31/07/2015
गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई
प्रातः स्मरणीय परम पूज्य गुरु महाराज के चरणों में कोटि कोटि नमन
गुरु - जो अज्ञानता के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश में लाये
- जो सम्पूर्ण ज्ञान का स्रोत है
- बिना गुरु ज्ञान सम्भव नहीं है
गुरु का महत्व शब्दों में नहीं कहा जा सकता है , क्योंकि आज आप जो भी है गुरु के वजह से है जो आपने ज्ञान पाया अवश्य ही किसी गुरु से पाया होगा । गुरु ज्ञान के स्रोत है और ज्ञान के 6 स्रोत है
(1 ) माता पिता - सबसे पहला गुरु माँ , माँ के ममत्व से बड़ा कोई शिक्षा नहीं हो सकता और पिता के प्यार से बड़ा कोई ज्ञान नहीं हो सकता । माता -पिता का जैसा संस्कार होगा बच्चा भी वैसा ही होगा क्योंकि निब (FOUNDATION ) घर से तैयार होता है इसी संस्कार (CHARACTER ) के बल से आदमी आगे बढ़ता है
(२) गुरु, शिक्षक - गुरु हमेशा आपको जीवन प्रदान करता है , नया जीवन देता है , आपके सोचने का नजरिया बदल डालता है ; जबकि शिक्षक सिर्फ शिक्षा देते है खाशकर व्यवासायिक शिक्षा , जबकि व्यक्ति को महान सिर्फ और सिर्फ नैतिक सिक्षा ही महँ बना सकता है
(३) पुस्तक (वेद , शास्त्र , गीता आदि ) - ऐसी किताब जो आपको जीवन जीने की कला सिखाये ,आपको आगे बढ़ने का मौका दे
(4 ) अनुभव - जो आप अपने इन्द्रियों से अनुभव करते है , समाज से सीखते है , experience is the great teacher, Pain is the great Teacher, etc. , डॉक्टर कहते है बदाम खाने से दिमाग नहीं आता है लेकिन ठोकर खाने से जरुर आता है
(5) जिज्ञाशा (curiousity )- जब आप ईमानदारी से कुछ सीखना चाहेंगे आपको निश्चित ही गुरु मिलेंगे
(6) सहजता (simplicity )- आप जितने सहज होंगे , सत्य को स्वीकार करेंगे , उतने ही खुद से और दुसरे के गलतियों से सिख पाएंगे
अतः अपने गुरु का सम्मान करे , सेवा करे और उनके आदर्शो पर चलने की कोशिश करे । विश्व के सबसे बड़े और पहले गुरु शिव है , शिव ही सर्वत्र है सबका स्वामी है ,गीता (भगवद गीता ) जीवन को सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाली सबसे अच्छी पुस्तक । अतः भगवद गीता अवश्य पढ़े और दुसरो को भी प्रेरित करे ।
धन्यवाद
आपका सुभचिन्तक -डॉ. जीतेन्द्र पाण्डेय
जो आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे वह अपना है। जो आपको निराश करे , हिम्मत गिराए और ख़ुशी न दे वह अपना सगा नहीं !
गुरु है अपना ; और सब सपना !