13/05/2017
देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी भी अब ऑनलाइन कोर्स संचालित करने जा रही है। सभी प्रोग्राम चॉइस बेस क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के आधार पर बनाए जा रहे हैं, जिससे कोर्स करने के दौरान मिले अंकों का फायदा विद्यार्थी की मूल यूनिवर्सिटी से चल रही डिग्री में मिलेगा। फिलहाल यह जिम्मेदारी यूनिवर्सिटी ने ईएमआरसी को दे रखी है, जो जुलाई से शुरू होने वाले सत्र के लिए पांच ऑनलाइन प्रोग्राम तैयार करने में जुटा है। कुछ पेपर की टेस्टिंग शुरू हो चुकी है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रोजेक्ट के तहत मैसिव ऑनलाइन ओपन कोर्स शुरू करने की योजना बनाई है, जिसमें देशभर की यूनिवर्सिटी को ऑनलाइन कोर्स के अलावा ई-कंटेंट तैयार करना है। यह काम देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में मार्च से किया जा रहा है। खास बात यह है कि किसी भी यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी कहीं से भी कोर्स में रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इसके बाद निर्धारित समयवाधि में कोर्स पूरा करना होगा।
ईएमआरसी ने टेस्टिंग में फोटोग्राफी पर आधारित कोर्स को ऑनलाइन किया था, जिसमें एक हजार से ज्यादा विद्यार्थीयों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। इसके अलावा फाइनेंशियल अकाउंटिंग, हिंदी भाषा साहित्य, पर्यावरण संबंधी विषय पर काम किया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि टेस्टिंग के बाद ये सभी कोर्स ऑनलाइन मौजूद रहेंगे। ईएमआरसी के डायरेक्टर डॉ. एके सिंह ने बताया कि ऑनलाइन ओपन कोर्स पर काम शुरू हो चुका है।
पहले चरण में सिर्फ पांच कोर्स को चुना गया है। टेस्टिंग के बाद इन्हें ऑनलाइन करने पर जोर दिया जाएगा। मंत्रालय के निर्देश पर ऑनलाइन कोर्स की फीस भी निर्धारित की जाएगी। रजिस्ट्रेशन के बाद विद्यार्थियों को शुल्क जमा करना होगा। फिलहाल इन कोर्स को यूनिवर्सिटी की स्टैंडिंग कमेटी से हरी झंडी मिल चुकी है। इसकी फीस को अभी तय करना बाकी है। विभाग को जल्द ही प्रस्ताव बनाकर देना है।
कंटेंट के साथ होंगे वीडियो
कोर्स से जुड़े कंटेंट के अलावा ईएमआरसी विषय संबंधी वीडियो भी अपलोड करेगा। विषय विशेषज्ञों द्वारा इन वीडियो को बनाया जाएगा। खास बात यह है कि इसमें ज्यादातर वरिष्ठ प्रोफेसर के लेक्चर को शामिल किया जा रहा है। विषयों को विस्तार से समझाने के लिए ग्राफिक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही फोटो का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
नैक में मिलेगा फायदा
नैक के नए प्रारूप के आधार पर यूनिवर्सिटी को ज्यादा जानकारी ऑनलाइन भरना है, जिसमें ऑनलाइन कोर्स के बारे में भी बताना है। इस लिहाज से ये प्रोग्राम यूनिवर्सिटी को ग्रेडिंग दिलाने में अहम भूमिका अदा करेंगे। यही वजह है कि सालभर के अंदर 20-25 ऑनलाइन प्रोग्राम तैयार करने के निर्देश कुलपति ने दिए हैं। ई-कंटेंट और ऑनलाइन कोर्स में काम करने पर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों और अन्य फैकल्टी को भी फायदा मिलेगा। इससे उनके प्रमोशन का रास्ता आसान होगा। इन प्रोग्राम के अंक उनकी सर्विस में जुड़ेंगे।
दो-दो श्रेणी के होंगे कोर्स
ऑनलाइन कोर्स को दो श्रेणियों में रखा गया है। एक में सीबीसीएस वाले कोर्स रहेंगे, जिनकी विद्यार्थियों को परीक्षा देना होगी। इसके अंक उनकी मार्कशीट में जुड़ेंगे। कुछ कोर्स सिर्फ पढ़ने की दृष्टि से तैयार किए जाएंगे जिन्हें ऑनलाइन ही पढ़ा जा सकेगा। इनकी परीक्षा नहीं करवाई जाएगी।
इन विषयों में तैयार होंगे प्रोग्राम
यूजी और पीजी कोर्स को ध्यान में रखकर प्रोग्राम बनाए जा रहे हैं। इसमें कॉमर्स, मार्केटिंग, अकाउंट्स, जर्नलिज्म, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, फिजिक्स, केमिस्ट्री, कम्प्यूटर्स, इंजीनियरिंग के अलग-अलग विषय शामिल हैं। हालांकि अभी सिर्फ चुनिंदा विषयों पर ई-कंटेंट जुटाया जा रहा है।
बढ़ेगा विद्यार्थियों का नॉलेज
ऑनलाइन कोर्स को बेहतर ढंग से डिजाइन किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ सकेगा। शुरुआती दौर में चुनिंदा विषयों को लेकर ई-कंटेंट तैयार किया जा रहा है।
-डॉ. नरेंद्र धाकड़, कुलपति, डीएवीवी