11/01/2022
वंदे मातरम
भारत के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग चुकी है और विभिन्न राजनीतिक दल अपने मुद्दों के साथ ही नहीं अपितु अन्य सत्ताधारी दलों की दाल का रंग बता रहे हैं चाहे वह रंग हो या कोई अन्य हो। चाहे वह उसकी गुणवत्ता को भी कमियां में ढालकर बता रहे हैं लेकिन विपक्ष ने आजतक यह हिम्मत नहीं की कि वो सत्ता दल के प्रयास जिनसे बदलाव हुआ हो , न केवल वर्तमानकाल के संदर्भ में अपितु भविष्य के लक्ष्यों जैसे भारत सरकार के अंतर्राष्ट्रीय सोलर एनर्जी संगठन संबंधी प्रयास से न केवल भारत को बल्कि सारे विश्व के लिए, आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन स्तर और शुद्ध पर्यावरण के प्रयास में भारत सफल हुआ था। आज जनता की उम्मीदों का भारत जिस जम्मू कश्मीर में धारा 370 को हटाने से अब जम्मू कश्मीर में न केवल भारतीय बल्कि संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश में विश्व की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा बनाने वाली कंपनी श्री नगर में 5 लाख वर्ग फिट का मॉल बनाने जा रही है। इससे साफ नजर आता है की पड़ोसी मुल्क ने केवल धार्मिक आधार पर जम्मू कश्मीर को अपने झगड़े में रखकर हड़पने की कोशिश की हैं लेकिन आज जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था को देखा जाए तो लगता है की वास्तव में यहां कुछ तो बदलाव हुआ है। पूर्व में जम्मू कश्मीर में अर्थव्यवस्था के क्या संसाधन थे वो आप जानते है लेकिन आज वहां 6 लाख से अधिक पर्यटक प्रतिवर्ष आएं तो यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है क्योंकि यह बदलाव उन भारतीयों के वोट का परिवर्तन हैं न की किसी चमत्कारिक उम्मीद का। बहुत से लोग अपने अपने दलों के कारण बड़ी बड़ी घटनाओं में उलझ जाते हैं। वो बिना किसी अपने हित साधे भी केवल अपनी अपनी बात रखने या मनवाने , लोगों को दिखावा करने या परिणाम के बाद खुशी इजहार करने की चाहत से अत्यंत ज्वलंत भाषा के साथ विचार रखते हैं। कभी कभी दो विपक्षी दलों के नेता मंत्रियों के बच्चों की आपस में शादी देखते हैं सुनते हैं तो कहते हैं की ये तो दोनों और से मिले हुए हैं हमारे लिए तीसरा विकल्प होना चाहिए। इसका कारण है की ऐसे विचारक उन नेताओं में परस्पर विरोधी स्वरूप को जीवंत देखना चाहते हैं। लेकिन नेताओं और अमूमन व्यवहारिक रूप से शिक्षित लोगों का विरोधी नजरिया तभी तक रहता है जब तक की प्रक्रियाधीन मुद्दे का इंतकाल ना हो जाए। अगर कोई चिंता का विषय है फिर भी दुखद घटना नहीं होने से पूर्व विपक्षी दलों को साजिश ही लगती हैं लेकिन उन्हें पता है की इतिहास में ऐसा हुआ है चाहे वह प्रधानमंत्री की सुरक्षा का सवाल ही हो। किसी मुद्दे पर देशवासियों का अनावशायक समय खराब न करने के बजाय नेता अपनी धाक जमाने में तो आम लोग उनके साथ हाय हाय में जुटे रहते हैं चाहे घर में ठंड, गर्मी, बरसात के दिन घर परिवार के सदस्यों का हाल क्या ही होता हो। बच्चो को शिक्षा से पहले अपनी नेतागिरी के विचारों से फलीभूत करना ताकि उन्हें लगे मेरी मां , मेरे पापा , दादा आदि ही सत्ता के हकदार है लेकिन अंततः इनका परिणाम घोषित होता है तो वह तीखा होता है। ये चुनाव सत्ता बदलने या सत्ता में आने के लिए नहीं है अपितु जनता के अपने इरादों को सफल करने के लिए एक पथ का नक्शा हैं। और इस पर भारत के सभी मतदाता अपने स्वाभिमान के साथ चलते हैं और अपने गोपनीय विचारों और आशाओं का बटन दबाते हैं।
जब नेता लोगों का झगड़ा चुनावों तक ही हैं तो आम जन का जो इन वोटों का संबंध अपने क्षेत्र, जिले, राज्य, देश की प्रगति और विकास के लिए देखे या पार्टी , संबंधी , अथवा किसी अन्य राग जगाने वाले घटनाक्रम के लिए मतदान करें।
आज महामारी के समय में भी कार्यकर्ता बनकर ऐसे घूम रहे हैं जैसे पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति में बंधा चांद घूम रहा हो। सभी मतदाताओं, राजनेताओं, राजनीतिक विश्लेषकों, पत्र संपादकों, दल प्रवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं से विनम्र निवेदन है की उस सीमा को पर पहरा रखना जहां मुद्दा हम भारतीयों का हो और उसमें अडंगा किसी पड़ोसी मुल्क के दिशाविहीन लोगों का नहीं हो। पड़ोसी मुल्क के नेता इसने महान है की वो वैज्ञानिकों से कई गुना ज्यादा प्रगती कर गए हैं उनके पास ऐसे हथियार है जो उनके समुदाय को बचा कर लक्षित लोगों को मारता हो वो भी परमाणु हथियार। ऐसा दुनिया में हमारे पड़ोसी मुल्क के अलावा किसी के पास नहीं है। इसलिए गैर जिम्मेदाराना विचार के लोगों और नेताओं के प्रति समर्पण करने से खुद बचे , अपनों को बचाएं। जब तक जीवन हैं जन कल्याण के कार्य करने का अवसर हैं इसमें क्या जाति और क्या धर्म? सभी भारतीय एक हैं और सभी प्रगति के माध्यम से दुनिया को संकेत दें की देश के लिए हम सभी भारतीय हैं इस मकसद से हमारी जाति और धर्म केवल भारतीय हैं।
ये मेरे अपने निजी विचार है आप इन्हें किस तरह से समझते हैं यह आपका मसला है। पाठक का जीवन शुभ हो। ©Devendra Thory
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