Greencore Bio Hi tec nursery Bansur

Greencore Bio Hi tec nursery Bansur उच्च quality के आंध्रा व् कोलकाता थाईलैंड ?

सुपर कंपोस्ट
05/10/2024

सुपर कंपोस्ट

*जीवामृत के कई फ़ायदे हैं, जिनमें से कुछ ये हैं:👇🏻*  जीवामृत में मौजूद सूक्ष्म जीवाणु, ज़मीन में मौजूद पोषक तत्वों को पौ...
24/09/2024

*जीवामृत के कई फ़ायदे हैं, जिनमें से कुछ ये हैं:👇🏻*

जीवामृत में मौजूद सूक्ष्म जीवाणु, ज़मीन में मौजूद पोषक तत्वों को पौधों के लिए उपलब्ध बनाते हैं.

जीवामृत की मदद से पौधों और पेड़ों को कवक और जीवाणु से होने वाले रोगों से बचाया जा सकता है.

जीवामृत से मिट्टी की गुणवत्ता और बनावट में सुधार होता है.

जीवामृत से मिट्टी और जल प्रदूषण कम होता है.

जीवामृत से जैव विविधता संरक्षित होती है.

जीवामृत से रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है.

जीवामृत से लागत बचती है.

जीवामृत से एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलता है.

🍀🍀🍀जीवामृत🍀🍀🍀

पपीता की खेती की महत्वपूर्ण बातें     💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐🪷 रेड लेडी ,पूसा ड्वॉर्फ ,पूसा नन्हा अपने क्षेत्र में काफी प्रचलित है 🪷...
19/08/2024

पपीता की खेती की महत्वपूर्ण बातें
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

🪷 रेड लेडी ,पूसा ड्वॉर्फ ,पूसा नन्हा अपने क्षेत्र में काफी प्रचलित है
🪷 पौधे लगाने का समय 15 फरवरी के बाद अप्रैल तक है किस्म के आधार पर दूरी होनी चाहिए आमतौर पर 1.8×1.8 मीटर कीसिफारिश की जाती है
🪷 खेत में पौधा लगाए तो उसे ऊंचाई पर लगाएं ताकि पानी का भराव नहीं हो एक लंबाई में पौधों की लाइन में एक सीधा बेड बना ले जिससे जडगलन रोग ,फंगस रोग फूल गिरने की समस्या कम होगी
🪷 पोषक तत्व में बड़े पौधे में 10 kg गोबर खाद या वर्मी कंपोस्ट और हर महीने NPK 15:15:15 का स्प्रे करना चाहिए
🪷पेड़ ऐसी जगह लगाए जहा हवा का संचार अच्छे से हो आस पास सफाई हो , मच्छर v कीटो का प्रकोप कम हो
🪷पपीते के पेड़ में मिली बग(सफेद कीट )रोग काफी ज्यादा आता है अगर इसकी रोकथाम नही की जाती तो यह पूरे पेड़ को खराब कर देता है इसकी रोकथाम के लिए पानी की धार से संक्रमित जगह को धोना चाहिए और नीम तेल का स्प्रे करना चाहिए
🪷 बिना एक्सपर्ट की सहायता से कभी भी कोई दवा या खाद का प्रयोग ना करें
🪷 मार्केट में रेड लेडी जो की एक फेमस किस्म है उसकी नकली किस्म बहुत ज्यादा आ रही है अधिकृत केंद्रों से ही बीज खरीदे
🪷 अपने क्षेत्र में पपीता का मौसम इतना अनुकूल नहीं है इसे बड़े क्षेत्र में लगाने से बचे क्योंकि सर्दी व गर्मी काफी तेज पड़ती है जिसे पेड़ खराब हो जाते है

नींबू व  अन्य खट्टे फलों के पेड़ों की कटी फटी पत्तियों की समस्या को कैसे दूर करे✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️नींबू के पत्...
09/08/2024

नींबू व अन्य खट्टे फलों के पेड़ों की कटी फटी पत्तियों की समस्या को कैसे दूर करे✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

नींबू के पत्ते विभिन्न कीटों के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं जिनमे पत्ती खाने वाला कैटरपिलर है इनका शरीर आमतौर पर मुलायम और बेलनाकार आकार वाला कुर्मी जैसा होता है कैटरपिलर नींबू के पेड़ों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं एवं फलों के उत्पादन और समग्र पौधों के स्वास्थ्य पर असर डालते हैं मादा तितलियां अपने अंडे पेड़ की पत्तियों पर देती है आमतौर पर पेड़ के ऊपरी सतह के पास देती है अंडों से निकलने के बाद कैटरपिलर नींबू की पत्तियों को बड़े चाव से खाना शुरू कर देते हैं यह पेड़ की पत्तियों को बार-बार खाते हैं इसलिए उत्पादन क्षमता पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है पत्ती खाने वाले कैटरपिलर को प्रबंध करने के लिए प्रभावी नियंत्रण उपायों को जानना आवश्यक है

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कृषि विधियों द्वारा

गिरी हुई पत्तियों और मलबे को हटाकर बगीचे में सफाई रखे क्योंकि ये पुरानी पत्तियां व मलबा कैटरपिलर और अन्य कीटो के लिए संभावित प्रजनन स्थल के रूप में काम करते हैं और प्रभावित शाखाओं की छटाई करें

यांत्रिक नियंत्रण🪷🪷🪷🪷
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कैटरपिलर कम संख्या में हो तो उन्हें हाथ से चुने और नष्ट कर दें

रासायनिक नियंत्रण🪷🪷🪷
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प्रोफेनोफोस 2 मिली प्रति लिटर या इंडोक्साकार्ब 1.5मिली प्रति लिटर के हिसाब से छिड़काव करे 15 दिवस में दोबारा छिड़काव करें
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एन्थ्रक्नोज़(श्यामवर्ण), बरसात के मौसम में अमरूद के फलों की घातक बीमारी कोकैसे करें प्रबंधित?जुलाई अगस्त के महीने में अमर...
03/08/2024

एन्थ्रक्नोज़(श्यामवर्ण), बरसात के मौसम में
अमरूद के फलों की घातक बीमारी को
कैसे करें प्रबंधित?

जुलाई अगस्त के महीने में अमरुद में एन्थ्रक्नोज़ रोग का प्रकोप दिखाई देने लगता है । इस समय अमरुद के पौधों में अक्सर एक रोग पाया जाता है जिसके कारण अमरूद के पेड़ की डालियों के अंत में जो छोटी और कोमल नवजात पत्तियां होती है, उस पर काली या चॉकलेट रंग के अनियमित आकार के धब्बे बनते है जिससे पत्तियां पीली हो जाती है और अंतः कमजोर हो जाती है और गिर जाती है। इसके आस पास धब्बें होने के कारण दूसरी आस पास की पत्तिया भी काली भूरे रंग की हो जाती हैं और ऊपर की टहनियां काली पड़ जाती है। जो नई कलियां है वह फूल बनने से पहले ही कमजोर होकर गिर जाती है। अगर इनका समय पर इलाज न करे तो यह सूख कर गिर जाती है और धीरे धीरे पहले पूरी डाली सूख जाती है। इस रोग के कारण फलों के ऊपर छोटे छोटे काले धब्बें दिखाई पड़ते है जो धसे होते है और फल अंदर से सड़ जाते हैं। छोटी बिना खिली कलियाँ और फूल भी इस रोग के कारण समय से पहले ही सूख कर गिर जाती है। यह एक फफूंदजनित रोग है,जो कोलेटोट्राईकम नामक फफूंद की वजह से होता है ।यह वसंत ऋतु में जब मौसम ठंडा और नमीयुक्त होता है, मुख्य रूप से पौधों की पत्तियों और टहनियों पर सर्वप्रथम हमला करता है। बारिश के मौसम (जुलाई अगस्त-सितंबर) में इसका प्रकोप सर्वाधिक होता है। इस मौसम में लगातार नमी बने रहने के कारण रोग की उग्रता में भारी वृद्धि होता है। एन्थ्रेक्नोज रोग का अगर इसका समय पर इलाज न किया गया तो मोटी टहनियां भी सूख जाती है। जब यह रोग पत्तियों पर दिखाई दे उसी अवस्था में इसका इलाज करने से आशातीत लाभ मिलता है ।जब यह रोग फलों को भी प्रभावित करने लगे तो इसका मतलब की इस रोग का समय से रोकथाम नही किया गया ।जब यह रोग फलों पर दिखाई देता है तो उस अवस्था में बागवान को भारी नुकसान होता है और फसल खराब हो जाती है जिसके कारण वह बाज़ार में बिकने के लायक नहीं रहता है।
अमरूद एन्थ्रेक्नोज को प्रबंधित करने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए

स्वच्छता

अमरूद के पेड़ के आसपास के क्षेत्र को साफ रखने से शुरुआत करें। कवक के प्रसार को कम करने के लिए किसी भी गिरी हुई पत्तियों, फलों, या संक्रमित पौधे सामग्री को जमीन से हटा दें।

कटाई छंटाई

वायु परिसंचरण और सूर्य के प्रकाश के प्रवेश को बेहतर बनाने के लिए अमरूद के पेड़ की नियमित रूप से छंटाई करें। यह आर्द्रता को कम करने में मदद करता है और एन्थ्रेक्नोज कवक के विकास और प्रसार के लिए कम अनुकूल वातावरण बनाता है। पूर्ण रूप से फल की तुड़ाई करने के उपरांत अमरूद के पेड़ से सूखी एवं रोगग्रस्त टहनीयो की तेज चाकू या सिकेटियर से कटाई छटाई करने के उपरांत कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के गाढ़े पेस्ट से कटे हिस्से की पुताई करें ।

पानी देना

जब भी संभव हो ऊपर से पानी देने से बचें, क्योंकि पत्तियों और फलों पर नमी एन्थ्रेक्नोज के विकास को बढ़ावा दे सकती है। इसके बजाय, पेड़ के आधार के आसपास की मिट्टी को पानी दें।

उर्वरीकरण

सुनिश्चित करें कि अमरूद के पेड़ को उचित रूप से उर्वरित किया गया है और इसमें पर्याप्त पोषक तत्व हैं। एक स्वस्थ पेड़ संक्रमण का प्रतिरोध करने और उससे उबरने के लिए बेहतर ढंग से सुसज्जित होता है।पेड़ की उम्र के अनुसार खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। एन पी के 19:19:19 की 4 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से भी रोग की उग्रता में कमी आती है। यह छिड़काव या तो फूल आने के पहले करे या पेड़ में पूरी तरह से फल लग जाने के बाद करे।

मल्चिंग

मिट्टी की नमी को संरक्षित करने, तापमान को नियंत्रित करने और बारिश के दौरान मिट्टी से पैदा होने वाले बीजाणुओं को पेड़ पर गिरने से रोकने के लिए पेड़ के आधार के चारों ओर जैविक गीली घास लगाएं।

प्रतिरोधी किस्में

यदि आप अमरूद के पेड़ लगा रहे हैं, तो एन्थ्रेक्नोज-प्रतिरोधी किस्मों को चुनने पर विचार करें। ये किस्में बीमारी के प्रति कम संवेदनशील हो और सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत प्रदान करती हैं।

रोग का शीघ्र पता लगाना और
उसे काट कर अविलम्ब हटाना

एन्थ्रेक्नोज संक्रमण के लक्षणों के लिए नियमित रूप से अपने अमरूद के पेड़ का निरीक्षण करें। यदि आपको कोई प्रभावित पत्तियां, तना या फल दिखाई दें, तो उन्हें तुरंत हटा दें और आगे फैलने से रोकने के लिए उनका उचित तरीके से नष्ट कर दे।

कवकनाशी द्वारा रोग का प्रबंधन

यदि अमरूद का पेड़ एन्थ्रेक्नोज से गंभीर रूप से प्रभावित है, तो अंतिम उपाय के रूप में कवकनाशी का उपयोग करने पर विचार करें। कॉपर-आधारित या प्रणालीगत कवकनाशी जैसे सक्रिय तत्व वाले कवकनाशी रोग के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। हेक्साकोनाजोल या प्रोपिकोनाजोल नामक प्रणालीगत (सिस्टमिक) फफूंदनाशी की 2 मिली दवा को प्रति लीटर पानी मे घोलकर उसने आधा मिली लीटर स्टीकर मिला कर दो छिड़काव करना चाहिए। यह छिड़काव फूल आने के 15 दिन पहले एक छिड़काव करना चाहिए एवं दूसरा छिड़काव पेड़ में पूरी तरह से फल लग जाने के बाद करने से रोग की उग्रता में भारी कमी आती है।अमरूद के पौधों में 25 जून के आस पास इसका स्प्रे करने से यह बरसात के मौसम में इस रोग से बचाव करता है और सर्दियों की फसल को सुरक्षित रहती है। साफ (Carbendazim 12% + Mancozeb 63%) जो कि एक संपर्क + प्रणालीगत (Contact + Systemic ) फफूंदनाशी है इसकी 3 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से भी रोग की उग्रता में भारी कमी आती है। हालाँकि, हमेशा निर्माता के निर्देशों का पालन करें और लाभकारी कीड़ों और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए जिम्मेदारी से कवकनाशी का उपयोग करें।

29/07/2024

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26/07/2024

plant #

23/07/2024

*आयुर्वेदिक* औषधीय पौधे*
*(प्रथम) इंसुलिन प्लांट*

यह पौधा मधुमेह के मरीजों के लिए उपयोग किया जाता है। इसका नाम इन्सुलिन इसीलिए पड़ा है क्योंकि मधुमेह के अंग्रेजी उपचार में शुगर बढ़ जाने पर इन्सुलिन नामक इंजेक्शन दिया जाता है। यदि आप भी मधुमेह के मरीज हैं तो इस पौधे को अपने घर के आस पास लगा लें। शुगर बढ़ने पर इसके मात्र 2 से 4 पत्तों के सेवन से आपका शुगर तुरंत कंट्रोल हो जाएगा। आप चाहें तो इसके पत्तों को सुखाकर उसका पाउडर बना लें, जब भी आपका शुगर बढ़ें तो एक चम्मच पाउडर खा लें आपको तुरंत आराम मिलेगा। यदि आप इसका रोजाना नियम से सेवन करते हैं तो 12 से 15 दिनों में आपका शुगर पूरी तरह से कंट्रोल हो जाता है।
👉Source उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद

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