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25/09/2026
आज 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के 76वें जन्मदिवस के अवसर पर देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शु...
17/09/2026

आज 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के 76वें जन्मदिवस के अवसर पर देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत की गई है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवस पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में ‘सेवा संकल्प’ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवस के अवसर पर आज जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश में ‘सेवा संकल्प’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो शिशिर कुमार पाण्डेय जी, कुलसचिव श्री मधुरेन्द्र कुमार पर्वत जी तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न अधिकारीगण उपस्थित रहे। दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से सेवा, समर्पण, सकारात्मकता एवं राष्ट्रहित के संकल्प को अभिव्यक्त किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवस पर उनके स्वस्थ, दीर्घायु एवं सफल जीवन की मंगलकामना की तथा राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के प्रति समर्पण की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय दिव्यांगजन के शिक्षा, कौशल-विकास, आत्मनिर्भरता एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समर्पित संस्थान है। विश्वविद्यालय का मूल उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को सक्षम, आत्मनिर्भर एवं जागरूक नागरिक के रूप में विकसित करना है। कार्यक्रम का वातावरण गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण रहा। उपस्थित सभी अधिकारियों एवं विश्वविद्यालय परिवार ने सेवा और समाजहित के कार्यों में सक्रिय सहभागिता का संकल्प लिया।

06/09/2026
25/08/2026

आज दिनांक 25/08/2026 को बारिश जैसे चुनौतिपूर्ण मौसम के बावजूद BCA प्रथम वर्ष कि कक्षा मे विद्यार्थियों की उत्साह पूर्ण उपस्थिति उनकी पढ़ाईं के प्रति लगन, अनुशासन और जिम्मेदारी को दर्शाता है

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम एवं जगद गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय ,चित्रकूट के संस्कृत एवं हिंदी विभ...
21/08/2026

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम एवं जगद गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय ,चित्रकूट के संस्कृत एवं हिंदी विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के चतुर्थ दिवस पर प्रथम सत्र में विभिन्न विद्वानों ने अपने शोध परक आलेख प्रस्तुत किए। इस अवसर पर कार्यशाला के चल रहे सफलतापूर्वक सत्रों की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शिशिर कुमार पांडेय ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा के नए सोपानों का उदय होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुल सचिव मधुरेन्द्र कुमार पर्वत भी उपस्थित रहे। प्रथम सत्र में कार्यशाला को संबोधित करते हुए शिक्षा संकाय के सहायक आचार्य डॉ विश्वेश दुबे ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण इस विश्वविद्यालय के संस्थापक जगद्गुरु स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी हैं ।
इनसे प्रेरणा लेकर भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। मनोविज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ अमिता त्रिपाठी ने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से हम भारतीय ज्ञान परंपरा में नये मनोवैज्ञानिक तत्वों को जानकर उन्हें अपने शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया में सम्मिलित कर सकते हैं। अध्यक्षता करते हुए अतर्रा स्नातकोत्तर महाविद्यालय के डॉ तरुण कुमार शर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा उत्कृष्ट ज्ञान परंपरा है जिसका प्रयोग कर हम नवीन शिक्षा प्रणाली को अधिक मूल्यपरक एवं जनउपयोगी बना सकते हैं। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर मनोज कुमार द्विवेदी ने संस्कृति एवं संस्कृत के उत्थान के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा को उपयोगी बताया। डॉ शिव शंकर शुक्ला ने भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से वेद एवं उपनिषदों के ज्ञान को वर्तमान समय की आवश्यकता बताई। द्वितीय तकनीकी सत्र में सदानंद डिग्री कॉलेज फतेहपुर के ईश नारायण द्विवेदी ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और भारतीय शिक्षा नीतियां निश्चित रूप से मानव की हर समस्या को हल करने में सफल है। आवश्यकता इस बात की है कि भारतीय ज्ञान परंपरा को सरल रूप में स्पष्ट किया जाए।
डॉ हरिकांत मिश्र ने भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से वेद एवं उपनिषदों के ज्ञान को जन उपयोगी बनाने पर बल दिया और उसे वैचारिक क्रांति का आधार बताया। डॉ निहार रंजन मिश्र , अधिष्ठाता ,शिक्षा संकाय ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समावेशी शिक्षा के लिए उपयोगी बताते हुए इसके माध्यम से जन सामान्य को मूल्यपरक शिक्षा देने हेतु आवश्यक बताया। राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ सुशील त्रिपाठी ने भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से ज्ञान के शाश्वत स्वरूप को समझने तथा उसे विद्यार्थियों तक प्रेषित किए जाने हेतु आवश्यक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन पर बल दिया। इतिहास विभाग की सहायक आचार्य डॉ प्रतिमा कुमारी शुक्ला ने भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से वैश्विक ज्ञान को जन सामान्य तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया। ललित कला विभाग के की डॉ संध्या पांडेय ने भारतीय ज्ञान परंपरा को कला परंपरा के माध्यम से सम्प्रेषित करने पर बल दिया तथा उन्होंने बताया कि सृजनात्मकता का उत्कृष्ट स्वरूप भारतीय ज्ञान परंपरा में देखने को मिलता है। कार्यशाला का संचालन संस्कृत विभाग की प्रभारी डॉ प्रमिला मिश्रा के द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ शांत कुमार चतुर्वेदी ने किया। इस अवसर पर शोध छात्र देवदत्त, रूबी शुक्ला, इच्छा उपाध्याय तथा सुनील कुमार ने अपने शोध परक आलेख प्रस्तुत किए।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय एवं उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में चल र...
20/08/2026

जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय एवं उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे पंच दिवसीय राष्ट्रीय प्रमाणपत्रीय कार्यशाला के तीसरे दिन प्रथम सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शिशिर कुमार पांडेय ने भारतीय ज्ञान परंपरा, जीवन मूल्यों के रूप में सतत रूप से जीवन दर्शन का अंग बनाने पर बल दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुल सचिव मधुरेन्द्र कुमार पर्वत भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वेद विभाग के आचार्य प्रोफेसर महेंद्र पांडेय ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में उच्चारण एवं 16 संस्कार का विशेष महत्व है ।उन्होंने प्रत्येक संस्कार के विषय में विस्तार से चर्चा करते हुए इसे आज के जीवन मूल्यों से जोड़कर अपने जीवन शैली में अपनाने पर विशेष बल दिया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे जयदेव संस्कृत महाविद्यालय के व्याकरण विभाग के आचार्य डॉ विजय पयासी ने आत्मा एवं ब्रह्म के विषय में अपना उद्बोधन प्रस्तुत किया। डॉ सुधा त्रिपाठी ने उपनिषदों में जीवन मूल्यों के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किया।
द्वितीय तकनीकी सत्र में विशिष्ट स्थिति डॉ सुनीता श्रीवास्तव ने भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं के योगदान पर चर्चा करते हुए बताया कि अनेकों युगो से महिलाओं ने भारतीय ज्ञान परंपराओं के उत्थान एवं सम्मेलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका रखी है। उनके सिद्धांतों को अपनाकर ही वर्तमान महिला सशक्तिकरण की नियम को सशक्त बनाया जा सकता है। इस सत्र की अध्यक्षता कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ महेंद्र कुमार उपाध्याय ने की और उन्होंने वास्तु कला पर अपना भावपूर्ण उद्बोधन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर शाश्वत त्रिपाठी ,अंजू लता, शीला देवी ,गरिमा देवी ,नीतू सिंह ,डॉ सुमन देवी ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।कार्यक्रम का संचालन कार्यशाला की संयोजिका डॉ प्रमिला मिश्रा तथा सहसंयोजक डॉ शांत कुमार चतुर्वेदी ने किया।

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