Maulana Azad Institute of Prof. Studies, Burhanpur

Maulana Azad Institute of Prof. Studies, Burhanpur REGULAR COLLEGE FROM DAVV. OPEN UNI. IGNOU, OPEN CENTRE 10 & 12

21/02/2021

UG teaching
B.Sc Computer, Microbiology, Biotechnology,
B.Com Plain,Computer Application
B.A.
BBA
PGDCA

सूचनाकॉलेज के NSS के स्टूडेंट्स जो स्वेच्छा से कॅरोना के कारण उत्पन्न विपदा में सहयोग करना चाहते है वे अपने मोबाइल से यह...
06/04/2020

सूचना
कॉलेज के NSS के स्टूडेंट्स जो स्वेच्छा से कॅरोना के कारण उत्पन्न विपदा में सहयोग करना चाहते है वे अपने मोबाइल से यह फार्म भरें।
फार्म में कॉलेज कोड का कालम है उसमें आप P122 भरें ।
[email protected] पर mail करना अनिवार्य हैं।

26/03/2020

*निवेदन,
देश एक गम्भीर विपत्ति से गुज़र रहा है,और आज भी कुछ संकीर्ण मानसिकता के लोग जातिगत टिप्पणियों से बाज नही आरहे है ,अभी हम सबको मिलकर सिर्फ और सिर्फ कोरोना से जंग जितना है कड़वाहट खत्म करके देशहित में अपना दिमाग लगाएं, झूटी अफवाहों और नेगेटिव पोस्ट से परहेज करें*

*Unique :सुरत अग्निकांड के बाद देश में पहला Burhanpur मैप्स कॉलेज 200 Student को देगा निशुल्क आपदा प्रबंधन कोर्स*       ...
26/05/2019

*Unique :सुरत अग्निकांड के बाद देश में पहला Burhanpur मैप्स कॉलेज 200 Student को देगा निशुल्क आपदा प्रबंधन कोर्स*

Burhanpur News

19/05/2019
13/05/2017

देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी भी अब ऑनलाइन कोर्स संचालित करने जा रही है। सभी प्रोग्राम चॉइस बेस क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के आधार पर बनाए जा रहे हैं, जिससे कोर्स करने के दौरान मिले अंकों का फायदा विद्यार्थी की मूल यूनिवर्सिटी से चल रही डिग्री में मिलेगा। फिलहाल यह जिम्मेदारी यूनिवर्सिटी ने ईएमआरसी को दे रखी है, जो जुलाई से शुरू होने वाले सत्र के लिए पांच ऑनलाइन प्रोग्राम तैयार करने में जुटा है। कुछ पेपर की टेस्टिंग शुरू हो चुकी है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रोजेक्ट के तहत मैसिव ऑनलाइन ओपन कोर्स शुरू करने की योजना बनाई है, जिसमें देशभर की यूनिवर्सिटी को ऑनलाइन कोर्स के अलावा ई-कंटेंट तैयार करना है। यह काम देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में मार्च से किया जा रहा है। खास बात यह है कि किसी भी यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी कहीं से भी कोर्स में रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इसके बाद निर्धारित समयवाधि में कोर्स पूरा करना होगा।
ईएमआरसी ने टेस्टिंग में फोटोग्राफी पर आधारित कोर्स को ऑनलाइन किया था, जिसमें एक हजार से ज्यादा विद्यार्थीयों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। इसके अलावा फाइनेंशियल अकाउंटिंग, हिंदी भाषा साहित्य, पर्यावरण संबंधी विषय पर काम किया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि टेस्टिंग के बाद ये सभी कोर्स ऑनलाइन मौजूद रहेंगे। ईएमआरसी के डायरेक्टर डॉ. एके सिंह ने बताया कि ऑनलाइन ओपन कोर्स पर काम शुरू हो चुका है।
पहले चरण में सिर्फ पांच कोर्स को चुना गया है। टेस्टिंग के बाद इन्हें ऑनलाइन करने पर जोर दिया जाएगा। मंत्रालय के निर्देश पर ऑनलाइन कोर्स की फीस भी निर्धारित की जाएगी। रजिस्ट्रेशन के बाद विद्यार्थियों को शुल्क जमा करना होगा। फिलहाल इन कोर्स को यूनिवर्सिटी की स्टैंडिंग कमेटी से हरी झंडी मिल चुकी है। इसकी फीस को अभी तय करना बाकी है। विभाग को जल्द ही प्रस्ताव बनाकर देना है।
कंटेंट के साथ होंगे वीडियो
कोर्स से जुड़े कंटेंट के अलावा ईएमआरसी विषय संबंधी वीडियो भी अपलोड करेगा। विषय विशेषज्ञों द्वारा इन वीडियो को बनाया जाएगा। खास बात यह है कि इसमें ज्यादातर वरिष्ठ प्रोफेसर के लेक्चर को शामिल किया जा रहा है। विषयों को विस्तार से समझाने के लिए ग्राफिक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही फोटो का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
नैक में मिलेगा फायदा
नैक के नए प्रारूप के आधार पर यूनिवर्सिटी को ज्यादा जानकारी ऑनलाइन भरना है, जिसमें ऑनलाइन कोर्स के बारे में भी बताना है। इस लिहाज से ये प्रोग्राम यूनिवर्सिटी को ग्रेडिंग दिलाने में अहम भूमिका अदा करेंगे। यही वजह है कि सालभर के अंदर 20-25 ऑनलाइन प्रोग्राम तैयार करने के निर्देश कुलपति ने दिए हैं। ई-कंटेंट और ऑनलाइन कोर्स में काम करने पर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों और अन्य फैकल्टी को भी फायदा मिलेगा। इससे उनके प्रमोशन का रास्ता आसान होगा। इन प्रोग्राम के अंक उनकी सर्विस में जुड़ेंगे।
दो-दो श्रेणी के होंगे कोर्स
ऑनलाइन कोर्स को दो श्रेणियों में रखा गया है। एक में सीबीसीएस वाले कोर्स रहेंगे, जिनकी विद्यार्थियों को परीक्षा देना होगी। इसके अंक उनकी मार्कशीट में जुड़ेंगे। कुछ कोर्स सिर्फ पढ़ने की दृष्टि से तैयार किए जाएंगे जिन्हें ऑनलाइन ही पढ़ा जा सकेगा। इनकी परीक्षा नहीं करवाई जाएगी।
इन विषयों में तैयार होंगे प्रोग्राम
यूजी और पीजी कोर्स को ध्यान में रखकर प्रोग्राम बनाए जा रहे हैं। इसमें कॉमर्स, मार्केटिंग, अकाउंट्स, जर्नलिज्म, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, फिजिक्स, केमिस्ट्री, कम्प्यूटर्स, इंजीनियरिंग के अलग-अलग विषय शामिल हैं। हालांकि अभी सिर्फ चुनिंदा विषयों पर ई-कंटेंट जुटाया जा रहा है।
बढ़ेगा विद्यार्थियों का नॉलेज
ऑनलाइन कोर्स को बेहतर ढंग से डिजाइन किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ सकेगा। शुरुआती दौर में चुनिंदा विषयों को लेकर ई-कंटेंट तैयार किया जा रहा है।
-डॉ. नरेंद्र धाकड़, कुलपति, डीएवीवी

01/04/2017

नए सत्र से आधार नंबर के साथ मिलेगी डिग्री

Updated: 30 मार्च, 2017 7:53 PM

अगर आप कॉलेज के छात्र हैं और अभी तक आधार कार्ड नहीं बना है तो जल्द ही बना लें। हो सकता है कि अगले सत्र में बगैर आधार नंबर के डिग्री ना मिले। दरअसल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों को नए सत्र से डिग्री पर आधार नंबर अंकित करने के निर्देश जारी किए हैं। यूजीसी के मुताबिक छात्रों के शैक्षणिक दस्तावेजों की सुरक्षा बढ़ाने को ये फैसला लिया गया है।
उच्चतर शिक्षा विभाग और यूजीसी के अधिकारियों की बैठक फरवरी में हुई थी। इसमें शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों के दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए चर्चा की गई थी। इसके बाद दस्तावेजों की प्रमाणिकता आसानी से जांचने और उन्हें पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए कुछ बदलावों पर निर्देश दिए गए हैं। यूजीसी के मुताबिक इन बदलावों के बाद दस्तावेजों के दुरुपयोग पर लगाम कसेगी।
फर्जीवाड़ा रोकने को बदलाव जरूरी
यूजीसी की ओर से जारी पत्र के मुताबिक आधुनिक समय में डिजिटलाइजेशन के चलते कोई भी फर्जीवाड़ा आसानी से संभव है। ऐसे में ये पता लगाना मुश्किल होता है कौन सा दस्तावेज वास्तविक या नकली है। इसलिए मार्कशीट और डिग्री जैसे दस्तावेजों पर आधार नंबर के चलते फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी। साथ ही दस्तावेजों की जांच आसानी से हो सकेगी।
आधार नंबर और फोटो किए जाएं शामिल
विश्वविद्यालयों को दिए गए आदेशों के मुताबिक डिग्री पर आधार नंबर और फोटोग्राफ शामिल किए जाने हैं। इसके अलावा उच्चतर शिक्षा संस्थानों से संबंधित दस्तावेजों पर संस्थान का नाम और रेगुलर, नियमित या पार्ट टाइम कोर्स आदि भी अंकित करने का सुझाव दिया गया है। जिससे कि छात्रों की दस्तावेज पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी रहें।

19/03/2017
08/03/2017

हायर एजुकेशन का पूरा खर्च उठाएगी सरकार, 85% से कम वालों को भी फायदा
Bhaskar News | Mar 2017 09:38 IST

भोपाल. देश के हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट में दाखिला लेने वाले प्रदेश के प्रतिभावान बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना की बुधवार को विधानसभा में पेश होने वाले बजट में घोषणा हो सकती है। इस योजना का लाभ किसी जाति अथवा धर्म विशेष को नहीं, बल्कि सभी वर्ग के उन बच्चों को मिलेगा, जिन्हें माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षा में 85 प्रतिशत से अधिक अंक मिले हों। साथ ही उनके अभिभावकों की सालाना आय 10 लाख रुपए तक हो। सरकार अगले वित्तीय वर्ष में योजना के लिए 500 करोड़ रु. का बजट में प्रावधान कर सकती है।

- सरकार के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सोशल इंजीनियरिंग की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं।
- इसके मद्देनजर सरकार ने उन प्रतिभावन बच्चों की पढ़ाई का बोझ अपने कंधों पर लेने जा रही है, जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे अपने बच्चों को आगे की पढ़ाई का खर्च उठा सकें।
- उच्च शिक्षा विभाग ने देशभर के एक दर्जन टॉप इंस्टिट्यूट्स की लिस्ट बना ली है। इसमें फिलहाल आईआईटी, आईआईएम, एनआईएफटी, एनएलआईयू समेत कुछ अन्य प्रतिष्ठित संस्थान शामिल किए गए हैं। यहां पर एडमिशन होने पर छात्र-छात्रा की फीस के साथ हॉस्टल का खर्च सरकार उठाएगी।

85% से कम वालों को भी फायदा
- प्रस्ताव के मुताबिक 85 प्रतिशत से कम अंक लाने वाले बच्चों को भी योजना का लाभ देने का निर्णय सरकार ने लिया है। इसके तहत सरकार द्वारा चिह्नित संस्थान के अलावा किसी निजी प्रतिष्ठित संस्थान में छात्र-छात्राएं एडमिशन लेते हैं तो सरकार उनकी पूरी फीस अथवा एक लाख रुपए प्रति वर्ष अनुदान देगी।
इसलिए लिया फैसला
प्रदेश सरकार यह निर्णय इसलिए लेने जा रही है, क्योंकि एजुकेशन लोन देने में बैंक काफी आनाकानी करते हैं। गारंटी मांगते हैं। कुछ ऐसी शर्तें लगा देते है, जिसके चलते अधिकतर छात्रों को लोन की सुविधा नहीं मिल पाती। पैसों के अभाव में कुछ छात्रों को तो अपनी पढ़ाई भी बीच में छोड़नी पड़ जाती है और काबिल होने के बावजूद वे अपने सपने पुरे नहीं कर पाते।

आठ माह पहले सीएम ने दिए थे संकेत
दैनिक भास्कर से चर्चा में मुख्यमंत्री ने जुलाई 2016 में कहा था कि जिन बच्चों में प्रतिभा है वह किसी भी जाति और समाज के हो, वे उनकी पढ़ाई में बाधा नहीं आने देंगे। अब हर एक बच्चे के लिए अलग व्यवस्था तो नहीं कर सकते इसलिए मैं इस बारे में एक योजना बना रहा हूं, जिसके चलते बच्चे सीना तान कर कह सकेंगे कि वे अच्छे से अच्छे कॉलेज में पढ़ेंगे चाहे प्राइवेट हो या सरकारी ।

23/10/2016

इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) से पासआउट छात्र-छात्राओं के लिए खुशखुबरी है. विश्वविद्यालय प्रबंधन ने दोबारा आवेदन करने वालों के पते पर सिर्फ 48 घंटे के भीतर डिग्री पहुंचाने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है.

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