20/04/2019
"बेक़रारी"
कुछ अच्छा पाने की बेक़रारी को जेहन में बरक़रार रखिए। आप कितने भी बड़े रसूखदार या अमीर है, असली अमीरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आपके दिल में कुछ अच्छा पाने की बेक़रारी और सनक कितनी है।
आप किसी 'सपने' या 'अपने' को लेकर बहुत बेक़रार है, और बड़ी बेताबी से उसे पाने निकल पड़े हो तो आपकी यात्रा शुभ हो। लेकिन बेक़रारी के सुरूर में सफर का सलीका मत भूल जाना।
सफर के कुछ कायदे हैं। एक तो ये कि सफर में आपकी गाड़ी हमेशा 'टॉप गियर' में नहीं चलेगी। जरूरत पड़ने पर उसे पहले, दूसरे या 'रिवर्स' गियर में भी चलाना पड़ सकता है। लेकिन सुनिश्चित करें कि ये सब होते हुए भी आप आगे ही बढ़ रहे हैं।
दूसरा ये कि आपकी गाड़ी में ईंधन की आवश्यकता होगी, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि आप को मुसल्सल जोश देने वाला ईंधन आप में भी भरा हुआ है। अगर आप में वो ईंधन नहीं है तो गहरी साँस लेकर हवा में बिखरी ऊर्जा को इकठ्ठा करो और अपने मस्तिष्क में लगा हुआ 'टॉप गियर' तलाशो। याद रखो, तीर्थयात्री की तीर्थ पर पहुँचने की बेक़रारी तीर्थ पर मिलने वाले दर्शन से भी ज्यादा बड़ी दौलत है।
तीसरा ये कि आपके पास अपनी मंजिल का नक्शा हो। भ्रमित कर देने वाले चौराहे, आकर्षण, लोग रास्ते में मिलेंगे। वेग और बेक़रारी से बहती नदियों को समुद्र से मिलने के लिए रोका जाय तो वो तबाही ला देती है। स्वार्थी लोग रास्ते में बांध बनाते है लेकिन बांधों को नदी के बुलंद हौसलें मालूम होते है वे भी तनाव में आकर मुँह खोल कर नदी को आगे बढ़ने का मार्ग दे देते हैं।
आज गाड़ी 'टॉप गियर' में नहीं चल रही है तो कोई बात नहीं, पर अपने भीतर के ईंधन को चेतावनी के निशान तक नहीं पहुँचने देना।