📢 RCI द्वारा D.Ed. Special Education Admission 2026 का शेड्यूल जारी! 🎓
Rehabilitation Council of India (RCI) के अंतर्गत D.Ed. Special Education सहित Diploma एवं Certificate Level Courses में प्रवेश के लिए Admission Schedule 2026 जारी कर दिया गया है।
🗓️ मुख्य तिथियाँ: ✅ ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन: 05 अगस्त 2026 से 24 अगस्त 2026 ✅ प्रथम मेरिट सूची: 26 अगस्त 2026 ✅ प्रथम काउंसलिंग/रिपोर्टिंग: 29 अगस्त से 03 सितंबर 2026 ✅ द्वितीय मेरिट सूची: 05 सितंबर 2026 ✅ द्वितीय काउंसलिंग/रिपोर्टिंग: 08 सितंबर से 11 सितंबर 2026 ✅ अंतिम चयनित सूची: 15 सितंबर 2026 🎓 कक्षाओं का शुभारंभ: 18 सितंबर 2026
💰 पंजीकरण शुल्क: 🔹 General/UR – ₹500 🔹 OBC/EWS/SC/ST/PwD – ₹350
⚠️ D.Ed. Special Education में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी समय रहते आवेदन करें और सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें।
Bachpan day care centre bareilly run by hwd.up.
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अक्षम सक्षम एक समान, सबको शिक्षा सबको ज्ञान!
श्रवण बाधित, दृष्टि बाधित एवं मानसिक मंदित बच्चों की शिक्षा, मार्गदर्शन और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण टिप्स। आइए मिलकर दिव्यांग बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाएं। 🙏"
विश्व का पहला दिव्यांग विश्वविद्यालय कौन से महाद्वीप में स्थित है और उसका क्या नाम है ?कमेंट में बताए।
09/07/2026
*🛖💵🤔रिटायरमेंट के बाद भी लोग अपने पैसों को खर्च करने से क्यों डरते हैं----🛖💵🤔*
हमारे देश में लाखों ऐसे बुजुर्ग हैं जिन्होंने पूरी जिंदगी ईमानदारी से मेहनत की, बचत की, बच्चों को पढ़ाया, घर बनाया और करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर दी…
लेकिन दुःख की बात यह है कि रिटायरमेंट के बाद भी वे उसी डर और कमी वाली मानसिकता में जीते रहते हैं।
कई लोग 65–70 साल की उम्र में भी:
जरूरत महसूस होने पर भी AC चलाने से डरते हैं…
अच्छा इलाज टाल देते हैं…
आरामदायक यात्रा नहीं करते…
अपने शौक़ दबा देते हैं…
और खुद पर पैसा खर्च करने में अपराधबोध महसूस करते हैं।
🌿 *आखिर ऐसा क्यों होता है?*
क्योंकि 35–40 साल तक उनका पूरा जीवन “बचत” पर आधारित रहा।
उनके समय में नौकरी की सुरक्षा कम थी, महंगाई का डर था, भविष्य अनिश्चित था।
धीरे-धीरे उनका दिमाग इस तरह तैयार हो गया कि पैसा खर्च करना उन्हें ग़लत लगने लगा।
उनके अंदर एक डर बैठ गया:
अगर आगे पैसों की जरूरत पड़ गई तो ?
अगर बीमारी आ गई तो?
अगर पैसे खत्म हो गए तो?
और यही डर उन्हें जीने नहीं देता।
🌿 *रिटायरमेंट के बाद सबसे आम समस्याएँ:*
1. सिर्फ ब्याज पर जीने की मानसिकता
कई लोग करोड़ों रुपए बैंक में रखे रहते हैं लेकिन मूल रकम को छूना नहीं चाहते।
वे सिर्फ FD के ब्याज पर जिंदगी काटते रहते हैं, जबकि महंगाई धीरे-धीरे उस पैसे की ताकत कम करती रहती है।
2. इलाज को टालना
बहुत से बुजुर्ग पैसे होने के बावजूद:
घुटने का ऑपरेशन,
दांतों का इलाज,
आंखों का मोतियाबिंद,
या जरूरी टेस्ट टालते रहते हैं।
उन्हें लगता है: इतना पैसा खर्च क्यों करें?
लेकिन बाद में वही बीमारी ज्यादा बड़ी और महंगी बन जाती है।
3. खुद को तकलीफ देना
70 साल की उम्र में भी Sleeper Class में सफर करना…
गर्मी में जरूरत महसूस हो तो भी AC ना चलाना…
अच्छा खाना ना खाना…
सिर्फ पैसे बचाने के लिए खुद को कष्ट देना —
यह समझदारी नहीं, आदत बन चुकी मानसिक कैद है।
4. बच्चों के लिए सब बचाकर रखना
कई माता-पिता अपनी पूरी जिंदगी ऐसे जीते हैं जैसे वे ग़रीब हों, सिर्फ इसलिए कि बच्चों के लिए ज्यादा पैसा छोड़ जाएं।
लेकिन आज के समय में ज्यादातर बच्चे खुद कमाने वाले हैं।
उन्हें माता-पिता का पैसा नहीं, उनका स्वस्थ और खुश रहना ज्यादा जरूरी लगता है।
🌿 *असली डर क्या होता है?*
असल में यह सिर्फ पैसों का डर नहीं होता।
यह “असुरक्षा” का डर होता है।
लंबी उम्र का डर
बीमारी का डर
अकेलेपन का डर
भविष्य का डर
इस डर में इंसान अपनी बची हुई अच्छी जिंदगी भी जी नहीं पाता।
🌿 *सबसे बड़ा दुःख क्या बन जाता है?*
बहुत लोग जिंदगी भर पैसा जोड़ते रहते हैं…
लेकिन जब खर्च करने और आनंद लेने का समय आता है, तब शरीर साथ नहीं देता।
फिर पीछे सिर्फ पछतावा बचता है:--
काश थोड़ा घूम लिया होता…
काश खुद पर खर्च किया होता…
काश जिंदगी को थोड़ा जी लिया होता…
कई लोग बैंक बैलेंस छोड़ जाते हैं…
लेकिन अधूरी जिंदगी भी छोड़ जाते हैं।
🌿 *अब सवाल है — क्या किया जाए?*
1.कृपया “खुशी फंड” बनाइए
हर महीने या हर साल कुछ पैसा सिर्फ खुशी के लिए अलग रखिए।
यात्रा
अच्छे कपड़े
आरामदायक जीवन
हॉबी
परिवार के साथ समय
इस पैसे को खर्च करना गलत नहीं है।
पैसा दो हिस्सों में बांटिए
➤ *Survival Fund*
जो मेडिकल और जरूरी जरूरतों के लिए सुरक्षित रहे।
➤ *Lifestyle Fund*
जो आराम और खुशी के लिए हो।
जब दिमाग को भरोसा हो जाता है कि सुरक्षा वाला पैसा अलग है, तब खर्च करने का डर कम होने लगता है।
3. स्वास्थ्य पर खर्च करने में कंजूसी मत कीजिए
सबसे महंगी चीज़ अस्पताल नहीं…
बल्कि खराब स्वास्थ्य होता है।
अच्छा खाना आरामदायक नींद, जरूरी इलाज,
मानसिक शांति —
ये खर्च नहीं, निवेश हैं।
4. उम्र भर की बचत के धन को को सिर्फ बचाइए मत, इस्तेमाल भी कीजिए!
हल्की वॉक,
योग,
दोस्तों से मिलना,
परिवार के साथ समय बिताना,
नई जगह घूमना —
ये सब शरीर और मन दोनों को जीवित रखते हैं।
5. बच्चों के लिए सबसे बड़ा उपहार क्या है?
बच्चों को करोड़ों छोड़ना जरूरी नहीं…
उन्हें यह दिखाना ज्यादा जरूरी है कि:--
जीवन कैसे जिया जाता है।
एक खुश, स्वस्थ और आत्मनिर्भर माता-पिता —
यह किसी भी विरासत से बड़ा उपहार है।
🌿 *याद रखिए--*
आपने 40 साल सिर्फ पैसा जोड़ने के लिए मेहनत नहीं की थी…
आपने मेहनत की थी ताकि जीवन सम्मान और आराम से जी सकें।
✨ जरूरत है तो AC चलाइए।
✨ हर 3 - 4 महीने में अच्छी यात्रा कीजिए।
✨ अपने शौक पूरे कीजिए, जो बचपन में अधूरे रह गए थे।
✨ अच्छा स्वास्थ्यवर्धक भोजन कीजिए।
✨ खुद पर खर्च करने से डरिए मत।
क्योंकि अंत में सबसे बड़ी संपत्ति बैंक बैलेंस नहीं…
बल्कि जी हुई जिंदगी होती है।
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बचपन डे केयर सेंटर, जैसे संस्थानों का मुख्य उद्देश्य प्रारंभिक स्तर पर दिव्यांग बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना और उनके विकास के लिए एक सहायक वातावरण तैयार करना है।
इस सेंटर के मुख्य उद्देश्यों को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
प्रारंभिक हस्तक्षेप (Early Intervention): 3 से 7 वर्ष की आयु बच्चों के मस्तिष्क और कौशल विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसका उद्देश्य बच्चों की विशिष्ट आवश्यकताओं (जैसे श्रवण बाधिता या मानसिक अक्षमता) की शीघ्र पहचान करना और उन्हें समय पर आवश्यक थेरेपी और प्रशिक्षण प्रदान करना है।
सर्वांगीण विकास: बच्चों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि उनके शारीरिक, मानसिक, संज्ञानात्मक (Cognitive), और भावनात्मक विकास के लिए विशेष गतिविधियाँ कराना, ताकि वे अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकें।
आत्मनिर्भरता की नींव: इस आयु वर्ग में बच्चों को दैनिक जीवन के छोटे-छोटे कार्य (जैसे खुद खाना, अपनी चीजों को पहचानना) सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में शुरुआती प्रशिक्षण देना।
सामाजिक एकीकरण: बच्चों को एक-दूसरे के साथ खेलने और बातचीत करने के अवसर प्रदान करना, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़े और वे सामाजिक रूप से घुलने-मिलने में सक्षम हो सकें।
अभिभावकों को सहयोग: बच्चों के माता-पिता को यह सिखाना और जागरूक करना कि वे घर पर अपने बच्चे की विशेष जरूरतों का ध्यान कैसे रखें, ताकि स्कूल के प्रयासों को घर पर भी जारी रखा जा सके।
सरकारी नीतियों का क्रियान्वयन: दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित दिव्यांग पुनर्वास (Rehabilitation) के मानकों को अपनाकर बच्चों को सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं और अधिकारों का लाभ दिलाना।
संक्षेप में, इस सेंटर का उद्देश्य एक "सुरक्षित और समावेशी स्थान" बनाना है, जहाँ 3 से 7 वर्ष के दिव्यांग बच्चे बिना किसी भेदभाव के अपनी पूरी क्षमता का विकास कर सकें।
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यहाँ भारत में दिव्यांगजनों से जुड़ी हालिया मुख्य ख़बरें, सरकारी योजनाएं और कानूनी अपडेट्स दिए गए हैं:
1. सुप्रीम कोर्ट का बिना पंजीकरण वाले रिहैब सेंटरों पर कड़ा रुख
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में चल रहे बाल विकलांगता पुनर्वास और थेरेपी सेंटरों (Rehabilitation and Therapy Centres) में हो रही अनियमितताओं को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है।
मुख्य मुद्दा: याचिका में बताया गया कि कई निजी क्लिनिक RPwD एक्ट 2016 (दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम) की धारा 50 के तहत बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं।
अयोग्य स्टाफ: कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई है कि इन केंद्रों में काम करने वाले कई थेरेपिस्ट के पास भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) द्वारा मान्यता प्राप्त डिग्री या ट्रेनिंग नहीं है। कोर्ट ने साफ किया है कि विशेष बच्चों के भविष्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और मानकों को कड़ाई से लागू किया जाएगा।
2. दिव्यांगजनों के लिए दो नई बड़ी योजनाएं
सरकार ने दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन को आसान बनाने के लिए दो प्रमुख योजनाओं की शुरुआत की है:
दिव्यांगजन कौशल योजना
यह एक विशेष कौशल विकास (Skill Development) कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य दिव्यांग युवाओं को ऐसे क्षेत्रों में ट्रेनिंग देना है जहाँ रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं, जैसे—इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT), डिजिटल टूल्स, हॉस्पिटैलिटी (होटल और प्रबंधन) और एनीमेशन क्षेत्र। यह ट्रेनिंग पूरी तरह से उनकी क्षमताओं के अनुसार तैयार की जा रही है ताकि वे सम्मानजनक रोजगार पा सकें।
दिव्यांग सहारा योजना
यह योजना आधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाले सहायक उपकरण (Assistive Devices) आसानी से उपलब्ध कराने के लिए है:
इसके तहत एलिम्को (ALIMCO) को आधुनिक कृत्रिम अंग और उपकरण बनाने के लिए अतिरिक्त फंड दिया जा रहा है।
नए उपकरणों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि वे इस्तेमाल करने में अधिक आरामदायक और आधुनिक हों।
देश भर में 'असिस्टिव टेक्नोलॉजी मार्ट' (Assistive Technology Marts) खोले जा रहे हैं, जहाँ जाकर दिव्यांगजन स्वयं इन आधुनिक व्हीलचेयर, सुनने की मशीन और अन्य उपकरणों को देख, आज़मा और खरीद सकते हैं।
3. डिजिटल और सरकारी सेवाओं को सुगम बनाने पर ज़ोर
सभी सरकारी वेबसाइटों, मोबाइल ऐप्स और सार्वजनिक स्थानों को दिव्यांगजनों के लिए पूरी तरह 'सुगम्य' (Accessible) बनाने की मुहिम तेज की गई है। इसके तहत बैंकों और सरकारी कार्यालयों के ऐप्स को इस तरह अपडेट किया जा रहा है कि वे स्क्रीन रीडर और वॉयस कमांड (बोलकर काम करने वाले सिस्टम) को बेहतर तरीके से सपोर्ट कर सकें, जिससे दृष्टिबाधित या सुनने में असमर्थ लोगों को किसी दूसरे पर निर्भर न रहना पड़े।
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