15/03/2021
भारत की भौगोलिक विशेषताएं:-
भारतीय इतिहास पर भूगोल का व्यापक रूप से प्रभाव पड़ा है भारतीय महाद्वीप पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित की विशालता एवं उसकी वीरता ने भिन्न-भिन्न भागों में भिन्न भिन्न संस्कृतियों के उद्भव एवं विकास में मदद पहुंचाई है,भारत उत्तर में हिमालय की पर्वत श्रेणियों से और अन्य तीन दिशाओं से उसे समुद्र से घिरा हुआ है फलता उत्तर की ओर या समुद्र की दिशा से भारत पर बाहरी आक्रमण नहीं हो सके.उत्तर-पश्चिम सीमा पर है खैबर और कोमल तथा बोलन दर्रे द्वारा मध्य एशिया जाने का मार्ग था.
प्राचीन काल में इसी मार्ग से विदेशी आक्रमणकारी भारत आए और यहां के व्यापारी मध्य एशिया गए अरबों और यूरोपियन ओ के अतिरिक्त अन्य कोई भी जाति समुद्री मार्ग से भारत में प्रवेश नहीं कर सकी समूचे भारत में नदियों और पर्वतों का जाल बिछा हुआ है संपूर्ण भारत को सुविधा के दृष्टिकोण से 4 प्राकृतिक विभागों में रखा जा सकता है -
उत्तर पर्वती प्रदेश गंगा और सिंधू के मैदान दक्षिणी पठार एवं समुद्र तटीय क्षेत्र इस समूचे क्षेत्र में जल y.v. एवं वनस्पति की विभिन्नता देखी जा सकती है प्राकृतिक सुविधाओं के कारण हिमालय की तराई गंगा यमुना दोआब और सिंधु घाटी आरंभिक सभ्यता के प्रमुख केंद्र बने गंगा यमुना सिंधु गोदावरी कृष्णा नदी कावेरी जैसी प्रमुख नदियों ने सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान किया भारत की प्राकृतिक संपदा वन तांबा टीन लोहा सोना चांदी बहुमूल्य एवं अर्ध बहुमूल्य पत्थर की सुगमता ने विभिन्न उद्योग धंधों को बढ़ावा दिया कच्चे माल को प्राप्त करने के लिए उठा निर्मित वस्तुओं के आदान-प्रदान के लिए व्यापार वाणिज्य का विकास हुआ देश में अनेक मार्ग प्राचीन काल से ही प्रचलित थे जिनके लिए योद्धा व्यापारी और धर्म प्रचारक एक जगह से दूसरी जगह जाकर सभ्यता और संस्कृति का प्रसार करते व बस्तियों व राज्य स्थापित करते.
भारत की मौलिक एकता
भारत एक भौगोलिक सांस्कृतिक एवं आर्थिक विविधताओं से परिपूर्ण देश रहा है इसकी मौलिक एकता बाहरी विभिन्नता में निहित है संपूर्ण भारत आधुनिक पाकिस्तान एवं बांग्लादेश सहित प्राचीन काल से ही एक राष्ट्र के रूप में स्वीकार जा चुका था इसे आर्यवर्त भारतवर्ष हिंद हिंदुस्तान भारत इंडिया इत्यादि कहा गया है प्राचीन साहित्यकारों ने इसे एक ऐसे विस्तृत भौगोलिक इकाई ग्रुप में देखा है जो हिमालय पर्वत माला से लेकर समुद्र तक विस्तृत था इस समूचे क्षेत्र पर शासन करने वालों को चक्रवर्ती की उपाधि से विभूषित किया गया है अशोक समुद्रगुप्त अकबर औरंगजेब जैसे पराक्रमी और शक्तिशाली शासकों ने संपूर्ण भारत को एक राजनीतिक सूत्र में बांधने का प्रयास किया इस भौगोलिक एकता ने देश के प्रत्येक भाग के सांस्कृतिक एवं आर्थिक जी 1 को प्रभावित किया भारत की आदिम प्रजातियां आर यूनानी शक कुसानूर तुर्क मुगल इत्यादि सभी भारतीय समाज में समाहित हो गई इन सभी प्रजातियों ने भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के निर्माण में अपना अपना योगदान दिया परिणाम स्वरुप उत्तर दक्षिण पूर्व और पश्चिम के निवासियों के सामाजिक आर्थिक जीवन खानपान वस्त्र आभूषण सामाजिक संस्थाओं रीति-रिवाजों त्योहारों उत्सव भाषा इत्यादि में अलग-अलग के बावजूद एकता के लक्षण स्पष्ट तौर पर दिखाई देते हैं उत्तर भारत की आर्य सभ्यता और दक्षिण की सभ्यताओं ने एक दूसरे को प्रभावित किया अनेक शब्द और संस्थाओं का उल्लेख वैदिक साहित्य में मिलता है इस प्रकार पाली और संस्कृत के शब्द साहित्य में देखे जा सकते हैं मुंडा संस्कृति का प्रभाव भी आर्य संस्कृति पर पड़ा है अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा और लिपि में खुदवा कर भारत के विभिन्न भागों में प्रचारित किए गए इसी प्रकार वेद पुराण रामायण और महाभारत को भी सर्वत्र सम्मान दिया गया संस्कृत में लिखे इन ग्रंथों को अनेक स्थानीय भाषाओं में रूपांतरित किया गया उत्तरी भारत में स्थापित वर्ण व्यवस्था ने समूचे भारत पर अपना प्रभाव इसी प्रकार ब्राह्मण धर्म बौद्ध धर्म जैन धर्म का प्रभाव समस्त भारत पर पड़ा स्वस्थ उतावली राजनीतिक भाषा सामाजिक सांस्कृतिक व धार्मिक विभिन्नता के बावजूद भारत में एकता दर्शाता है भारतीय एकता की तुलना एक पिरामिड से की जा सकती है यहां जी वन के भौतिक आधार में अंतर अधिक स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है परंतु अन्य क्षेत्रों में अंतर कम होता जाता है भारत के वित्त में मौलिक एकता है.