20/08/2024
24 सालों में गैरसैंण का सफर-"क्या खोया-क्या पाया" राज्य आंदोलन की अगुवाई करने वाला गैरसैंण क्यों रहा गैर----?
गैरसैंण/भराड़ीसैण (उत्तराखंड)- 20 अगस्त
रिपोर्ट- प्रेम संगेला.
कभी राज्य आंदोलन की अगुवाई करने वाला गैरसैंण,जिसके आह्वान पर पूरे उत्तराखंड के आंदोलनकारी गैरसैंण पहुंचकर आंदोलन की आवाज को बुलंद किया करते थे.उत्तराखंड की मध्यस्थली ओर आंदोलनकारीयों की हृदयस्थली में रचे बसे गैरसैंण में सन 1994 में 147 दिनों का आंदोलन इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ था. राज्य आंदोलन की बात करें,तो तब उत्तराखंड क्रांती दल,कांग्रेस ओर भाजपा दलों के कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभायी थी.जिसमें गैरसैंण के 45 घोषित राज्य आंदोलनकारियों ओर 50 से ज्यादा सक्रिय रणनीतिकारों के साथ लगभग दस हजार से ज्यादा ग्रामीणों ने अपना सक्रिय योगदान दिया.
राज्य निर्माण के बाद जहां नेताओं और अफसरों के कद ओर पद तो बढ़ गये,लेकिन गैरसैंण आज भी अपने को ठगा हुआ महसूस करता है.लंबे संघर्षों और बलिदानों के बाद सन 2000 में जब उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया तो उसका सबसे ज्यादा फायदा नेताओं और अफसर ने ही उठाया, लेकिन राज्य आंदोलन की कर्मभूमि रहा गैरसैंण आज भी अपने को ठगा हुआ महसूस करता है. मूलभूत समस्याओं के लिए तरस रहे गैरसैंण की ग्रामीण सड़कों पर पड़े गड्ढे जानलेवा बने हुए हैं,वहीं शिक्षा ओर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए ग्रामीणों की शहरों की दौड़ थमने का नाम नहीं ले रही है.जिला मुख्यालय की दूरी 150 किलोमीटर होने के चलते योजनाओं की समय पर जानकारी भी नहीं मिल पाती है.गैरसैंण मुख्यालय के खेल मैदान की दुर्दशा ऐसी है की ब्लॉक स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं के लिए भी 40 किलोमीटर दूर आदिबद्री जाना पड़ता है.
राज्य बनने के बाद उक्रांद के नेता गठबंधन सरकारों में मंत्री पदों पर विराजमान रहे,लेकिन गैरसैंण को लेकर कोई ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने में नाकामयाब रहे.वहीं भाजपा ओर कांग्रेस की सरकारें राजनीतिक लाभ लेने की होड़ में गैरसैंण स्थायी राजधानी का समाधान नहीं ढुंढ पाए.पहले कांग्रेस की विजय बहुगुणा सरकार ने गैरसैंण की बढती चर्चाओं को देख वर्ष 2012 में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया,जिसके बाद सतपाल महाराज के दबाव के चलते इसी वर्ष विधानसभा भवन का भराडीसैंण में भूमि पूजन भी किया गया,जिसके बाद बदले घटनाक्रम में हरीश रावत की सरकार बनने पर पहाड़ के प्रतीक गैरसैंण के नाम पर हरीश रावत हमेशा फ्रंट-फुट पर खेलते दिखायी दिए.जिसके तहत पहले गैरसैंण में टेंट विधानसभा सत्र का आयोजन ओर विधानसभा भवन का शिलान्यास करने के बाद विधानसभा भवन सहित आवासीय भवनों का निर्माण भी शुरू किया गया। लेकिन 2017 में हरीश रावत की सरकार वापसी नहीं कर सकी ओर गैरसैंण को राजधानी बनाने का मलाल हरीश रावत को आज भी परेशान करता है।
वर्ष 2017 में भाजपा के त्रिवेंद्र रावत की सरकार आयी तो उन्होंने 2020 में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर,खांटी-पहाडी नेता के रूप में पहचान बनायी।त्रिवेन्द्र रावत सकार ने राजधानी परिक्षेत्र के विकास के लिए 25हजार करोड रुपए की घोषणा भी की। 2022 में गैरसैंण में मूलभूत सुविधाएं जुटाने के लिए उन्होंने गैरसैंण कमिश्नरी की घोषणा की तो अपने ही विधायकों के विरोध के बीच उनकी कुर्सी जाती रही। बदले हालात में तीरथ सिंह रावत सरकार ने गैरसैंण कमिश्नरी को निरस्त कर गैरसैंण के विकास के संभावित रास्ते भी बंद कर दिए। 2022 में भाजपा सरकार का नेतृत्व पुष्कर सिंह धामी के हाथों में चले जाने के बाद से गैरसैंण में ठंड के कारण सत्र निरस्त करना तो चर्चाओं में रहा,लेकिन गैरसैंण राजधानी परिक्षेत्र के विकास के लिए पूर्व में उन्हीं की पार्टी की सरकार द्वारा घोषित 25 हजार करोड की धनराशि में से कुछ भी धरातल पर उतरता नहीं दिखाई दे रहा है।
➡️स्वीकृति ओर सुधारीकरण के इंतजार में ग्रामीण सडकें⤵️
कस्वी नगर देवपुरी से थराली व गरुड़ को जोड़ने के लिए सड़क मार्ग, कोठा से दमदड,हिसलाणी दुर्गा देवी सड़क मार्ग,मेहलचौरी से घनियालीगांव,मेहलचौरी से सरोवर,माईथन से कुसरानी, देवपुरी से लखण,रोहिडा से देवस्थान,रोहिडा से भेडियाणा -गोल की सड़कें आज भी स्वीकृति के इंतजार में है।वहीं रामपुर-कुनीगाड मोटर मार्ग डामरीकरण तो माईथान-चौखुटिया ओर कंडारीखोड मोटर मोटर मार्ग सुधारीकरण का इंतजार कर रहे हैं।
➡️बीते 24वर्षों में गैरसैंण ने क्या पाया⤵️
2012 में विजय बहुगुणा सरकार की गैरसैंण में कैबिनेट बैठक।2013 में सतपाल महाराज की उपस्थिति में विधानसभा भवन का भूमि पूजन। 2013 में हरीश रावत सरकार द्वारा टेंट में विधानसभा सत्र का आयोजन,विधानसभा भवन का शिलान्यास व निर्माण प्रारंम्भ.2014 में हरीश रावत सरकार द्वारा गैरसैंण विकास परिषद की स्थापना.2012 से 2017 के बीच कर्णप्रयाग के तत्कालीन विधायक अनुसूया प्रसाद मैखुरी के कार्यकाल में गैरसैंण में नवोदय विद्यालय, डिग्री कॉलेज,आईटीआई और पॉलिटेक्निक भवनों का निर्माण।हरगढ़ में भरसार पादप केंद्र की स्थापना.गैरसैंण थाना,लोक निर्माण विभाग व विद्युत विभाग के डिविजनों की स्थापना.मेहलचौरी व आदिबद्री में विधुत सब स्टेशनों की स्थापना.आदिबद्री तहसील की स्थापना.भगत सिह कोशियारी सरकार में 2001 में गैरसैंण डिग्री कॉलेज की स्थापना,विधायक अनिल नौटियाल के कार्यकाल में 2009 में नवोदय विद्यालय की स्थापना,2023 में सिलकोट पेयजल योजना का निर्माण शुरू व भरसार पादप केंद्र के लिए 5 करोड़ की स्वीकृति।
➡️ 24सालों में गैरसैंण ने क्या खोया⤵️
वर्ष 2004 से गैरसैंण जिले के लिए आंदोलन चलाए जाने के बाद 2010 में जिला पुनर्गठन समिति में शामिल करने के बाद भी कोई निर्णय नहीं हुआ। 2022 में गैरसैंण कमिश्नरी की घोषणा हुई लेकिन स्थानीय विधायक सहित भाजपा संगठन इसके पक्ष में माहौल नहीं बना पाए ओर अन्य जिलों के विरोध के चलते निरस्त कर दिया गया।खंडूरी सरकार में ढोल दमाऊ केंद्र की घोषणा धरातल पर नहीं उतरी।भराडीसैंण में अंतरराष्ट्रीय संसदीय शोध संस्थान केंद्र की घोषणा में भी मामला आगे नहीं बढ़ पाया।गैरसैंण पेयजल योजना कब लिए झील निर्माण भी सर्वे तक ही सिमट कर रह गया।गैरसैंण उप जिला चिकित्सालय की घोषणा, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की हालत जस की तस। 2018 में भरसार संस्थान के लिए 12 करोड़ की स्वीकृति हुई जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया।2018 में केंद्रीय विद्यालय को लेकर नागार्जुनसैंण में सर्वे किया गया,जिसे आज तक स्वीकृति नहीं मिल पायी। वही मुख्यमंत्रीयों की घोषणाओं में शामिल गैरसैंण डाक बंगला रोड का सुधारीकरण,मेहलचौरी रामगंगा नदी पर पुल का निर्माण,धुनारघाट-बाटाधार,आगरचट्टी-कोयलख शहीद मार्ग,गैरसैंण-फरकंडे मार्ग का सुधारीकरण,रिखोली-डिग्री कॉलेज सड़क का नवनिर्माण आज तक पूरी नहीं हो पाया है।