21/08/2023
भारत देश में लगभग बीस करोड़ के आस पास छोटे छोटे रिटेलर हैं, 50 फीसद से ज्यादा बरबाद हो चुका है जिसके पीछे की मुख्य वजहें नोट बंदी, जीएसटी का मनमाने तरीके से लागू होने से लेकर कोरोना लॉकडाउन तक रही है, लेकिन इससे भी बड़ी वजह रही है मॉल कल्चर और इससे भी बड़ी वजह जिसने रही सही कसर पूरी कर दी है ऑनलाइन मार्केटिंग ने जो सब्जी से लेकर राशन तक की डिलीवरी देने का रिटेल लाइसेंस पा चुके हैं। आने वाले पांच सालों में और अधिकतम दस सालों में ये रिटेल और मॉल दोनो पूरी तरह बर्बाद होने वाला है।
डरा नहीं रहा हूं, बता रहा हूं। कोई सेकंड ऑप्शन तैयार रखिए, वरना रोड पर आने में ज्यादा देर नहीं है।
बचने का रास्ता क्या है फिर, रास्ता है लेकिन थोड़ा टफ है।पहला रास्ता है कि सरकार पर सारे व्यापारी, विशेषकर रिटेलर मिलकर दबाव बनाएं कि ऑनलाइन रिटेल मार्केटिंग बैन कर दिया जाय, ऑनलाइन कंपनियां केवल व्होलसेलर का काम करें और इन्हे केवल व्होलसेल का लाइसेंस मिले।
दूसरा रास्ता है कि ऑनलाइन कंपनियां रिटेल सेक्टर में काम करने को स्वतंत्र हों लेकिन इस शर्त पर कि वो बिलिंग केवल जीएसटी नंबर पर ही करें, न कि डायरेक्ट इंडिविजुअल पर्सन को, इससे होगा ये कि ग्राहक नजदीकी रिटेल स्टोर पर जाकर उसकी फर्म के जीएसटी नंबर पर बिलिंग करवाएगा और सामान चाहे तो अपने घर पर डिलीवर करवा सकता है।
इससे ग्राहक को कोई नुकसान नहीं होगा और रीटेलर को इनपुट जीएसटी का लाभ मिलेगा, साथ की ग्राहक और रीटेलर सम्पर्क बढ़ेगा जिसका लाभ निश्चित रुप से रिटेल सैक्टर को मिलेगा।
ऑनलाइन फ्रॉड और नकली माल से ग्राहक का बचाव होगा क्योंकि रीटेलर को निश्चित रूप से माल की पहचान इंडिविजुअल से बेहतर होगी ही।
सरकार का जीएसटी कलेक्शन बढ़ेगा। जिससे सरकार चाहे तो आधा फीसदी ही सही, रीटेलर कमीशन का प्रावधान रख सकती है।
ऑनलाइन होने से रीटेलर की रेंज अंधाधुंध बढ़ेगी, एक छोटा सा सा जीएसटी धारक राशन दुकानदार इलेक्ट्रोनिक से लेकर डायमंड तक कुछ भी ऑर्डर कर सकता है। जिससे मरणासन्न रीटेल सैक्टर फिर से चमक सकता है।
व्यापारियों और विशेषकर व्यापार संघों को इस मुद्दे पर आगे बढ़ना होगा, वरना मुश्किल हालत होनी अवश्यंभावी है।
बचने का अंतिम रास्ता भी है लेकिन वो इलीगल है, सार्वजनिक प्लेटफार्म पर नहीं बताया जा सकता है।