21/12/2025
देश के जाने-माने न्यूक्लियर फिजिसिस्ट पी के अयंगर का निर्धन 21 दिसंबर 2011 को हुआ था।
उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन।
परमाणु वैज्ञानिक डॉ. पी. के. अयंगर के विचारों में भारत की वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता, स्वदेशी तकनीकी विकास और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग पर जोर था; वे विदेशी निर्भरता के सख्त खिलाफ थे और मानते थे कि मौलिक विज्ञान ही नवाचार की रीढ़ है, तथा उन्होंने शीत संलयन (cold fusion) जैसे क्षेत्रों में भी प्रयोगों का समर्थन किया, साथ ही जीवन के अंत में वे भारत-पाक शांति प्रयासों के पक्षधर बन गए थे, जो उनके परिपक्व दृष्टिकोण को दर्शाता है।
प्रमुख विचार:-
I)आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक:- डॉ. अयंगर का मानना था कि भारत को परमाणु क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना चाहिए और विदेशी रिएक्टरों के आयात का विरोध करते थे, क्योंकि उनका मानना था कि यह देश की तकनीकी रीढ़ को कमजोर करता है.
II)विज्ञान और राष्ट्र की आत्मा:- वे विज्ञान को केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय नीति का प्रतीक मानते थे. उनका लक्ष्य प्रयोगशाला से आगे बढ़कर समाज में विज्ञान को भरना था ।
III)मौलिक विज्ञान का महत्व:-उनका दृढ़ विश्वास था कि मौलिक विज्ञान (basic science) के बिना तकनीक का विकास संभव नहीं है. उन्होंने कहा था कि तकनीक और बुनियादी विज्ञान अलग होने पर नवाचार मर जाता है।
IV)ज्ञान का प्रवाह:-उन्होंने कहा कि ज्ञान को रोका नहीं जा सकता, लेकिन तकनीकी निर्भरता राष्ट्र की सुरक्षा को कमजोर करती है। उन्होंने अमेरिका के वैज्ञानिक विकास का उदाहरण दिया, जहाँ प्रतिभाओं का मुक्त प्रवाह होता है।
V)शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा:-वे परमाणु ऊर्जा को हथियार के बजाय राष्ट्रीय नीति और ऊर्जा का साधन मानते थे। वे भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौते के मुखर विरोधी थे ।
VI)शीत संलयन (Cold Fusion):- उन्होंने सामान्य तापमान पर परमाणु संलयन की संभावना पर प्रयोगों का नेतृत्व किया, यह मानते हुए कि भौतिकी की समझ आगे बढ़ सकती है, भले ही रूढ़िवादी वैज्ञानिकों ने बाद में इन प्रयोगों को बंद कर दिया ।
VII)परमाणु परीक्षण:-वे भारत के पहले परमाणु परीक्षण (स्माइलिंग बुद्धा) के मुख्य डिजाइनरों में से थे और मानते थे कि यह देश की शक्ति का प्रतीक है, लेकिन वे बाद में 1998 के थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस के प्रदर्शन पर चिंतित थे और अतिरिक्त परीक्षण चाहते थे।
संक्षेप में, डॉ. अयंगर एक दूरदर्शी वैज्ञानिक थे, जिन्होंने भारत को परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और हमेशा देश की वैज्ञानिक स्वतंत्रता तथा तकनीकी प्रगति के प्रबल समर्थक रहे ।
आपका :-TFI Computer Academy
वेबसाइट देखें:-www.tfieducation.com
फेसबुक पेज फोलो करें:-TFI Institute of Management & Technology
विद्यार्थियों का भावी भविष्य कम्प्यूटर शिक्षा पर निर्भर है।