06/07/2026
9th International conference of WAF& VHM organised At paris (France)
To work on all streams of Ayush
06/07/2026
9th International conference of WAF& VHM organised At paris (France)
22/06/2026
22/05/2026
प्रेस विज्ञप्ति
बहराइच, दिनांक 22 मई 2026
आज दिनांक 22.05.2026, दिन शुक्रवार को वर्ल्ड आयुष फाउंडेशन एवं आयुष विभाग, बहराइच के संयुक्त तत्वावधान में स्वर्गीय पं. केशवराम मिश्र फ्री आयुष चिकित्सा एवं स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन ग्राम खालेपुरवा, कटहा, जनपद में किया गया। शिविर में आयुष विभाग की ओर से एक वृहत चिकित्सा शिविर आयुर्वेद,यूनानी,होमियोपैथी की व्यवस्था की गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. रंजन वर्मा ने बताया कि शिविर में शल्य चिकित्सक डॉ. उपेंद्र रावत, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति सिंह, वरिष्ठ काय चिकित्सक डॉ. विजय गौतम, डॉ. आनंद कुमार निराला, डॉ. सुधीर उपाध्याय, योग प्रशिक्षक विजय कुमार श्रीवास्तव, यूनानी चिकित्सक डॉ. सर्वेश रावत, होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. आशीष कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. प्रभात मिश्र, प्राची मिश्रा तथा स्टाफ सदस्य चक्रपाणी गौड़, हुसैनी एवं दिवाकर आदि का विशेष योगदान रहा।
शिविर में कैंसर रोगियों की स्क्रीनिंग भी की गई तथा लोगों को जीवनशैली जनित रोगों से बचाव एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि श्री दिवाकर पांडेय, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. सरोज शंकर राम तथा जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. यूसुफ़ अली अंसारी उपस्थित रहे। अतिथियों द्वारा भगवान धन्वंतरि के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
शिविर में आयुर्वेद से कुल 310.यूनानी विधा से कुल 135 एवं होम्योपैथी से कुल 70 मिलाकर कुल 515 रोगियों का परीक्षण कर उन्हें निःशुल्क औषधियों का वितरण किया गया।
कार्यक्रम का सफल संयोजन एवं आभार ज्ञापन सेवानिवृत्त फार्मासिस्ट श्री राजेश मिश्रा द्वारा किया गया।
आयुष विभाग,बहराइच द्वारा आयोजित कार्यशाला में धौति कर्म....
Workshop on shatkarm by Ayush department,Bahraich
15/04/2026
Rakt Mokshan (Venesection) Venesection Procesure in a world ayush Foundation work shop
09/04/2026
आयुर्वेद में आहार परिकल्पना (Dietary Concept) अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। चरक संहिता में कहा गया है— “आहार ही शरीर का आधार है”। सही आहार न केवल शरीर को पोषण देता है बल्कि रोगों की रोकथाम और उपचार में भी सहायक होता है।
नीचे आयुर्वेद के अनुसार आहार परिकल्पना को सरल रूप में समझाया गया है:
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1. आहार का महत्व
आहार शरीर, मन और आत्मा को संतुलित रखता है
यह त्रिदोष—वात, पित्त, कफ को संतुलित करता है
ओज, बल, वर्ण और आयु बढ़ाता है
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2. अष्टाहार विधि विशेषायतन (8 नियम)
आयुर्वेद में भोजन के 8 मुख्य सिद्धांत बताए गए हैं:
1. प्रकृति – भोजन का स्वभाव (गुरु, लघु, शीत, उष्ण)
2. करण – भोजन बनाने की विधि
3. संयोग – पदार्थों का संयोजन
4. राशि – भोजन की मात्रा
5. देश – स्थान और जलवायु के अनुसार भोजन
6. काल – समय के अनुसार आहार
7. उपयोगसंस्था – भोजन करने का तरीका
8. उपभोक्ता – व्यक्ति की प्रकृति और अवस्था
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3. षड्रस (छः रस)
आहार में 6 रसों का संतुलन आवश्यक है:
मधुर (मीठा)
अम्ल (खट्टा)
लवण (नमकीन)
कटु (तीखा)
तिक्त (कड़वा)
कषाय (कसैला)
👉 संतुलित आहार में सभी रस उचित मात्रा में होने चाहिए।
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4. हितकर एवं अहितकर आहार
✔️ हितकर (Pathya)
ताजा, स्वच्छ, सुपाच्य भोजन
मौसमी फल-सब्जियाँ
संतुलित और हल्का आहार
❌ अहितकर (Apathya)
बासी, अत्यधिक तला-भुना भोजन
विरुद्ध आहार (जैसे दूध + मछली)
अधिक मात्रा या अनियमित समय
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5. विरुद्ध आहार (Incompatible Food)
आयुर्वेद में कुछ खाद्य संयोजन निषिद्ध हैं:
दूध + नमक
दूध + मछली
फल + दूध (कुछ स्थितियों में)
👉 ये दोषों को बढ़ाकर रोग उत्पन्न कर सकते हैं।
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6. भोजन करने के नियम
भूख लगने पर ही भोजन करें
शांत मन से, ध्यानपूर्वक भोजन करें
भोजन के बाद थोड़ी देर विश्राम करें
अति भोजन (overeating) से बचें
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7. मात्रा (Quantity of Food)
पेट का 1/2 भाग ठोस भोजन
1/4 भाग जल
1/4 भाग खाली (वायु के लिए)
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8. आहार और त्रिदोष संबंध
वात – गर्म, स्निग्ध, भारी भोजन लाभकारी
पित्त – शीतल, मधुर, तिक्त आहार
कफ – हल्का, गर्म, तीखा भोजन
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निष्कर्ष
आयुर्वेद में आहार केवल पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक चिकित्सा (Medicine) है। उचित आहार से ही स्वास्थ्य, रोग-निवारण और दीर्घायु प्राप्त होती है।