Exam guru abhishek bhatt faculty of many ias academy

Welcome dear in your class
16/03/2021

Welcome dear in your class

  target
15/03/2021

target

  Exam preparation
15/03/2021

Exam preparation

  Exam preparation with our all family
15/03/2021

Exam preparation with our all family

15/03/2021
15/03/2021

प्राग इतिहास
पद्धतियां एवं महत्व
प्राग इतिहास से मानव के जन्म एवं विकास की जानकारी मिलती है आरंभिक काल में मनुष्य का प्रकृति के साथ संघर्ष एवं विषम परिस्थितियों पर विषय का ज्ञान सिर्फ प्राप्त इतिहास से ही प्राप्त होता है प्राण इतिहास के अंतर्गत करीब 3000000 वर्ष पूर्व से 3000 ईसा पूर्व के पहले जब मानव लिपि अथवा लेखन कला से अपरिचित था मानव संस्कृति का अध्ययन किया जाता है प्राग इतिहास का मानव सभ्यता की उत्पत्ति एवं विकास में महत्वपूर्ण स्थान है अतः आधुनिक काल में प्राग इतिहास पुरातत्व के अध्ययन पर विशेष बल दिया जाता है प्राग इतिहास के अध्ययन की विधियों का मुख्य उद्देश्य मानव के क्रियाकलापों तथा उनकी गतिविधियों की तह तक पहुंचना तथा उनके आधार पर सांस्कृतिक विशेषताओं की पहचान करना है इसके साथ-साथ प्रागैतिहासिक काल के प्राकृतिक वातावरण और प्रौद्योगिकी विकास को भी प्रागैतिहासिक का ध्यान में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है समानता इतिहास के अध्ययन के लिए दो पद्धतियां अपनाई जाती है ऐतिहासिक पद्धति और पुरातात्विक पद्धति पहली पद्धति मुख्यता ऐतिहासिक काल के लेखों पर आधारित है इसमें लेखक या तत्कालीन इतिहासकार व्यक्तियों और राज्यों के संबंध में निश्चित तिथि क्रम के अनुसार अपना मंतव्य देता है दूसरी विधि के अंतर्गत पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर मानवीय क्रियाकलापों और सांस्कृतिक विशेषताओं की रूपरेखा तैयार की जाती है यह साथ हमेशा अति प्राचीन काल की पूरी जानकारी नहीं दे पाते अंतहपुरा इतिहास पूरा अवशेषों का अध्ययन करते समय मुख्यता दो उद्देश्यों को ध्यान में रखना पड़ता है पहला उद्देश्य तो होता है एक काल मापक तैयार करना एवं दूसरा सांस्कृतिक सूचक का निर्माण करना इन्हीं के आधार पर पराग इतिहास का अध्ययन सुगमता पूर्वक किया जा सकता है इतिहास में संस्कृति शब्द का बहुत महत्व होता है संस्कृति एक अमूर्त परिकल्पना होती है परंतु समकालीन समाजों के अध्ययन में प्रथा या प्रणाली का विवरण देकर अपराध इतिहासकार उसे मूर्त रूप देने का प्रयत्न करता है प्राण इतिहास संस्कृतियों के निर्धारण से मानव आवश्यकताएं प्राकृतिक वातावरण कृत्रिम माध्यम का निर्माण युवा समिति साक्ष परंपरा तकनीकी 9th बर्तनों एवं सर्व विद्या का सहारा लेना पड़ता है कुछ अपराध इतिहासकार प्रागैतिहासिक संस्कृति यों के अध्ययन के लिए नृजातीय समानांतर तकनीक का भी उपयोग करते हैं प्राग इतिहास का अध्ययन मुख्यता स्तर क्रम विज्ञान और उपकरण प्रारूप पर आधारित होता है
स्तर क्रम विज्ञान :- प्राण इतिहास साक्षी धरती पर गुफा में और प्राचीन नदियों के किनारे बिखरे मिलते हैं प्राकृतिक गतिविधियों के परिणाम स्वरुप कुछ साक्ष्य धरती के अंदर भी दब जाते हैं इन सभी साक्ष्यों का अध्ययन स्तर क्रम विज्ञान के आधार पर किया जा सकता है स्तरीकरण के नियमानुसार इस तरीके इतने छेद की निम्नतम परत सबसे पुरानी और उसके बाद की परतें क्रमशाह नहीं होती जाती है अभी नीचे पड़ किसी नदी का हो तो उत्तर संरचनाएं विपरीत क्रम में रहती है किसी निश्चित को अन्य निश्चित हो से पुराना या नया मानकर उसका आपेक्षिक समय निर्धारित करने पर स्थानीय काल अनुक्रम का अंदाजा लगाया जा सकता है विभिन्न स्तरों से प्राप्त जीवो और वनस्पतियों से संबंधित पक्षों को पूरा इतिहास पंचांग के अनुसार निर्धारित किया जा सकता है या एक जटिल प्रक्रिया है दुर्भाग्यवश विश्व के विभिन्न भागों और भारत से जो साक्ष्य मिले हैं उन्हें संतोषजनक रूप से प्रागैतिहासिक पंचांग के साथ मिलाया नहीं जा सका है स्तर क्रम विज्ञान आदि इतिहास के अध्ययन के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ है सब अन्वेषण और उत्खनन से प्राप्त करो के आधार पर ऐतिहासिक काल के इतिहास की रचना में भी सहायता मिलती है.

उपकरण प्रारूप :-
प्रागैतिहासिक मानव के तकनीकी विकास का अध्ययन उपकरण प्रारूप के आधार पर किया जाता है परेशान कालीन मानव पत्थर के टुकड़ों अथवा वाटिका शमा की सहायता से कोण एवं सेल उपकरण तैयार करते हैं इसी की सहायता से वह जानवरों का शिकार करता था तथा अन्य आवश्यक कार्य पूरा करता था यह प्रस्तर उपकरण समय अनुसार बदलते गए इनमें आवश्यकता अनुसार परिवर्तन किए गए एक विशिष्ट काल में जैसे पुरापाषाण युग अथवा नवपाषाण युग में एक ही प्रकार के पाषाण उपकरण दुनिया के विभिन्न भागों में मिलते हैं एवं शुल्क तैयार करने के अतिरिक्त पाषाण उपकरण तैयार करने की दो अन्य विधियां भी थी इनमें पहली विधि ब्लैक टोनी तकनीकी तकनीकी के अंतर्गत किसी कोड से बड़ा शल्क उतार कर पहले खेल के चिन्ह को दूसरी कल को उतारने के आधार पर बनाया जाता है यही प्रक्रिया आगे भी दोहराई जाती है अल्ताफ लेक्टोनिक बड़े और मोटे होते हैं खेल को उतारने की एक अन्य प्रक्रिया कहलाती है इस तकनीक के अनुसार पहले कोर्ट के एक तल से अनेक केंद्र सरकार को तैयार किया जाता है और फिर तैयार कल के शीर्ष पर प्रहार करते हैं ताकि ऐसा शुल्क उतार सके जिसके तकनीक के बल पर और फिर तैयार दल के शीर्ष पर प्रहार करते हैं अतः इस विधि को निर्मित और तकनीक भी कहते हैं प्रागैतिहासिक मानव पत्थर के विभिन्न उपकरण इन विधियों द्वारा बनाया जाता था उनके उपकरणों में प्रमुख है गंडासा और खंडक उपकरण हस्त कुठार विद आर्मी घुड़चढ़ी भेजनी बेधडक दक्षिणी इन उपकरणों के आधार पर ही प्रागैतिहासिक संस्कृति ओं का अध्ययन किया जा सकता है प्रागैतिहासिक विपरीत आज इतिहास के अध्ययन के लिए अधिक विधियां उपलब्ध है आदि इतिहास का अध्ययन मुख्यता स्तरीकरण एवं तिथि निर्धारण की विधियों पर आधारित है स्तरीकरण के लिए समान वेतन एवं उत्खनन का सहारा लिया जाता है विधि निर्धारण के लिए सापेक्ष विधि तिथि निरपेक्ष तिथि और विधि स्तरीकरण के आधार पर वह आकृति विज्ञान विधि अन्योन्याश्रित काल अनुक्रम विधि रिक्शावाला विश्लेषण विधि अनवर स्तर विश्लेषण पराग विश्लेषण विधि पूरा चुंबकत्व रेडियो कार्बन विधि अथवा सी 14 विधि पर आश्रित होना पड़ता है इनमें सबसे अधिक प्रचलित विधि रेडियो कार्बन विधि ही है इस विधि का प्रयोग केवल ऐसी वस्तुओं के लिए किया जाता है जिसमें कार्बन की मात्रा वर्तमान हो जैसे काट कोयला अनाज के घुसे हुए दाने हड्डियां चूना पत्थर आदि स्थिति निर्धारण की मूल धारणा यह है कि वायुमंडल में रेडियोधर्मी कार्बन 14 की मात्रा रहती है परंतु इस धारणा को अब संशोधित किया जा रहा है समानता संख्या क्रियात्मक अशुद्धि से बचने के लिए सभी c14 तिथियों को धन अथवा लगाकर लिखा जाता है उदाहरण के लिए 1750 50 का अर्थ है कि जिस वस्तु का परीक्षण किया गया वह 1718 की है आजकल इस विधि को अधिक प्रमाणिक बनाने के लिए अतिथि का व्यवहार किया जाता है इसके अनुसार संशोधित तिथियों के आगे भी और संशोधित तिथियों के बाद कैपिटल लिखा जाता है.

15/03/2021

मानव का उद्भव एवं विकास
मानव सभ्यता की उत्पत्ति एवं विकास की कहानी अत्यंत ही रोचक है आदिम युग से आधुनिक युग तक पहुंचने में मानव को करोड़ों लाखों साल बिताने पड़े उसे अनेक विषम परिस्थितियों से गुजरना पड़ा परंतु मनुष्य ने कठिनाइयों से और प्रकृति से कभी हार नहीं मानी अपनी बुद्धि और शक्ति के बल पर वह हमेशा ही विजई रहा अपने दो हाथों एवं मस्तिष्क की समुचित उपयोग कर वह आदिम मानव से सभ्य मानव बन सका इतिहास में हम इसी सभ्य मानव के विकास उसके संघर्ष उत्थान एवं पतन तथा उसकी सांस्कृतिक उपलब्धियों के विषय में जानकारी प्राप्त करते हैं इसके लिए हमें साहित्यिक एवं पुरातात्विक सामग्रियों का सहारा लेना पड़ता है मानव के जैसे क्रियाकलाप का लिखित विवरण हमें प्राप्त होता है उसे हम इतिहास कहते हैं लेकिन सभ्यता का आरंभ कैसे हुआ किन परिस्थितियों से गुजर कर मानव सभ्यता के कगार तक पहुंच सका इसकी जानकारी देने में इतिहास असमर्थ है मानव के उद्भव एवं प्रारंभिक विकास की प्रक्रिया को जानने समझने के लिए हमें इतिहास का नहीं बल्कि प्राग इतिहास एवं प्राप्त या पूरा याद इतिहास का सहारा लेना पड़ता है प्रारंभिक काल में मनुष्य का प्रकृति के साथ संघर्ष एवं विषम परिस्थितियों पर विजय का ज्ञान हमें सिर्फ प्रगति हाथ से ही प्राप्त होता है क्योंकि इस युग में मनुष्य लिखने की कला से परिचित नहीं था ऐतिहासिक काल और प्रागैतिहासिक काल में मुख्य विभेद नहीं है कि ऐतिहासिक काल में लिपिया लेखन पद्धति का विकास हो चुका था परंतु प्रागैतिहासिक मानव से अपरिचित था प्रागपुरा ऐतिहासिक काल की कुछ संस्कृतियों के निवासी यद्यपि लेखन कला से परिचित थे तथापि उनकी लिपि स्पष्ट तौर पर पढ़ी नहीं जा सकी है इस प्रकार लिपि के आधार पर मोटे तौर पर प्रागैतिहासिक इतिहास एवं इतिहास में अंतर दिखाया जा सकता है तथापि विभाजन सर्वथा अनुपयुक्त है उदाहरण के अनुसार अभी हम हड़प्पा संस्कृति को प्राप्त इतिहास की श्रेणी में रखते हैं परंतु जब इस काल में प्रचलित लिपि का पूर्ण ज्ञान हो जाएगा तब इसे ऐतिहासिक काल में स्थान देना होगा इसी प्रकार लिपि को ही विभाजक रेखा मारी जाए तब प्राचीन भारत का ऐतिहासिक काल हमें मौर्य युग से ही मारना होगा क्योंकि उसके पहले की प्रचलित लिपि उपलब्ध नहीं है.
प्रागैतिहासिक एवं आद्य ऐतिहासिक काल का मानव सभ्यता की उत्पत्ति एवं विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है इन्हीं युग में मानव सभ्यता एवं संस्कृति की नींव पड़ी है इसे जानने के लिए हमें विभिन्न आधुनिक विज्ञान व्यथा पुरातत्व मानव विज्ञान भूगर्भ शास्त्र प्राणीशास्त्र जीवाश्म विज्ञान भूगोल इत्यादि की सहायता लेनी पड़ती है इन विज्ञानों के आधार पर ही हम पृथ्वी पर मनुष्य के जन्म एवं उसके विकास की प्रक्रिया के विषय में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

15/03/2021

इस ग्रुप का टारगेट है 10,000 शेयर 10000 लाइक क्या आप इस काम को कर सकते हैं तो प्लीज जितना हो सके शेयर करें जितना हो सके लाइक करें

15/03/2021

भारत की भौगोलिक विशेषताएं:-
भारतीय इतिहास पर भूगोल का व्यापक रूप से प्रभाव पड़ा है भारतीय महाद्वीप पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित की विशालता एवं उसकी वीरता ने भिन्न-भिन्न भागों में भिन्न भिन्न संस्कृतियों के उद्भव एवं विकास में मदद पहुंचाई है,भारत उत्तर में हिमालय की पर्वत श्रेणियों से और अन्य तीन दिशाओं से उसे समुद्र से घिरा हुआ है फलता उत्तर की ओर या समुद्र की दिशा से भारत पर बाहरी आक्रमण नहीं हो सके.उत्तर-पश्चिम सीमा पर है खैबर और कोमल तथा बोलन दर्रे द्वारा मध्य एशिया जाने का मार्ग था.
प्राचीन काल में इसी मार्ग से विदेशी आक्रमणकारी भारत आए और यहां के व्यापारी मध्य एशिया गए अरबों और यूरोपियन ओ के अतिरिक्त अन्य कोई भी जाति समुद्री मार्ग से भारत में प्रवेश नहीं कर सकी समूचे भारत में नदियों और पर्वतों का जाल बिछा हुआ है संपूर्ण भारत को सुविधा के दृष्टिकोण से 4 प्राकृतिक विभागों में रखा जा सकता है -
उत्तर पर्वती प्रदेश गंगा और सिंधू के मैदान दक्षिणी पठार एवं समुद्र तटीय क्षेत्र इस समूचे क्षेत्र में जल y.v. एवं वनस्पति की विभिन्नता देखी जा सकती है प्राकृतिक सुविधाओं के कारण हिमालय की तराई गंगा यमुना दोआब और सिंधु घाटी आरंभिक सभ्यता के प्रमुख केंद्र बने गंगा यमुना सिंधु गोदावरी कृष्णा नदी कावेरी जैसी प्रमुख नदियों ने सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान किया भारत की प्राकृतिक संपदा वन तांबा टीन लोहा सोना चांदी बहुमूल्य एवं अर्ध बहुमूल्य पत्थर की सुगमता ने विभिन्न उद्योग धंधों को बढ़ावा दिया कच्चे माल को प्राप्त करने के लिए उठा निर्मित वस्तुओं के आदान-प्रदान के लिए व्यापार वाणिज्य का विकास हुआ देश में अनेक मार्ग प्राचीन काल से ही प्रचलित थे जिनके लिए योद्धा व्यापारी और धर्म प्रचारक एक जगह से दूसरी जगह जाकर सभ्यता और संस्कृति का प्रसार करते व बस्तियों व राज्य स्थापित करते.

भारत की मौलिक एकता
भारत एक भौगोलिक सांस्कृतिक एवं आर्थिक विविधताओं से परिपूर्ण देश रहा है इसकी मौलिक एकता बाहरी विभिन्नता में निहित है संपूर्ण भारत आधुनिक पाकिस्तान एवं बांग्लादेश सहित प्राचीन काल से ही एक राष्ट्र के रूप में स्वीकार जा चुका था इसे आर्यवर्त भारतवर्ष हिंद हिंदुस्तान भारत इंडिया इत्यादि कहा गया है प्राचीन साहित्यकारों ने इसे एक ऐसे विस्तृत भौगोलिक इकाई ग्रुप में देखा है जो हिमालय पर्वत माला से लेकर समुद्र तक विस्तृत था इस समूचे क्षेत्र पर शासन करने वालों को चक्रवर्ती की उपाधि से विभूषित किया गया है अशोक समुद्रगुप्त अकबर औरंगजेब जैसे पराक्रमी और शक्तिशाली शासकों ने संपूर्ण भारत को एक राजनीतिक सूत्र में बांधने का प्रयास किया इस भौगोलिक एकता ने देश के प्रत्येक भाग के सांस्कृतिक एवं आर्थिक जी 1 को प्रभावित किया भारत की आदिम प्रजातियां आर यूनानी शक कुसानूर तुर्क मुगल इत्यादि सभी भारतीय समाज में समाहित हो गई इन सभी प्रजातियों ने भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के निर्माण में अपना अपना योगदान दिया परिणाम स्वरुप उत्तर दक्षिण पूर्व और पश्चिम के निवासियों के सामाजिक आर्थिक जीवन खानपान वस्त्र आभूषण सामाजिक संस्थाओं रीति-रिवाजों त्योहारों उत्सव भाषा इत्यादि में अलग-अलग के बावजूद एकता के लक्षण स्पष्ट तौर पर दिखाई देते हैं उत्तर भारत की आर्य सभ्यता और दक्षिण की सभ्यताओं ने एक दूसरे को प्रभावित किया अनेक शब्द और संस्थाओं का उल्लेख वैदिक साहित्य में मिलता है इस प्रकार पाली और संस्कृत के शब्द साहित्य में देखे जा सकते हैं मुंडा संस्कृति का प्रभाव भी आर्य संस्कृति पर पड़ा है अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा और लिपि में खुदवा कर भारत के विभिन्न भागों में प्रचारित किए गए इसी प्रकार वेद पुराण रामायण और महाभारत को भी सर्वत्र सम्मान दिया गया संस्कृत में लिखे इन ग्रंथों को अनेक स्थानीय भाषाओं में रूपांतरित किया गया उत्तरी भारत में स्थापित वर्ण व्यवस्था ने समूचे भारत पर अपना प्रभाव इसी प्रकार ब्राह्मण धर्म बौद्ध धर्म जैन धर्म का प्रभाव समस्त भारत पर पड़ा स्वस्थ उतावली राजनीतिक भाषा सामाजिक सांस्कृतिक व धार्मिक विभिन्नता के बावजूद भारत में एकता दर्शाता है भारतीय एकता की तुलना एक पिरामिड से की जा सकती है यहां जी वन के भौतिक आधार में अंतर अधिक स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है परंतु अन्य क्षेत्रों में अंतर कम होता जाता है भारत के वित्त में मौलिक एकता है.

15/03/2021

प्राचीन भारत सभ्यता का आरंभ
प्राचीन भारतीय इतिहास का अध्ययन अत्यंत रोचक है,
जिसके द्वारा हमें ज्ञात होता है कि भारत में मानव सभ्यता की उत्पत्ति और विकास कैसे हुआ भिन्न-भिन्न समय में कौन-कौन सी संस्कृतियों प्रचलित रही ? विभिन्न समय में राज्यों का उत्थान - पतन कैसे हुआ? सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्था कैसे विकसित हुई? एवं उसकी क्या विशेषताएं थी? धर्म का स्वरूप और प्रभाव किया था भारत के साहित्यिक वैज्ञानिक और कलात्मक उपलब्धियां कौन-कौन सी थी और कौन-कौन से तत्व थे जिन्होंने अंततः भारत को दासता की बेड़ियों में जकड़ दिया आधुनिक काल में भारतीय इतिहास लेखन की परंपरा 18वीं शताब्दी में भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना के साथ ही आरंभ हुई भारत जैसे अज्ञात देश पर शासन करने के लिए कंपनी के अधिकारियों ने प्राचीन भारतीय इतिहास का अनुसंधान किया 1748 ईस्वी में सर विलियम जोंस और वारेन हेस्टिंग्स के प्रयासों से कोलकाता में एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल की स्थापना हुई इसमें भारतीय इतिहास के विस्मृत तथ्यों को उजागर किया कलंदर में आरोपी जातियां भी भारतीय इतिहास की ओर आकर्षित हुई फल स्वरुप यूरोपीय और अंग्रेज इतिहासकार ने भारतीय इतिहास का अध्ययन यूरोपीय अर्थव्यवस्था के आधार पर किया साम्राज्यवादी और अपने हितों की सुरक्षा के लिए इन लोगों ने भारतीय इतिहास को तोड़ मरोड़ कर अपने स्वार्थों के अनुकूल तैयार किया 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से स्वतंत्रता प्रेमी से प्रभावित और देश प्रेम से प्रेरित होकर भारतीय इतिहासकारों ने इतिहास की रचना की स्वतंत्रता की पूर्णता की प्रक्रिया अंग्रेजों के आगमन से लेकर भारतीय इतिहास की गौरवपूर्ण सभ्यताओं को माना गया स्वतंत्रता की प्रक्रिया चलती रही इन लोगों ने प्राचीन भारतीय इतिहास को गौरवपूर्ण होना तथा मुसलमानों एवं अंग्रेजों के आगमन को मार्क्सवादी इतिहासकार राजनीतिक इतिहास से अधिक दिलचस्पी उत्पादन के साधनों में लेते हैं. जिन्होंने भारतीय इतिहास के क्रम को प्रभावित किया स्वतंत्रता के पश्चात अनेक आधुनिक इतिहासकारों ने पुरानी और लिख से हटकर धर्मनिरपेक्ष और वस्तु पर इतिहास लेखन का प्रयास किया है जो प्रशंसनीय है.

15/03/2021

Address

Bhatapara

Telephone

+917974739629

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Exam guru abhishek bhatt faculty of many ias academy posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The School

Send a message to Exam guru abhishek bhatt faculty of many ias academy:

Shortcuts

Share