Prem Verma Page

Prem Verma Page बेसिक शिक्षा में शैक्षिक एवं बौद्धिक सहयोग हेतु एक प्रयास

12/02/2026

बुन्देली लोकगीत : देखो सखी वर्षा ऋतु आई। कक्षा 3 NCERT

12/02/2026

अवधी लोकगीत - बाबा निमिया क पेड़ जिनि काटेउ निमिया चिरइया के बसेर । कक्षा 3 | NCERT

12/02/2026

भोजपुरी लोकगीत : सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से : कक्षा 3 NCERT

12/02/2026

ब्रजभाषा लोकगीत - आज बिरज में होरी रे रसिया | कक्षा 3

03/02/2026

जब बच्चों से जुड़ाव बनता है तो वो सब सीख लेते हैं जो हम चाहते हैं।
Chapter 7. The Big Laddoo | Class 3 |
#शिक्षकजीवन #बच्चे_हमारे_भविष्य"

निहिलिस्ट पेंगुइन: अपना रास्ता चुनने का साहसअंटार्कटिका की बर्फ़ में एक पेंगुइन अपनी पूरी कॉलोनी छोड़कर पहाड़ों की ओर चल...
31/01/2026

निहिलिस्ट पेंगुइन: अपना रास्ता चुनने का साहस
अंटार्कटिका की बर्फ़ में एक पेंगुइन अपनी पूरी कॉलोनी छोड़कर पहाड़ों की ओर चल पड़ता है— जहाँ न खाना है, न पानी, न ही जीवित रहने की कोई उम्मीद।

वैज्ञानिक इसे दिशाभ्रम कहते हैं, लेकिन इंटरनेट की दुनिया ने इसे existential rebellion यानी अस्तित्ववादी विद्रोह का प्रतीक बना दिया और नाम दिया— 👉

वर्नर हर्ज़ोग की 2007 की डॉक्यूमेंट्री "Encounters at the End of the World" में दिखाया गया यह दृश्य इंटरनेट पर "निहिलिस्ट पेंगुइन" यानी अस्तित्व की अर्थहीनता से टकराता पेंगुइन के नाम से Viral है।

यह प्रतीक है— भीड़ से अलग होने का, तयशुदा जीवन को ठुकराने और अपना रास्ता चुनने का! भले ही वह रास्ता irrational यानी अतार्किक लगे।

जनवरी 2026 में दो ऐसी ही घटनाएँ हुईं, जो ठीक इसी पेंगुइन की तरह लगती हैं।

━━━━━━━━━━━━━━
पहली - "अरिजीत सिंह का संन्यास”
भारतीय संगीत जगत के सबसे चमकदार सितारे, अरिजीत सिंह ने अचानक ऐलान किया कि अब वे नए प्लेबैक गाने नहीं गाएँगे। वजह बताई— रूटीन से बोरियत, एकरसता और लंबे समय की थकान। वे अब independent music और शास्त्रीय संगीत की ओर जाना चाहते हैं। उनके पास सब कुछ था— अभूतपूर्व सफलता, करोड़ों प्रशंसक, कमाई— फिर भी उन्होंने कहा, “नहीं, अब यह रास्ता नहीं। मुझे कुछ और चाहिए।” ठीक वैसा ही है जैसे पेंगुइन ने हजारों साथियों की भीड़ छोड़कर अकेले चलना चुना।

━━━━━━━━━━━━━━
और दूसरी - "सौरभ द्विवेदी का The Lallantop छोड़ना"

इसी महीने हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के सबसे चर्चित चेहरे सौरभ द्विवेदी ने The Lallantop से इस्तीफ़ा दे दिया। 12 साल बाद, जब प्लेटफ़ॉर्म सफलता के शिखर पर था, वे चले गए— शायद नए रचनात्मक सफ़र या अलग राह की तलाश में।
लोग हैरान थे, क्योंकि वे “सफलता का प्रतीक" बन चुके थे। लेकिन उन्होंने भी वही किया— सुरक्षित position, टीम, और दर्शक वर्ग की “कॉलोनी” छोड़कर अकेले आगे बढ़ना।

━━━━━━━━━━━━━━
पेंगुइन, अरिजीत सिंह, सौरभ द्विवेदी— तीनों में एक साझा बात है, और वह है अपने लिए सुरक्षित और तयशुदा रास्ता छोड़ना। जहाँ पेंगुइन अपने जीवित रहने की स्वाभाविक प्रवृत्ति के खिलाफ, अरिजीत अपने stardom के चक्र से बाहर और सौरभ अपनी दमदार पहचान और प्लेटफ़ॉर्म से अलग हो जाते हैं।

ये लोग “क्यों?” ❓का पूरा जवाब नहीं देते— बस चल पड़ते हैं, क्योंकि अंदर से आवाज़ आती है। यह प्रेरणा देता है कि जीवन में “सब ठीक है” होने के बावजूद, अगर दिल कहे “मुझे और चाहिए”, तो उस आवाज़ को सुनना चाहिए। भले समाज इसे “पागलपन" कहे, भले रास्ता सुनसान लगे।

━━━━━━━━━━━━━━
हम सब एक ही रास्ते पर चल रहे हैं— एक जैसी पढ़ाई, एक जैसा करियर, एक जैसी सुरक्षा। लेकिन अगर तुम्हारे अंदर की आवाज़ कहे
“मुझे कुछ और चाहिए” — तो उसे सुनना ही सबसे बड़ा साहस है पेंगुइन को नहीं पता था कि आगे क्या है, फिर भी वह चला।
क्योंकि असली विद्रोह हमेशा चिल्लाकर नहीं होता— कभी-कभी चुपके से अपना रास्ता चुन लेना ही विद्रोह है।

━━━━━━━━━━━━━━
एक छोटी सी कक्षा गतिविधि: "Draw Your Mountain"
हर बच्चा अपने “पहाड़” यानी अपने सपने या लक्ष्य की ड्रॉइंग बनाए और बताए — मैं उस पहाड़ पर क्यों जाना चाहता हूँ?

सफलता का मतलब हमेशा “और ज़्यादा” नहीं होता। कभी-कभी रुकना, मुड़ना और अपना पहाड़ चुनना होता है। भीड़ सुरक्षा देती है, लेकिन जीवन का असली अर्थ अक्सर अकेले रास्तों पर मिलता है।

एक प्रश्न आपके लिए : आपका "पहाड़" कौन सा है???❓

━━━━━━━━━━━━━━
✍️ Prem Verma


#अपना_रास्ता



30/01/2026

सभी छात्रों शिक्षको और अभिभावकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण चर्चा 👍👌🌿

 #छात्र_कभी_शून्य_नहीं_होता.....✍️ एक शिक्षक के रूप में यह हमारा विश्वास है कि — जो बच्चा कक्षा तक पहुँचा है, वह कभी शून...
27/01/2026

#छात्र_कभी_शून्य_नहीं_होता.....
✍️ एक शिक्षक के रूप में यह हमारा विश्वास है कि — जो बच्चा कक्षा तक पहुँचा है, वह कभी शून्य नहीं हो सकता।

हो सकता है उसने उत्तर न लिखा हो, हो सकता है वह डर गया हो, हो सकता है हालात उस दिन उसके पक्ष में न रहे हों — लेकिन क्या उसका संघर्ष शून्य था?

सुबह की ठंडी हवा में उठना, स्टेशनरी खरीदना, कॉपी-क़लम-ड्रेस सँभालना, स्कूल तक पहुँचना — यह सब शून्य नहीं है।

शून्य कागज़ पर लिखी वह भावना है, जो किसी बच्चे के भीतर यह विश्वास भर देती है कि “मैं किसी काम का नहीं हूँ।” और अगर एक शिक्षक ही यह कह दे, तो फिर उस बच्चे को उठाने वाला कौन बचेगा?

शिक्षा का उद्देश्य इंसान को खड़ा रखना है।
जब हम किसी प्रयास को पहचानते हैं, जब हम कहते हैं — “इस बार नहीं हुआ, कोई बात नहीं… फिर कोशिश करेंगे,” तब हम अंक नहीं देते, हम उम्मीद देते हैं।

शिक्षा का काम डराना या असफलता बताना नहीं, बल्कि हौसला देना है। फिर से खड़ा होना सिखाना है।

एक शिक्षक अगर थोड़ी-सी मानवता जोड़ दे, तो वही कक्षा किसी बच्चे की ज़िंदगी बदल सकती है।
Prem Verma Page

Prem Verma Prem RB Verma Mission Abhyudaya

🚸 भविष्य की सबसे ज़रूरी ट्रेनस्कूल स्टेशन से चलती है।बच्चों को रोज़ और समय पर स्कूल भेजें। 📚✨
27/01/2026

🚸 भविष्य की सबसे ज़रूरी ट्रेन
स्कूल स्टेशन से चलती है।
बच्चों को रोज़ और समय पर स्कूल भेजें। 📚✨

FAILURE शर्म नहीं, DATA है
26/01/2026

FAILURE शर्म नहीं, DATA है

"राष्ट्रीय मतदाता दिवस"     राष्ट्रीय मतदाता दिवस हर साल 25 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन भारत में लोकतंत्र के महत्व को...
25/01/2026

"राष्ट्रीय मतदाता दिवस"

राष्ट्रीय मतदाता दिवस हर साल 25 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन भारत में लोकतंत्र के महत्व को दर्शाता है और लोगों को अपने मताधिकार का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों, सेमिनारों और जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को मतदान के महत्व के बारे में बताया जाता है।

वर्ष 2011 में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 25 जनवरी को भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना दिवस के अवसर पर 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' का शुभारंभ किया था। इसका उद्देश्य मतदाताओं द्वारा चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने तथा मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाना है।

यह दिवस सभी भारतवासियों को अपने राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की याद दिलाता है कि हर व्यक्ति के लिए मतदान करना जरूरी है। हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम अपने मताधिकार का उपयोग करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करें। मतदान के माध्यम से ही हम एक मजबूत और समृद्ध भारत का निर्माण कर सकते हैं।

21/09/2025

"पत्थर और भगवान"

अगर आपको किसी मूर्ति में सिर्फ पत्थर दिखाई देता है, तो भगवान नहीं दिखेंगे।
और यदि भगवान दिखाई देते हैं, तो पत्थर नहीं दिखेगा।

बिलकुल वैसे ही, अगर आपको Opportunity दिख गई तो Competition नहीं दिखेगा।
लेकिन अगर नज़र Competition पर टिक गई, तो Opportunity कभी दिखाई नहीं देगी।
इसीलिए हमें हमेशा समस्याओं में अपनी Opportunity तलाशनी चाहिए, ताकि हम चीज़ों को बेहतर बना सकें।

सोचिए, हम शिक्षक हैं – दुनिया के सबसे बड़े बदलाव के सृजनकर्ता!
हर बच्चे की मुश्किल एक अवसर है, बाधा नहीं।
वो बच्चा जो पढ़ नहीं पा रहा, बढ़ नहीं पा रहा वही हमारी पुकार, हमारा आह्वान और हमारा अवसर है… उसे उड़ान देने का।
वो कक्षा, जहाँ संसाधन कम हैं और जागरूकता सीमित है – वही हमारा कैनवास है नई रचनात्मकता का।

अगर हम प्रतियोगिता पर ध्यान देंगे – कौन बेहतर है.... कौन आगे है ....
तो हम वो जादू खो देंगे, जो हर बच्चे की मुस्कान में छिपा है।
लेकिन अगर हम अवसर देखेंगे, तो हर समस्या एक सीढ़ी बनेगी, हर चुनौती एक नई कहानी।

इसलिए हम पत्थर नहीं, भगवान देखेंगे। हम Competition नहीं, Opportunity चुनेंगे।

-प्रेम वर्मा
(इस पेज पर आज हमनें एक नई पहल शुरू की है। जिसमें हम अपनी लिखी हुई पोस्ट पोस्ट की वीडियो प्रस्तुति भी करेंगे। अगर आपको हमारी पोस्ट से मोटिवेशन मिलता है तो इसे शेयर करें 👍 धन्यवाद।)

Prem Verma
Mission Abhyudaya
Prem RB Verma
Prem Verma
MARG Darshak बेसिक शिक्षा
#पत्थर_और_भगवान

Address

Bahraich

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Prem Verma Page posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The School

Send a message to Prem Verma Page:

Shortcuts

Share

Category