08/10/2025
किस्मत का खेल
एक बन्जारा था ....जो मुल्तानी मिट्टी का व्यापार करता था
राजस्थान से अपने 2 बैलों पर मिट्टी लाकर के दिल्ली मे बेचता था...
एक बार वो अपने दोनों बैलों की पीठ पर दोनों तरफ मिट्टी लाध के अपने एक नौकर के साथ दिल्ली जा रहा था ...
आधी मिट्टी रास्ते मे ही बिक गई और दोनों बैलों के एक तरफ के बोरे खाली हो गए , जिसके कारण एक तरफ भार ज्यादा हो गया और बोरें फिसलने लगे ...
नौकर ने पूछा :- " मालिक , एक तरफ के बोरें अब गिर रहे है क्या करे ..."
मालिक ने कहा :- " यहाँ राजस्थान मे बहुत रेत है , एक तरफ के बोरे मे वही भर दे , सन्तुलन हो जाएगा ..."
नौकर ने तुरंत बोरों मे रेत भर दिए और वो आगे दिल्ली के चल दिए ...
तभी वहाँ से एक और व्यापारी निकल रहा था , उसने रेत के बोरें देख कर पूछा ...यह रेत क्यों लाध रखी है , रेत कोई नहीं खरीदता ...
बन्जारा बोला संतुलन के लिए है ...
तो दूसरा व्यापारी हँसने लगा और बोला...
" यह क्या नासमझी है .. एक बैल की पीठ से बोरे हटा के दूसरे बैल की पीठ पर रख दो ....संतुलन भी हो जाएगा और एक बैल भार मुक्त भी हो जाएगा ..."
बन्जारे ने व्यापारी से पूछा ?? :- " आप कहाँ जा रहे है ???"
वो बोला ... :- " मैं दिल्ली व्यापार करने गया था , बीमार हो गया , इलाज मे सारा मुनाफा चला गया , घाटा हो गया , अब घर जा रहा हूँ..."
बन्जारे ने कहा :- " ठीक है , पर हम तो ऐसे ही रेत लाध कर ही जाऊँगा ..."
और वो दिल्ली की ओर निकल पड़ा..
नौकर ने पूछा :- " मालिक आपने उसकी बात क्यों नहीं मानी .."
मालिक बोला :- " बात तो उसने बुद्धिमानी की ही कही थी , वो बुद्धिमान था पर फिर भी घाटे मे था , यानि उस पर भगवान की कृपा नहीं है , बुद्धि तो अच्छी उसकी चलती है पर अच्छे नतीजे नहीं मिलते ...
हम बुद्धिमान तो नहीं है , पर कभी घाटे मे नहीं रहे , यानी हम पर ईश्वर की कृपा है | बुद्धि हमारी कैसी भी चलती हो , नतीजे अच्छे मिलते है , इसलिए उसकी बुद्धि से नहीं चलेगे , अपनी बुद्धि से ही चलेंगे ..."
दिल्ली पहुँचा उसकी पूरी मुल्तानी मिट्टी बिक गई ,
कुछ लोग चरम रोग के इलाज के लिए राजस्थान की रेत खोज रहे थे , तो उसकी रेत भी अच्छे भाव मे बिक गई ...
मालिक ने नौकर से कहा :- " देखा ??? मुफ़्त के पैसे रेत से मिल गए ...खाली बैल लाते तो भी क्या ही फायदा होता...
एक खाली बैल से भरा हुआ बैल हमेशा ज्यादा अच्छा होता है..बहुत बार जो हमारे लिए मिट्टी होती है...दूसरों के लिए वो सोना होती है..उधर बहुत रेत थी..इसलिए उसकी ज्यादा वैल्यू नहीं थी..पर जहाँ जो चीज नहीं होती है या कम होती है... वहाँ उसकी कीमत बढ़ जाती है...
जो उन्नति कर लेते है उनका विवेक विकसित हो जाता है ...जिसके नतीजे अच्छे है उसी का अनुसरण करो...और कर्म जरूर करो़ फल की चिन्ता मत करों... ✍️ विनोद
07/10/2025
हार्ट अटैक -:
भारत में 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे। नाम था महाऋषि वागवट जी उन्होंने एक पुस्तक लिखी, जिसका नाम है, अष्टांग हृदयम Astang hrudayam इस पुस्तक में उन्होंने बीमारियों को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखें थे। यह उनमें से ही एक सूत्र है। वागवट जी लिखते हैं कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रक्त blood में acidity अम्लता बढ़ी हुई है अम्लता आप समझते हैं, जिसको अँग्रेजी में कहते हैं acidity अम्लता दो तरह की होती है एक होती है पेट की अम्लता और एक होती है रक्त blood की अम्लता आपके पेट में अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे पेट में जलन सी हो रही है, खट्टी खट्टी डकार आ रही हैं , मुंह से पानी निकल रहा है और अगर ये अम्लता acidity और बढ़ जाये तो hyperacidity होगी और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त में आती है तो रक्त अम्लता blood acidity होती है और जब blood में acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त blood दिल की नलियों में से निकल नहीं पाती और नलियों में blockage कर देता है तभी heart attack होता है इसके बिना heart attack नहीं होता और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है ! इलाज क्या है ? वागवट जी लिखते हैं कि जब रक्त (blood) में अम्लता (acidity) बढ़ गई है तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय हैं आप जानते हैं दो तरह की चीजें होती हैं अम्लीय और क्षारीय ! acidic and alkaline अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ? acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है ? neutral होता है सब जानते हैं तो वागवट जी लिखते हैं कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय (alkaline) चीजें खाओ ! तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी ! और रक्त में अम्लता neutral हो गई ! तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं ! ये है सारी कहानी ! अब आप पूछेंगे कि ऐसी कौन सी चीजें हैं जो क्षारीय हैं और हम खायें ? आपके रसोई घर में ऐसी बहुत सी चीजें है जो क्षारीय हैं जिन्हें आप खायें तो कभी heart attack न आए और अगर आ गया है तो दुबारा न आए यह हम सब जानते हैं कि सबसे ज्यादा क्षारीय चीज क्या हैं और सब घर मे आसानी से उपलब्ध रहती हैं, तो वह है लौकी जिसे दुधी भी कहते लौकी जिसे दुधी भी कहते हैं English में इसे कहते हैं bottle gourd जिसे आप सब्जी के रूप में खाते हैं ! इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है ! तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो या कच्ची लौकी खायो वागवट जी कहते हैं रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी में ही है तो आप लौकी के रस का सेवन करें, कितना सेवन करें ? रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो कब पिये ? सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते हैं या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते हैं इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते हैं इसमें 7 से 10 पत्ते तुलसी के डाल लो तुलसी बहुत क्षारीय है इसके साथ आप पुदीने के 7 से 10 पत्ते मिला सकते हैं पुदीना भी बहुत क्षारीय है इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले ये भी बहुत क्षारीय है लेकिन याद रखें नमक काला या सेंधा ही डाले वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है तो आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करें 2 से 3 महीने की अवधि में आपकी सारी heart की blockage को ठीक कर देगा 21 वें दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी घर में ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा और आपका अनमोल शरीर और लाखों रुपए आपरेशन के बच जाएँगे आपने पूरी पोस्ट पढ़ी , आपका बहुत बहुत धन्यवाद। आयुर्वेद ही सर्वश्रेष्ठ है
06/10/2025
एक बार मैं ट्रेन में सफर कर रहा था। ट्रेन के रिजर्वेशन के डब्बे में बाथरूम के तरफ वाली सीट पर एक लड़की बैठी थी...
उसके चेहरे से पता चल रहा था कि थोड़ी सी घबराहट मे है? उसके दिल में था कि कहीं टीटी ने आकर पकड़ लिया तो..
कुछ देर तक तो पीछे पलट-पलट कर टीटी के आने का इंतज़ार करती रही। शायद सोच रही थी कि थोड़े बहुत पैसे देकर कुछ निपटारा कर लेगी। देखकर यही लग रहा था कि जनरल डब्बे में चढ़ नहीं पाई इसलिए इसमें आकर बैठ गयी, शायद ज्यादा लम्बा सफ़र भी नहीं करना होगा। सामान के नाम पर उसकी गोद में रखा एक छोटा सा बैग दिख रहा था।
मैं बहुत देर तक कोशिश करता रहा पीछे से उसे देखने की कि शायद चेहरा सही से दिख पाए लेकिन हर बार असफल ही रहा...
फिर थोड़ी देर बाद वो भी खिड़की पर हाथ टिकाकर सो गयी। और मैं भी वापस से अपनी किताब पढ़ने में लग गया...
लगभग 1 घंटे के बाद टीटी आया और उसे हिलाकर उठाया।
“कहाँ जाना है बेटा”
“अंकल दिल्ली तक जाना है”
“टिकट है ?”
“नहीं अंकल ….
जनरल का है ….लेकिन वहां चढ़ नहीं पाई इसलिए इसमें बैठ गयी”
“अच्छा 300 रुपये का पेनाल्टी बनेगा”
“ओह …अंकल मेरे पास तो लेकिन 100 रुपये ही हैं”
“ये तो गलत बात है बेटा …..पेनाल्टी तो भरनी पड़ेगी”
“सॉरी अंकल …. मैं अलगे स्टेशन पर जनरल में चली जाउंगी….
मेरे पास सच में पैसे नहीं हैं ….
कुछ परेशानी आ गयी, इसलिए जल्दबाजी में घर से निकल आई … और ज्यादा पैसे रखना भूल गयी….” बोलते बोलते वो लड़की रोने लगी।
टीटी ने उसे माफ़ किया और 100 रुपये में उसे दिल्ली तक उस डब्बे में बैठने की परमिशन दे दी।
टीटी के जाते ही उसने अपने आँसू पोंछे और इधर-उधर देखा कि कहीं कोई उसकी ओर देखकर हंस तो नहीं रहा है....
थोड़ी देर बाद उसने किसी को फ़ोन लगाया और कहा कि उसके पास बिलकुल भी पैसे नहीं बचे हैं …दिल्ली स्टेशन पर कोई जुगाड़ कराके उसके लिए पैसे भिजा दे, वरना वो समय पर गाँव नहीं पहुँच पायेगी।
मेरे मन में उथल-पुथल हो रही थी, न जाने क्यूँ उसकी मासूमियत देखकर उसकी तरफ खिंचाव सा महसूस कर रहा था, दिल कर रहा था कि उसे पैसे दे दूं और कहूँ कि तुम परेशान मत हो … और रो मत ….
लेकिन एक अजनबी के लिए इस तरह की बात सोचना थोडा अजीब था। उसकी शक्ल से लग रहा था कि उसने कुछ खाया पिया नहीं है शायद सुबह से … और अब तो उसके पास पैसे भी नहीं थे।
बहुत देर तक उसे इस परेशानी में देखने के बाद मैं कुछ उपाय निकालने के बारे मे सोचने लगा। जिससे मैं उसकी मदद कर सकूँ और फ़्लर्ट भी ना कहलाऊं।
फिर मैंने एक पेपर पर नोट लिखा, “बहुत देर से तुम्हें परेशान होते हुए देख रहा हूँ, जानता हूँ कि एक अजनबी हम उम्र लड़के का इस तरह तुम्हें नोट भेजना अजीब भी होगा और शायद तुम्हारी नज़र में गलत भी, लेकिन तुम्हे इस तरह परेशान देखकर मुझे बैचेनी हो रही है। इसलिए यह 500 रुपये दे रहा हूँ , तुम्हे कोई अहसान न लगे इसलिए मेरा एड्रेस भी लिख रहा हूँ …...
जब तुम्हें सही लगे मेरे एड्रेस पर पैसे वापस भेज सकती हो…. वैसे मैं नहीं चाहूँगा कि तुम वापस करो …..
.......अजनबी हमसफ़र
एक चाय वाले के हाथों उसे वो नोट देने को कहा, और चाय वाले को मना किया कि उसे ना बताये कि वो नोट मैंने उसे भेजा है।
नोट मिलते ही उसने दो-तीन बार पीछे पलटकर देखा कि कोई उसकी तरह देखता हुआ नज़र आये तो उसे पता लग जायेगा कि किसने भेजा। लेकिन मैं तो नोट भेजने के बाद ही मुँह पर चादर डालकर लेट गया था...
थोड़ी देर बाद चादर का कोना हटाकर देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कराहट महसूस की। लगा जैसे कई सालों से इस एक मुस्कराहट का इंतज़ार था। उसकी आखों की चमक ने मेरा दिल उसके हाथों में जाकर थमा दिया ….
फिर चादर का कोना हटा- हटा कर हर थोड़ी देर में उसे देखकर जैसे सांस ले रहा था मैं...
पता ही नहीं चला कब आँख लग गयी। जब आँख खुली तो वो वहां नहीं थी …
ट्रेन दिल्ली स्टेशन पर ही रुकी थी। और उस सीट पर एक छोटा सा नोट रखा था …..
मैने झटपट मेरी सीट से उतरकर उसे उठा लिया .. और उस पर लिखा था … Thank You मेरे अजनबी हमसफ़र…..
आपका ये अहसान मैं ज़िन्दगी भर नहीं भूलूँगी …. मेरी माँ आज मुझे छोड़कर चली गयी हैं …. घर में मेरे अलावा और कोई नहीं है इसलिए आनन – फानन में घर जा रही हूँ। आज आपके इन पैसों से मैं अपनी माँ को शमशान जाने से पहले एक बार देख पाऊँगी …. 😢
उनकी बीमारी की वजह से उनकी मौत के बाद उन्हें ज्यादा देर घर में नहीं रखा जा सकता। आज से मैं आपकी कर्ज़दार हूँ?…. जल्द ही आपके पैसे लौटा दूँगी।
उस दिन से उसकी वो आँखें और वो मुस्कराहट जैसे मेरे जीने की वजह थे …. हर रोज़ पोस्टमैन से पूछता था शायद किसी दिन उसका कोई ख़त आ जाये ….
आज 1 साल बाद एक ख़त मिला ….
आपका क़र्ज़ अदा करना चाहती हूँ …. लेकिन ख़त के ज़रिये नहीं आपसे मिलकर … नीचे मिलने की जगह का पता लिखा था …. और आखिर में लिखा था नमस्कार धन्यवाद
06/10/2025
एक राजा था जिसकी केवल एक टाँग और एक आँख थी। उस राज्य में सभी लोग खुशहाल थे क्यूंकि राजा बहुत बुद्धिमान और प्रतापी था।
एक बार राजा के मन में विचार आया कि क्यों न खुद की एक तस्वीर बनवायी जाये। फिर क्या था, देश विदेशों से चित्रकारों को बुलवाया गया और एक से एक बड़े चित्रकार राजा के दरबार में आये।
राजा ने उन सभी से हाथ जोड़ कर आग्रह किया कि वो उसकी एक बहुत सुन्दर तस्वीर बनायें जो राजमहल में लगायी जाएगी। सारे चित्रकार सोचने लगे कि राजा तो पहले से ही विकलांग है, फिर उसकी तस्वीर को बहुत सुन्दर कैसे बनाया जा सकता है? ये तो संभव ही नहीं है और अगर तस्वीर सुन्दर नहीं बनी तो राजा गुस्सा होकर दंड देगा।
यही सोचकर सारे चित्रकारों ने राजा की तस्वीर बनाने से मना कर दिया। तभी पीछे से एक चित्रकार ने अपना हाथ खड़ा किया और बोला कि मैं आपकी बहुत सुन्दर तस्वीर बनाऊँगा जो आपको जरूर पसंद आएगी। फिर चित्रकार जल्दी से राजा की आज्ञा लेकर तस्वीर बनाने में जुट गया। काफी देर बाद उसने एक तस्वीर तैयार की जिसे देखकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ और सारे चित्रकारों ने अपने दातों तले उंगली दबा ली।
उस चित्रकार ने एक ऐसी तस्वीर बनायीं जिसमें राजा एक टाँग को मोड़कर जमीन पर बैठा है और एक आँख बंद करके अपने शिकार पर निशाना लगा रहा है।
राजा ये देखकर बहुत प्रसन्न हुआ कि उस चित्रकार ने राजा की कमजोरियों को छिपाकर कितनी चतुराई से एक सुन्दर तस्वीर बनाई है।
राजा ने उसे खूब इनाम एवं धन दौलत दी। तो क्यों ना हम भी दूसरों की कमियों को छुपाएँ, उन्हें नजरअंदाज करें और अच्छाइयों पर ध्यान दें।
सीख :--
आज कल देखा जाता है कि लोग एक दूसरे की कमियाँ बहुत जल्दी ढूंढ लेते हैं चाहें हममें खुद में कितनी भी बुराइयाँ हों लेकिन हम हमेशा दूसरों की बुराइयों पर ही ध्यान देते हैं कि अमुक आदमी ऐसा है, वो वैसा है।
हमें नकारात्मक परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोचना चाहिए और हमारी सकारात्मक सोच हमारी हर समस्याओं को हल करती है।
सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।
जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।
विनोद
05/10/2025
3 बीघा बटइया पर खेत ले जुगल ने पूरे 5 बीघा में धान लगाने की तैयारी कर ली थी, बड़ा खेती करने से बड़ा मुनाफा होगा सोच 5 रुपये सैकड़ा ब्याज पर 40000 रुपये भी महाजन से ले लिए थे, अब बस बीहन तैयार होने की देरी थी, ट्रैक्टर वाले से बात कर ली थी 2 चास के 1700 रुपये बीघा पर बात तय कर 2000 रुपये बयाना भी दे आया था ताकि सबसे पहले ट्रैक्टर वाला उसके खेत जोत दे. गेहूं भी तो समय पर लगाना था जुगल को, इस बार पूरा दिमाग लगाया था जुगल ने. बहुत प्रयास करने पर भी रोपना नहीं मिले तो थक कर रोपनी ले आया था, खाद दवा सब समय के साथ दे रहा था, पड़ोस के खेत वाले को ज्यादा खाद डालते देख जुगल समझ गया की जितना ज्यादा खाद डालूंगा उतनी अच्छी फसल होगी इसलिए खाद भी दुगना ले कर आया था पर किसान की किस्मत भी भगवान माटी से ही लिखते है अंत में ज्यादा बारिश होने से फसल को नुकसान हो गया.
भारी बारिश हुई थी, बिना खिड़की के उसका कॉलोनी वाला घर भी जलमग्न हो गया था, सुजीत बार बार बाउजी बाउजी पुकार रहा था पर जुगल को जैसे सुनाई ना दे रहा हो वो आसमान की तरफ एकटक देख रहा था, जब सुजीत ने उसका हाथ पकड़ हिलाया तब जुगल का ध्यान सुजीत पर गया, प्रधानमंत्री वाला राशन सब फूल कर खराब हो गया है माँ बोली है बाजार से कुछ ले आओ तब छत पर खाना बनेगा, महाजन वाले पैसे में अब भी 7-800 रुपये बचे थे, झुके कंधे के साथ जुगल पानी में रास्ता ढूँढते हुए बाजार की तरफ चल दिया, 3 बीघा बटाई का हिस्सा दे बाकी धान जुगल ने बेच दिया पर पैसा राइस मिल वाले ने पूरे 4 महीने बाद दिए, महाजन का ब्याज जोड़ पूरे 58000 रुपये हो गए थे, जुगल के खाते में धान के 58700 रुपय आए, आज घर से निकलते वक्त सुजीत ने कहा था बाउजी मेरे लिए एक बिस्कुट लेते आना, तभी जुगल को याद आया की घर के लिए चावल खातिर जो धान कूटवाया था उसके पैसे तो दिए नहीं, धान कुटाई के ठीक 700 रुपये हुए थे, 700 रुपये देते हुए जुगल की आँख में कुछ कचरा चला गया जिसे बार बार जुगल अपने गमछे से पोंछ रहा था, चावल की बोरी सर पर उठा बिन भाड़ा जुगल पैदल ही 6 km दूर अपने घर की तरफ चल दिया, सुजीत के बिस्कुट परचुन की दुकान में ही रह गए....🙏
✍️ विनोद कुमार
किसान की खेती खजाने की खोज की तरह होती है..
05/10/2025
" दुनिया गोल है "
सेठ ने अभी दुकान खोली ही थी कि एक औरत आई और बोली :-
"सेठ जी यह अपने दस रुपये लो"..
सेठ उस गरीब सी औरत को प्रश्नवाचक नजरों से देखने लगा,जैसे पूछ रहा हो कि ...
मैंने कब तुम्हे दस रुपये दिये?
औरत बोली :- कल शाम को मै सामान ले कर गई थी... तब आपको सौ रुपये दिये थे, 70 रुपये का सामान खरीदा था ... आपने 30 रुपये की जगह मुझे 40 रुपये वापस दे दिये।
"सेठ ने दस रुपये को माथे से लगाया,फिर गल्ले मे डालते हुए बोला कि एक बात बताइये बहन जी?
आप सामान खरीदते समय कितने मोल भाव कर रही थी। पाँच रुपये कम करवाने के लिए आपने कितनी बहस की थी,और अब यह दस रुपये लौटाने चली आई ????
औरत बोली :- "पैसे कम करवाना मेरा हक है" मगर एक बार मोल भाव होने के बाद, "उस चीज के कम पैसा देना पाप है।
सेठ बोला ... " लेकिन, आपने कम पैसे कहाँ दिये? आपने पूरे पैसे दिये थे,यह दस रुपया तो मेरी गलती से आपके पास चला गया...रख लेती,तो मुझे कोई फर्क नही पड़ने वाला था "
औरत बोली :- " आपको कोई फर्क नही पड़ता ? मगर मेरे मन पर हमेशा ये बोझ रहता कि मैंने जानते हुए भी,आपके पैसे खाये।
इसलिए मै रात को ही,आपके पैसे वापस देने आई थी l मगर उस समय आपकी दुकान बन्द थी। "
सेठ ने महिला को आश्चर्य से देखते हुए पूछा :- "आप कहाँ रहती हो"..?
वह बोली ;- "मैं सेक्टर आठ मे रहती हूँ"...
सेठ का मुँह खुला रह गया ... बोला :-
"आप 7 किलोमीटर दूर से",यह दस रुपये देने दूसरी बार आई हो ?
औरत सहज भाव से बोली :- "हाँ दूसरी बार आई हूँ , मन का सुकून चाहिए तो ऐसा करना पड़ता है ।
मेरे पति इस दुनिया मे नही है मगर उन्होंने मुझे एक ही,बात सिखाई है कि "दूसरे के हक का एक पैसा भी,मत खाना" क्योंकि इंसान चुप रह सकता है मगर ऊपर वाला कभी भी हिसाब माँग सकता है और उस हिसाब की सजा मेरे बच्चों को भी मिल सकती है ...."
इतना कह कर वह औरत चली गई।
सेठ ने तुरन्त गल्ले से तीन सौ रुपये निकाले और स्कूटी पर बैठता हुआ अपने नौकर से बोला तुम दुकान का ख्याल रखना,मै अभी आता हूँ।
सेठ बाजार मे ही एक दुकान पर पहुँचा। फिर उस दुकान वाले को तीन सौ रुपये देते हुए बोला यह अपने तीन सौ रुपये लीजिए प्रकाश जी। कल जब आप सामान लेने आये थे,तब हिसाब मे ज्यादा जुड़ गए थे।
प्रकाश हँसते हुए बोला "पैसे हिसाब मे ज्यादा जुड़ गए थे,तो आप तब दे देते जब मै दुबारा दुकान पर आता"...।
इतनी सुबह सुबह आप तीन सौ रुपये देने चले आये।
सेठ बोला, :- जब आप दुबारा आते तब तक मै मर जाता तब"..?? आपके मुझमे तीन सौ रुपये निकलते है,यह आपको तो पता ही नही था न..? इसलिए देना जरूरी था। पता नही "ऊपर वाला कब हिसाब माँगने लग जाए".. और... "उस हिसाब की सजा मेरे बच्चों को भी मिल सकती है ।
सेठ तो चला गया मगर प्रकाश के दिल मे खलबली मच गई। क्योंकि चार साल पहले उसने अपने एक दोस्त से "दस लाख रुपये"उधार लिए थे मगर पैसे देने के दूसरे ही दिन दोस्त मर गया था।
दोस्त के घर वालों को पैसों के बारे मे पता नही था इसलिए किसी ने उससे पैसे वापस नही माँगे थे।
प्रकाश के दिल मे लालच आ गया था इसलिए खुद पहल करके पैसे देने वह नही गया।
आज दोस्त का परिवार गरीबी मे जी रहा था। दोस्त की पत्नी लोगों के घरों मे झाडू पौंछा करके बच्चों को पाल रही थी फिर भी, प्रकाश उनके पैसे हजम किये बैठा था।
सेठ का यह वाक्य " पता नही कब ऊपर वाला हिसाब माँगने बैठ जाए" और ...."उस हिसाब की सजा मेरे बच्चों को भी मिल सकती है"
प्रकाश को डरा रहा था ।
प्रकाश दो तीन दिन तक टेंशन में रहा , आखिर मे उसका जमीर जाग गया।
उसने बैंक से रुपये निकाले और पैसे लेकर दोस्त के घर पहुँच गया।
दोस्त की पत्नी घर पर ही थी, प्रकाश जाकर उसके पैरों मे गिर गया।
एक एक रुपये के लिए संघर्ष कर रही,उस "विधवा औरत"के लिए इतने रुपये बहुत बड़ी रकम थी।
पैसे देखकर उसकी आँखों मे आँसू आ गए। वह प्रकाश को"दुआएँ"देने लगी,जो उसने ईमानदारी दिखाते हुए,पैसे लौटा दिये।
यह वही औरत थी जो सेठ को दस रुपये लौटाने दो बार गई थी ।
अपनी "मेहनत" और "ईमानदारी"का खाने वालो की ईश्वर "परीक्षा" जरूर लेता है मगर कभी भी,उन्हे अकेला नही छोड़ता, एक दिन जरूर सुनता है "ऊपर वाले पर भरोसा रखिये"।
भगवान के घर देर जरूर है पर अन्धेर नहीं है...
" साभार ".
03/09/2023
इस दरवाजा बनाने वाले मिस्री की कला को सलाम है। इसमें लगता है कि कोई स्त्री दरवाजा खोल रही है। जबकि यह दरवाजा बंद है। इसको इस तरीके से मिस्री ने बनाया है कि घर पर कोई महिला आपका इंतजार करती है। वह पत्नी, हो सकती है बहन, या मां, हो सकती है,l जीवन बहुत खूब सूरत है 🥰