13/07/2026
इतिहास गवाह है.. राजाओं ने जमीन और सल्तनत के लिए खून बहाया, लेकिन साल 1303 में चित्तौडगढ की धरती पर आत्मसम्मान की एक ऐसी जंग लड़ी गई जिसने पूरी दूनिया को हिलाकर रख दिया।
जब क्रूर सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने धोखे से चित्तौड पर आक्रमण किया, तो उसे अंदाजा नहीं था कि उसका सामना दृनिया की सबसे बहादुर महिलाओं से होने वाला है। राजा रतन सिह के वीरगति प्राप्त होने के बाद,. रानी पद्मावती ने खिलजी की गलामी स्वीकार करने के बजाय16,000 राजपूत वीरांगनाओं के साथ धधकती आग में कूदकर 'जौहर' कर लिया। खिलजी के हाथ आई तो सिर्फ राख और धआं
देखिए भारत के इस महान और गौरवशाल इतिहास की पूरी कहानी।
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Suren Kumar Baruah