Bharat Adhyayan Kendra, BHU

Bharat Adhyayan Kendra, BHU भारतीय ज्ञान विज्ञान के प्रसार एवं उच्च अनुसंधान को समर्पित

🌺 Discover India’s Timeless Wisdom at BHU 🌺🎓 Admissions Open for M.A. in Hindu Studies📍 Bharat Adhyayan Kendra, Banaras ...
26/05/2026

🌺 Discover India’s Timeless Wisdom at BHU 🌺

🎓 Admissions Open for M.A. in Hindu Studies
📍 Bharat Adhyayan Kendra, Banaras Hindu University

Step into a journey of knowledge, culture, philosophy, and heritage at one of India’s most prestigious universities.

✨ Why Join?
📚 Study Vedas, Upanishads & Indian Epics
🕉 Explore Hindu Philosophy & Traditions
🏛 Experience India’s Rich Cultural Heritage
🎤 Participate in Seminars, Workshops & Heritage Visits
🌍 Build Careers in Research, Academia, Culture & Civil Services

💫 Learn from the past. Understand the present. Shape the future.

📅 Last Date to Apply: June 4th, 2026

🔗 Apply Now:
https://bhuce.samarth.edu.in
https://admission.bhu.ac.in/en

📞 Contact:
+91-9454737596
+91-9795614679

📘 Facebook: Bharat Adhyayan Kendra, BHU

🌿 7-DAY INTENSIVE WORKSHOP 🌿✨ PRANA TO PRAJNA ✨*The Art & Science of Pranayama, Trataka & Preksha Meditation*Organized b...
22/05/2026

🌿 7-DAY INTENSIVE WORKSHOP 🌿
✨ PRANA TO PRAJNA ✨
*The Art & Science of Pranayama, Trataka & Preksha Meditation*

Organized by Bharat Adhyayan Kendra, Banaras Hindu University

🗓 Dates: June 06 – June 13, 2026
⏰ Time: 02:00 PM – 04:00 PM
📍 Venue: Bharat Adhyayan Kendra, 4th Floor, Yoga Hall
💻 Mode: Online & Offline

🧘 Experience a transformative journey from *Prāṇa (Vital Energy)* to *Prajñā (Higher Wisdom)* through:

✔ Kapalabhati
✔ Classical Pranayama
✔ Trataka
✔ Preksha Meditation
✔ Leshya Dhyana
✔ Anupreksha

🌸 Workshop Highlights
• Stress reduction & emotional balance
• Improved concentration & mental clarity
• Guided meditative practices
• Yogic & scientific perspectives combined
• Suitable for beginners & experienced practitioners
• Certificate of Participation

👥 Who Can Participate?
Students | Researchers | Teachers | Yoga Practitioners | Wellness Professionals | Working Professionals | International Participants

💰 Registration Fees
• UG/PG Students – ₹300/-
• MD Students – ₹500/-
• Researchers/Teachers/Professionals – ₹500/-
• Foreign & NRI Participants – ₹500/-

📌 Last Date for Registration: June 02, 2026
⚠ Limited Seats Available

📝 Register Here:
https://forms.gle/wGJbD27SUFArKS8R8

📞 Contact
Dr. Geeta Y. Bhatt
📧 [[email protected]](mailto:[email protected])
📱 +91-8707455236

✨ “Meditation is not escape — it is awakening.” ✨

हमारी लोक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सनातन परंपरा का प्रतीक वटसावित्री पर्व भारतीय जीवन-मूल्यों की अमूल्य धरोहर है।महाभा...
16/05/2026

हमारी लोक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सनातन परंपरा का प्रतीक वटसावित्री पर्व भारतीय जीवन-मूल्यों की अमूल्य धरोहर है।महाभारत में उपाख्यान रूप में सावित्री और सत्यवान की कथा के माध्यम से वर्णित यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नारी की श्रद्धा, संकल्प, परिवार-निष्ठा और भारतीय संस्कृति की गहन संवेदनशीलता का जीवंत उत्सव है।

आज जब विश्व तीव्र गति से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और विज्ञान ने अभूतपूर्व प्रगति की है, तब भी भारत की लोक-आत्मा अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से गहराई से जुड़ी हुई है। यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति और विशिष्टता है।

वटसावित्री पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि आधुनिकता के बीच भी हमारी परंपराएँ केवल जीवित ही नहीं हैं, बल्कि समाज को निरंतर दिशा और प्रेरणा प्रदान कर रही हैं।

आप सभी को लोक आस्था और भारतीय संस्कृति के महापर्व वटसावित्री की हार्दिक शुभकामनाएँ।
माँ सावित्री का आशीर्वाद सभी के जीवन में सुख, सौभाग्य, स्वास्थ्य और समृद्धि लेकर आए। 🙏

📍 भारत अध्ययन केन्द्र में बिहार सरकार के माननीय शिक्षा मंत्री जी का आगमनदिनांक 10 मई 2026 को माननीय शिक्षा मंत्री (बिहार...
11/05/2026

📍 भारत अध्ययन केन्द्र में बिहार सरकार के माननीय शिक्षा मंत्री जी का आगमन
दिनांक 10 मई 2026 को माननीय शिक्षा मंत्री (बिहार सरकार) श्री मिथिलेश तिवारी जी का भारत अध्ययन केन्द्र में गरिमामय आगमन हुआ।
माननीय मंत्री जी ने भारत अध्ययन केन्द्र के उद्देश्यों, कार्यों एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण हेतु केन्द्र द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए केन्द्र को भारतीय विद्याओं का एक श्रेष्ठ केन्द्र बताया। उन्होंने बिहार की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाने के लिए अपने संकल्प को व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को शिक्षा एवं राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय योगदान हेतु प्रेरित किया।
माननीय मंत्री जी ने अपने प्रेरणास्रोत पंडित मदन मोहन मालवीय जी के शैक्षिक आदर्शों का उल्लेख करते हुए उपस्थित विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों से शिक्षा व्यवस्था के उन्नयन हेतु अपने सुझाव एवं विचार साझा करने का आग्रह किया।
✨ यह अवसर विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए प्रेरणादायी एवं स्मरणीय रहा। ✨
#भारतअध्ययनकेन्द्र

भारत अध्ययन केन्द्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी द्वारा गुरुदेव Rabindranath Tagore की जन्म जयंती के अवसर पर आयोज...
07/05/2026

भारत अध्ययन केन्द्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी द्वारा गुरुदेव Rabindranath Tagore की जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित भारत अध्ययन व्याख्यानमाला में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।

🗓 दिनांक: 09 मई 2026, शनिवार
⏰ समय: अपराह्न 04:00 बजे
📍 स्थान: प्रथम तल, भारत अध्ययन केन्द्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी
आपकी गरिमामयी उपस्थिति कार्यक्रम को सफल बनाएगी।🌹🙏🌹

पुस्तकों की यह खूबी होती है कि पढ़ने वाला अपने दर्पण से समझता है और लिखने वाला अपने दर्पण से समझता है ~ प्रो. अजित कुमार...
30/04/2026

पुस्तकों की यह खूबी होती है कि पढ़ने वाला अपने दर्पण से समझता है और लिखने वाला अपने दर्पण से समझता है ~ प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी

‘ चन्दन किवाड़’ पुस्तक चाक्षुष यज्ञ भी है और श्रुत यज्ञ भी है ~ प्रो. अवधेश प्रधान

लोक की भूमि हमारी पूर्वजाओं ने बनाई है~ पद्मश्री मालिनी अवस्थी

भाव से भाव, कंठ से कंठ और स्वर से स्वर मिलते गए, तब ‘चंदन किवाड़’ का निर्माण हुआ है ~ प्रो. वशिष्ठ द्विवेदी ‘अनूप’

इस किताब को हृदय अन्तस के मोती से पिरोकर लिखा गया है ~ प्रो. अर्चना शर्मा

भारत अध्ययन केन्द्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के तत्वावधान में ‘भारत अध्ययन साहित्य संवाद’ के अन्तर्गत 30 अप्रैल 2026 को प्रसिद्ध लोक गायिका पद्मश्री श्री मालिनी अवस्थी जी द्वारा प्रणीत पुस्तक ‘चंदन किवाड़’ पर लोकार्पण सह परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अमित कुमार पाण्डेय तथा निवेदक भारत अध्ययन केन्द्र, बीएचयू के समन्वयक प्रो. शरदिन्दु कुमार तिवारी थे। भारतीय परंपरानुसार महामना पण्डित मदनमोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात् कुलगीत की प्रस्तुति समीक्षा ठाकुर तथा आदित्य भारती द्वारा किया गया।‘लोक निर्मला सम्मान’ की स्थापना पद्मश्री श्री मालिनी अवस्थी जी ने लोककला के क्षेत्र में प्रोत्साहन हेतु की है।चन्दन किवाड़ लोकगायिका मालिनी अवस्थी का यह किताब लोकमंगल की साधनावस्था की किताब है, इसमें उन स्त्रियों की आवाज़ें हैं, धुन हैं जिसे अनसुना कर दिया गया था।भारत अध्ययन केन्द्र में भारत की कथा परम्परा, चौमासा जैसे भव्य कार्यक्रमों का आयोजन मालिनी जी के संयोजन में सम्पन्न हुआ था जिसमें देश के जाने माने कलाकारों ने सहभागिता निभाई थी। चन्दन किवाड़ एक ऐसा प्रतीक है जो हमारे लोकगीतों की पहचान है। वे जहां भी रह लें उनके लिए किवाड़ चन्दन का है और उससे शीतल सुगंधित वायु प्रवाहमान होती है।

आयोजन की अध्यक्षता बीएचयू के माननीय कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने की। उन्होंने कहा कि मालिनी जी एक विलक्षण व्यक्तित्व हैं उन्होंने संगीत और गायन के साथ साथ लेखनी में सत्ताईस अध्यायों की पुस्तक भी लिख डाली। पुस्तकों की यह खूबी होती है कि पढ़ने वाला अपने दर्पण से समझता है और लिखने वाला अपने दर्पण से समझता है। मुझे यह पुस्तक आत्मकथात्मक लगता है क्योंकि उन्होंने जिन भी गीतों को चुना है, प्रसंग को चुना है, उनका मालिनी जी के जीवन से जुड़ाव है। पुस्तकों में एक प्रतिभा होती है जो वर्तमान पीढ़ी को आगामी पीढ़ी से जोड़ने का काम करती है।

स्वागत वक्तव्य देते हुए भारत अध्ययन केन्द्र के समन्वयक प्रो. शरदिन्दु कुमार तिवारी ने बताया कि 2017 से 2022 तक पद्मश्री मालिनी अवस्थी जी भारत अध्ययन केन्द्र की संस्थापिका सदस्या रहीं हैं। उन्होंने हमारे विद्वान अतिथि वक्ताओं का अपने भव्य वाणी के कुसुम वर्षा से उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

विशिष्ट वक्तव्य देते हुए प्रसिद्ध आलोचक एवं वक्ता प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि यह एक बहुत महत्वपूर्ण अवसर है। मालिनी जी अवध की परम्परा और आशीर्वाद की धारा से अभिसिंचित होकर खुद को अवध का मानती हैं, हम उन्हें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का मानते हैं। वे विदुषी हैं, चन्दन किवाड़ से उनका दूसरा परिचय मिलता है। संगीत की दुनिया में पद्मश्री जैसे अलंकरण ऐसे साधकों से ही भव्य होते हैं। इस पुस्तक को पढ़कर आपकी आँखें और आपका हृदय पिघल पड़ेगा। उन्होंने सारी कीर्ति को इस पुस्तक में साध लिया है। इस पुस्तक के प्रत्येक अध्याय में ऐसे लोग हैं जो रात रात भर कला की साधना में रमने वाले लोग है। यह पुस्तक चाक्षुष यज्ञ भी है और श्रुत यज्ञ भी है। हमारे यहाँ लोक संस्कृति के क्षेत्र में यह ऐसी पुस्तक है जिसकी धारा वेदों से आती है। इस पुस्तक के प्रत्येक प्रसंग में ऐसे पुरुष और स्त्री हैं जो जीवन में दुःख भोगते हैं लेकिन लोगों में आनन्द बांटते हैं। यह पुस्तक संस्मरण भी हैं और इसका हर एपिसोड अपने ढंग का ललित निबन्ध भी है। हमारी संस्कृति के जीवंत रूप को इस पुस्तक में मालिनी जी ने प्रस्तुत किया है। इसमें किसी भी तरह का ऊंच नीच और जातिभेद नहीं है, इस पुस्तक के कुछ अध्यायों को एनसीआरटी की पुस्तक में शामिल करना चाहिए। इस पुस्तक में महजब की दीवारें टूट गईं हैं। उन्होंने लिखा है,राहतअली साहब ने मुझे भी और दलेर मेहंदी को भी बिना किसी भेदभाव के सिखाया है। इस देश की उत्तरजीविता इसी संस्कृति के जरिए बची रहेगी। विश्वास नहीं होता कि मालिनी जी ने पहली बार कलम पकड़ी है, उन्होंने शैली और भाषा साध लिया है। आप ऐसी भाषा लिखें जिसका अनुवाद सम्भव न हो तो समझना चाहिए आप पर सरस्वती की कृपा है।

लेखकीय वक्तव्य देते हुए पद्मश्री श्री मालिनी अवस्थी जी ने कहा कि भारत अध्ययन केन्द्र मेरे लिए एक परिवार है। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक को मैंने यात्राओं के दरम्यान लिख डाला है। लोकगीतों के कथाओं के मनोविज्ञान और समाजशास्त्र पर काम होना बाकी है। मुझे कितनी यात्राएं करनी पड़ती है कि जब मैं मंच पर होती हूँ ऐसा लगता है लोक की सारी नायिकाएं वहाँ आकर खड़ी हो गईं हैं। लोकगीत गाती हूँ तो उसके पीछे संस्कृत का हाथ है। संस्कृत विषय नहीं होता तो मुझे भारत को देखने की मुकम्मल दृष्टि नहीं मिलती। वाणी प्रकाशन की आदित्य माहेश्वरी मालिनी जी पर पुस्तक लिखना चाहती थीं, ऐसा मालिनी जी ने बताया सूर्य शास्त्र है और चन्द्रमा लोकमन है। लोक भी औघड़, सरल, सहज है। उन्होंने बताया कि लोक की भूमि हमारी पूर्वजाओं ने बनाई है। उन्होंने बताया कि उनकी पसलियों में फ्रैक्चर हो गया था, और गाने का कार्य पसलियों और श्वासों से है, इस दरम्यान उन्हें जो समय मिला उसी में इस पुस्तक की निर्मिति हुई है। लोकगीत अपने आप में इतिहास है। अवध नाम क्यों पड़ा क्योंकि राम ने कहा था, यहाँ पर अब से कोई वध नहीं होगा, लोककथा में प्रसंग हथिनी का था, जो बिना एक भी फूल रौंदे उद्यान से गुजर जाती थी, उसका वध कर दिया गया था, राम से पूछा गया कि आखिर उसका क्या अपराध था ? राम ने कहा अब से यहाँ कोई वध नहीं होगा, वह भूमि अवध कहलाई। भरथरी की कथा प्रसंग का उल्लेख भी उन्होंने किया।
उन्होंने अपने जीवन का एक प्रसंग साझा किया जो इसका पुस्तक में दर्ज है, बात 1995 की थी लगभग 31 साल पूर्व की बात, मालिनी जी के पति अवनीश जी की पोस्टिंग ललितपुर में हुई थी, आज बुंदेलखंड की क्या स्थिति है और उस समय क्या होगी, उसका अनुमान आप लगा सकते हैं। अफसरों की दावत हुई हमारे घर, एक परिवार की स्त्री बिना खाए चली गई, उसके पति ने तो खा लिया, तब अगले दिन उसका पति आया और उसने बताया कि मेरे पत्नी के भीतर से गांव अभी भी नहीं निकला है, उसके जीवन में यह पहली बार था जब किसी ब्राह्मण ने अपने घर खाना परोसा था, मालिनी जी बताती हैं कि उन्होंने तुरंत गाड़ी निकाला और उस स्त्री जिसका नाम कुसुम था, घर गईं, बोलीं कुसुम बहुत भूख लगी है खाना खिला दो, अपने हाथ से दो रोटी निकालती हैं और खाती हैं, हम किन खेमों में बंटे हैं मुझे उस दिन एहसास हुआ। वे जाति से पासी थे और इतिहास में दर्ज है कि पासी सबसे बड़े योद्धा थे। राधा जब कृष्ण से पूछती हैं कि मुझसे कैसे मिलने आओगे तो वे कहते थे पासी बनकर आऊंगा। क्योंकि स्वाधीनता के समय पासी योद्धा के फंडे से अंग्रेज़ों के गर्दन नहीं बच पाते थे।

बीएचयू के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रसिद्ध ग़ज़लकार एवं नवगीतकार प्रो. वशिष्ठ द्विवेदी ‘अनूप’ बतौर विशिष्ट वक्ता उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि यह हमलोगों का सौभाग्य है कि आज हम बहुत महत्वपूर्ण, समृद्ध और रोचक पुस्तक पर बातचीत कर रहे हैं। मालिनी जी की गायन के मुरीद तो पूरा भारतवर्ष है। हमलोगों ने राहत अली जी प्रत्यक्ष सुना है। घनानंद के बारे में कहा जाता है कि जिसने प्रेम की पीड़ा को आंखों से देखा है वही घनानंद के कवित्व में प्रेम के पीर को समझ सकता है, ऐसे ही मालिनी जी ने लोक की पीड़ा को हृदय की आंखों से देखा है,यह चन्दन का किवाड़ लोक का किवाड़ है जो चन्दन की सुगन्ध लिए सजल कंठ स्त्रियों के भीतर विश्वास और भरोसा को जिन्दा रखता है। यह लोक सोने की कटोरिया न होने पर भी गा लेता है, चन्दा मामा आरे आवा पारे आवा, सोने की कटोरिया में दूध भात लेले आवा, हमरे बच्ची के मुहवा में घुटुक, यह सब कुछ लोकगीत में है। इसमें गुरुओं की प्रेरणा हैं, आप गिरिजा देवी को बार बार प्रणाम करती हैं, आपने इसमें लिखा है कि यह किताब मुझसे मेरे पुरखिनों ने मुझसे लिखवा लिया। भाव से भाव, कंठ से कंठ और स्वर से स्वर मिलते गए, तब इस पुस्तक का निर्माण हुआ है।
जब जब बाजे खंजड़िया
सबद सुनी अनके होय,
हिरण का दुःख, छठी में हिरन को मार दिया जाता है, और हिरण जब खाल मांगती है तब रानी कहती हैं इस खाल से राम के लिए खंजरी बनेगी, तब हिरनी शाप देती है। इस तरह की लोककथा हमारे लोक में मिलती है, जो सामंती व्यवस्था का प्रतिकार करती है।
मिर्जापुर कइला गुलज़ार हो
कचौड़ी गली सुन कइला बलमु
गीत के पीछे का प्रसंग असलम न केवल प्रेमी था बल्कि देशभक्ति सैनिक भी था जिसे मार दिया जाता है, जानकर सुनते हैं तब हम उसके मर्म तक पहुँच पाते हैं।

प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग की आचार्य प्रो. अर्चना शर्मा ने बताया कि मेरे हाथ में जब यह पुस्तक आई तो मेरे भीतर एक रोमांच उत्पन्न हुआ कि जिस लोक गायिका को मैं लम्बे समय से सुन रही हूँ उनकी किताब पर बात करने का मौका मिलेगा।
इस किताब को हृदय के अन्तस के मोती से पिरोकर लिखा गया है। उन्होंने कहा कि चंदन धारणीयता का प्रतीक है जिसमें सुगंध की विद्यमानता हमेशा रहती है और किवाड़ वह द्वार है जिसके जरिए हम लोक में प्रवेश करते हैं। स्त्री मन के तरुण भाव की अभिव्यक्ति भी इस पुस्तक में की गई है। स्त्री ने लोक को बहुत ताकत दी थी। आज हम बीएचयू के कॉमर्स विभाग में नारी वंदन अधिनियम पर चर्चा कर रहे थे और आज इस पुस्तक पर चर्चा स्त्री सशक्तिकरण का प्रमाण है। राज्यसत्ता से लड़ने की शक्ति नहीं है तो क्या! आप शाप के अधिकार को हिरनी से छीन नहीं सकते। उन्होंने एक और प्रसंग को प्रस्तुत किया। यह किसान बहुरिया का प्रसंग है। लोक में स्वीकार्यता है तो अस्वीकार्यता भी है। कन्नौज की एक सुन्दर कथा के रूप में मालिनी जी ने वर्णित किया है। जब उस किसान बहुरिया के जीवन में, उसके परिवार में बुजुर्ग के सिवा कोई नहीं रहा, तब एक निम्नवर्गीय पुरुष का जब उसके जीवन में प्रवेश होता है, लोगों में कानाफुंसी शुरू हो गई लेकिन उस किसान बहुरिया के ससुर ने स्वीकृति दी आई वह पुरुष उस परिवार का हिस्सा बना। गोदना गोदे बुदन धरिया प्रसंग की भी चर्चा की। लोकगीतों में निहित सामाजिक समन्वय को भी इस पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है। हर जाति की अपनी भूमिका है और उस भूमिका के बिना लोक अपूर्ण ही रहेगा। काहे को ब्याहे विदेश, मालिनी जी अमीर खुसरों के गीत बहुत मन से गाती हैं। मालिनी जी की नानी मंडला से थी, उन्होंने अपने गीतों में मंडला को बार बार याद किया है। मालिनी जी ने ‘नकटा’ विधा पर लिखकर जीवित करने का महानीय कार्य किया है। स्त्री स्वर का सबसे सशक्त विधा है ‘नकटा’। यह लड़के के विवाह के रात केवल स्त्रियों की उपस्थिति में किया जाता है जिसमें स्वांग के जरिए वे अपने भीतर के सारे भाव प्रकट करती हैं। उनको पति पसंद है या नहीं, उसको किससे प्रेम है ये सब खुलकर प्रकट करती है।
मालिनी जी ने ‘नकटा’ गीत को सैंया मिले लड़कैया से जोड़कर अभिनव प्रयोग किया है। इन गीतों को रचने का साहस स्त्रियों के कलम में है, यह मालिनी जी ने स्थापित किया है।

कार्यक्रम का संचालन इस आयोजन के संयोजक डॉ. अमित कुमार पाण्डेय कर रहे थे। उन्होनें बताया कि यह पुस्तक 27 अध्यायों में विभक्त है। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्ञानेंद्र नारायण राय ने किया।

कार्यक्रम में प्रो. सदाशिव द्विवेदी, प्रो.आनंदवर्धन शर्मा, प्रो. एस.एन. उपाध्याय, प्रो उपेंद्र कुमार त्रिपाठी, श्री मनीष खत्री, प्रो. अभिमन्यु, डॉ. सिद्धिदात्री,डॉ. जया पांडेय, डॉ. मलय झा, डॉ. गीता योगेश भट्ट, डॉ. उमा तिवारी, डॉ. अंकिता, डॉ. सुप्रिया शाह, डॉ. महेन्द्र प्रसाद कुशवाहा, डॉ. रवि शंकर सोनकर, डॉ. विंध्याचल यादव, डॉ. शिल्पा सिंह सहित विद्यार्थियों और शोधार्थियों की उपस्थिति रही।
लेखन ~ कु. रोशनी
शोध छात्रा, हिन्दी विभाग काशी हिन्दू विश्वविद्यालय

सादर आमंत्रण🙏भारत अध्ययन केन्द्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी द्वारा आयोजित ‘भारत अध्ययन साहित्य संवाद’ के अंतर्गत...
29/04/2026

सादर आमंत्रण🙏

भारत अध्ययन केन्द्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी द्वारा आयोजित ‘भारत अध्ययन साहित्य संवाद’ के अंतर्गत प्रसिद्ध लोक गायिका एवं लेखिका मालिनी अवस्थी जी की पुस्तक ‘चंदन किवाड़’ पर चर्चा आयोजित की जा रही है।

🗓️ दिनांक: 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार) समय-04:30 से 05:30 बजे तक।
📍 स्थान: पंचम तल, भारत अध्ययन केन्द्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय

31/03/2026

🌼 गौरवपूर्ण उपलब्धि – भारत अध्ययन केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय 🌼

हर्ष एवं गर्व के साथ सूचित किया जाता है कि भारत अध्ययन केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मेधावी छात्र श्री हर्ष कुमार सिंह का चयन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा आयोजित परीक्षा में Deputy Superintendent of Police (DSP) पद पर (रैंक – 7) हुआ है।

यह उपलब्धि उनके समर्पण, अनुशासन एवं सतत परिश्रम का परिणाम है, साथ ही यह भारत अध्ययन केंद्र के उच्च शैक्षणिक वातावरण एवं मार्गदर्शन की उत्कृष्टता को भी प्रतिबिंबित करती है।

भारतीय ज्ञान परंपरा एवं ‘हिंदू अध्ययन’ के प्रति उनकी गहन समझ ने साक्षात्कार में उनके व्यक्तित्व को विशेष रूप से सुदृढ़ किया, जो उनकी सफलता का एक महत्वपूर्ण आधार बना।

यह सफलता न केवल उनके लिए, बल्कि भारत अध्ययन केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के समस्त छात्र-समुदाय एवं शिक्षकों के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।

हम उनके उज्ज्वल एवं सफल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएँ व्यक्त करते हैं।

🌸 “परंपरा से प्रेरणा, उत्कृष्टता की ओर अग्रसर” 🌸

18/02/2026
🌿 “समग्र स्वास्थ्य हेतु आयुर्वेद” अल्पकालीन पाठ्यक्रम का भव्य एवं गरिमामय समापन 🌿भारत अध्ययन केन्द्र, काशी हिन्दू विश्वव...
18/02/2026

🌿 “समग्र स्वास्थ्य हेतु आयुर्वेद” अल्पकालीन पाठ्यक्रम का भव्य एवं गरिमामय समापन 🌿

भारत अध्ययन केन्द्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित “समग्र स्वास्थ्य हेतु आयुर्वेद” (03–18 फरवरी 2026) अल्पकालीन पाठ्यक्रम–सह–जागरूकता कार्यशाला का समापन 18 फरवरी 2026 को अत्यंत उत्साह एवं गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ।

यह अवसर केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम का समापन नहीं था, बल्कि भारतीय ज्ञान–परंपरा, स्वास्थ्य–संस्कार एवं जीवन–मूल्यों के पुनर्स्मरण का प्रेरक क्षण बनकर उपस्थित हुआ।

🔸 समापन व्याख्यान “आयुर्वेद में स्वास्थ्य की अवधारणा : रोग–निवारण एवं स्वास्थ्य–संवर्धन” विषय पर प्रख्यात विद्वान प्रो० जे. एस. त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयुर्वेद केवल रोग–उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि संतुलित दिनचर्या, संयमित आहार–विहार, मानसिक प्रसन्नता एवं सकारात्मक जीवन–दृष्टि के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य–संरक्षण का सशक्त विज्ञान है।

🔸 केंद्र के समन्वयक प्रो० शरदिन्दु कुमार तिवारी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि यह पाठ्यक्रम भारतीय ज्ञान–धारा की उस अमूल्य परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास है, जो शरीर, मन और चेतना के समन्वित विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।

🔸 प्रो० सी. बी. झा ने आयुर्वेद की वैज्ञानिक गहराई, औषधीय परंपरा एवं राष्ट्र के स्वास्थ्य–सशक्तिकरण में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

🔸 पाठ्यक्रम की कोर्स समन्वयक डॉ. गीता भट्ट ने समस्त अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पाठ्यक्रम केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन–मार्गदर्शन का सशक्त आधार सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ, जहाँ सभी ने स्वस्थ, संस्कारित एवं जागरूक भारत के निर्माण का संकल्प दोहराया।

🌼 भारत अध्ययन केन्द्र की यह पहल भारतीय ज्ञान–परंपरा, आयुर्वेद एवं समग्र स्वास्थ्य–दृष्टि को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने की सतत प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

आपका हार्दिक स्वागत है 🙏
28/01/2026

आपका हार्दिक स्वागत है 🙏

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Bharat Adhyayan Kendra
Banaras Hindu University
221005

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