18/08/2026
गंगा-सरयू की गोद में बसी द्वाबा की यह क्रांतिकारी माटी सिर्फ उपजाऊ ही नहीं, बल्कि वीरों की जननी भी है।आज़ादी की लड़ाई से लेकर सीमा की सुरक्षा तक, इस धरती के शूरवीरों ने अपने लहू से इतिहास लिखा है। आज हम स्वतंत्र भारत में जो सांस ले रहे हैं, वह इन्हीं वीर बलिदानियों के त्याग का परिणाम है।द्वाबा की पावन और क्रांतिकारी धरती को कोटि-कोटि नमन, जिसने देश की आज़ादी और स्वाभिमान के लिए अपने वीर सपूतों को हंसते-हंसते न्योछावर कर दिया।यहाँ की माटी के कण-कण में वीरता, त्याग और बलिदान की अमर गाथाएं रची-बसी हैं। मातृभूमि के मान-सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूतों का यह देश हमेशा ऋणी रहेगा।माँ भारती की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले द्वाबा के सभी अमर वीर शहीदों के चरणों में शत-शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि। 🇮🇳🙏