28/12/2025
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28/12/2025
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) आमतौर पर 25 दिसंबर के आसपास से साल के अंत तक छुट्टी पर रहते हैं। इसका कारण और प्रभाव नीचे दिए गए हैं
वैश्विक छुट्टियाँ: अमेरिका और यूरोप जैसे पश्चिमी देशों में 25 दिसंबर (क्रिसमस) से लेकर 1 जनवरी (न्यू ईयर) तक का समय छुट्टियों का होता है। चूंकि अधिकांश FIIs इन्हीं देशों से संचालित होते हैं, इसलिए उनके फंड मैनेजर और ट्रेडर्स इस दौरान सक्रिय नहीं रहते।
कम ट्रेडिंग वॉल्यूम: इस अवधि के दौरान भारतीय शेयर बाजार में FIIs की भागीदारी काफी कम हो जाती है। इससे बाजार में वॉल्यूम घट जाता है, जिसके कारण छोटी खरीद-बिक्री से भी कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव (volatility) देखने को मिल सकता है।
वर्ष के अंत की स्थिति (Year-end Adjustments): छुट्टी पर जाने से पहले, कई FIIs अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करते हैं या 'प्रॉफिट बुकिंग' (मुनाफावसूली) करते हैं।
भारतीय बाजार की स्थिति: 2025 में, भारतीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE और BSE) 25 दिसंबर (गुरुवार) को क्रिसमस के अवसर पर बंद रहेंगे। इसके बाद 26 दिसंबर को बाजार खुलेगा, लेकिन वैश्विक छुट्टी के कारण FIIs की गतिविधि सीमित रहने की उम्मीद है।
ध्यान दें: FIIs की अनुपस्थिति में अक्सर घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) बाजार को संभालने या दिशा देने का काम करते हैं।
Trading
ट्रेडिंग की दुनिया का सबसे बड़ा Paradox यही है कि इंसान प्रॉफिट से डरता है और लॉस से उम्मीद रखता है। जब स्क्रीन पर ट्रेड Profit में आता है तो ट्रेडर को डर लगने लगता है कि कहीं यह पैसा वापस न चला जाए इसलिए वह उसे तुरंत काट लेता है। लेकिन जब ट्रेड Loss में जाता है तो उसे उम्मीद जगती है कि अभी भाव पलटेगा और वह उसे घंटों या दिनों तक पकड़े रखता है। यह व्यवहार बाज़ार के सुनहरे नियम के ठीक उल्टा है। हम मुनाफे को ऐसे पकड़ते हैं जैसे चोरी का माल हो जल्दी से लेकर भागना चाहते हैं और नुकसान को ऐसे पालते हैं जैसे वह हमारा अपना सगा हो। हम खरगोश की तरह प्रॉफिट लेकर भागते हैं और कछुए की तरह लॉस में बैठे रहते हैं। नतीजा? आप दस बार 500-500 रुपये कमाते हैं (कुल 5000) और एक ही बार में 10,000 गँवा देते हैं।
यह गणित आपको कभी भी अमीर नहीं बनने देगा दिग्गज निवेशक पीटर लिंच ने एक बार कहा था कि लॉस को पकड़े रहना और प्रॉफिट को काट देना बिल्कुल वैसा ही है जैसे अपने बगीचे के फूलों को तोड़ देना और जंगली घास-फूस को पानी देना। अगर आप अपने जीतने वाले ट्रेड को बढ़ने का मौका नहीं देंगे और हारने वाले ट्रेड को खाद-पानी देते रहेंगे तो आपका पोर्टफोलियो एक बंजर जमीन बन जाएगा। एक सफल ट्रेडर वह नहीं है जिसे डर नहीं लगता बल्कि वह है जो उस डर के बावजूद अपने विनिंग ट्रेड में तब तक बैठा रहता है जब तक ट्रेंड उसके साथ है। अमीरी सही होने से नहीं आती अमीरी सही समय पर टिके रहने से आती है।
आपको अपनी आदत बदलनी होगी लॉस से नफरत कीजिए और उसे तुरंत काटिए और प्रॉफिट के साथ धैर्य रखना सीखिए। जब तक आप हाथी जैसा प्रॉफिट और चींटी जैसा लॉस का फॉर्मूला नहीं अपनाएंगे तब तक बाज़ार आपकी जमापूंजी को धीरे-धीरे दीमक की तरह खाता रहेगा।
WAY OF INVESTING:
1. “अच्छे मैनेजमेंट की अच्छी कंपनी के बुरे समय में निवेश करो और इंतज़ार करो कि इसका अच्छा समय आयेगा”
अभी बहुत सारी कंपनियों का बुरा समय आ गया है, कम से कम 26 सप्ताह तक वीकली बाइंग करोगे तो बॉटम ढूँढने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी
2. “मल्टीबैगर तो सबके पास होते हैं, पर टिकते किसी के पास नहीं”
अभी जो निवेश करोगे उसके 100% बढ़ने का इंतज़ार करो और उसके बाद आधे बेचकर आधे फ्री ऑफ़ कॉस्ट वाले शेयर्स को कम से कम अगले 10 साल तक होल्ड कर लोगे तो मल्टीबैगर आपके पास भी टिक जायेंगे !
3. “मार्केट क्रैश होने पर हमेशा ये सोचकर निवेश करो कि दुनिया खत्म नहीं होने वाली”
9/11 जब अमेरिका में हुआ तब टाइटन 32 रुपए पर आ गया था और आज ऊपर में 80000 तक पहुँच गया, ऐसे बहुत उदाहरण आपको को कोरोना वाली मंदी के भी मिल जायेंगे
4. “किसी भी आईपीओ में लिस्टिंग के समय निवेश मत करो, कम से कम 3 से 5 साल का इंतज़ार करो”
टाटा ,महिंद्रा, गोदरेज जैसे ग्रुप की कंपनी हो तो कम से कम 3 साल और दूसरी कंपनियों में लिस्टिंग के 5 साल बाद ही निवेश करो क्यूँकि उस समय तक शेयर अपनी सही वैल्यू पर आ ही जाता है, लिस्टिंग अधिकतर शेयर्स की फ़र्ज़ी वैल्यू पर ही होती है चाहे कितनी ही बड़ी कंपनी क्यूँ ना हो !
5. “सोशल मीडिया व बिज़नेस चेनल में शेयर्स ख़रीदने -बेचने की सलाह देने वालों को बिल्कुल भी मत सुनो” इसकी बजाय रमेश दमानी जी, मनीष चोखानी जी, रिदम देसाई जी, मधु केला जी , रामदेव अग्रवाल जी जैसे अनुभवी विशेषज्ञों के पुराने सारे इंटरव्यू यूट्यूब पर देखो और इनके अनुभव से अपने निवेश के लिए स्वयं रिसर्च करने का प्रयास करो !
6. “शेयर्स के गिरने और बढ़ने को प्रॉफिट लॉस मत समझो”
अधिकतर लोगों को शेयर्स के गिरते ही “बहुत लॉस हो गया” और बढ़ते ही “इस बार तो बहुत माल कमाया” कहते सुना है, अरे जब बेचा ही नहीं तो काहे का प्रॉफिट और काहे का लॉस ! जैसे जनवरी 2020 में किसी ने बीएसई का शेयर 540 में लंबी अवधि के लिए खरीदा और मार्च 2020 में कोरोना की मंदी में यह 320 हो गया तो रोना गाना शुरू अरे इसमें तो बहुत लॉस हो गया फिर जैसे ही 540 का भाव आया तो निकल पड़े ये सोचकर कि जान बची और लाखों पाये और यदि मेरे फार्मूले पर चलते तो 1080 का भाव आने पर आधे बेचकर आधे फ्री कर लेते तो 4 साल में 17000 का भाव भी देखते क्यूँकि फ्री वाले शेयर्स को तो कम से कम 10 साल होल्ड करना ही है !
7. “जिस ब्रोकर के यहाँ ट्रेडिंग या निवेश कर रहे हो उसकी सलाह कभी मत लो”
ब्रोकर चाहे कितना भी बड़ा हो, वो पब्लिकली तो हमेशा यही सलाह देगा कि सही शेयर में लंबी अवधि का निवेश करके बैठ जाओ पर वास्तव में वो जब तक आपको फ़ास्ट, फ्यूचर -ऑप्शन, मार्जिन ट्रेडिंग नहीं करवाएगा, उसकी दुकान नहीं चलने वाली और आप उनकी सलाह मानकर ये सब करोगे तो 99% की दुकान 10 साल के अंदर किसी भी क़ीमत पर बंद हो जाएगी !
8. “जो कंपनी कॉन-कॉल ना करे और त्रैमासिक रिजल्ट ना बताए, उसमें कभी निवेश ना करें”
लंबी अवधि के निवेशक को हर त्रैमासिक रिजल्ट , इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन और कॉन कॉल पर जरूर नज़र रखनी चाहिए ताकि कंपनी को समय समय पर रिव्यू कर सके !
9. “अपने निवेश का 15% गोल्ड में भी वीकली SIP करके निवेश करें”
गोल्ड में निवेश आपके लांग टर्म इन्वेस्टमेंट का इन्शुरन्स है , ऐसी मंदी के समय गोल्ड से वीकली एग्जिट करके शेयर्स में वीकली निवेश का फायदा मिलेगा और जब मार्केट में तेजी हो तब अपने 100% बढ़े हुवे शेयर्स को बेचकर गोल्ड में वीकली एसआईपी कर सकते हो
10. “सच्चे लंबी अवधि के निवेशक को बाज़ार के किसी भी उतार -चढ़ाव से फ़र्क़ नहीं पड़ता”
टाइटन 2000 की मंदी में 70 रुपये था, 9/11 वाले दिन 32 आ गया फिर 2008 की लेहमेंन ब्रदर्स वाली मंदी में 1500 जाकर वापिस 800 आ गया , फिर 2020 की कोरोना मंदी में 25000 जाकर 18000 आ गया , अभी भी 2024 में 76000 जाकर 64000 आ गया !
(SPLIT 1:20 PRICE) अब आप स्वयं सोचें कि यदि कोई मार्केट की 9/11 की मंदी में घबराकर 32 में बेच देता तो आज 24 साल में 76000 तक के भाव तक रख पाता क्या ! और जिसने मेरे फार्मूले से यदि 2000 शेयर में 140000 का निवेश करके 1000 शेयर 140 में बेचकर 1000 शेयर की कॉस्ट को ZERO करके रख लेता तो आज उसके पास 7 करोड़ रुपये होते ! तीनो बड़ी मंदी में दुनिया खत्म नहीं हुई इसलिए जिसके पास फ्री ऑफ़ कॉस्ट का होल्डिंग रखा है , उसका क्या बिगड़ सकता है
24 june 2011 को टाइटन 1:1 बोनस और 10:1 SPLIT हुआ था !
11. “कोई भी शेयर मंदी में नीचे का कोई भी भाव दिखा सकता है फिर चाहे कोई कितनी भी अच्छी और मजबूत कंपनी हो”
बाज़ार में जब ऐसी बड़ी गिरावट आती है तो F&O , MARGIN TRADING, & SHORT TERM ट्रेडर को बहुत बड़ा नुकसान होता है, ब्रोकर मार्जिन की डिमांड तुरंत करता है और इनके होल्डिंग के शेयर बाज़ार में पानी के भाव बेच देता है जिसमें अच्छी कंपनी के शेयर भी बिकने आ जाते है, चूँकि इस समय ख़रीददार बहुत कम रहते है इसलिए इस सेलिंग प्रेशर में अच्छी कंपनिया भी जरूरत से ज़्यादा गिर जाती है पर आप यदि लंबी अवधि के निवेशक हो तो आपको इन कंपनियों में हर गिरावट पर वैल्यू बाइंग करनी चाहिए, जैसे ही मार्केट बॉटम आउट होकर कंसोलिडेटेड होगा, इन अच्छी कंपनियों के भाव कम समय में ही 50% तक बढ़ सकते है, कोरोना की मंदी में आपने देखा ही है , इसलिए निवेशक को गिरते भाव देखकर अच्छी कंपनियों में घबराने की जरूरत नहीं है
12. “टेक्स बचाने के चक्कर में प्रॉफिट बुक करने से अपने आपको कभी ना रोके”
अक्सर लोगों को ये कहते सुनता हूँ कि इस बार का मेरा प्रॉफिट बुक करने का कोटा पूरा हो गया , और प्रॉफिट बुक करूँगा तो 20% टैक्स लग जाएगा और जिन लोगों ने ये सोचकर प्रॉफिट बुक नहीं किया , मार्केट ने उनसे 50% छीन लिया !
13. “ORDER BOOK, FII STAKE INCREASED, PROMOTERS STAKE INCREASED” इन सबका ड्रम पीटने वाले शेयर विशेषज्ञों से बचें!
14. टाटा, महिंद्रा, गोदरेज जैसे सॉलिड ग्रुप हो और प्रमोटर शेयर PLEDGE हो तो कोई बात नहीं , पर एक अकेली कंपनी लिस्टेड हो और किसी बड़े और सॉलिड ग्रुप से बिलोंग नहीं करती हो तो ऐसी कंपनी के शेयर कभी मत ख़रीदो यदि उसके प्रमोटर ने शेयर प्लेज़ कर रखे हों!
Copied
What Drives the Indian Stock Market?
What really moves the Indian Stock Market?
It’s not tips. It’s not predictions. It’s fundamentals.
Here are the key drivers:
📈 Corporate Earnings
Stronger profits → higher stock prices.
Weak results → pressure on the market.
🏦 Interest Rates
Lower rates boost borrowing & spending.
Higher rates slow growth.
🥕 Inflation
Moderate inflation is healthy.
High inflation reduces purchasing power & impacts valuations.
🌍 Global Cues
US markets, crude oil, geopolitical events — everything is connected.
🤝 FII & DII Activity
Foreign investors bring big money in or out.
Domestic institutions help stabilize the market.
🏛 Government Policies
Budgets, reforms, and regulations shape economic growth.
Markets move for reasons — not rumours.
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