YKS History

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JPSC JET की ऑनलाइन आवेदन करने की समय सीमा बढ़ा दी गई है।जिन अभ्यर्थियों ने अभिव्यक आवेदन नहीं किया है यथाशीघ्र आवेदन कर ...
05/10/2025

JPSC JET की ऑनलाइन आवेदन करने की समय सीमा बढ़ा दी गई है।
जिन अभ्यर्थियों ने अभिव्यक आवेदन नहीं किया है यथाशीघ्र आवेदन कर दें।
अंतिम तिथि की प्रतीक्षा ना करें।

UGC NET की तर्ज पर JHARKHAND JET की नोटिफिकेशन आ चुकी है। झारखंड के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक बनने तथा phd कर...
10/09/2025

UGC NET की तर्ज पर JHARKHAND JET की नोटिफिकेशन आ चुकी है।
झारखंड के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक बनने तथा phd करने हेतु अति महत्वपूर्ण परीक्षा ।

YKS History आपकी सफलता की कामना करता है।

राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त)राष्ट्रीय खेल दिवस भारत में हर साल 29 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन हॉकी के महान खिलाड़ी म...
29/08/2025

राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त)

राष्ट्रीय खेल दिवस भारत में हर साल 29 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है और उन्होंने 1928, 1932, और 1936 के ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाए। यह दिन खेलों के महत्व को समझाने, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने, और खिलाड़ियों को सम्मानित करने के लिए है।

मेजर ध्यानचंद का जन्म संयुक्त प्रांत के इलाहाबाद (ब्रिटिश भारत) में 29 अगस्त 1905 को हुआ था।
मेजर ध्यानचंद को ' हॉकी का जादूगर ' 'The Magician' आदि उपनाम से पुकारा जाता है।
1922 में ब्रिटिश भारतीय सेना में साधारण सिपाही की हैसियत से भरती हो गए तथा 1956 में मेजर के पद से रिटायर हुए।
मेजर ध्यानचंद तथा उनके भाई रूप सिंह को ' हॉकी के जुड़वा ' (Hockey Twins) ke नाम से भी जाना जाता था।
म्यूनिख में एक सड़क का नाम उनके नाम पर रखा गया था।
दिसम्बर 1934 में भारतीय कप्तान नियुक्त हुए।

मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार ने भी 1975 में भारत की वर्ल्ड कप विजेता टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

राष्ट्रीय खेल दिवस को पहली बार 2012 में भारत में आधिकारिक रूप से मनाया गया था।

आज का ऐतिहासिक दिन....सुभाष चन्द्र बोस (Subhas Chandra Bose)भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और प्रखर राष्ट्रवादी न...
18/08/2025

आज का ऐतिहासिक दिन....
सुभाष चन्द्र बोस (Subhas Chandra Bose)

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। उन्हें “नेताजी” के नाम से जाना जाता है। उनका जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक (ओडिशा) में हुआ था। उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माता का नाम प्रभावती देवी था।

जीवन और शिक्षा

उन्होंने कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज से पढ़ाई की और बाद में इंग्लैंड जाकर भारतीय सिविल सेवा (ICS) की परीक्षा उत्तीर्ण की।

परंतु अंग्रेजों की सेवा करने के बजाय उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए कार्य करना उचित समझा और नौकरी छोड़ दी।

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

प्रारंभ में वे कांग्रेस के प्रमुख नेता रहे और 1938 में हरिपुरा अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए।

लेकिन उनके क्रांतिकारी विचारों और आज़ादी के लिए सशस्त्र संघर्ष की नीति के कारण वे महात्मा गांधी और अन्य नेताओं से मतभेद के चलते कांग्रेस से अलग हो गए।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने आज़ाद हिंद फौज (INA) का गठन किया और अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालने का प्रयास किया।

उनका प्रसिद्ध नारा था – "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा"।

उन्होंने "जय हिंद" का नारा भी दिया, जो आज राष्ट्रीय अभिवादन के रूप में प्रयोग होता है।

निधन

सुभाष चन्द्र बोस का 18 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में ताइवान में निधन हो गया था, हालांकि उनकी मृत्यु को लेकर कई विवाद और रहस्य भी रहे हैं।

महत्व

सुभाष चन्द्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे योद्धा थे जिन्होंने बलिदान, साहस और अदम्य इच्छाशक्ति का परिचय दिया। वे आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

13/08/2025

सिक्किम (नारी अदालत) 14 अगस्त

सिक्किम में नारी अदालत की शुरुआत हुई है। इस सामुदायिक न्याय मंच का संचालन सिर्फ महिलाएं करेंगी। गांव या कस्बे के स्तर पर चलने वाली यह अदालत घरेलू विवाद, आपसी झगड़े, संपत्ति के छोटे विवाद जैसे मामलों का समाधान करेगी। इसके लिए लिए स्थानीय महिला नेताओं को मध्यस्थता, नेतृत्व और न्यायिक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया है। इससे औपचारिक अदालतों पर दवाब कम होगा। इससे न्याय प्रक्रिया में समय और पैसे की बचत भी होगी।

12/08/2025

आज का ऐतिहासिक दिन

इलाहाबाद की संधि (12 अगस्त 1765)

बक्सर की लड़ाई (Oct. 22, 1764) में मुगल सम्राट (शाह आलम द्वितीय), अवध का नवाब (शुजाउद्दौला) तथा बंगाल का अपदस्थ नवाब ( मीर कासिम) की संयुक्त सेना को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (BEIC)की निर्णायक जीत हुई।
बक्सर ने प्लासी के निर्णयों पक्की मोहर लगा दी। भारत में अब अंग्रेजों को चुनौती देने वाला कोई दूसरा नहीं रह गया था।
बंगाल का नवाब पराजित होने के बाद भाग गया तथा गुमनामी में ही मृत्यु को प्राप्त हुआ। नया नवाब अब अंग्रेजों का कठपुतली था। अवध का नवाब अब अंग्रेजों की दया पर रह गया और मुगल सम्राट उनका पेंशनर बन गया।

बक्सर युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद BEIC ने मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के साथ इलाहाबाद की संधि (12 अगस्त 1765) की ।
इस संधि के अनुसार
– शाह आलम को अवध के नवाब द्वारा छोड़े गए इलाहाबाद तथा कड़ा के जिले मिले।

–BEIC को बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा की दीवानी स्थाई रूप से प्राप्त हुआ।

– मुगल सम्राट को BEIC का पेंशनर बना दिया गया।
(26 लाख रुपया वार्षिक) अब नवाब बस कंपनी की रबड़ की मोहर बन गया।

अवध के नवाब से भी इलाहाबाद की दूसरी संधि (16 अगस्त 1765) की गई जिसके तहत् नवाब को इलाहाबाद तथा कड़ा के जिले सम्राट शाह आलम को देने पड़े और युद्ध क्षतिपूर्ति के लिए कंपनी को 50 लाख रुपया दे।

9 अगस्त 1925 – काकोरी कांडकाकोरी कांड, जिसे काकोरी षड्यंत्र या काकोरी ट्रेन डकैती भी कहा जाता है, भारत के स्वतंत्रता संग...
09/08/2025

9 अगस्त 1925 – काकोरी कांड

काकोरी कांड, जिसे काकोरी षड्यंत्र या काकोरी ट्रेन डकैती भी कहा जाता है, भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक अहम घटनाक्रम था। यह घटना 9 अगस्त 1925 को उत्तर प्रदेश के काकोरी स्टेशन के पास हुई, जब हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के क्रांतिकारियों ने चलती ट्रेन को रोककर सरकारी खजाना लूट लिया।

इस योजना के प्रमुख सूत्रधार राम प्रसाद बिस्मिल और अशफ़ाक़ुल्ला ख़ान थे, जिनके साथ चन्द्रशेखर आज़ाद, राजेन्द्र लाहिड़ी और अन्य साथी शामिल थे। उनका उद्देश्य था ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों से कर के रूप में वसूले गए पैसे को हथियाकर हथियार खरीदना, ताकि आज़ादी की लड़ाई को तेज़ किया जा सके।

डकैती में लगभग ₹8,000 लूटे गए। इस दौरान हुई गोलीबारी में एक यात्री की मृत्यु हो गई, जिससे यह मामला हत्या का भी बन गया।

ब्रिटिश सरकार ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां कीं—40 से अधिक लोगों को पकड़ा गया। 1926 में मुकदमा चला और चार क्रांतिकारियों—राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ुल्ला ख़ान, राजेन्द्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह—को फाँसी की सज़ा दी गई, जो दिसंबर 1927 में दी गई। अन्य कई क्रांतिकारियों को आजीवन कारावास मिला।

काकोरी कांड ने आज़ादी के आंदोलन में युवाओं में जोश भर दिया और यह साबित किया कि अंग्रेज़ी शासन का विरोध सिर्फ़ अहिंसा से नहीं बल्कि सशस्त्र क्रांति से भी किया जा सकता है।

(Hindustan Republican Association)

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