18/08/2026
उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम लखनऊ एवं जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिवसीय राष्ट्रीय प्रमाणपत्रीय कार्यशाला :वेद, उपनिषद एवं भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन और अनुप्रयोग विषय पर उद्घाटन सत्र भव्यता पूर्णढंग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महर्षि पाणिनि विश्वविद्यालय उज्जैन के आचार्य प्रो तुलसीदास परौहा उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम पढ़े हुए ज्ञान को अपने आचरण में लाएं ।भारतीय वांग्मय में ज्ञान और आचरण का जो विशुद्ध प्रयोग है वह और कहीं देखने को नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम इस आधार पर निर्मित किया जाना चाहिए कि जन सामान्य तक भारतीय संस्कृति के मूल अनुप्रयोग एवं उसके अध्ययन सामग्री का सम्यक रूप से समावेश हो सके। उन्होंने उत्तम नागरिकों की तैयार करने की आधारशिला के रूप में गुरुकुलों का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि गुरुकुल के माध्यम से ही भगवान श्री कृष्ण व भगवान श्री राम उत्तम नागरिक के रूप में युगों से प्रतिष्ठित हैं।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शिशिर कुमार पांडेय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमको धर्म से अनुप्राणित बनाती हैं अर्थात प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म और संस्कृति को जानना अनिवार्य होना चाहिए । आज व्यक्ति मनोविकारों से इसलिए ग्रसित हो रहा है क्योंकि उसे भारतीय ज्ञान परंपरा के मौलिक स्वरुप का ज्ञान ही नहीं है। प्रकृति एवं पर्यावरण की उत्तम शिक्षा प्रत्येक भारतीय वांग्मय में निहित है। अतः आवश्यकता इस बात की है कि उसे अध्ययन और अनुप्रयोग के द्वारा व्यक्ति तक पहुंचाया जाए। विषय प्रवर्तन करते हुए संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि वेद उपनिषद के अतिरिक्त आयुर्वेद, चिकित्सा शास्त्र , बाइनरी अंक पद्धति आज भी हमारी भारतीय वांग्मय का भाग है ।इनके द्वारा भी हम भारतीय ज्ञान परंपरा का निरंतर प्रसार होता है।उन्होंने कहा कि उपनिषद आत्मिक ज्ञान का प्रकाश करते हैं तथा वेदों के द्वारा प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन करके हम जीवन उपयोग का सही परिचय देते हैं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के निजी सचिव रमापति मिश्र, हमीरपुर से पधारे प्रोफेसर उमाशंकर त्रिपाठी, अधिष्ठाता डॉ महेंद्र कुमार उपाध्याय, डॉ अमित अग्निहोत्री ,डॉ निहार रंजन मिश्र, डॉ रमा सोनी,डॉ आनंद कुमार ,डॉ नीतू तिवारी, डॉ रवि प्रकाश शुक्ल, डॉ सुनीता श्रीवास्तव, डॉ दलीप कुमार ,डॉ दुर्गेश कुमार मिश्र, डॉ संध्या पांडेय, डॉ सुशील त्रिपाठी,डॉ हरिकांत मिश्रा ,डॉ रजनीश कुमार सिंह, डॉ भविष्या माथुर , सूर्य प्रकाश मिश्र , डॉ सुमेरी लाल ,डॉ रवि प्रकाश चौधरी,सहित विश्वविद्यालय परिवार के समस्त सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन संस्कृत विभाग की प्रभारी डॉ प्रमिला मिश्रा तथा धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ शांत कुमार चतुर्वेदी ने किया।