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“Qurani Hidayat Urdu mein • ilm ka safar jaari ✨”
“Quran ki roshni ko Urdu alfaaz mein phela rahe hain 📖✨”
“Har ayat—Dil ko chhoone wali tarjumah ke saath ❤️📚”
“Sunnat aur Quran ki roshni mein zindagi badlein ✨
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05/03/2026
दुनिया की तारीख़ गवाह है कि अगर किसी एक ख़ानदान को अल्लाह तआला ने सबसे ज़्यादा मक़बूलियत, इज़्ज़त और नबूवत का सिलसिला अता किया, अल्लाह तआला ने आपको इब्राहीम नाम अता फ़रमाया, जिसका मतलब है क़ौमों का बाप। सचमुच, आपकी नस्ल से ऐसी अज़ीम हस्तियाँ पैदा हुईं जिनका नाम क़यामत तक रोशन रहेगा।
आपकी दो बीवियाँ थीं, सारा अलैहिस्सलाम और हाजरा अलैहिस्सलाम। हाजरा अलैहिस्सलाम से आपके पहले बेटे पैदा हुए इस्माईल अलैहिस्सलाम, और सारा अलैहिस्सलाम से पैदा हुए इसहाक अलैहिस्सलाम। इसहाक अलैहिस्सलाम के बेटे थे याकूब अलैहिस्सलाम, जिन्हें इसराईल भी कहा जाता है। याकूब अलैहिस्सलाम की नस्ल से एक के बाद एक नबी तशरीफ़ लाए, यूसुफ अलैहिस्सलाम, मूसा अलैहिस्सलाम, दाऊद अलैहिस्सलाम, सुलेमान अलैहिस्सलाम, और यह सिलसिला चलता रहा यहाँ तक कि ईसा अलैहिस्सलाम तक पहुँचा। दूसरी तरफ इस्माईल अलैहिस्सलाम के बारह बेटे हुए, जिनमें से मशहूर हुए कैदार, और उसी नस्ल से आगे चलकर अदनान पैदा हुए। फिर नस्ल दर नस्ल यह सिलसिला चलता रहा, माज़, नज़ार, मुदर, इलियास, मुद्रिका, खुज़ैमा, किना, नज़र, मालिक, और फिर फिहर जिन्हें कुरैश का असल बुज़ुर्ग माना जाता है। इसी मुबारक नस्ल से आगे ग़ालिब, लुआई, काब, मुर्राह, किलाब, कुसई, अब्द मनाफ, हाशिम, अब्दुल मुत्तलिब, अब्दुल्लाह और फिर दुनिया की सबसे अज़ीम हस्ती, इमामुल अंबिया, खातमुन नबीयीन, रहमतुल्लिल आलमीन, मोहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ़ लाए।
आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तीन बेटे थे, क़ासिम, अब्दुल्लाह और इब्राहीम, और चार बेटियाँ - ज़ैनब, रुकय्या, उम्मे कुलसूम और फ़ातिमा ज़हरा रज़ियल्लाहु अन्हा। यह वह ख़ानदान है जिसे अल्लाह तआला ने नबूवत, रहनुमाई और इज़्ज़त की बुलंदियों से नवाज़ा। अगर यह मालूमात आपको फ़ायदेमंद लगी हो तो इस पैग़ाम को आगे तक ज़रूर पहुँचाइए!
यहू'दी शुरू से ही बड़े जुमलेबाज़ और डरपोक रहें हैं। धोका करना, मक्कारी करना, मुआहिदा तोड़ना इनका पसंदीदा काम है। जब अल्लाह के नबी हिजरत करके मदीने आये तो य'हूदियो के तीन क़बीलो ने मुआहिदा किया। जिनमें से एक क़बीला था बनू क़ैनुक़ा'अ। ये क़बीला काम के ऐतबार से सोनार, लौहार और बर्तन बनाने वाला था। सात सौ लोग इस क़बीले में लड़ाके थे। ये लोग मदीने के बिल्कुल सेंटर में रहते थे। ख़ैर। जब बद्र में मुसलमानों ने फ़तेह पाई तो इस क़बीले को जलन होने लगी। ये जगह जगह जाकर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ बात करने लगे। मुसलमानों को आपस में लड़ाने की कोशिश करने लगे। उनका मज़ाक उड़ाते। यहाँ तक कि मुस्लिम औरतों से छेड़खानी शुरू कर दी। जब इनकी हरक़त हद्द से ज़्यादह बढ़ गयी तो नबी अलैहिस्सलाम ने इनको जमा किया और नसीहत कि 'ऐ य'हूदियो- इस्लाम क़ुबूल कर लो इससे पहले कि तुम पर भी ऐसी मार पड़े जैसी क़ुरैश पर (बद्र में) पड़ चुकी है' इसके बाद य'हूदियो ने बड़े ही घमंड से कहा कि 'ऐ मुहम्मद (अलैहिस्सलाम) - तुम इस ग़लतफ़हमी में ना रहना। तुम्हारा टकराव अनाड़ी लोगों से हुआ था और तुमने उन्हें मार गिराया। अगर तुम्हारी लड़ाई हमसे हो गयी तो तुम्हें पता चल जायेगा कि मर्द हम हैं' अब ये जवाब सीधा सीधा लड़ाई, बग़ावत और मुआहिदा को तोड़ने वाला था। दिन बीतने के बाद किसी एक यहूदी ने एक मुस्लिम औरत के कपड़े को सरे बाज़ार खोल दिया। जिस पर एक सहाबी (र०अ०) ने उस य'हूदी को जान से मार दिया। वहां जमा हुए य'हूदियो ने मिलकर उन सहाबी को शहीद कर दिया। इस हरक़त के बाद नबी अलैहिस्सलाम ने इनके ख़िलाफ़ जंग का ऐलान किया। जैसे ही यहूदियो को इसकी ख़बर हुई तो डरकर किले में छिप गये। मुसलमानों ने पंद्रह दिन तक घेराबंदी की। लेकिन एक भी लड़ाका बाहर नहीं आया। जब इन्हें लगने लगा कि मुस्लिम इन्हें नहीं छोड़ेंगे तो मुआफ़ी मांगनी शुरू की और कहने लगे कि जो हुक़्म अल्लाह के नबी हमारे लिये करेंगे हमें मंजूर होगा। मुनाफ़िक़ अब्दुल्ला-ह-बिन उबई ने अल्लाह के नबी से गिड़गिड़ाकर इनकी जान बचवा ली। जिसके बाद इनको मदीने से निकाल दिया गया। बस इतने ही ताक़तवर हैं ये लोग। आज भी आप देख लो। बंकर छोड़ने को तैय्यार नहीं है। और अगर बंकर छोड़ रहे हैं तो सीधा दूसरे मुल्क का रुख कर रहे हैं।
Ibn e shan
duniya yaad rakhe gi ek 86 saal ke marde mujahid ne jung ladna pasand kiya lekin ghutne nahi teka salam hai inko 😥😥
24/02/2026
मुसलमानों से नफरत करने वालो जरा इस पर भी विचार किया जाए 👇👇👇
मैं आपको दिल्ली सल्तनत गुलाम वंश से नरेन्द्र मोदी तक के ईतिहास से परिचित कराना चाहता हुँ*
*👉गुलाम वंश*
1=1193 मुहम्मद गौरी
2=1206 कुतुबुद्दीन ऐबक
3=1210 आराम शाह
4=1211 इल्तुतमिश
5=1236 रुकनुद्दीन फिरोज शाह
6=1236 रज़िया सुल्तान
7=1240 मुईज़ुद्दीन बहराम शाह
8=1242 अल्लाउदीन मसूद शाह
9=1246 नासिरुद्दीन महमूद
10=1266 गियासुदीन बल्बन
11=1286 कै खुशरो
12=1287 मुइज़ुदिन कैकुबाद
13=1290 शमुद्दीन कैमुर्स
1290 गुलाम वंश समाप्त्
(शासन काल-97 वर्ष लगभग )
*👉खिलजी वंश*
1=1290 जलालुदद्दीन फ़िरोज़ खिलजी
2=1296
अल्लाउदीन खिलजी
4=1316 सहाबुद्दीन उमर शाह
5=1316 कुतुबुद्दीन मुबारक शाह
6=1320 नासिरुदीन खुसरो शाह
7=1320 खिलजी वंश स्माप्त
(शासन काल-30 वर्ष लगभग )
*👉तुगलक वंश*
1=1320 गयासुद्दीन तुगलक प्रथम
2=1325 मुहम्मद बिन तुगलक दूसरा
3=1351 फ़िरोज़ शाह तुगलक
4=1388 गयासुद्दीन तुगलक दूसरा
5=1389 अबु बकर शाह
6=1389 मुहम्मद तुगलक तीसरा
7=1394 सिकंदर शाह पहला
8=1394 नासिरुदीन शाह दुसरा
9=1395 नसरत शाह
10=1399 नासिरुदीन महमद शाह दूसरा दुबारा सता पर
11=1413 दोलतशाह
1414 तुगलक वंश समाप्त
(शासन काल-94वर्ष लगभग )
*👉सैय्यद वंश*
1=1414 खिज्र खान
2=1421 मुइज़ुदिन मुबारक शाह दूसरा
3=1434 मुहमद शाह चौथा
4=1445 अल्लाउदीन आलम शाह
1451 सईद वंश समाप्त
(शासन काल-37वर्ष लगभग )
*👉लोदी वंश*
1=1451 बहलोल लोदी
2=1489 सिकंदर लोदी दूसरा
3=1517 इब्राहिम लोदी
1526 लोदी वंश समाप्त
(शासन काल-75 वर्ष लगभग )
*👉मुगल वंश*
1=1526 ज़ाहिरुदीन बाबर
2=1530 हुमायूं
1539 मुगल वंश मध्यांतर
*👉सूरी वंश*
1=1539 शेर शाह सूरी
2=1545 इस्लाम शाह सूरी
3=1552 महमूद शाह सूरी
4=1553 इब्राहिम सूरी
5=1554 फिरहुज़् शाह सूरी
6=1554 मुबारक खान सूरी
7=1555 सिकंदर सूरी
सूरी वंश समाप्त,(शासन काल-16 वर्ष लगभग )
*मोगल वंश पुनःप्रारंभ*
1=1555 हुमायू दुबारा गाद्दी पर
2=1556 जलालुदीन अकबर
3=1605 जहांगीर सलीम
4=1628 शाहजहाँ
5=1659 औरंगज़ेब
6=1707 शाह आलम पहला
7=1712 जहादर शाह
8=1713 फारूखशियर
9=1719 रईफुदु राजत
10=1719 रईफुद दौला
11=1719 नेकुशीयार
12=1719 महमूद शाह
13=1748 अहमद शाह
14=1754 आलमगीर
15=1759 शाह आलम
16=1806 अकबर शाह
17=1837 बहादुर शाह जफर
1857 मोगल वंश समाप्त
(शासन काल-315 वर्ष लगभग )
*👉ब्रिटिश राज (वाइसरॉय)*
1=1858 लोर्ड केनिंग
2=1862 लोर्ड जेम्स ब्रूस एल्गिन
3=1864 लोर्ड जहॉन लोरेन्श
4=1869 लोर्ड रिचार्ड मेयो
5=1872 लोर्ड नोर्थबुक
6=1876 लोर्ड एडवर्ड लुटेन
7=1880 लोर्ड ज्योर्ज रिपन
8=1884 लोर्ड डफरिन
9=1888 लोर्ड हन्नी लैंसडोन
10=1894 लोर्ड विक्टर ब्रूस एल्गिन
11=1899 लोर्ड ज्योर्ज कर्झन
12=1905 लोर्ड गिल्बर्ट मिन्टो
13=1910 लोर्ड चार्ल्स हार्डिंज
14=1916 लोर्ड फ्रेडरिक सेल्मसफोर्ड
15=1921 लोर्ड रुक्स आईजेक रिडींग
16=1926 लोर्ड एडवर्ड इरविन
17=1931 लोर्ड फ्रिमेन वेलिंग्दन
18=1936 लोर्ड एलेक्जंद लिन्लिथगो
19=1943 लोर्ड आर्किबाल्ड वेवेल
20=1947 लोर्ड माउन्टबेटन
ब्रिटिस राज समाप्त
*🇮🇳आजाद भारत,प्राइम मिनिस्टर🇮🇳*
1=1947 जवाहरलाल नेहरू
2=1964 गुलजारीलाल नंदा
3=1964 लालबहादुर शास्त्री
4=1966 गुलजारीलाल नंदा
5=1966 इन्दिरा गांधी
6=1977 मोरारजी देसाई
7=1979 चरणसिंह
8=1980 इन्दिरा गांधी
9=1984 राजीव गांधी
10=1989 विश्वनाथ प्रतापसिंह
11=1990 चंद्रशेखर
12=1991 पी.वी.नरसिंह राव
13=अटल बिहारी वाजपेयी
14=1996 ऐच.डी.देवगौड़ा
15=1997 आई.के.गुजराल
16=1998 अटल बिहारी वाजपेयी
17=2004 डॉ.मनमोहनसिंह
*18=2014 से नरेन्द्र मोदी*
764 सालों तक मुस्लिम राज होने पर भी हिन्दू महफूज़ (बाक़ी) हैं। और,,,,,,,,,इन लोगों को अभी 80 साल भी नहीं हुए और ये मुसलमानों को ख़त्म करने की बात करते हैं
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काश कोई हिंदुत्व/बीजेपी समर्थक, मित्र Alok Mohan की इस पोस्ट पर कुछ कहे
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मुसलमान हिंदुस्तान के सबसे सस्ते वोटर हैं
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उन्हें सरकार से सुरक्षा के बदले में कुछ भी नहीं चाहिए.
अपनी मेहनत के दम पर कमाने खाने वाले लोग हैं. साईकिल पंचर लगाने से लेकर भारत के राष्ट्रपति तक के पद को सुशोभित किया है. फल बेचने से लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज तक रहे.
बिरयानी बनाने का काम करने से लेकर IB प्रमुख तक, कवाब बनाने से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक; एक तो अभी सेना प्रमुख बनने तक रह गए
किसानी से लेकर सेना में भर्ती होकर परमवीर चक्र लिया. पदमश्री से लेकर भारत रत्न तक प्राप्त किया मुसलमानों ने. मोटर वर्कशॉप का काम करने से लेकर अग्नि मिसाईल तक बनाई.
हर क्षेत्र में डंका बजाया है फ़िल्म, कला, साहित्य, संगीत, आप भारत के होने की कल्पना ही नहीं कर सकते बिना मुसलमानों के...
और ये सब इन्होंने बिना आरक्षण, बिना सरकारी मदद और बिना भाई भतीजावाद के प्राप्त किया है यदि असली मेरिट की बात की जाये तो वो भारत के मुसलमानों की है, लेकिन आज 70 साल के बाद भी इन्हें अपने वोट के बदले में क्या चाहिए केवल सुरक्षा....
कितना सस्ता है मुसलमानों का वोट....
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► औरत बियर बार में नंगी नाचे तो किसी को कोई तकलीफ नहीं।
► औरत बिकनी में क्लब के अंडर पोल डांस करे तो किसी को कोई तकलीफ नहीं।
► औरत जिस्म के धंधे में गैर मर्दो के साथ सोये तो किसी को कोई तकलीफ नहीं।
लेकिन जब एक मुसलमान औरत नकाब से अपने जिस्म को ढांके तो पूरी दुनियां के लोगों के सीने पे सांप लोट जाता है।
और कहते है इस्लाम में औरतो को आजादी नहीं.
#वाह_रे_जाहिलो
समझ में नहीं आता ये औरतों को बेपर्दा क्यूँ करना चाहते है.?
[5/9, 14:44] Tauheed Bin Zaheer: दुनियाँ की तारीख में किसने मासूमों का सबसे ज़्यादा क़त्ल किया है?
1)हिटलर।.
आप जानते हैं ये कौन था?
हिटलर जर्मन "ईसाई" था लेकिन मीडिया कभी "ईसाईयों" को आतंकवादी नहीं कहता।।
2)"जोसफ स्टालिन"
इसने तक़रीबन 20 मिलियन इंसानी जानें ली जिसमें 14.5 मिलियन को तड़पा तड़पा कर मारा गया।।
क्या ये मुसलमान था?
3) "माओ त्से तसुंग (चीन)"
इसने 14 से 20 मिलियन का क़त्ल किया।।
क्या ये मुस्लमान था ??
4) "बेनितो मुस्सोलिनी" (इटली)"
इसने तक़रीबन 400 हज़ार लोगों का कत्लेआम कराया।
क्या ये मुसलमान था ?
5) "अशोक" ने कलिंगा के युद्ध में 100 हज़ार लोगो का कत्लेआम किया ।।
क्या ये मुसलमान था ??
6) "अम्बार्गो" (इराक) जिसे जॉर्ज बुश ने इराक भेजा था।
इराक में 1 मिलियन से ज़्यादा इंसानो की जानें ली गयी जिसमे मासूम बच्चे भी शामिल थे।।
क्या ये भी मुसलमान था ??
आज देखा जाता है के ग़ैर मुस्लिम समाज में "जिहाद " के नाम से एक डर और दहशत बनी हुई है लेकिन मीडिया सच्चाई न बताता है और न दिखाता है।
"जिहाद" एक अरबी का शब्द है जो की एक और अरबी के शब्द "जहादा" से बना है।
जिसका मतलब है "बुराई" और "नाइंसाफी" के खिलाफ आवाज़ उठाना उसके खिलाफ खड़े होना या इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ना।।
जिहाद का मतलब मासूमों व बेगुनाहों की जान लेना या क़त्ल करना हरगिज़ नहीं है।
फ़र्क़ सिर्फ इतना है के हम बुराई के खिलाफ खड़े हैं , बुराई के साथ नहीं।
क्या इस्लाम हक़ीक़त में परेशानी है ?? 👇🏼👇🏼
1.पहली आलमी जंग (फर्स्ट वर्ल्ड वॉर 1930 के दशक में ) जिसमें 17 मिलियन मौतें हुयी।
जिसे ग़ैर मुस्लिम देशों ने किया।।
2. दूसरी आलमी जंग (सेकंड वर्ल्ड वॉर 1939 -1945 ) जिसमें 50 से 55 मिलियन मौतें हुयी।।
यह भी ग़ैर मुस्लिमों द्वारा किया गया।।
3. नागासाकी हिरोशिमा एटॉमिक हमले जिसमें 200,000 लोगों की जानें गयी ये हमले भी ग़ैर मुस्लिम(अमेरिका) द्वारा किये गए।
4. वियतनाम की लड़ाई में 5 मिलियन लोग मारे गए ।। यह भी ग़ैर मुस्लिम ने किया।।
5. बोस्निया/कोसोवो की लड़ाई में तक़रीबन 500,000 लोग मारे गए।।
ग़ैर मुस्लिम ने किया ।
6. इराक की जंग में अब तक 12,000,000 लोग मारे गए।जिसे ग़ैर मुस्लिम ने किया।
7.1975-1979 तक कंबोडिया में तक़रीबन 3 मिलियन लोगों की जाने गयी।।
ग़ैर मुस्लिम ने किया।।
8. और आज अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया , फिलिस्तीन, और बर्मा में लोग मारे जा रहे हैं।।
क्या ये सब मुसलमानों ने किया ??
"मुसलमान आतंकवादी नहीं है और जो आतंकवादी है वो मुस्लमान नहीं है।।"
ये दोहरे चेहरे ज़रूर उजागर होने चाहिए।।
मिडिया ग़लत हाथ में है इसलिए वो लोग ग़लत जानकारी लोगों तक पहुचाते है।
लेकिन मोबाइल फ़ोन हमारे हाथ में हैं इसलिए हमें सही जानकारी फैलानी होगी।
अल्लाह ता'ला हमारे इमान व मज़हब की इसी तरह हिफाज़त करता रहे।।
History bukhari
22/02/2026
एक अजीब करिश्मा : कुवैत के मशहूर दाई, शेख अब्दुर्रहमान अस्सुमैत रहिमहुल्लाह को खबर मिली कि अफ्रीका की एक ऐसी बस्ती है जहाँ अभी तक इस्लाम की रोशनी नहीं पहुँची। उनके दिल में दर्द जगा और उन्होंने तुरंत इरादा कर लिया कि वहाँ जाना है। साथियों ने रोकते हुए चिंता के साथ कहा: “आप नहीं जा सकते। हमारे और उस बस्ती के बीच एक नदी है जो मगरमच्छों से भरी हुई है।”
शेख ने पूरी शांति और यक़ीन के साथ जवाब दिया: “मुझे वहाँ ले चलो… जिम्मेदारी मेरी है।” वे लोग नाव में बैठे। नदी में लहरें उठ रही थीं और इधर-उधर से डरावने मगरमच्छ सिर उठाए देख रहे थे। मगर नाव बढ़ती गई और अल्लाह की मदद से वे नदी पार कर गए। जब वे बस्ती पहुँचे तो लोग हैरानी से उन्हें देखने लगे। उन्होंने पूछा: “आप यहाँ कैसे पहुँचे?”
साथियों ने कहा: “अल्लाह ने हमारी हिफाज़त की, क्योंकि हम उसके दीन का पैग़ाम लेकर आए हैं।” शेख अस्सुमैत रहिमहुल्लाह ने बड़ी सादगी और मोहब्बत से उन्हें इस्लाम के बुनियादी अकीदे और तालीमात समझाईं। बात खत्म हुई तो बस्ती के सरदार ने कहा: “हमारी एक शर्त है… अगर आप उसे पूरा कर दें, तो हम सब इस्लाम क़ुबूल कर लेंगे।”
शेख ने मुस्कराकर पूछा, “वह क्या है?”
सरदार ने उदासी से कहा: “हमारी बस्ती में कई सालों से बारिश नहीं हुई। आप अपने रब से दुआ कीजिए कि बारिश हो जाए।” शेख ने कहा: “ठीक है… लेकिन पहले बस्ती के सभी लोगों को इकट्ठा कर लो।” जब पूरी बस्ती मैदान में जमा हो गई, तो शेख ने वुज़ू किया और नमाज़ के लिए खड़े हो गए। रुकू और सज़्दा की लय से माहौल में गहरा सुकून उतर आया। वे एक लंबे सज़्दे में चले गए। सज़्दे में उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे और उनकी ज़बान पर लगातार यह दुआ थी: “ऐ मेरे रब… अपने दीन को अब्दुर्रहमान के गुनाहों की वजह से रुसवा न करना।”
वे देर तक अल्लाह के सामने रोते रहे। अचानक आसमान में गरज की आवाज़ आई। उन्होंने सज़्दे से सिर उठाया तो रहमत के बादल छाए हुए थे और मोटी-मोटी बारिश की बूँदें बरसने लगीं। जब बस्ती वालों ने यह नज़ारा देखा तो बेइख़्तियार पुकार उठे: “हम गवाही देते हैं कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उसके आखिरी रसूल हैं!” शेख अब्दुर्रहमान अस्सुमैत की आँखें नम हो गईं। उन्होंने अल्लाह का शुक्र अदा किया और पूरी बस्ती यक़ीन के साथ इस्लाम में दाखिल हो गई।
ध्यान रहे कि शेख अस्सुमैत एक मेडिकल डॉक्टर थे (Internal Medicine) और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के माहिर। उन्होंने ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ़ लिवरपूल और कनाडा की मैकगिल यूनिवर्सिटी से तालीम हासिल की। लेकिन अपनी पूरी जिंदगी अल्लाह के दीन के प्रचार और लोगों की सेवा में गुजार दी। वे 29 साल अपनी पत्नी के साथ अफ्रीका के सूने इलाकों में घूमते रहे। नतीजा यह हुआ कि 11 मिलियन लोगों ने उनके हाथों इस्लाम कबूल किया। आधुनिक इतिहास में किसी एक व्यक्ति ने इतने लोगों को इस्लाम की रोशनी नहीं दिखाई। उनका विस्तृत तआरुफ़ हमारी किताब “रोशनी के मुसाफ़िर” में दर्ज है। (ज़िया चत्राली)
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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ ١
video ko akhri tak lajmi dekhe🥺 follow bhi karle
meri taraf se aap sabhi ko ramadan mubarak 😊
History bukhari
゚
18/02/2026
Big shout out to my newest top fans! 💎 RAFIQUE.09, Mohd Sahabaan, صدام حسین, Sheikh Lateef, Heena Shaikh, Shakeel Bahashawan, MD Afsar Afsar, Mo Abdullah Shekh, Bashir Sikandar Shaikh, Farjul Baba
Drop a comment to welcome them to our community,
اسے ایک یاد دہانی سمجھو 🥷🏾📌
مکہ کی فضا ایک باوقار خاموشی میں سانس لے رہی تھی، جب گھڑی ٹاور کی چوٹی پر وقت کا وہ شاہکار نمودار ہوا جو افق کو سجاتا ہے اور دوام کی روشنائی سے سرگوشی کرتا ہے؛
ساعتِ مکہ—بیتُ اللہ کے مجمع میں برجوں کا تاج—محض وقت ناپنے کی ایک مشین نہیں، بلکہ نور کی چمک اور اذان کی گونج میں لکھی ہوئی ایک داستان ہے، جو ہر سمت سے آنے والی نگاہوں کی قبلہ نما بن جاتی ہے۔
قبۂ زمانی کی خصوصیات:
بلندی: گھڑی ٹاور کی بلندی تقریباً 601 میٹر ہے؛ وقت کے ستون کی طرح سربلند، جو آسمان کے سامنے جھک سا جاتا ہے۔
وزن: پوری ساخت کے ساتھ اس کا وزن لگ بھگ 36,000 ٹن ہے؛ ایسا بوجھ جو تعمیر کی عظمت اور تاریخ کے وقار کی یاد دلاتا ہے۔
ڈائل/واجهات: چار عظیم الواجهات—دو سامنے کے ڈائل 43×43 میٹر کے، اور دو جانبی ڈائل جن کا رقبہ تقریباً 3943 مربع میٹر ہے—ایسے قرص جو دور دور سے یوں دکھائی دیتے ہیں جیسے شہر کی دیوار پر لٹکے سورج ہوں۔
تزئین: چوٹی کے اوپر لفظِ جلالہ “اللہ اکبر” خوش خطی کے قالب میں، جس میں حرف الف کی لمبائی 23 میٹر سے زیادہ ہے، اور اس کے ساتھ 23 میٹر قطر کا ہلالی دائرہ—عروج کی فضا کو مکمل کرتا ہوا۔
وقت کا نظام: مرکزِ توقیتِ مکہ عالمی وقت کے نظام UTC سے مربوط ہے، گویا یہ گھڑی زمین کی دھڑکن درست کرتی اور انسانیت کی تال کو مشترک احساسات کی سمت ہم آہنگ رکھتی ہے۔
روشنی: اس کے چہرے 21,000 سے زائد سبز و سفید LED چراغوں سے منور ہوتے ہیں؛ اذان کے وقت وہ ستارے کی طرح چمکتے ہیں اور کئی کلومیٹر دور سے حاجیوں کو عبادت کی راہ دکھاتے ہیں۔
یہ گھڑی صرف وقت گننے کے لیے نہیں بنی، بلکہ ایسا منظر رقم کرنے کے لیے ہے جو زمین کو آسمان سے، ماضی کو حال سے جوڑ دے؛
یہ ایک آئینہ ہے جو ایک قدیم مگر ہمہ وقت آگے بڑھتی ہوئی شہرِ مکہ کی شان کے برابر کھڑا ہے۔
جب اس کے چہرے روشن ہوتے ہیں اور اس کی گونج مکہ کی گلیوں میں بلند ہوتی ہے تو یوں لگتا ہے جیسے شہر ایک ایسے عالم کے دل کی طرح دھڑک رہا ہو جو کبھی ختم نہیں ہوتا… ہمیشہ کے لیے۔
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