मधुरेन्द्र कुमार पर्वत भी उपस्थित रहे। प्रथम सत्र में कार्यशाला को संबोधित करते हुए शिक्षा संकाय के सहायक आचार्य डॉ विश्वेश दुबे ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण इस विश्वविद्यालय के संस्थापक जगद्गुरु स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी हैं ।
इनसे प्रेरणा लेकर भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। मनोविज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ अमिता त्रिपाठी ने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से हम भारतीय ज्ञान परंपरा में नये मनोवैज्ञानिक तत्वों को जानकर उन्हें अपने शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया में सम्मिलित कर सकते हैं। अध्यक्षता करते हुए अतर्रा स्नातकोत्तर महाविद्यालय के डॉ तरुण कुमार शर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा उत्कृष्ट ज्ञान परंपरा है जिसका प्रयोग कर हम नवीन शिक्षा प्रणाली को अधिक मूल्यपरक एवं जनउपयोगी बना सकते हैं। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर मनोज कुमार द्विवेदी ने संस्कृति एवं संस्कृत के उत्थान के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा को उपयोगी बताया। डॉ शिव शंकर शुक्ला ने भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से वेद एवं उपनिषदों के ज्ञान को वर्तमान समय की आवश्यकता बताई। द्वितीय तकनीकी सत्र में सदानंद डिग्री कॉलेज फतेहपुर के ईश नारायण द्विवेदी ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और भारतीय शिक्षा नीतियां निश्चित रूप से मानव की हर समस्या को हल करने में सफल है। आवश्यकता इस बात की है कि भारतीय ज्ञान परंपरा को सरल रूप में स्पष्ट किया जाए।
डॉ हरिकांत मिश्र ने भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से वेद एवं उपनिषदों के ज्ञान को जन उपयोगी बनाने पर बल दिया और उसे वैचारिक क्रांति का आधार बताया। डॉ निहार रंजन मिश्र , अधिष्ठाता ,शिक्षा संकाय ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समावेशी शिक्षा के लिए उपयोगी बताते हुए इसके माध्यम से जन सामान्य को मूल्यपरक शिक्षा देने हेतु आवश्यक बताया। राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ सुशील त्रिपाठी ने भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से ज्ञान के शाश्वत स्वरूप को समझने तथा उसे विद्यार्थियों तक प्रेषित किए जाने हेतु आवश्यक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन पर बल दिया। इतिहास विभाग की सहायक आचार्य डॉ प्रतिमा कुमारी शुक्ला ने भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से वैश्विक ज्ञान को जन सामान्य तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया। ललित कला विभाग के की डॉ संध्या पांडेय ने भारतीय ज्ञान परंपरा को कला परंपरा के माध्यम से सम्प्रेषित करने पर बल दिया तथा उन्होंने बताया कि सृजनात्मकता का उत्कृष्ट स्वरूप भारतीय ज्ञान परंपरा में देखने को मिलता है। कार्यशाला का संचालन संस्कृत विभाग की प्रभारी डॉ प्रमिला मिश्रा के द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ शांत कुमार चतुर्वेदी ने किया। इस अवसर पर शोध छात्र देवदत्त, रूबी शुक्ला, इच्छा उपाध्याय तथा सुनील कुमार ने अपने शोध परक आलेख प्रस्तुत किए।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय एवं उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में चल र...
20/08/2026

जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय एवं उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे पंच दिवसीय राष्ट्रीय प्रमाणपत्रीय कार्यशाला के तीसरे दिन प्रथम सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शिशिर कुमार पांडेय ने भारतीय ज्ञान परंपरा, जीवन मूल्यों के रूप में सतत रूप से जीवन दर्शन का अंग बनाने पर बल दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुल सचिव मधुरेन्द्र कुमार पर्वत भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वेद विभाग के आचार्य प्रोफेसर महेंद्र पांडेय ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में उच्चारण एवं 16 संस्कार का विशेष महत्व है ।उन्होंने प्रत्येक संस्कार के विषय में विस्तार से चर्चा करते हुए इसे आज के जीवन मूल्यों से जोड़कर अपने जीवन शैली में अपनाने पर विशेष बल दिया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे जयदेव संस्कृत महाविद्यालय के व्याकरण विभाग के आचार्य डॉ विजय पयासी ने आत्मा एवं ब्रह्म के विषय में अपना उद्बोधन प्रस्तुत किया। डॉ सुधा त्रिपाठी ने उपनिषदों में जीवन मूल्यों के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किया।
द्वितीय तकनीकी सत्र में विशिष्ट स्थिति डॉ सुनीता श्रीवास्तव ने भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं के योगदान पर चर्चा करते हुए बताया कि अनेकों युगो से महिलाओं ने भारतीय ज्ञान परंपराओं के उत्थान एवं सम्मेलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका रखी है। उनके सिद्धांतों को अपनाकर ही वर्तमान महिला सशक्तिकरण की नियम को सशक्त बनाया जा सकता है। इस सत्र की अध्यक्षता कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ महेंद्र कुमार उपाध्याय ने की और उन्होंने वास्तु कला पर अपना भावपूर्ण उद्बोधन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर शाश्वत त्रिपाठी ,अंजू लता, शीला देवी ,गरिमा देवी ,नीतू सिंह ,डॉ सुमन देवी ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।कार्यक्रम का संचालन कार्यशाला की संयोजिका डॉ प्रमिला मिश्रा तथा सहसंयोजक डॉ शांत कुमार चतुर्वेदी ने किया।

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम लखनऊ  तथा जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय चित्रकूट के  में चल रही पंचद...
19/08/2026

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम लखनऊ तथा जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय चित्रकूट के में चल रही पंचदिवसीय राष्ट्रीय प्रमाणपत्रीय कार्यशाला के द्वितीय दिवस में विद्वानों ने अपने विचारों से भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन एवं अनुप्रयोग के विभिन्न आयामों को विस्तार से स्पष्ट किया।
प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए महर्षि पाणिनि विश्वविद्यालय, उज्जैन के प्रो तुलसीदास परौहा ने कहा कि भारतीय शिक्षा के प्रत्येक पक्ष पर भारतीय ज्ञान परंपरा का व्यापक प्रभाव है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के व्यापक क्रियान्वयन हेतु आवश्यक है कि भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुप्रयोगों को समझ कर उसे पाठ्यक्रम का आवश्यक अंग बनाया जाए।प्रतापगढ़ से पधारी डॉ रेनू देवी ने कहा कि बाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड में भारतीय ज्ञान परंपरा के उत्कृष्ट तत्वों का समावेश है। द्वितीय सत्र में विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के सहायक आचार्य डॉ दुर्गेश कुमार मिश्र ने विस्तार से भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पक्षों को स्पष्ट करते हुए कहा कि बिना चारित्रिक विकास और नैतिक शिक्षा के भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुप्रयोग का महत्व नहीं रह जाता है अतः आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन इस ढंग से करें कि उसे व्यवहार में उतार कर एक आदर्श समाज की स्थापना कर सकें। विशिष्ट अतिथि शिक्षा संकाय के सहायक आचार्य डॉ रजनीश कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की जडे केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के अनेक देशों तक प्राचीन काल से ही फैली हैं उन्होंने अपने शोध परक आलेख में अनेक स्थानों का उदाहरण देते हुए बताया कि अनेकों स्थानों पर भारतीय ज्ञान परंपरा के उदाहरण हमें इस रूप में मिलते हैं कि उससे प्रतीत होता है कि भारतीय संस्कृति इन देशों में किस रूप में फैली हुई थी। संगीत विभाग के डॉ गोपाल कुमार मिश्र ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वर्तमान में उपयोगिता एवं अंतर्दृष्टि को विकसित करने पर विशेष बल दिया। भाषा संकाय के अधिष्ठाता डॉ शशिकांत त्रिपाठी ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा के शाश्वत स्वरूप को स्पष्ट किया। सत्र की अध्यक्षता करते हुए अधिष्ठाता डॉ विनोद कुमार मिश्र ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा प्राचीन काल से ही नहीं बल्कि वर्तमान में भी प्रासंगिक है। उन्होंने मूल्य परक शिक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के तत्वों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ मधुरेन्द्र कुमार पर्वत, इतिहास विभाग की सहायक आचार्य डॉ प्रतिमा कुमारी शुक्ला,डॉ सुमेरीलाल, डॉ रवि प्रकाश चौधरी सहित विश्वविद्यालय परिवार के शोधार्थी ,विद्वान एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ शांत कुमार चतुर्वेदी ने किया तथा कार्यशाला की विभिन्न गतिविधियों का क्रियान्वयन संयोजिका डॉ प्रमिला मिश्रा ने किया। कार्य शाला के उत्कृष्ट आयोजन हेतु विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शिशिर कुमार पांडेय ने शुभ आशीर्वाद प्रदान किया।

उत्तर प्रदेश संस्कृत  संस्थानम लखनऊ एवं जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में पां...
18/08/2026

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम लखनऊ एवं जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिवसीय राष्ट्रीय प्रमाणपत्रीय कार्यशाला :वेद, उपनिषद एवं भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन और अनुप्रयोग विषय पर उद्घाटन सत्र भव्यता पूर्णढंग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महर्षि पाणिनि विश्वविद्यालय उज्जैन के आचार्य प्रो तुलसीदास परौहा उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम पढ़े हुए ज्ञान को अपने आचरण में लाएं ।भारतीय वांग्मय में ज्ञान और आचरण का जो विशुद्ध प्रयोग है वह और कहीं देखने को नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम इस आधार पर निर्मित किया जाना चाहिए कि जन सामान्य तक भारतीय संस्कृति के मूल अनुप्रयोग एवं उसके अध्ययन सामग्री का सम्यक रूप से समावेश हो सके। उन्होंने उत्तम नागरिकों की तैयार करने की आधारशिला के रूप में गुरुकुलों का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि गुरुकुल के माध्यम से ही भगवान श्री कृष्ण व भगवान श्री राम उत्तम नागरिक के रूप में युगों से प्रतिष्ठित हैं।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शिशिर कुमार पांडेय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमको धर्म से अनुप्राणित बनाती हैं अर्थात प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म और संस्कृति को जानना अनिवार्य होना चाहिए । आज व्यक्ति मनोविकारों से इसलिए ग्रसित हो रहा है क्योंकि उसे भारतीय ज्ञान परंपरा के मौलिक स्वरुप का ज्ञान ही नहीं है। प्रकृति एवं पर्यावरण की उत्तम शिक्षा प्रत्येक भारतीय वांग्मय में निहित है। अतः आवश्यकता इस बात की है कि उसे अध्ययन और अनुप्रयोग के द्वारा व्यक्ति तक पहुंचाया जाए। विषय प्रवर्तन करते हुए संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि वेद उपनिषद के अतिरिक्त आयुर्वेद, चिकित्सा शास्त्र , बाइनरी अंक पद्धति आज भी हमारी भारतीय वांग्मय का भाग है ।इनके द्वारा भी हम भारतीय ज्ञान परंपरा का निरंतर प्रसार होता है।उन्होंने कहा कि उपनिषद आत्मिक ज्ञान का प्रकाश करते हैं तथा वेदों के द्वारा प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन करके हम जीवन उपयोग का सही परिचय देते हैं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के निजी सचिव रमापति मिश्र, हमीरपुर से पधारे प्रोफेसर उमाशंकर त्रिपाठी, अधिष्ठाता डॉ महेंद्र कुमार उपाध्याय, डॉ अमित अग्निहोत्री ,डॉ निहार रंजन मिश्र, डॉ रमा सोनी,डॉ आनंद कुमार ,डॉ नीतू तिवारी, डॉ रवि प्रकाश शुक्ल, डॉ सुनीता श्रीवास्तव, डॉ दलीप कुमार ,डॉ दुर्गेश कुमार मिश्र, डॉ संध्या पांडेय, डॉ सुशील त्रिपाठी,डॉ हरिकांत मिश्रा ,डॉ रजनीश कुमार सिंह, डॉ भविष्या माथुर , सूर्य प्रकाश मिश्र , डॉ सुमेरी लाल ,डॉ रवि प्रकाश चौधरी,सहित विश्वविद्यालय परिवार के समस्त सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन संस्कृत विभाग की प्रभारी डॉ प्रमिला मिश्रा तथा धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ शांत कुमार चतुर्वेदी ने किया।

15/08/2026

जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) में 80वाँ स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। समारोह प्रातः 8:00 बजे प्रारंभ हुआ, जिसमें माननीय कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पाण्डेय ने ध्वजारोहण किया। राष्ट्रगान के पश्चात कुलपति जी ने स्वतंत्रता दिवस का उद्घोषण किया और उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। तत्पश्चात समस्त उपस्थित लोगों ने राष्ट्रगीत "वन्देमातरम" का संयुक्त गायन किया। विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर समारोह की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में कुलसचिव श्री मधुरेन्द्र कुमार पर्वत सहित विश्वविद्यालय का समूचा परिवार उपस्थित रहा।

14/08/2026
जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट द्वारा चित्रकूट जनपद की चयनित 10 ग्राम पंचायतों में जीरो प...
09/08/2026

जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट द्वारा चित्रकूट जनपद की चयनित 10 ग्राम पंचायतों में जीरो पॉवर्टी मिशन के अंतर्गत गरीबी उन्मूलन एवं पात्र परिवारों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से व्यापक सर्वेक्षण अभियान संचालित किया जा रहा है।

माननीय कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रत्येक शनिवार को चयनित ग्राम पंचायतों में भ्रमण कर पात्र परिवारों का सर्वेक्षण कर रहे हैं। इसी क्रम में आज विश्वविद्यालय की सात सदस्यीय टीम ने विकासखंड कर्वी की ग्राम पंचायत सुदिनपुर एवं घुरेटनपुर में पहुंचकर जीरो पॉवर्टी अभियान के अंतर्गत सर्वेक्षण किया।

सर्वेक्षण के दौरान ग्रामीण परिवारों से उनकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति से संबंधित आवश्यक जानकारी एकत्रित की गई तथा पात्र परिवारों को शासन द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। टीम द्वारा यह भी प्रयास किया गया कि पात्र परिवारों को उनकी आवश्यकता एवं पात्रता के अनुरूप संबंधित योजनाओं का लाभ प्राप्त कराने की दिशा में आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सके।

आज के ग्राम भ्रमण एवं सर्वेक्षण दल में डॉ. प्रदीप कुमार गोंड, डॉ. रवि प्रकाश चौधरी, डॉ. घनश्याम पाल, डॉ. बजरंगी सिंह, डॉ. श्रुति मिश्रा, डॉ. जसप्रीत कौर एवं श्री मूलचंद सम्मिलित रहे। टीम ने ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों से संवाद स्थापित करते हुए अभियान के उद्देश्यों की जानकारी दी और आवश्यक आंकड़ों एवं व्यक्तिगत विवरणों का संकलन किया।

इस अभियान का मार्गदर्शन विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री मधुरेंद्र पर्वत द्वारा किया जा रहा है, जबकि जीरो पॉवर्टी मिशन के नोडल अधिकारी डॉ. शशिकांत त्रिपाठी के नेतृत्व में अभियान की गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय का यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर एवं पात्र परिवारों की पहचान कर उन्हें शासन की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने तथा गरीबी-मुक्त ग्राम पंचायतों की दिशा में प्रभावी योगदान देने के उद्देश्य से निरंतर जारी रहेगा।

Address

Chitrakoot
Chitrakoot
210204

Opening Hours

Monday 10am - 5am
Tuesday 10am - 5am
Wednesday 10am - 5am
Thursday 10am - 5am
Friday 10am - 5am
Saturday 10am - 5am

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when JRD State University posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share