10/05/2026
बांका जिले के शंभूगंज में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण से इस विशिष्ट क्षेत्र के पर्यावरण, जल विज्ञान (Hydrology) और सामाजिक-आर्थिक ढांचे पर कई गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। एक विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment - EIA) के दृष्टिकोण से, शंभूगंज के संदर्भ में इसके प्रमुख नुकसान निम्नलिखित हैं:
1. बड़े पैमाने पर विस्थापन और सामाजिक प्रभाव (Mass Displacement)
संयंत्र की स्थापना के कारण शंभूगंज और भितरिया के कई गाँवों के लोगों को अपना घर छोड़कर विस्थापित होना पड़ेगा। विस्थापन की प्रक्रिया हमेशा सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता लाती है, और अक्सर उचित पुनर्वास और मुआवजे को लेकर स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के बीच लंबे समय तक टकराव की स्थिति बनी रहती है।
2.तापीय प्रदूषण और अपशिष्ट जल की समस्या (Thermal Pollution & Wastewater Issues)
रिएक्टर को ठंडा करने के बाद जो गर्म पानी (Cooling tower blowdown) और अन्य औद्योगिक अपशिष्ट जल (Wastewater) निकलेगा, उसका सुरक्षित निपटान एक बड़ी तकनीकी चुनौती होगी। यदि यह अत्यधिक गर्म पानी वापस गंगा या स्थानीय जल निकायों में छोड़ा जाता है, तो पानी में घुलनशील ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) का स्तर तेजी से गिरेगा। इससे स्थानीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem), मछलियों और गांगेय डॉल्फिन जैसे संवेदनशील जीवों को गंभीर नुकसान पहुँचेगा।
3. उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण (Loss of Fertile Agricultural Land)
शंभूगंज और आस-पास का इलाका मुख्य रूप से कृषि प्रधान है। इस भारी सिविल और औद्योगिक ढांचे तथा इसके अनिवार्य 'सुरक्षा क्षेत्र' (Exclusion Zone) के लिए लगभग 1,000 एकड़ या उससे अधिक ज़मीन की आवश्यकता होगी। इतने बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण से उपजाऊ कृषि भूमि का स्थायी नुकसान होगा, जिससे हजारों किसानों को अपनी आजीविका से हाथ धोना पड़ेगा।
4. गंगा नदी बेसिन पर भारी जल संकट (Water Stress on Ganga River)
इस संयंत्र के रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होगी। इसके लिए भागलपुर से 35-50 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए गंगा नदी से प्रतिदिन करोड़ों लीटर पानी खींचा जाएगा। इससे गंगा के प्राकृतिक जल प्रवाह (Ecological flow) पर भारी दबाव पड़ेगा, विशेषकर गर्मियों के मौसम में जब नदी का जल स्तर पहले ही कम हो जाता है। यह पूरे क्षेत्र की सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
5. निर्माण गतिविधियों से व्यापक पर्यावरणीय क्षरण (Environmental Degradation during Construction)
इस विशाल सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने में कई वर्ष लगेंगे। इस दौरान व्यापक स्तर पर मिट्टी की खुदाई (Soil excavation), भारी मशीनों की आवाजाही और बड़े पैमाने पर कंक्रीट के काम से वायु और ध्वनि प्रदूषण चरम पर होगा। यह न केवल स्थानीय वायु गुणवत्ता (Air Quality) को खराब करेगा, बल्कि इस ग्रामीण क्षेत्र की प्राकृतिक वनस्पतियों और वन्यजीवों के आवास को भी नष्ट कर देगा।
6. कृषि उत्पादों के बाजार मूल्य पर असर (Stigma on Local Agriculture)
भले ही संयंत्र सामान्य रूप से सुरक्षित चले, लेकिन 'परमाणु विकिरण' का मनोवैज्ञानिक डर हमेशा बना रहता है। परमाणु संयंत्र के आस-पास के खेतों में उगाई जाने वाली फसलों, सब्जियों और डेयरी उत्पादों को लेकर बाजार में नकारात्मक धारणा बन सकती है, जिससे बांका के किसानों की उपज की मांग और दाम गिर सकते हैं।
7. भूजल प्रदूषण का खतरा (Groundwater Contamination Risk)
यद्यपि संयंत्र का निर्माण भूकंपरोधी (Seismic Zone-3 के मानकों के अनुसार) और बेहद सुरक्षित तरीके से किया जाएगा, लेकिन किसी भी प्रकार के रिसाव या रेडियोधर्मी कचरे (Radioactive waste) के सुरक्षित भंडारण में मामूली सी भी चूक से क्षेत्र का भूजल हमेशा के लिए प्रदूषित हो सकता है, जो पीढ़ियों तक असर दिखाएगा।
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