16/08/2026
भारत में प्रतिदिन औसतन लगभग 468 लोग आत्महत्या (Su***de) करते हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, देश में एक वर्ष में कुल 1,70,746 लोगों ने आत्महत्या कर अपनी जान गंवाई,
यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में हर 3 मिनट में एक व्यक्ति अपनी जीवनलीला समाप्त कर लेता है, मुख्य आंकड़े एक नज़र में
प्रति घंटे मौतें:-
देश में हर घंटे औसतन लगभग 19 से 20 लोग आत्महत्या करते हैं.
सबसे प्रभावित आयु वर्ग: -आत्महत्या करने वालों में लगभग 66% लोग 18 से 45 वर्ष के युवा और कामकाजी वर्ग के होते हैं,
*लिंग के आधार पर: -
कुल मामलों में से लगभग 75% पुरुष और 25% महिलाएं शामिल हैं,
*सबसे ज्यादा प्रभावित श्रेणियां (Occupations)दिहाड़ी मजदूर (Daily Wage Earners): -
कुल आत्महत्याओं में सबसे बड़ा हिस्सा (तकरीबन 26-28%) दिहाड़ी मजदूरों का होता है, जो गंभीर आर्थिक तंगी को दर्शाता है.गृहिणियां (Housewives): घरेलू महिलाओं का हिस्सा कुल मौतों में लगभग 14.7% है।
छात्र (Students):-
पढ़ाई और परीक्षा के बढ़ते दबाव के कारण देश में हर दिन औसतन 35 से अधिक छात्र सुसाइड करते हैं।
आत्महत्या के प्रमुख कारणपारिवारिक समस्याएं: -
लगभग 33.5% मामलों की मुख्य वजह घरेलू कलह और पारिवारिक तनाव होती है, बीमारी व मानसिक स्वास्थ्य: करीब 17.9% लोग गंभीर या मानसिक बीमारी (जैसे डिप्रेशन) के कारण यह कदम उठाते हैं।
हमारे देश में पर डे भारत में प्रतिदिन औसतन लगभग 26,700 से 28,000 लोगों की मृत्यु होती है। यह आंकड़ा देश की कुल जनसंख्या और अनुमानित मृत्यु दर (क्रूड डेथ रेट जो कि लगभग 7.3 से 7.6 प्रति 1,000 व्यक्ति है) के आधार पर निकाला गया है। वर्षभर में यह कुल आंकड़ा लगभग 95 लाख से 98 लाख के बीच रहता है।
वार्षिक मौतें: -
भारत में हर साल लगभग 95 से 98 लाख लोगों की मौत होती है
प्रति घंटे की मौत:-
एक घंटे में लगभग 1,110 से 1,120 लोगों की मृत्यु होती है।प्रति मिनट की मौत:-
हर मिनट लगभग 18 से 19 लोग दम तोड़ते हैं।
भारत में प्रतिदिन औसतन लगभग 502 लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में होती है। संसद और सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश में हर साल तकरीबन 1.83 लाख लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा देते हैं।
यदि व्यापक रूप से सभी प्रकार के ट्रैफ़िक हादसों (सड़क, रेलवे और रेल क्रॉसिंग दुर्घटनाएं) को शामिल किया जाए, तो
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार
यह संख्या प्रतिदिन 546 मौतों तक पहुँच जाती है.मुख्य आंकड़े
एक नज़र मेंप्रति घंटे मौतें: - देश में हर घंटे औसतन 20 से 21 लोग सड़क हादसों में मरते हैं.दैनिक हादसे: भारत की सड़कों पर रोजाना लगभग 1,400 से अधिक दुर्घटनाएं दर्ज होती हैं सबसे प्रभावित आयु वर्ग: सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होने वाले लोगों में लगभग 66% लोग 18 से 34 वर्ष के युवा होते हैं।
इसका मुख्य कारण है तेज रफ़्तार गाड़ी चलना और सड़क की स्थिति खराब होने का कारण है ।
वाकई में भारत इस तरह से विकसित 2047 में हो सकता है ।