PAWAN KUMAR SAHU - champa"

PAWAN KUMAR SAHU - champa" >हार कर, डर कर तू रुक नहीं सकता ! क्योंकि चलना ही ज़िन्दगी है !! ....... Keep Moving

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08/11/2021

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08/07/2019
14/06/2017

आइना....पहले खुद को देखो, फिर दूसरों को दिखाओ।

16/01/2017

**कर कुछ ऐसा कि दुनिया बनना चाहे तेरे जैसा**
आज मैं आपको कोई कहानी नहीं सुनाने वाला हूँ बल्कि आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूँ।

सभी के घरों में बच्चे होते हैं और इन बच्चों से सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल पता है क्या है ?
बेटा तुम बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?
ये बच्चों से सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है।
यक़ीनन आपके भी बच्चे होंगे और बच्चे नहीं तो छोटे भाई या बहन या कोई भी……..
जब एक पिता अपने बच्चे से पूछता है कि बेटा तुम बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?
तो 99% बच्चों का जवाब होताहै –
मैं बिल गेट्स जैसा बनूँगा...
मुझे मार्क जुकरबर्ग जैसा बनना है...
मुझे टाटा बिड़ला बनना है...
मुझे सचिन तेंदुलकर जैसा बनना है……. आदि .
लेकिन जरा गौर से सोचिये आपका बच्चा बिल गेट्स या सचिन तेंदुलकर जैसा बनना चाहता है पर आपके जैसा क्यों नहीं ?
आपका बच्चा उन लोगों जैसा बनना चाहता है जिन्हें वो ठीक से जानता भी नहीं..
बल्कि आप हमेशा अपने बच्चों के साथ रहते हैं लेकिन फिर भी 99% बच्चे कभी ये नहीं बोलते कि पापा मैं आपके जैसा बनना चाहता हूँ,
कभी सोचा है क्यों ?
क्यूंकि आपने अपने बच्चों को केवल पाला है उनके सामने एक अच्छे इंसान होने का उदहारण कभी पेश नहीं किया,
शायद आपने जीवन में कुछ बड़ा नहीं किया।
काश आपने भी अपने जीवन को कुछ अलग अंदाज से जिया होता…
काश आप भी एक सफल इंसान होते….
काश ये दुनिया आपकी फैन होती….
काश आपने जीवन में सफलता की बुलंदियों को छुआ होता…..
तो आज जब आप अपने बच्चे से पूछते कि बेटा तुम कैसे बनना चाहते हो ?
तो बच्चे का जवाब होता – पापा आपके जैसा……..
दोस्तों क्यों ना हम लोग भी कुछ बड़ा करें, अपनी आने वाली पीढ़ी के सामने एक उदाहरण पेश करें जिससे आपके बच्चे किसी और के नहीं बल्कि आपके खुद के फैन हों।
अपने जीवन को केवल जियो मत बल्कि भरपूर जियो, खूब मेहनत करो, हमें तो आसमां की बुलंदियों को छूना है।
सोचिये कितना गर्व महसूस होगा जब आपके छोटे भाई बहन या आपके बच्चे दूसरे लोगों को आपकी मिसाल देंगे आपके जैसा बनने की कोशिश करेंगे।
तो चलिए आज ही से कुछ बड़ा करने की कोशिश करिये...!!!
***कर कुछ ऐसा कि दुनिया बनना चाहे तेरे जैसा***

02/01/2017

*CONSIDERATIONS FOR 2017*
________________________________
*1. ON EARNING:*
Never depend on single income. Make investment to
create a second chance.
_________________________________
*2. ON SPENDING:*
If you buy things you do not need, soon you will have to sell things you need.
________________________________
*3. ON SAVINGS:*
Do not save what is left after spending, but spend what is left after saving.
________________________________
*4. ON TAKING RISK:*
Never test the depth of a river with both feet.
________________________________
*5. ON INVESTMENT:*
Do not put all eggs in one basket.
________________________________
*6. ON EXPECTATIONS:*
Honesty is a very expensive gift. Do not expect it from cheap people.
________________________________
*7. Past* is a waste paper, present is a newspaper, and future is a question paper. Come out of your past, control the present, and secure the future.
________________________________
*8. When bad things happen* in your life, you have three choices. You can either let it define you, let it destroy you or you can let it strengthen you.
_______________________________
*9. Our eyes are in the front* because it is more important to look ahead than to look backwards.
_______________________________
*10.* We use pencil when we were young, but now we use pens. Do you know why? Because mistakes in childhood can easily be erased, unlike now.

*Wish you a prosperous 2017 !!*

04/07/2016

"जीत की खातिर एक जूनून चाहिए, जिसमें हो ऊबाल ऐसा एक खून चाहिए.ये आसमां भी आयेगा जमीन पर, बस इरादों में ऐसी एक गूंज चाहिए.

""विचारों और शब्दों" की ताकत--------
क्या हमें ये पता है कि हमारे "विचारों या शब्दों" में कितनी ताकत होती है ?
जी हाँ हम जो भी बोल दें वो पूरे होकर ही रहते हैं, क्या ये बात हम जानते हैं ?
बिलकुल सही, हमारे "विचारों या शब्दों" में इतनी ताकत होती है कि जो एक बार हमारे मुँह से निकला उसे "पूरा होना ही होना" है.
पर प्रश्न उठता है
तो फिर हमारी कही हुई हर बात पूरी क्योँ नहीं होती.
इसका सिर्फ और सिर्फ 1 ही कारण है -
हम स्वयं ही अपने "विचारों और शब्दों" को काट देते हैं
जैसे हम आकाश में पतंग उड़ाते समय खुद ही पतंग की डोर को काट दें तो पतंग कहीं ब्रम्हाण्ड में विलीन हो जाती है
उसी तरह हमारे विचारों और शब्दों को हम स्वयं ही"क्या" का कट मार कर ब्रम्हाण्ड में विलीन होने के लिए छोड़ देते हैं.
नहीं तो इंसान कोई बात "विचारे या बोले" वो पूरी न हो, ऐसा हो नहीं सकता.
मित्रों हमारी आदत होती है कि हम कुछ सोचते या बोलते हैं और उसके तुरंत बाद अपने पर ही शक करने लगते हैं जैसे :-(1) मैं अपनी क्लास में top करूँगा,ये सोच लिया.अब अगले ही मिनट से सोचने लगेंगे, "क्या" मैंअपनी क्लास में top कर सकता हूँ. बस मित्रों हमने अपने विचार को "क्या" का कट लगा कर ब्रम्हाण्ड में छोड़ दिया. अब यकीन मानिये मैं क्लास में top कर ही नहीं सकता.
(2) मैं अपने ऑफिस में सबसे बढ़िया employee बनूगा,ये सोच लिया.अब अगले ही मिनट से सोचने लगेंगे, "क्या" मैंसबसे बढ़िया employee बन सकता हूँ. बस मित्रों हमने अपने विचार को "क्या" का कट लगा कर ब्रम्हाण्ड में छोड़ दिया. अब यकीन मानिये मैं सबसे बढ़िया employee नहीं बन सकता.
(3) मैं अपने business में top में रहूँगा, ये सोच लिया.अब अगले ही मिनट से सोचने लगेंगे, "क्या" मैंbusiness में top में पहुंचूंगा. बस मित्रों हमने अपने विचार को "क्या" का कट लगा कर ब्रम्हाण्ड में छोड़ दिया. अब यकीन मानिये मैं business में top में नहीं पहुँच सकता.
मित्रों इसी तरह के जितने भी विचार हमें आतेहैं, हम उनमें "क्या" का कट लगा कर ब्रम्हाण्ड में विलीन होने के लिए छोड़ देते हैं. हमारे अधिकतर कामों में असफल होने का यही एकमात्र राज़ है.
मित्रों, सबसे पहले अपने ऊपर यकीन रखिये की ये काम "होगा ही होगा" और इस काम को "होना ही होना" है, कोई भी ताकत इसको नहीं रोक सकती,
मित्रों ध्यान रहे उस विचार पर "क्या" का कट कतई मत लगाइएगा, वर्ना वो विचार ब्रम्हाण्ड में स्वतः ही विलीन हो जायेंगे, उसके बाद कोई भी ताकत उनको नहीं रोक सकती.
इसमें हमें स्वामी विवेकानंद जी की बात को किसी भी हाल में याद रखना होगा :-
"एक विचार लो. उस विचार को अपना जीवन बना लो. उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार को जियो, अपने मस्तिस्क, मांसपेशियों,नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूबजाने दो, इसके बाद हमारा सोचा हुआ कोई भी विचार और बोले हुए शब्द पूरे न हो, ऐसा हो नहीं सकता.
मित्रों ध्यान रहे :-"जीत की खातिर एक जूनून चाहिए, जिसमें हो ऊबाल ऐसा एक खून चाहिए.ये आसमां भी आयेगा जमीन पर, बस इरादों मे ऐसीएक गूंज चाहिए."

20/06/2016

*खतरनाक सत्य*

"अगर आप रास्ते पे चल रहे है और आपको वहां पड़ी हुई दो पत्थर की मुर्तिया मिले

1) भगवान राम की

और

2)रावण की

और आपको एक मूर्ति उठाने का कहा जाए तो अवश्य आप राम की मूर्ति उठा कर घर लेके जाओगे।
क्यों की राम सत्य , निष्ठा,
सकारात्मकता के प्रतिक हे और रावण नकारात्मकता का प्रतिक हे।

फिरसे आप रास्ते पे चल रहे हो और दो मुर्तिया मिले
राम और रावण की
पर अगर "राम की मूर्ति पत्थर" की और "रावण की सोने "की हो
और एक मूर्ति उठाने को कहा जाए तो आप राम की मूर्ति छोड़ कर रावण की सोने की मूर्तिही उठाओगे
मतलब
हम सत्य और असत्य,
सकारात्मक और नकारात्मक
अपनी सुविधा और लाभ के अनुसार तय करते हे।

99% प्रतिशत लोग भगवान को सिर्फ लाभ और डर की वजह से पूजते है.
और इस बात से वह 99% प्रतिशत लोग भी सहमत होंगे मगर शेअर नही करेंगे क्योंकी .....
,
एक ही डर
"लोग क्या कहेंगे"

लोग क्या सोचेंगे ? ? ?

25 साल की उम्र तक हमें परवाह नहीँ होती कि "लोग क्या सोचेंगे ? ? "

50 साल की उम्र तक इसी डर में जीते हैं कि " लोग क्या सोचेंगे ! ! "

50 साल के बाद पता चलता है कि " हमारे बारे में कोई सोच ही नहीँ रहा था ! ! ! "

Life is beautiful, enjoy it everyday.

Sabse Bada ROG...
Kya Kahenge LOG...

20/06/2016

रिश्ते निभाने के लिए.....
मैं हमेशा 'झुकता' रहा.....!!

और लोगों ने इसे.....
मेरी 'औकात' समझ ली.....!!!!!..!!!!!

01/03/2016

मेरा यही अंदाज ज़माने को खलता है..की मेरा चिराग हवा के खिलाफ क्यों जलता हैI

19/02/2016

हे मेरे मन ....
कुछ करना है, तो डट कर थोड़ा दुनियाँ से, हट कर ....
सीधे रास्ते पर तो सभी चलते हैं तू चल इतिहास को पलट कर ....
बिना काम के, मुकाम कैसा !!?? बिना मेहनत के, दाम कैसा !!??
जब तक ना हासिल हो मंजिल तो राह में आराम कैसा !!??
अर्जुन सा अचूक निशाना रख जो ठाना वो कर, ना कोई बहाना रख ....
तेरा लक्ष्य बस सामने ही है बस उसी पे, अपना ठिकाना रख ....
सोच मत सपने साकार कर अपने कर्मो से, प्रेमिका सा प्यार कर ....
मिलेगा तेरी मेहनत का फल किसी और का मत इंतज़ार कर ....
जो कभी चले थे अकेले इतिहास में उनके पीछे, आज लोगों के मेले हैं ....
जो करते रहे इंतज़ार भाग्य का उनकी जिंदगी में बहुत से झमेले हैं ....
कुछ करना है, तो डट कर थोड़ा दुनियां से हट कर ....
मेहनत कर और थोड़ा जोर लगा और तू चल, इतिहास को पलट कर...

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